15 जनवरी का इतिहास: 1934 का वह भूकंप जब उजड़ गए हजारों आशियाने

Kaushiki | Jan 15, 2026, 08:00 IST
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15 जनवरी 1934 को आए 8.0 तीव्रता के भूकंप ने भारत-नेपाल में भारी तबाही मचाई। लगभग 20,000 लोगों की जान गई और कई बड़े शहर जमींदोज हो गए। जानें इतिहास की पूरी जानकारी।

आज के दिन की कहानी:इतिहास के पन्नों में कुछ तारीखें ऐसी होती हैं जिन्हें याद करके आज भी रूह कांप जाती है। 15 जनवरी 1934 की वो सर्द दोपहर भी कुछ वैसी ही डरावनी और कयामत वाली थी। दोपहर के करीब 2 बजकर 13 मिनट हुए थे लोग अपने रोजमर्रा के कामों में मग्न थे।



अचानक धरती के भीतर से एक ऐसी गर्जना हुई जिसे सुनकर लोग सहम कर रह गए। महज कुछ ही सेकंड्स के भीतर पूरी जमीन किसी नाव की तरह डोलने लगी थी। यह 8.0 तीव्रता का महाभूकंप था जिसने भारत के बिहार और पड़ोसी देश नेपाल को हिला दिया।



कभी ना भूल पाने वाला वो मंजर जिसने भारत और नेपाल में मचाई भारी तबाही, 11 हजार लोगों की गई जान | 15


दोपहर का वो मंजर जब धूल से भर गया था आसमान

जैसे ही भूकंप के झटके शुरू हुए, पक्के मकान ताश के पत्तों की तरह गिरने लगे। उत्तर बिहार के मोंगायर (मुंगेर), मुजफ्फरपुर और दरभंगा जैसे शहर देखते ही देखते मलबे में बदल गए।



काठमांडू घाटी में भी तबाही का मंजर इतना भयानक था कि पुराने मंदिर और महल ढह गए। उस समय संचार के साधन इतने उन्नत नहीं थे कि तुरंत मदद की पुकार भेजी जा सके।



धूल और मलबे के गुबार ने सूरज की रोशनी तक को काफी समय के लिए रोक दिया था। चीख-पुकार और अपनों को खोने का दर्द उस दिन हर गली और मोहल्ले में गूंज रहा था।



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मलबे में दफन जिंदगी की हकीकत

सरकारी और ऐतिहासिक आंकड़ों की मानें तो इस आपदा में लगभग 10 हजार से 20 हजार लोग मारे गए। हालांकि, स्थानीय लोगों का मानना था कि मरने वालों की संख्या इससे कहीं ज्यादा बड़ी थी।



मुंगेर शहर की हालत तो ऐसी थी कि वहां एक भी पक्का मकान सीधा खड़ा नहीं बचा। नेपाल में भी हजारों लोग मारे गए और काठमांडू की ऐतिहासिक धरोहरों को भारी नुकसान पहुंचा था।



धरती में ऐसी दरारें पड़ गई थीं कि वहां से गर्म पानी और रेत बाहर निकलने लगी थी। खेती की जमीनें पूरी तरह बर्बाद हो गईं और चारों तरफ सिर्फ भूख और प्यास का आलम था।



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राहत कार्यों की वो ऐतिहासिक शुरुआत

उस समय भारत में ब्रिटिश शासन था। लेकिन राहत कार्यों की बागडोर खुद भारतीय नेताओं ने संभाली। महात्मा गांधी ने इस भूकंप को लेकर एक विवादित लेकिन भावनात्मक बयान दिया जिसे दुनिया ने सुना। उन्होंने उत्तर भारत के कई हिस्सों में भूकंप कोछुआछूत जैसी सामाजिक बुराई के खिलाफ ईश्वर का एक बड़ा दंड करार दिया था।



बिहार के तत्कालीन नेता डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने राहत शिविरों के निर्माण में दिन-रात एक कर दिया था। उस समय की आम जनता और राजा-महाराजाओं ने भी पीड़ितों की मदद के लिए अपने खजाने खोल दिए थे। ब्रिटिश सरकार ने भी पुनर्निर्माण के लिए कुछ फंड जारी किए लेकिन वो नाकाफी साबित हुए थे।



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क्यों आया था इतना भयानक भूकंप

विशेषज्ञों के मुताबिक, यह भूकंप हिमालयी बेल्ट के मुख्य बेल्ट (Main Boundary Thrust) पर हलचल से हुआ था। भारतीय टेक्टोनिक प्लेट और यूरेशियन प्लेट के बीच भारी दबाव के कारण ये ऊर्जा अचानक बाहर निकली।



इस जलजले ने न केवल जान-माल का नुकसान किया बल्कि गंगा के मैदान की भूगोल भी बदल दी। कई नदियों की धाराएं बदल गईं और जमीनी स्तर कहीं ऊपर तो कहीं बहुत नीचे चला गया।



1934 के इस भूकंप (क्यों आता है भूकंप)को आज भी दक्षिण एशिया के सबसे बड़े भूकंपों में गिना जाता है। इस घटना ने वैज्ञानिकों को हिमालयी क्षेत्र में भूकंप सुरक्षा के लिए नए सिरे से सोचने पर मजबूर किया।



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निष्कर्ष

1934 का भारत-नेपाल भूकंप केवल एक प्राकृतिक आपदा नहीं बल्कि एक बहुत बड़ा सबक था। इसने हमें सिखाया कि कुदरत के आगे इंसान की बनाई बड़ी-बड़ी इमारतें भी महज मिट्टी के ढेर हैं।



आज भी यह भूकंप उत्तर भारत के लिए एक बड़ी चेतावनी माना जाता है। हमें कुदरत के इन संकेतों को कभी भी हल्के में नहीं लेना चाहिए। हमेशा तैयार रहना ही इस तरह की आपदाओं से बचने का एकमात्र रास्ता है।



Reference Links:

15 जनवरी की महत्वपूर्ण ऐतिहासिक घटनाएं

आज का इतिहास मेंहर दिन का अपना एक अलग महत्व होता है। 15 जनवरी का दिन भी इतिहास (आज की यादगार घटनाएं) में कई महत्वपूर्ण घटनाओं के लिए दर्ज है। इस दिन दुनिया में कई ऐसी घटनाएं हुईं, जिन्होंने इतिहास की दिशा बदल दी।



आइए जानते हैं 15 जनवरी (आज की तारीख का इतिहास) को भारत और विश्व में घटी कुछ प्रमुख घटनाओं के बारे में, जो आपके सामान्य ज्ञान को बढ़ा सकती हैं-



विश्व इतिहास की प्रमुख घटनाएं...

  • 1759: लंदन का प्रसिद्ध ब्रिटिश संग्रहालय पहली बार आम जनता के लिए खोला गया।
  • 1784: कोलकाता में एशियाटिक सोसायटी ऑफ बंगाल की स्थापना हुई।
  • 1826: पेरिस में मशहूर फ्रांसीसी अखबार "ले फिगारो" का प्रकाशन शुरू हुआ।
  • 1839: मध्य अमेरिकी संघ के टूटने के बाद अल सल्वाडोर को औपचारिक स्वतंत्रता मिली।
  • 1889: दुनिया की मशहूर सॉफ्ट ड्रिंक कंपनी कोका कोला का जॉर्जिया में निगमीकरण हुआ।
  • 1910: अमेरिका के व्योमिंग में बफेलो बिल डैम का निर्माण हुआ, जो तब दुनिया का सबसे ऊंचा बांध था।
  • 1943: दुनिया की सबसे बड़ी ऑफिस बिल्डिंग 'पेंटागन' (अमेरिकी रक्षा विभाग मुख्यालय) का निर्माण पूरा हुआ।
  • 1968: सिसिली में आए विनाशकारी भूकंप में करीब 380 लोगों की जान चली गई।
  • 1998: नासा ने घोषणा की कि 76 वर्षीय जॉन ग्लेन फिर से अंतरिक्ष में उड़ान भर सकेंगे।
  • 2009: कैप्टन सुलेनबर्गर ने खराब विमान को न्यूयॉर्क की हडसन नदी में सुरक्षित उतारकर 155 यात्रियों की जान बचाई।
  • 2013: सीरिया की अलेप्पो यूनिवर्सिटी पर हुए रॉकेट हमले में 83 लोगों की दुखद मृत्यु हुई।
  • 2016: बुर्किना फासो के एक होटल में हुए आतंकी हमले में 28 लोगों की मौत हो गई।

भारत की महत्वपूर्ण घटनाएं

  • 1926: स्वतंत्र भारत के पहले व्यक्तिगत ओलंपिक पदक विजेता के.डी. जाधव का जन्म हुआ।
  • 1934: भारत-नेपाल सीमा पर 8.7 तीव्रता का भीषण भूकंप आया, जिसमें लगभग 11,000 लोग मारे गए।
  • 1949: फील्ड मार्शल के.एम. करियप्पा भारतीय सेना के पहले कमांडर-इन-चीफ बने, इसीलिए आज 'सेना दिवस' मनाया जाता है।

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