World Environment Day: कभी 50 डिग्री पारा तो कभी बिन मौसम बरसात, कैसे संभलेगा भारत
World Environment Day:क्या आपने कभी सोचा है कि अचानक मौसम इतना क्यों बदल रहा है? कभी बहुत ज्यादा गर्मी पड़ती है तो कभी बिन मौसम बरसात होने लगती है। ये सब हमारी प्रकृति में आ रहे असंतुलन की वजह से हो रहा है।
इसी असंतुलन को रोकने के लिए हर साल विश्व पर्यावरण दिवस मनाया जाता है। पूरी दुनिया में लोग 5 जून को पर्यावरण के प्रति जागरूक होते हैं। इस दिन को मनाने की शुरुआत साल 1972 में हुई थी।
संयुक्त राष्ट्र संघ ने इस दिवस को मनाने का बड़ा फैसला लिया था। तब से लेकर आज तक हर साल लोग नए संकल्प लेते हैं। इसका एकमात्र लक्ष्य हमारी हरी-भरी धरती को सुरक्षित रखना है।
हमारी धरती को बचाने के लिए ये दिन क्यों जरूरी है
आज के समय में प्रदूषण बहुत तेजी से पैर पसार रहा है। बड़े शहरों में सांस लेना भी अब काफी मुश्किल होता जा रहा है। नदियों का पानी गंदा हो रहा है और जंगल कट रहे हैं।
अगर हम अब भी नहीं संभले तो आगे बहुत मुश्किल होगी। आने वाली पीढ़ी को साफ हवा और पानी मिलना मुश्किल हो जाएगा। इसलिए पर्यावरण दिवस हमें अपनी गलतियों को सुधारने का मौका देता है।
यह दिन हमें याद दिलाता है कि प्रकृति के बिना हमारा अस्तित्व नहीं है। हमें विकास के साथ-साथ पौधों की सुरक्षा भी करनी होगी। प्रकृति को बचाना अब किसी एक व्यक्ति की जिम्मेदारी नहीं है।
भारत के नजरिए से पर्यावरण का हाल
आज हमारे भारत में पर्यावरण का संकट बहुत ही गंभीर रूप ले चुका है। अगर हम उत्तर से दक्षिण तक देखें, तो क्लाइमेट चेंज का असर साफ नजर आता है।
देश की राजधानी दिल्ली और अन्य बड़े शहरों में एयर पॉल्यूशन के कारण स्मॉग की समस्या आम हो चुकी है, जिससे लोगों को सांस लेने में भारी दिक्कत होती है।
गर्मियों में उत्तर भारत का टेम्परेचर 48 से 50 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है, जो ग्लोबल वार्मिंग का सीधा संकेत है। वहीं, देश के कई राज्यों में वाटर क्राइसिस यानी पानी की भयंकर किल्लत देखने को मिलती है।
इससे हमारे किसान (climate change)की फसलें और आम जनता का जीवन बुरी तरह प्रभावित होता है। इस गंभीर स्थिति से निपटने के लिए भारत सरकार ने Mission LiFE (Lifestyle for Environment) जैसी बेहतरीन पहल की शुरुआत की है।
इस योजना का मुख्य उद्देश्य हर नागरिक को पर्यावरण के अनुकूल आदतें अपनाने के लिए प्रेरित करना है। इसके तहत देश में सिंगल-यूज प्लास्टिक को पूरी तरह बैन कर दिया गया है।
भारत अब रिन्यूएबल एनर्जी यानी सौर ऊर्जा और पवन ऊर्जा के क्षेत्र में दुनिया के बड़े देशों को टक्कर दे रहा है। सड़कों पर तेजी से बढ़ती इलेक्ट्रिक गाड़ियां कार्बन एमिशन को कम करने में बड़ी भूमिका निभा रही हैं।
हमे अपने स्तर पर क्या करना चाहिए
- Tree Plantation: अपने जन्मदिन या विशेष अवसरों पर कम से कम एक पौधा जरूर लगाएं और उसे बड़ा करने की जिम्मेदारी लें।
- Save Water: ब्रश करते समय या गाड़ी धोते समय पानी की बर्बादी रोकें। Rainwater Harvesting जैसी तकनीकों को अपने घरों में अपनाएं।
- No Plastic: बाजार जाते समय हमेशा कपड़े या जूट का थैला साथ रखें। प्लास्टिक की थैलियों का इस्तेमाल पूरी तरह बंद करें।
- Save Energy: कमरे से बाहर निकलते ही लाइट, पंखे और एसी के स्विच बंद करना न भूलें। हो सके तो घरों में एलईडी बल्ब का ही उपयोग करें।
जब देश का हर नागरिक अपनी लाइफस्टाइल में ये छोटे बदलाव करेगा, तभी हमारा भारत स्वच्छ और हरा-भरा बन पाएगा।
प्रदूषण कम करने के लिए क्या कर सकते हैं
अक्सर लोग सोचते हैं कि अकेले उनके बदलने से क्या होगा। लेकिन बूंद-बूंद से ही हमेशा बहुत बड़ा सागर बनता है। हम अपनी छोटी आदतों को बदलकर बड़ा बदलाव ला सकते हैं।
सबसे पहले हमें प्लास्टिक की थैलियों का इस्तेमाल पूरी तरह बंद करना होगा। जब भी बाजार जाएं तो हमेशा कपड़े का थैला साथ लेकर जाएं। घर से बाहर निकलते समय बिजली के सारे स्विच बंद कर दें।
जितना हो सके पानी की बर्बादी को रोकने का प्रयास करें। गाड़ी धोने के लिए पाइप की जगह बाल्टी का इस्तेमाल करें। आपके ये छोटे-छोटे प्रयास हमारी धरती को नया जीवन दे सकते हैं।
पेड़ लगाने से पर्यावरण को कैसे मिलता है नया जीवन
पेड़ हमारी धरती के सबसे बड़े और सच्चे रक्षक माने जाते हैं। ये हमें जीवन जीने के लिए जरूरी ऑक्सीजन मुफ्त में देते हैं। लेकिन आज कंक्रीट के जंगल बनाने के लिए इन्हें काटा जा रहा है।
हमें इस पर्यावरण दिवस पर कम से कम एक पौधा जरूर लगाना चाहिए। सिर्फ पौधा लगाना ही काफी नहीं है, उसकी देखभाल भी जरूरी है। जब तक वह बड़ा न हो जाए, उसमें नियमित पानी दें।
ज्यादा पेड़ होने से आसपास का तापमान हमेशा कम बना रहता है। पेड़ बादलों को आकर्षित करते हैं जिससे समय पर अच्छी बारिश होती है। इसलिए पेड़ लगाना सबसे उत्तम और जरूरी काम माना गया है।
जलवायु परिवर्तन का भारत पर क्या हो रहा असर
जलवायु परिवर्तन (Global warming) का सबसे ज्यादा असर हमारे देश पर देखने को मिल रहा है। गर्मियों के मौसम में तापमान रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच जाता है। सर्दियों के दिनों में भी अब पहले जैसी ठंड नहीं पड़ती।
ग्लोबल वार्मिंग के कारण पहाड़ों की बर्फ बहुत तेजी से पिघल रही है। इससे समुद्र का जलस्तर बढ़ रहा है और तटीय इलाकों पर खतरा है। बेमौसम बारिश से हमारे किसानों की फसलें बर्बाद हो जाती हैं।
यह स्थिति देश की अर्थव्यवस्था के लिए भी ठीक नहीं है। अनाज का उत्पादन कम होने से महंगाई बढ़ने का डर रहता है। इसलिए भारत अब इस संकट से निपटने के लिए तैयार हो रहा है।
भविष्य को बेहतर बनाने के मूल मंत्र
अगर हम अपनी धरती को सुंदर देखना चाहते हैं तो जागना होगा। हमें प्रकृति के साथ तालमेल बिठाकर ही आगे बढ़ना होगा। लालच को छोड़कर हमें सीमित संसाधनों का उपयोग करना सीखना होगा।
स्कूलों में बच्चों को बचपन से ही पर्यावरण की शिक्षा देनी चाहिए। बच्चे जब पौधों से प्यार करेंगे तो भविष्य अपने आप सुरक्षित होगा। आइए इस बार दिखावे की जगह सच में एक बदलाव लाएं।
अपने घर, मोहल्ले और शहर को साफ और हरा-भरा बनाएं। याद रखें कि स्वस्थ पर्यावरण ही एक खुशहाल जीवन का आधार है। आज का लिया गया एक संकल्प कल को बेहतर बनाएगा।
Reference Links:
- संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP):संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP)
- विश्व पर्यावरण दिवस ऑफिशियल पोर्टल:वर्ल्ड एनवायरनमेंट डे ऑफिशियल
- मिशन लाइफ (Mission LiFE) ऑफिशियल पोर्टल:मिशन लाइफ पोर्टल (MoEFCC)
- पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (भारत सरकार):MoEFCC
5 जून की महत्वपूर्ण ऐतिहासिक घटनाएं
आज का इतिहास मेंहर दिन का अपना एक अलग महत्व होता है। 05 जून का दिन भी इतिहास (आज की यादगार घटनाएं) में कई महत्वपूर्ण घटनाओं के लिए दर्ज है। इस दिन दुनिया में कई ऐसी घटनाएं हुईं, जिन्होंने इतिहास की दिशा बदल दी।
आइए जानते हैं 05 जून (आज की तारीख का इतिहास) को भारत और विश्व में घटी कुछ प्रमुख घटनाओं के बारे में, जो आपके सामान्य ज्ञान को बढ़ा सकती हैं- हिंदी भाषा सम्मान होल्कर साम्राज्य
विश्व और भारत इतिहास की प्रमुख घटनाएं...
- विश्व पर्यावरण दिवस: हर साल 5 जून को पूरी दुनिया में पर्यावरण सुरक्षा के लिए विश्व पर्यावरण दिवस मनाया जाता है।
- 1989 (ईरान): ईरान के प्रमुख धार्मिक नेता अयातुल्लाह रोहेल्लाह खुमैनी का आज ही के दिन देहांत हुआ था।
- 2001 (नेपाल): शाही हत्याकांड जांच आयोग के सदस्य माधवन के इस्तीफे से नेपाल राजपरिवार की जांच का काम रुक गया था।
- 2002 (भारत-पाक): भारत की तरफ से दिए गए सीमा पर साझा गश्त (Joint Patrolling) के प्रस्ताव को पाकिस्तान ने खारिज कर दिया था।
- 2005 (ताइवान): ताइवान देश ने अपनी पहली क्रूज मिसाइल का सफलतापूर्वक परीक्षण पूरा किया था।
- 2008 (यूपी पुलिस घोटाला): इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती घोटाले की जांच सीबीआई (CBI) से कराने का आदेश दिया था।
- 2008 (बैंकिंग): एलेन परेरा ने आज ही के दिन 'बैंक ऑफ महाराष्ट्र' के नए अध्यक्ष एवं प्रबन्ध निदेशक (CMD) का कार्यभार संभाला था।
- 2008 (अमेरिका): अमेरिका ने आर्थिक और व्यापारिक नीतियों को लेकर भारत और चीन को अपनी विशेष निगरानी सूची में डाल दिया था।
- 2017 (इसरो): भारत ने अंतरिक्ष विज्ञान में इतिहास रचते हुए अपने सबसे भारी रॉकेट 'जीएसएलवी मार्क-3 डी-1' का सफल प्रक्षेपण किया था।
- योगी आदित्यनाथ (1972): उत्तर प्रदेश के वर्तमान और 21वें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का जन्म आज ही के दिन हुआ था।
- रमेश कृष्णन (1961): भारत के जाने-माने पूर्व टेनिस खिलाड़ी और मशहूर टेनिस प्रशिक्षक (Coach) रमेश कृष्णन का जन्म आज हुआ था।
- प्रेम खंडु थंगुन (1946): भारतीय राजनीतिज्ञ और अरुणाचल प्रदेश के सबसे पहले मुख्यमंत्री प्रेम खंडु थंगुन का जन्म आज ही के दिन हुआ था।
- सुब्रमण्यम रामास्वामी (1939): पुदुचेरी (पांडिचेरी) के भूतपूर्व और चौथे मुख्यमंत्री सुब्रमण्यम रामास्वामी का जन्म आज के दिन हुआ था।
- गोविंद शंकर कुरुप (1901): देश के प्रतिष्ठित ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित, मलयाली भाषा के मशहूर साहित्यकार गोविंद शंकर कुरुप का जन्म आज हुआ था।
- सिकन्दर हयात ख़ान (1892): भारत की आजादी से पहले, ब्रिटिश काल के दौरान पंजाब राज्य के प्रधानमंत्री रहे सिकन्दर हयात ख़ान का जन्म आज हुआ था।
- एन. एम. जोशी (1879): भारत के इतिहास में 'ट्रेड यूनियन आंदोलन' की शुरुआत करने वाले जन्मदाता एन. एम. जोशी का जन्म आज ही के दिन हुआ था।
- वेद मारवाह (2020): दिल्ली पुलिस के पूर्व कमिश्नर और कुशल प्रशासक वेद मारवाह का आज ही के दिन निधन हुआ था।
- कुबेरनाथ राय (1996): हिंदी साहित्य की दुनिया में ललित निबंधों में अपना विशिष्ट योगदान देने वाले लेखक कुबेरनाथ राय का आज निधन हुआ था।
- मास्टर मदन (1942): भारत के बेहद प्रतिभाशाली, गजल और मधुर गीतों के मशहूर गायक मास्टर मदन का आज ही के दिन निधन हुआ था।
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