26 जून का इतिहास: जब PV Narasimha Rao ने देश की कमान संभाली, बदल गया भारत
PV Narasimha Rao 9th PM: साल 1991 का समय भारत के लिए बहुत कठिन था। देश एक बड़े आर्थिक संकट से पूरी तरह जूझ रहा था। चारों तरफ राजनीतिक उथल-पुथल का माहौल बना हुआ था। ठीक उसी समय एक शांत नेता की एंट्री होती है।
उनका नाम था पामुलापर्ति वेंकट नरसिम्हा राव यानी पीवी नरसिम्हा राव। उन्होंने 21 जून 1991 को भारत के 9वें प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली। उनके शपथ लेते ही भारतीय राजनीति का एक नया अध्याय शुरू हुआ।
सबको लगा था कि यह सरकार ज्यादा दिन नहीं चल पाएगी। लेकिन नरसिम्हा राव ने अपनी बुद्धिमानी से सबको हैरान कर दिया। उन्होंने न केवल सरकार चलाई बल्कि देश की किस्मत भी बदल दी।
राजनीति के आधुनिक चाणक्य की असल कहानी
नरसिम्हा राव को भारतीय राजनीति का आधुनिक चाणक्य कहा जाता है। वे बहुत ही शांत स्वभाव के बेहद ज्ञानी इंसान थे। उन्हें करीब 17 अलग-अलग भाषाओं का बहुत अच्छा ज्ञान था।
वे कंप्यूटर चलाने और कोडिंग करने में भी काफी माहिर थे। साल 1991 के चुनाव से पहले वे राजनीति से संन्यास लेने वाले थे। वे अपना सामान पैक करके अपने घर जाने की तैयारी में थे।
लेकिन नियति को तो देश के लिए कुछ और ही मंजूर था। राजीव गांधी की अचानक हुई हत्या के बाद कांग्रेस संकट में आ गई। ऐसे में पार्टी को संभालने के लिए नरसिम्हा राव को आगे किया गया।
आर्थिक कंगाली के कगार पर खड़ा था भारत
जब नरसिम्हा राव ने प्रधानमंत्री पद की शपथ ली, तब हालात बदतर थे। भारत के पास विदेशी सामान खरीदने के लिए पैसे नहीं बचे थे। देश का विदेशी मुद्रा भंडार केवल दो हफ्तों के लिए बचा था।
भारत को अपना सोना विदेशी बैंकों में गिरवी रखना पड़ा था। देश पूरी दुनिया के सामने डिफॉल्टर होने की कगार पर था। आम जनता महंगाई और बेरोजगारी से पूरी तरह त्रस्त हो चुकी थी।
ऐसे समय में देश को एक बहुत बड़े चमत्कार की जरूरत थी। नरसिम्हा राव ने इस बड़ी चुनौती को बहुत ही शांति से स्वीकार किया। उन्होंने तुरंत देश के सबसे बड़े अर्थशास्त्रियों से बात करना शुरू किया।
मनमोहन सिंह को टीम में शामिल करने का मास्टरस्ट्रोक
नरसिम्हा राव ने एक ऐसा फैसला लिया जिसने इतिहास बदल दिया। उन्होंने गैर-राजनीतिक पृष्ठभूमि के डॉ मनमोहन सिंह को अपना वित्त मंत्री बनाया। मनमोहन सिंह उस समय रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर थे।
राव ने डॉ. मनमोहन सिंह को काम करने की पूरी आजादी दी। उन्होंने कहा कि आप देश की अर्थव्यवस्था को बचाने के उपाय ढूंढिए। राजनीतिक दबाव को संभालने की जिम्मेदारी खुद नरसिम्हा राव ने अपने ऊपर ली।
दोनों नेताओं की इस जोड़ी ने मिलकर कमाल कर दिया। उन्होंने देश के पुराने और बंद पड़े आर्थिक ढर्रे को बदल दिया। यहीं से भारत में आर्थिक सुधारों के एक नए युग की शुरुआत हुई।
LPG की शुरुआत
साल 1991 में भारत सरकार ने नई आर्थिक नीति की घोषणा की। इसे हम एलपीजी (Liberalization, Privatization, and Globalization) मॉडल के नाम से भी जानते हैं। इसका मतलब था लिबरलाइजेशन, प्राइवेटाइजेशन और ग्लोबलाइजेशन।
सरकार ने व्यापार करने के कड़े और पुराने नियम हटा दिए। लाइसेंस राज को पूरी तरह से खत्म कर दिया गया। अब विदेशी कंपनियों के लिए भारत में व्यापार करना बहुत आसान हो गया।
निजी कंपनियों को देश के विकास में भागीदार बनाया गया। इस एक बड़े फैसले ने भारतीय बाजार के बंद दरवाजे खोल दिए। इससे देश में नौकरियों और नए बिजनेस के रास्ते खुल गए।
विदेश नीति में किया बहुत बड़ा सुधार
नरसिम्हा राव सिर्फ आर्थिक मामलों के ही उस्ताद नहीं थे। उन्होंने भारत की विदेश नीति को भी एक नई दिशा दी। उन्होंने 'लुक ईस्ट पॉलिसी' की शुरुआत की थी।
इस नीति के तहत भारत ने पूर्वी एशिया के देशों से रिश्ते सुधारे। उन्होंने व्यापार और कूटनीति में इन देशों को प्राथमिकता दी। इससे भारत की वैश्विक साख बहुत तेजी से मजबूत होने लगी।
उन्होंने इजराइल (PV Narasimha Rao decision of 1998)के साथ भी भारत के राजनयिक संबंध शुरू किए। उनके इस फैसले का असर आज भी देश की सुरक्षा में दिखता है। राव ने देश के दुश्मनों को हमेशा कड़ा जवाब दिया।
आधुनिक भारत के निर्माण में उनका योगदान
नरसिम्हा राव (PV Narasimha Rao) के पांच साल के कार्यकाल ने नए भारत की नींव रखी। आज हम जो चमकता हुआ भारत देख रहे हैं, उसकी शुरुआत वहीं से हुई थी। वे देश के पहले ऐसे Non-Gandhi कांग्रेसी पीएम थे जिन्होंने पांच साल का कार्यकाल पूरा किया।
उनके समय में देश ने आईटी सेक्टर में बहुत तरक्की की। मोबाइल और टेलीकॉम क्रांति का रास्ता भी उसी समय साफ हुआ था। वे हमेशा पर्दे के पीछे रहकर देश के लिए काम करते रहे।
आज पूरा देश उनके योगदान को बहुत सम्मान से याद करता है। सरकार ने उन्हें देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'भारत रत्न' से भी नवाजा है। यह सम्मान उनके महान कार्यों (1998 का पीवी नरसिम्हा राव फैसला)का सबसे बड़ा प्रमाण है।
Reference Links:
- प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) - पी. वी. नरसिम्हा राव की आधिकारिक जीवनी और कार्यकाल का विवरण
- भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) आर्काइव्स - साल 1991 के आर्थिक संकट और वित्तीय सुधारों पर आधिकारिक रिपोर्ट
- भारत का राष्ट्रीय पोर्टल (National Portal of India) - भारत रत्न पुरस्कार विजेताओं की सूची और उनका योगदान
- विदेश मंत्रालय (MEA) भारत सरकार - भारत की 'लुक ईस्ट पॉलिसी' और राव दौर के ऐतिहासिक कूटनीतिक दस्तावेज
26 जून की महत्वपूर्ण ऐतिहासिक घटनाएं
आज का इतिहास मेंहर दिन का अपना एक अलग महत्व होता है। 26 जून का दिन भी इतिहास (आज की यादगार घटनाएं) में कई महत्वपूर्ण घटनाओं के लिए दर्ज है। इस दिन दुनिया में कई ऐसी घटनाएं हुईं, जिन्होंने इतिहास की दिशा बदल दी।
आइए जानते हैं 26 जून (आज की तारीख का इतिहास) को भारत और विश्व में घटी कुछ प्रमुख घटनाओं के बारे में, जो आपके सामान्य ज्ञान को बढ़ा सकती हैं-
विश्व और भारत इतिहास की प्रमुख घटनाएं...
- 1945: अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को में आज ही के दिन ऐतिहासिक संयुक्त राष्ट्र (UN) घोषणा पत्र पर आधिकारिक हस्ताक्षर किए गए थे।
- 1991: पी. वी. नरसिम्हा राव ने बहुत ही कठिन राजनीतिक दौर में भारत के 9वें प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली थी।
- 1992: भारत ने अपने सीमा क्षेत्र का 'तीन बीघा गलियारा' पूरे 999 वर्षों के लिए पड़ोसी देश बांग्लादेश को पट्टे पर दिया था।
- 1999: अमेरिकी ऊर्जा विभाग के हथियार कार्यक्रम के प्रमुख अधिकारी विक्टर रीस ने अपने पद से अचानक इस्तीफा दे दिया था।
- 1999: हंगरी की खूबसूरत राजधानी बुडापेस्ट में आज ही के दिन विश्व विज्ञान सम्मेलन की औपचारिक शुरुआत की गई थी।
- 1999: अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति (IOC) ने अपने तत्कालीन अध्यक्ष जे.ए. समारांच को 'बेस्ट स्पोर्ट्स लीडर ऑफ द सेंचुरी अवार्ड' से सम्मानित किया था।
- 2000: अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट काउंसिल (ICC) ने एक बड़ा फैसला लेते हुए बांग्लादेश की टीम को टेस्ट क्रिकेट खेलने का दर्जा दिया था।
- 2004: पाकिस्तान के तत्कालीन प्रधानमंत्री मीर जाफ़रुल्लाह ख़ान जमाली ने अपने पद से इस्तीफा दिया और चौधरी शुजात हुसैन नए कार्यवाहक प्रधानमंत्री बने।
- 2008: बहुराष्ट्रीय कंपनी रियोरिटो ने मध्य प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र के छतरपुर जिले में हीरा खनन के लिए 'बंदर डायमंड प्रोजेक्ट' शुरू करने का ऐलान किया।
- 2008: देश की बड़ी बिजली परियोजनाओं के लिए विशेष उपकरण बनाने के मकसद से एनटीपीसी और भारत फोर्ज ने मिलकर एक नया संयुक्त उद्यम बनाया।
- 1838: भारत के प्रसिद्ध बंगाली उपन्यासकार और राष्ट्रगीत 'वंदे मातरम' के रचयिता बंकिमचंद्र चटर्जी का जन्म आज ही के दिन हुआ था।
- 1873: भारतीय शास्त्रीय संगीत की मशहूर गायिका और अपनी कला से दुनिया को मंत्रमुग्ध करने वाली नर्तकी गौहर जान का जन्म हुआ था।
- 1888: मराठी रंगमंच को एक नई ऊंचाई पर ले जाने वाले महान नायक और प्रसिद्ध गायक बाल गंधर्व का जन्म हुआ था।
- 1918: देश के सर्वोच्च सैन्य सम्मान परमवीर चक्र से सम्मानित होने वाले जांबाज भारतीय सैनिक सेकेंड लेफ्टिनेंट रामा राघोबा राणे का जन्म हुआ था।
- 1931: भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ राजनीतिज्ञ और लोकसभा के पूर्व उपाध्यक्ष एस. मल्लिकार्जुनैय्या का जन्म आज ही के दिन हुआ था।
- 1942: केंद्र सरकार में पूर्व रक्षा सचिव और राज्य सभा के पूर्व महासचिव के पद पर रहे प्रशासनिक अधिकारी योगेन्द्र नारायण का जन्म हुआ था।
- 1943: भारत के जाने-माने वैज्ञानिक, उत्कृष्ट शोधकर्ता और प्रसिद्ध रासायनिक वैज्ञानिक गोवर्धन मेहता का जन्म आज ही के दिन हुआ था।
- 1967: जैन धर्म के दिगंबर पंथ के बेहद प्रसिद्ध, अपनी कड़वी और सच्ची बातों के लिए मशहूर मुनि तरुण सागर का जन्म हुआ था।
- 1969: भारतीय जनता पार्टी के कद्दावर नेता और भारत सरकार में केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का जन्म आज ही के दिन हुआ था।
- 1992: भारतीय फील्ड हॉकी टीम के पूर्व कप्तान और देश को ओलंपिक पदक जिताने वाले बेहतरीन खिलाड़ी मनप्रीत सिंह का जन्म हुआ था।
- 1961: हिंदी साहित्य जगत के जाने-माने और प्रसिद्ध साहित्यकार गोविंद शास्त्री दुगवेकर का आज ही के दिन निधन हो गया था।
- 2001: देश के विख्यात समाज सेवक और भारतीय राष्ट्रीय ट्रेड यूनियन कांग्रेस (INTUC) के सह-संस्थापक गोपाल रामानुजम का निधन हुआ था।
- 2004: बॉलीवुड फिल्म इंडस्ट्री के बहुत ही लोकप्रिय, धर्मा प्रोडक्शंस के संस्थापक और प्रसिद्ध फिल्म निर्माता यश जौहर का निधन हुआ था।
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