Partition Horror Day: 14 अगस्त 1947 को संविधान हॉल में क्या-क्या हुआ था?
Kaushiki | Aug 14, 2026, 08:00 IST
Partition Horror Day
14 अगस्त 1947 को ब्रिटिश भारत का बंटवारा हुआ था। इस दिन को भारत में विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के रूप में याद किया जाता है। इसी रात दिल्ली के संविधान हॉल में जवाहरलाल नेहरू ने अपना प्रसिद्ध भाषण ट्रिस्ट विद डेस्टिनी दिया था।
Partition Horrors Remembrance Day: 14 अगस्त का दिन भारत के इतिहास में बहुत ही खास और मिला-जुला माना जाता है। एक तरफ सदियों पुरानी गुलामी से मुक्ति का जश्न शुरू हो रहा था। दूसरी तरफ भारत के नक्शे के दो टुकड़े होने का गहरा दर्द भी छुपा था। 14 अगस्त 1947 को ब्रिटिश भारत का आधिकारिक तौर पर विभाजन हुआ था।
लाखों लोगों ने अपनों को खोया और अपने ही घरों को हमेशा के लिए छोड़ दिया। यह त्रासदी दुनिया के सबसे बड़े विस्थापन के रूप में इतिहास में दर्ज हुई। इसीलिए भारत में 14 अगस्त को विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस (Partition Horror Memorial Day) के रूप में याद करते हैं।
उस रात नई दिल्ली के संविधान हॉल में एक नया इतिहास भी लिखा जा रहा था। संविधान सभा की ऐतिहासिक बैठक में भारत की आजादी का ऐलान किया गया था। पंडित जवाहरलाल नेहरू ने अपनी ऐतिहासिक स्पीच 'ट्रिस्ट विद डेस्टिनी' दी थी। आइए जानते हैं कि 14 अगस्त 1947 को असल में क्या-क्या हुआ था।
![ab415fec-332]()
भारत सरकार ने 14 अगस्त को आधिकारिक तौर पर एक विशेष नाम दिया है। इस दिन को विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस (Partition Horror Memorial Day) के रूप में याद किया जाता है। यह दिन उन करोड़ों लोगों के संघर्ष और आंसुओं की याद दिलाता है।
बंटवारे के समय लगभग 1.5 करोड़ लोग बेघर हो गए थे। पंजाब और बंगाल की सीमाओं पर बहुत भयंकर हिंसा भड़क उठी थी। लाखों बेगुनाह पुरुषों, महिलाओं और बच्चों ने अपनी जान गंवा दी थी। ट्रेनों में भरकर लाशें एक तरफ से दूसरी तरफ आ-जा रही थीं।
वह भयानक मंजर याद करके आज भी लोगों की रूह कांप उठती है। लोग अपनी सदियों पुरानी जमीन और जायदाद छोड़कर शरणार्थी बनने पर मजबूर हुए। वे रातों-रात अपने ही देश में बेगाने और लाचार हो गए थे।
यह इतिहास का सबसे बड़ा और सबसे दर्दनाक मानवीय विस्थापन माना जाता है। इसीलिए यह दिन केवल जश्न का नहीं बल्कि श्रद्धांजलि देने का भी है।
![ce26b010-1aa]()
बंटवारे के इस भयंकर दर्द के बीच दिल्ली में एक नई भोर की तैयारी थी। 14 अगस्त की रात करीब 11 बजे संविधान सभा की बैठक शुरू हुई। नई दिल्ली के सेंट्रल हॉल जिसे तब संविधान हॉल कहते थे, वहां सब एकत्रित हुए। देश के सभी बड़े नेता, विद्वान और स्वतंत्रता सेनानी वहां मौजूद थे।
हॉल में काफी हलचल थी और हर कोई उस ऐतिहासिक पल का गवाह बनना चाहता था। बाहर हजारों लोग भारत माता की जय के नारे लगा रहे थे। बैठक की अध्यक्षता डॉ. राजेंद्र प्रसाद कर रहे थे जिन्होंने अपना भाषण दिया। उन्होंने देश की आजादी और स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के बलिदान को याद किया।
सुचेता कृपलानी ने वंदे मातरम गाकर सभा का शुभारंभ किया जो बहुत ही भावुक था। हर किसी की आंखों में आजादी के सपने और आंसू दोनों साफ दिख रहे थे। यह बैठक सदियों की गुलामी को खत्म करने के लिए बुलाई गई थी। समय रात के 12 बजे की तरफ बहुत तेजी से बढ़ रहा था।
![85d707e2-9e3]()
जैसे ही घड़ी की सुइयों ने रात के 12 बजाए, भारत आजाद हो गया। ठीक उसी वक्त जवाहरलाल नेहरू भाषण देने के लिए पोडियम पर आए। नेहरू जी ने अंग्रेजी में अपना सबसे मशहूर भाषण 'Tryst with Destiny' दिया। हिंदी में इसका अर्थ 'नियति से वादा' या 'भाग्य से मुलाकात' होता है।
उन्होंने कहा कि जब दुनिया सो रही होगी, भारत जीवन और आजादी के लिए जागेगा। एक ऐसा क्षण जो इतिहास में बहुत कम ही देखने को मिलता है। उन्होंने कहा कि आज हम एक पुराने युग का अंत कर रहे हैं। लंबे समय से दबाई गई देश की आत्मा अब अपनी बात कहेगी।
यह भाषण दुनिया के सबसे प्रभावशाली और ऐतिहासिक भाषणों में गिना जाता है। इस भाषण ने एक नए और आधुनिक भारत की नींव रखी थी। नेहरू जी ने स्पष्ट किया कि आजादी के साथ बहुत बड़ी जिम्मेदारियां भी आई हैं। हमें देश से गरीबी, अज्ञानता और बीमारियों को पूरी तरह मिटाना होगा।
![13a5c5c4-c98]()
रात 12 बजे के बाद संविधान सभा के सदस्यों ने देश सेवा की शपथ ली। लॉर्ड माउंटबेटन को आजाद भारत का पहला गवर्नर जनरल स्वीकार किया गया। भारत की आजादी का आधिकारिक प्रस्ताव सर्वसम्मति से पास कर दिया गया। संविधान हॉल के बाहर जमा भीड़ खुशी से झूमने और नाचने लगी थी।
उसी रात तिरंगा फहराया गया और राष्ट्रगान जन गण मन गाया गया। पूरे देश में आतिशबाजी हुई और दीये जलाकर जश्न मनाया जाने लगा। एक तरफ दिल्ली में आजादी का भव्य जश्न और उत्साह का माहौल था। दूसरी तरफ सीमावर्ती इलाकों में बंटवारे का भयानक दंश फैला हुआ था।
महात्मा गांधी उस समय दिल्ली के इस भव्य जश्न में शामिल नहीं थे। वे बंगाल के नोआखली में दंगे रोकने और शांति बनाने में लगे थे। गांधी जी विभाजन के दर्द से बहुत दुखी थे और प्रार्थना कर रहे थे। वे पीड़ित लोगों के जख्मों पर मरहम लगाने की कोशिश कर रहे थे।
![d762b403-1ff]()
14 अगस्त (Partition of India) का दिन हमें इतिहास के दो सबसे बड़े सबक सिखाता है। पहला सबक यह है कि आजादी कितनी कठिन और कीमती संघर्ष से मिली है। दूसरा सबक यह है कि नफरत और बंटवारे के नतीजे कितने भयानक होते हैं। देश की एकता और अखंडता को बनाए रखना हम सबकी जिम्मेदारी है।
आज का युवा वर्ग इस दिन को पढ़कर इतिहास के पन्नों को समझता है। हमें अपने वीरों के त्याग और बलिदान को कभी नहीं भूलना चाहिए। यह दिन हमें याद दिलाता है कि विविधता में एकता ही भारत की ताकत है। हमें आपस में प्रेम, शांति और भाईचारा बनाए रखना बहुत जरूरी है।
तो 14 अगस्त 1947 भारत-पाकिस्तान विभाजन काएक ऐसा मोड़ था जिसने पूरे दक्षिण एशिया का भूगोल बदल दिया। इसने दो नए देशों के भविष्य और दिशा का फैसला किया था। आज भी जब हम 14 अगस्त की बात करते हैं, तो दिल भर आता है। विभाजन विभीषिका दिवस का दिन इतिहास का सबसे बड़ा मोड़ और सबक माना जाता है।
सोर्स लिंक्स:
आज का इतिहास मेंहर दिन का अपना एक अलग महत्व होता है। 14 अगस्त का दिन भी इतिहास (आज की यादगार घटनाएं) में कई महत्वपूर्ण घटनाओं के लिए दर्ज है। इस दिन दुनिया में कई ऐसी घटनाएं हुईं, जिन्होंने इतिहास की दिशा बदल दी।
आइए जानते हैं 14 अगस्त (आज की तारीख का इतिहास) को भारत और विश्व में घटी कुछ प्रमुख घटनाओं के बारे में, जो आपके सामान्य ज्ञान को बढ़ा सकती हैं-
31 जुलाई का इतिहास: आज ही के दिन से हुई थी मोबाइल संचार क्रांति की शुरुआत
साल 1905 में आज ही के दिन कोलकाता से शुरू हुआ था स्वदेशी आंदोलन का इतिहास
27 जुलाई का इतिहास: कैसे मिला टाइटैनिक का मलबा, जानें समुद्र की गहराई का सच
28 जुलाई का इतिहास: कौन थे विलियम हर्शेल, जिन्होंने फिंगरप्रिंट को बनाया पहचान का जरिया
लाखों लोगों ने अपनों को खोया और अपने ही घरों को हमेशा के लिए छोड़ दिया। यह त्रासदी दुनिया के सबसे बड़े विस्थापन के रूप में इतिहास में दर्ज हुई। इसीलिए भारत में 14 अगस्त को विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस (Partition Horror Memorial Day) के रूप में याद करते हैं।
उस रात नई दिल्ली के संविधान हॉल में एक नया इतिहास भी लिखा जा रहा था। संविधान सभा की ऐतिहासिक बैठक में भारत की आजादी का ऐलान किया गया था। पंडित जवाहरलाल नेहरू ने अपनी ऐतिहासिक स्पीच 'ट्रिस्ट विद डेस्टिनी' दी थी। आइए जानते हैं कि 14 अगस्त 1947 को असल में क्या-क्या हुआ था।
ab415fec-332
विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस का सच
बंटवारे के समय लगभग 1.5 करोड़ लोग बेघर हो गए थे। पंजाब और बंगाल की सीमाओं पर बहुत भयंकर हिंसा भड़क उठी थी। लाखों बेगुनाह पुरुषों, महिलाओं और बच्चों ने अपनी जान गंवा दी थी। ट्रेनों में भरकर लाशें एक तरफ से दूसरी तरफ आ-जा रही थीं।
वह भयानक मंजर याद करके आज भी लोगों की रूह कांप उठती है। लोग अपनी सदियों पुरानी जमीन और जायदाद छोड़कर शरणार्थी बनने पर मजबूर हुए। वे रातों-रात अपने ही देश में बेगाने और लाचार हो गए थे।
यह इतिहास का सबसे बड़ा और सबसे दर्दनाक मानवीय विस्थापन माना जाता है। इसीलिए यह दिन केवल जश्न का नहीं बल्कि श्रद्धांजलि देने का भी है।
ce26b010-1aa
14 अगस्त की रात संविधान हॉल का दृश्य
हॉल में काफी हलचल थी और हर कोई उस ऐतिहासिक पल का गवाह बनना चाहता था। बाहर हजारों लोग भारत माता की जय के नारे लगा रहे थे। बैठक की अध्यक्षता डॉ. राजेंद्र प्रसाद कर रहे थे जिन्होंने अपना भाषण दिया। उन्होंने देश की आजादी और स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के बलिदान को याद किया।
सुचेता कृपलानी ने वंदे मातरम गाकर सभा का शुभारंभ किया जो बहुत ही भावुक था। हर किसी की आंखों में आजादी के सपने और आंसू दोनों साफ दिख रहे थे। यह बैठक सदियों की गुलामी को खत्म करने के लिए बुलाई गई थी। समय रात के 12 बजे की तरफ बहुत तेजी से बढ़ रहा था।
85d707e2-9e3
नेहरू का ट्रिस्ट विद डेस्टिनी भाषण
उन्होंने कहा कि जब दुनिया सो रही होगी, भारत जीवन और आजादी के लिए जागेगा। एक ऐसा क्षण जो इतिहास में बहुत कम ही देखने को मिलता है। उन्होंने कहा कि आज हम एक पुराने युग का अंत कर रहे हैं। लंबे समय से दबाई गई देश की आत्मा अब अपनी बात कहेगी।
यह भाषण दुनिया के सबसे प्रभावशाली और ऐतिहासिक भाषणों में गिना जाता है। इस भाषण ने एक नए और आधुनिक भारत की नींव रखी थी। नेहरू जी ने स्पष्ट किया कि आजादी के साथ बहुत बड़ी जिम्मेदारियां भी आई हैं। हमें देश से गरीबी, अज्ञानता और बीमारियों को पूरी तरह मिटाना होगा।
13a5c5c4-c98
सत्ता का ट्रांसफर और नया सवेरा
उसी रात तिरंगा फहराया गया और राष्ट्रगान जन गण मन गाया गया। पूरे देश में आतिशबाजी हुई और दीये जलाकर जश्न मनाया जाने लगा। एक तरफ दिल्ली में आजादी का भव्य जश्न और उत्साह का माहौल था। दूसरी तरफ सीमावर्ती इलाकों में बंटवारे का भयानक दंश फैला हुआ था।
महात्मा गांधी उस समय दिल्ली के इस भव्य जश्न में शामिल नहीं थे। वे बंगाल के नोआखली में दंगे रोकने और शांति बनाने में लगे थे। गांधी जी विभाजन के दर्द से बहुत दुखी थे और प्रार्थना कर रहे थे। वे पीड़ित लोगों के जख्मों पर मरहम लगाने की कोशिश कर रहे थे।
d762b403-1ff
14 अगस्त 1947 का संदेश
आज का युवा वर्ग इस दिन को पढ़कर इतिहास के पन्नों को समझता है। हमें अपने वीरों के त्याग और बलिदान को कभी नहीं भूलना चाहिए। यह दिन हमें याद दिलाता है कि विविधता में एकता ही भारत की ताकत है। हमें आपस में प्रेम, शांति और भाईचारा बनाए रखना बहुत जरूरी है।
तो 14 अगस्त 1947 भारत-पाकिस्तान विभाजन काएक ऐसा मोड़ था जिसने पूरे दक्षिण एशिया का भूगोल बदल दिया। इसने दो नए देशों के भविष्य और दिशा का फैसला किया था। आज भी जब हम 14 अगस्त की बात करते हैं, तो दिल भर आता है। विभाजन विभीषिका दिवस का दिन इतिहास का सबसे बड़ा मोड़ और सबक माना जाता है।
सोर्स लिंक्स:
- National Archives of India - Partition of India & Independence Documents
- Indian Culture Portal - Tryst with Destiny Speech & Constitution Hall Records
14 अगस्त की महत्वपूर्ण ऐतिहासिक घटनाएं
आइए जानते हैं 14 अगस्त (आज की तारीख का इतिहास) को भारत और विश्व में घटी कुछ प्रमुख घटनाओं के बारे में, जो आपके सामान्य ज्ञान को बढ़ा सकती हैं-
विश्व और भारत इतिहास की प्रमुख घटनाएं...
- 1862: बंबई उच्च न्यायालय की स्थापना की गयी थी।
- 1908: इंग्लैंड के फोकेस्टोन में दुनिया की पहली सौंदर्य प्रतियोगिता आयोजित की गयी थी।
- 1917: प्रथम विश्व युद्ध के दौरान चीन ने जर्मनी और आस्ट्रिया के खिलाफ युद्ध की घोषणा की थी।
- 1920: बेल्जियम के एंटवर्प शहर में ग्रीष्मकालीन ओलंपिक खेलों की औपचारिक शुरुआत हुई थी।
- 1936: बर्लिन ओलंपिक में पहली बार बास्केटबॉल खेल को शामिल किया गया था।
- 1938: बीबीसी ने अपनी पहली फीचर फिल्म (स्टूडेंट ऑफ प्राग) का टेलीविजन पर प्रसारण किया था।
- 1947: ब्रिटिश भारत का विभाजन हुआ और पाकिस्तान एक पृथक् राष्ट्र के रूप में अस्तित्व में आया।
- 1968: मोरारजी देसाई को पाकिस्तान के सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'निशान-ए-पाकिस्तान' से सम्मानित किया गया था।
- 1971: बहरीन को करीब 110 वर्षों के लंबे ब्रिटिश शासन से पूरी तरह आजादी मिली थी।
- 1975: बांग्लादेश में सेना ने तख्तापलट कर राष्ट्रपति मुजीब उर-रहमान की हत्या कर दी थी।
- 2001: मेसेडोनिया सरकार और अल्बानियाई विद्रोहियों में शांति समझौता हुआ, जबकि आयरिश रिपब्लिकन आर्मी ने निशस्त्रीकरण से साफ इंकार किया।
- 2002: पाकिस्तान के तत्कालीन राष्ट्रपति जनरल परवेज मुशर्रफ़ ने कश्मीर में होने वाले चुनावों को ढोंग करार दिया था।
- 2006: संयुक्त राष्ट्र की पहल पर इस्रायल और दक्षिणी लेबनान के बीच चला आ रहा पांच सप्ताह का संघर्ष समाप्त हुआ।
- 2006: इराक के कहतानिया शहर में हुए भयानक बमबारी धमाकों में करीब 400 लोगों की मौत हो गई थी।
- 2007: पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ़ और पूर्व प्रधानमंत्री बेनजीर भुट्टो के बीच राजनीतिक समझौता हुआ था।
- 2013: मिस्र में पुलिस और राजनीतिक प्रदर्शनकारियों के बीच हुई भयंकर हिंसक झड़प में 638 लोग मारे गए थे।
- 1900: एस. के. पाटिल - मुंबई के दिग्गज नेता और केंद्र सरकार में पूर्व केंद्रीय मंत्री।
- 1924: सैयद मुज़फ़्फ़र हुसैन बर्नी - उड़ीसा कैडर के पूर्व भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) अधिकारी।
- 1924: कुलदीप नैयर - भारत के बेहद प्रसिद्ध वरिष्ठ लेखक, स्तंभकार और पत्रकार।
- 1941: टी. वी. रामकृष्णन - भारत के जाने-माने सैद्धांतिक भौतिक विज्ञानी।
- 1957: जॉनी लीवर - हिंदी सिनेमा के मशहूर और दिग्गज हास्य अभिनेता।
- 1968: प्रवीण आमरे - पूर्व भारतीय अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर।
- 1970: रामेश्वर तेली - भारतीय जनता पार्टी के नेता और असम के सक्रिय राजनीतिज्ञ।
- 1995: ऐश्वर्या पिस्से - प्रसिद्ध भारतीय सर्किट और ऑफ़-रोड मोटर साइकिल रेसर।
- 1941: केसरी सिंह बारहट - प्रसिद्ध राजस्थानी कवि और महान स्वतंत्रता सेनानी।
- 1979: एडौर्ड गौबर्ट - पुदुचेरी (पांडिचेरी) केंद्र शासित प्रदेश के प्रथम मुख्यमंत्री।
- 1984: खाशाबा जाधव - व्यक्तिगत प्रतिस्पर्धा (हेलसिंकी ओलंपिक) में भारत के लिए पहला ओलंपिक कांस्य पदक जीतने वाले महान पहलवान।
- 1988: कैलाश नाथ वांचू - भारत के दसवें मुख्य न्यायाधीश (CJI)।
- 1996: अमृतराय - प्रसिद्ध हिंदी उपन्यासकार, निबंधकार, समीक्षक और अनुवादक।
- 2000: हवा सिंह - भारत के दिग्गज मुक्केबाज जिन्होंने लगातार दो एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीता।
- 2007: येनो मीनागावा - जापान की महिला जो उस समय दुनिया की सर्वाधिक उम्रदराज व्यक्ति थीं।
- 2011: शम्मी कपूर - हिंदी सिनेमा के सदाबहार और प्रसिद्ध अभिनेता।
- 2012: विलासराव देशमुख - महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के वरिष्ठ नेता।
- 2017: चंद्रकांत देवताले - प्रसिद्ध भारतीय कवि और साहित्यकार।
- 2018: बलरामजी दास टंडन - वरिष्ठ राजनीतिज्ञ और छत्तीसगढ़ के पूर्व राज्यपाल।
- 2022: राकेश झुनझुनवाला - 'द बिग बुल' के नाम से मशहूर भारत के दिग्गज शेयर बाजार निवेशक और व्यापारी।
- विश्व युवक दिवस (World Youth Day)
- विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस (Partition Horrors Remembrance Day - भारत में)
31 जुलाई का इतिहास: आज ही के दिन से हुई थी मोबाइल संचार क्रांति की शुरुआत
साल 1905 में आज ही के दिन कोलकाता से शुरू हुआ था स्वदेशी आंदोलन का इतिहास
27 जुलाई का इतिहास: कैसे मिला टाइटैनिक का मलबा, जानें समुद्र की गहराई का सच
28 जुलाई का इतिहास: कौन थे विलियम हर्शेल, जिन्होंने फिंगरप्रिंट को बनाया पहचान का जरिया
देश में मानसून की बेरुखी से 51% हिस्से में सूखे का संकट: खरीफ फसलों पर मार, बढ़ सकती है महंगाई और आम आदमी की मुश्किलें
By Aman Vaishnav, CHAKRESH
Live |उज्जैन में मस्जिद हटाने पर बवाल
By
राजस्थान नगर निगम चुनाव में BJP का दबदबा
By
गंगरेल बांध का विकराल रूप, खोले गए सभी 14 गेट, महानदी में बढ़ा जलस्तर
By
छत्तीसगढ़ में भारी बारिश का असर: महादेव घाट पुल डूबा, शबरी पर बढ़ा खतरा; कई रास्तों पर आवाजाही बंद
By Umeshwari Baghel
छत्तीसगढ़ के स्कूलों में अक्टूबर से बदलेगा पढ़ाई का तरीका, कठिन विषयों की होंगी लाइव ऑनलाइन क्लास
By Harrison Masih
31 साल का साथ, फिर शादी पर उठे सवाल, ग्वालियर हाईकोर्ट ने दिलाया पत्नी होने का हक
By Sanjay Dhiman