13 अप्रैल का इतिहास: जब निहत्थे मासूमों पर बरसीं गोलियां, कांप उठी थी पूरी इंसानियत

Kaushiki | Apr 13, 2026, 08:00 IST
jalallianwala
13 अप्रैल 1919 को जलियांवाला बाग में ब्रिटिश जनरल डायर ने निहत्थे मासूमों पर गोलियां चलवाईं। जानिए इस खूनी बैसाखी का इतिहास, शहीदी कुआं और ऊधम सिंह के बदले की पूरी कहानी।

आज के दिन की कहानी: साल 1919 अमृतसर की 13 अप्रैल की सुबह बहुत ही ठंडी और शांत थी। चारों तरफ बैसाखी के मेले की बहुत धूम मची हुई थी। लोग नए कपड़े पहनकर खुशियां मना रहे थे। बच्चे अपने माता-पिता के साथ बाग में खेल रहे थे। किसी को नहीं पता था कि काल आने वाला है।



स्वर्ण मंदिर के पास एक छोटा सा मैदान था। उसका नाम जलियांवाला बाग था। वहां हजारों लोग शांति से इकट्ठा हुए थे। वे अपने नेताओं की रिहाई की मांग कर रहे थे। अचानक वहां गोलियों की आवाज गूंजने लगी। वह आवाज आज भी हमारे इतिहास में गूंजती है।



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बैसाखी का वह काला दिन

बैसाखी का त्योहार सिखों के लिए बहुत बड़ा होता है। साल 1919 में ये दिन बहुत भारी पड़ा था। अमृतसर के लोग जलियांवाला बाग में जमा हुए थे। वहां करीब 20 हजार लोग मौजूद थे।



वे लोग शांतिपूर्वक विरोध प्रदर्शन कर रहे थे। तभी जनरल डायर अपनी फौज के साथ आया। उसने बाग के मुख्य द्वार को घेर लिया। वहां से बाहर निकलने का रास्ता बहुत संकरा था।



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जनरल डायर का खौफनाक आदेश

डायर ने भीड़ को कोई चेतावनी नहीं दी। उसने सीधे अपनी फौज को गोली चलाने को कहा। करीब 10 मिनट तक लगातार गोलियां चलती रहीं। उस दिन 1650 राउंड गोलियां चलाई गई थीं।



लोग अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागे। बाग की ऊंची दीवारें कूदना मुमकिन नहीं था। कुछ लोग जान बचाने के लिए कुएं में कूदे। वह कुआं आज शहीदी कुआं कहलाता है।



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इतिहास का सबसे बड़ा नरसंहार

सरकारी आंकड़ों के अनुसार 379 लोग मारे गए थे। लेकिन असल संख्या एक हजार से भी ज्यादा थी। घायलों की संख्या का कोई सही हिसाब नहीं था। चारों तरफ खून और लाशों का ढेर था।



रोलेट एक्ट के खिलाफ यह सबसे बड़ा विरोध था। रोलेट एक्ट को 'काला कानून' भी कहा जाता था। इसके तहत पुलिस किसी को भी जेल भेज सकती थी।



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शहीद ऊधम सिंह का बदला

इस घटना ने पूरे देश को हिला दिया। एक छोटे बच्चे (Bundelkhand Jallianwala Bagh) ने यह सब देखा था। उस बच्चे का नाम ऊधम सिंह था। उसने बदला लेने की कसम खाई थी।



साल 1940 में उसने लंदन जाकर बदला लिया। उसने वहां माइकल ओ'ड्वायर की हत्या कर दी। ओ'ड्वायर उस समय पंजाब का गवर्नर था। उसने ही डायर को फायरिंग की इजाजत दी थी।



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हंटर कमीशन और उसकी रिपोर्ट

ब्रिटिश सरकार ने इस कांड की जांच करवाई। इसके लिए हंटर कमीशन बनाया गया था। डायर ने अपनी गलती को सही बताया था। उसने कहा कि वह दहशत फैलाना चाहता था। कमीशन ने डायर को सिर्फ नौकरी से निकाला। उसे कोई कड़ी सजा नहीं दी गई थी। भारतीयों के लिए यह बहुत बड़ा अपमान था।



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आज का जलियांवाला बाग

आज जलियांवाला बाग सिर्फ एक बगीचा नहीं, बल्कि भारतीय आजादी का सबसे बड़ा तीर्थ बन चुका है। अमृतसर के स्वर्ण मंदिर के पास स्थित यह मैदान अब एक राष्ट्रीय स्मारक है।



यहां की ऊंची लाल दीवारें आज भी ब्रिटिश हुकूमत के जुल्मों की गवाही देती हैं। उन दीवारों पर सफेद घेरे के अंदर बने गोलियों के निशान आज भी वैसे ही सुरक्षित रखे गए हैं।



वहां मौजूद वह ऐतिहासिक कुआं, जिसमें गिरकर सैकड़ों मासूमों ने जान दी थी, अब 'शहीदी कुएं' के नाम से जाना जाता है। पर्यटक वहां जाकर उन शहीदों के साहस को महसूस करते हैं। हर साल 13 अप्रैल को यहां एक विशेष श्रद्धांजलि सभा का आयोजन होता है।



देश-विदेश से लोग यहां उन वीरों को नमन करने आते हैं। सरकार ने इस जगह का सौंदर्यीकरण भी किया है ताकि युवा पीढ़ी अपने इतिहास को करीब से जान सके। यह स्थान हमें याद दिलाता है कि हमारी आजादी कितनी महंगी है। यह भारतीय स्वाभिमान का एक अमर प्रतीक है।



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जलियांवाला बाग के बारे में कुछ खास बातें

जलियांवाला बाग के बारे में कुछ और खास बातें हैं जो हर भारतीय को जाननी चाहिए। इस बाग में प्रवेश करने का रास्ता आज भी वही संकरा रास्ता है, जहां से जनरल डायर अपनी फौज लेकर अंदर आया था। उस समय बाग के चारों तरफ ऊंची दीवारें थीं और बाहर निकलने का कोई दूसरा रास्ता नहीं था, जिससे लोग चाहकर भी अपनी जान नहीं बचा सके।



यहां बना लौ (Flame of Liberty) स्मारक बेहद प्रभावशाली है। यह पत्थर का एक विशाल स्तंभ है जो शहीदों की अमर याद में बनाया गया है। इसके अलावा, वहां एक म्यूजियम भी बनाया गया है, जहां उस समय की तस्वीरें, अखबारों की कटिंग और क्रांतिकारियों के पत्रों को संभालकर रखा गया है।



हाल के वर्षों में, यहां एकलाइट एंड साउंड शो भी शुरू किया गया है, जो शाम के वक्त इस पूरी घटना को जीवंत कर देता है। रवींद्रनाथ टैगोर ने इसी नरसंहार के विरोध में अपनी नाइटहुड की उपाधि लौटा दी थी। यह स्थान हमें सिखाता है कि एकता में कितनी शक्ति होती है और शांतिपूर्ण संघर्ष का मोल क्या है।



13 अप्रैल की महत्वपूर्ण ऐतिहासिक घटनाएं

आज का इतिहास मेंहर दिन का अपना एक अलग महत्व होता है। 13 अप्रैल का दिन भी इतिहास (आज की यादगार घटनाएं) में कई महत्वपूर्ण घटनाओं के लिए दर्ज है। इस दिन दुनिया में कई ऐसी घटनाएं हुईं, जिन्होंने इतिहास की दिशा बदल दी।



आइए जानते हैं 13 अप्रैल (आज की तारीख का इतिहास) को भारत और विश्व में घटी कुछ प्रमुख घटनाओं के बारे में, जो आपके सामान्य ज्ञान को बढ़ा सकती हैं-



विश्व इतिहास की प्रमुख घटनाएं...

  • 1111: सालियन राजवंश के अंतिम शासक हेनरी वी को होली रोमन सम्राट का ताज पहनाया गया।
  • 1735: सम्राट सकुरामाची को जापान के सिंहासन पर बैठाया गया।
  • 1742: डबलिन में जॉर्ज फ्रेडरिक हैंडल के प्रसिद्ध वाद्यवृंद "मसीहा" का पहली बार प्रदर्शन हुआ।
  • 1759: फ्रांसीसी सेना ने बर्गन की लड़ाई में यूरोपीय सहयोगियों को हराया।
  • 1777: अमेरिकी क्रांतिकारी युद्ध के दौरान ब्रिटिश सेना ने न्यू जर्सी में अमेरिकी चौकी पर अचानक हमला किया।
  • 1813: 1,144 साल पुराने ऐतिहासिक 'रिकुल्वर' चर्च को आधिकारिक रूप से बंद कर दिया गया।
  • 1823: प्रसिद्ध संगीतकार फ्रांज लिज़ट के कॉन्सर्ट के बाद बीथोवेन ने उन्हें व्यक्तिगत रूप से बधाई दी।
  • 1829: ब्रिटेन में 'रोमन कैथोलिक राहत अधिनियम' के जरिए कैथोलिकों पर लगे कड़े प्रतिबंध हटाए गए।
  • 1842: पहले एंग्लो-अफगान युद्ध के दौरान जेलालाबाद में ब्रिटिश सेना विजयी रही।
  • 1873: अमेरिका के लुइसियाना में श्वेत वर्चस्ववादियों के हमले में 100 से अधिक अफ्रीकी अमेरिकी मारे गए।
  • 1943: थॉमस जेफरसन की 200वीं वर्षगांठ पर वाशिंगटन में 'जेफरसन मेमोरियल' का उद्घाटन हुआ।
  • 1943: पोलिश कैदियों के सामूहिक नरसंहार की खबर से पोलैंड और सोवियत संघ के बीच राजनयिक दरार आई।
  • 1956: वियतनामी सेना ने बा कट को पकड़ा, जो दक्षिणी वियतनाम में समानांतर सरकार चला रहा था।
  • 1958: शीत युद्ध के दौरान अमेरिकी पियानोवादक वैन क्लिबर्न ने मास्को में अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता जीती।
  • 1960: फ्रांस सहारा मरुस्थल में परमाणु परीक्षण करने वाला दुनिया का चौथा देश बना।
  • 1970: चंद्रमा मिशन पर निकले अमेरिकी अंतरिक्ष यान 'अपोलो 13' के ईंधन टैंक में भयानक विस्फोट हुआ।
  • 1986: चिकित्सा इतिहास में पहली बार एक गैर-संबंधित सरोगेट मां से बच्चे का जन्म हुआ।
  • 1992: न्यूयॉर्क यांकीस ने अपनी अजेय बढ़त कायम रखते हुए टोरंटो ब्लू जैस को 5-2 से हराया।
  • 1993: न्यूयॉर्क के लिसेयुम थिएटर में प्रसिद्ध नाटक 'थ्री मेन ऑन अ हॉर्स' का प्रीमियर हुआ।
  • 1997: टाइगर वुड्स 21 साल की उम्र में 'यूएस मास्टर्स चैंपियनशिप' जीतने वाले सबसे युवा खिलाड़ी बने।
  • 2004: क्रिकेट दिग्गज ब्रायन लारा ने इंग्लैंड के खिलाफ ऐतिहासिक 400 रनों की नाबाद पारी खेली।
  • 2009: पोलैंड के कामिएनपोमॉर्स्की में एक हॉस्टल में आग लगने से 23 लोगों की मृत्यु हो गई।
  • 2011: भूकंप और सुनामी के चलते टोयोटा को अपनी कई निर्माण इकाइयों को बंद करना पड़ा।
  • 2013: बीजिंग में सात साल की बच्ची के रूप में चीन का पहला 'H7N9 बर्ड फ्लू' मामला सामने आया।
  • 2013: चीन और अमेरिका कोरियाई प्रायद्वीप को परमाणु मुक्त बनाने की दिशा में सहमत हुए।
  • 2013: पाकिस्तान के पेशावर में एक बस धमाके में 8 लोगों की दर्दनाक मौत हुई।
  • 2014: गोल्फर बुब्बा वॉटसन ने लगातार दूसरी बार प्रतिष्ठित 'मास्टर्स टूर्नामेंट' जीता।
  • 2015: वीट जेडली का ने क्रोएशिया और सर्बिया के बीच लावारिस भूमि पर 'लिबरलैंड' राष्ट्र की घोषणा की।

भारत के इतिहास की प्रमुख घटनाएं...

  • 1890: भारत की पहली फिल्म 'श्रीपुंडलीक' बनाने वाले फिल्मकार दादासाहब तोरणे का जन्म हुआ।
  • 1919: अमृतसर के जलियांवाला बाग में ब्रिटिश सेना ने निहत्थे मासूमों पर अंधाधुंध गोलियां चलाकर नरसंहार किया।
  • 1939: अंग्रेजों के खिलाफ सशस्त्र संघर्ष के लिए 'हिंदुस्तानी लाल सेना' (Indian Red Army) का गठन हुआ।
  • 1984: भारतीय सेना ने सियाचिन ग्लेशियर पर नियंत्रण पाने के लिए 'ऑपरेशन मेघदूत' शुरू किया।
  • 1984: भारतीय क्रिकेट टीम ने पाकिस्तान को हराकर पहली बार 'एशिया कप' का खिताब अपने नाम किया।
  • 1994: संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने भारत के खिलाफ अपना पहला आधिकारिक वनडे मैच खेला।
  • 2007: भारत और रूस के बीच कूटनीतिक संबंधों के सफल 60 वर्ष पूरे हुए।
  • 2012: बॉलीवुड अभिनेता शाहरुख खान को न्यूयॉर्क एयरपोर्ट पर सुरक्षा जांच के लिए हिरासत में लिया गया।

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