6 जून क इतिहास: आज ही के दिन छत्रपति बने थे वीर शिवाजी महाराज
भारतीय इतिहास में आज का दिन बेहद खास माना जाता है। आज ही के दिन एक महान योद्धा का आधिकारिक तौर पर राज्याभिषेक हुआ था। हम बात कर रहे हैं मराठा गौरव वीर छत्रपति शिवाजी महाराज की।
साल 1674 में आज ही के दिन उनका राज्याभिषेक किया गया था। इस घटना ने भारत के इतिहास को हमेशा के लिए बदल दिया था। इस दिन को हिंदू स्वराज की शुरुआत के रूप में देखा जाता है।
शिवाजी महाराज का जन्म एक बहुत ही साधारण परिवार में हुआ था। लेकिन अपनी बहादुरी के दम पर उन्होंने एक विशाल साम्राज्य खड़ा किया। उनके राज्याभिषेक की कहानी आज भी लोगों में नया जोश भर देती है।
शिवाजी महाराज का शुरुआती जीवन
वीर शिवाजी महाराज का जन्म 19 फरवरी 1630 को शिवनेरी किले में हुआ था। उनके पिता का नाम शाहजी भोंसले और माता का नाम जीजाबाई था। शिवाजी के मन में बचपन से ही देशभक्ति की भावना कूट-कूट कर भरी थी।
उनकी माता जीजाबाई ने उन्हें रामायण और महाभारत की कहानियां सुनाई थीं। इन कहानियों ने शिवाजी के चरित्र पर बहुत गहरा असर डाला था। बचपन से ही उन्होंने युद्ध कला और राजनीति की शिक्षा ली थी।
मात्र 16 साल की उम्र में उन्होंने तोरणा किले पर कब्जा कर लिया था। यह उनके सफल सैन्य जीवन की एक बहुत बड़ी शुरुआत थी। इसके बाद उन्होंने बीजापुर के सुल्तान को भारी शिकस्त दी थी।
उन्होंने मुगलों की विशाल सेना को भी कई बार धूल चटाई थी। शिवाजी महाराज की छापामार युद्ध नीति से बड़े-बड़े दुश्मन भी कांपते थे। उन्होंने अपनी छोटी सी सेना से मुगलों के नाक में दम कर दिया था।
रायगढ़ के किले में कैसे हुआ था राज्याभिषेक
साल 1674 तक शिवाजी महाराज ने कई बड़े किलों पर अपना अधिकार कर लिया था। उनकी ताकत को अब पूरी दुनिया स्वीकार करने लगी थी। लेकिन अभी तक उनका आधिकारिक रूप से राज्याभिषेक नहीं हुआ था।
बिना राज्याभिषेक के उन्हें कानूनी रूप से राजा नहीं माना जा रहा था। इसलिए शिवाजी महाराज ने अपना राज्याभिषेक कराने का एक बड़ा फैसला लिया। इसके लिए महाराष्ट्र के रायगढ़ किले को बहुत भव्य तरीके से सजाया गया।
राज्याभिषेक की रस्मों के लिए काशी के प्रसिद्ध विद्वान गागाभट्ट को बुलाया गया। गागाभट्ट उस समय के सबसे बड़े और ज्ञानी पंडित माने जाते थे। उन्होंने बहुत ही विधि-विधान से सभी पवित्र धार्मिक रस्में शुरू कीं।
यह समारोह कई दिनों तक पूरी भव्यता के साथ चलता रहा। देश के कोने-कोने से लाखों लोग इस ऐतिहासिक पल के गवाह बने थे। चारों तरफ बस शिवाजी महाराज के नाम की गूंज सुनाई दे रही थी।
गागाभट्ट ने कैसे किया था राजा का शुद्धिकरण
राज्याभिषेक से पहले शिवाजी महाराज का पवित्र शुद्धिकरण किया गया था। इसके लिए देश की पवित्र नदियों का जल रायगढ़ मंगाया गया था। गंगा, यमुना और सिंधु जैसी नदियों के जल से उन्हें स्नान कराया गया।
इस दौरान पंडित गागाभट्ट लगातार वेदों के मंत्रों का उच्चारण कर रहे थे। शिवाजी महाराज ने सोने के सिंहासन पर बैठने से पहले अपनी माता के पैर छुए। माता जीजाबाई की आंखों में खुशी के आंसू साफ दिखाई दे रहे थे।
इसके बाद शिवाजी महाराज को सोने और रत्नों से जड़ा मुकुट पहनाया गया। इसी भव्य समारोह में उन्हें आधिकारिक रूप से 'छत्रपति' की महान उपाधि दी गई। छत्रपति का अर्थ होता है जनता की रक्षा करने वाला राजा।
इस राज्याभिषेक के साथ ही एक नए युग की शुरुआत हो गई थी। मराठा साम्राज्य अब एक स्वतंत्र और संप्रभु राज्य बन चुका था। शिवाजी ने अपने नाम का एक नया सिक्का भी जारी किया था।
शिवाजी महाराज की नीतियां क्या थीं
Chhatrapati Shivaji Maharaj: छत्रपति शिवाजी महाराज सिर्फ एक महान योद्धा ही नहीं थे। वे एक बहुत ही दयालु और दूरदर्शी शासक भी थे। उन्होंने अपनी जनता की भलाई के लिए कई ऐतिहासिक काम किए थे।
उन्होंने अपने दरबार में अष्टप्रधान मंडल नाम की एक कैबिनेट बनाई थी। इस कैबिनेट में आठ मंत्रियों को अलग-अलग जरूरी जिम्मेदारियां दी गई थीं। इससे राज्य का कामकाज बहुत ही सुचारू रूप से चलता था।
शिवाजी महाराज ने महिलाओं की सुरक्षा के लिए बहुत कड़े नियम बनाए थे। युद्ध के दौरान भी महिलाओं और बच्चों को नुकसान पहुंचाना मना था। उनके राज्य में महिलाओं को बहुत ही उच्च सम्मान दिया जाता था।
उन्होंने किसानों (शिवाजी का राज्याभिषेक) के हित में टैक्स की व्यवस्था को बहुत सरल बनाया था। किसानों से उनकी क्षमता के हिसाब से ही लगान लिया जाता था। इस वजह से जनता अपनी जान से ज्यादा राजा को प्यार करती थी।
भारतीय नौसेना के जनक शिवाजी महाराज
बहुत कम लोग जानते हैं कि शिवाजी महाराज ने समुद्र की ताकत को समझा था। वे जानते थे कि विदेशी आक्रमणकारी समुद्री रास्ते से भारत आ सकते हैं। इसलिए उन्होंने एक बहुत ही मजबूत नौसेना का निर्माण किया।
उन्होंने समुद्र के किनारे कई अभेद्य जलदुर्गों का निर्माण करवाया था। विजयदुर्ग और सिंधुदुर्ग जैसे किले उनकी अद्भुत सूझबूझ का जीवंत उदाहरण हैं। इन किलों की मदद से उन्होंने समुद्री व्यापार को पूरी तरह सुरक्षित किया।
विदेशी दुश्मनों को रोकने में इस नौसेना ने बहुत बड़ी भूमिका निभाई थी। यही वजह है कि उन्हें भारतीय नौसेना का जनक माना जाता है। उनकी यह दूरदर्शी सोच आज भी आधुनिक सेना को प्रेरित करती है।
छत्रपति शिवाजी महाराज से जुड़ी कुछ बातें
- राज्याभिषेक के लिए दो बार हुई थीं रस्में
इतिहास के पन्नों के मुताबिक, यह बात बहुत ही हैरान करने वाली है कि शिवाजी महाराज का राज्याभिषेक एक नहीं, बल्कि दो बार हुआ था। पहला राज्याभिषेक 6 जून 1674 को वैदिक रीति-रिवाज से पंडित गागाभट्ट ने कराया था। लेकिन इसके कुछ ही दिनों बाद शिवाजी महाराज की माता जीजाबाई का निधन हो गया और कुछ अन्य अपशकुन हुए। इसके बाद तांत्रिक विधि के जानकार निश्चल पुरी गोसाईं के मार्गदर्शन में 24 सितंबर 1674 को दूसरी बार उनका राज्याभिषेक कराया गया। - सोने का विशाल और भारी सिंहासन
राज्याभिषेक के लिए रायगढ़ के किले में जो मुख्य सिंहासन तैयार किया गया था, वह बहुत ही भव्य था। इतिहास के पन्नों के मुताबिक, इस सिंहासन को बनाने में लगभग 32 मन सोना (करीब 12 सौ किलोग्राम से अधिक) और बेशकीमती हीरे-जवाहरात इस्तेमाल हुए थे। इसके चारों कोनों पर बहुत ही सुंदर नक्काशीदार स्तंभ बने थे। - शिवराई और होन सिक्कों की शुरुआत
छत्रपति बनने के बाद शिवाजी महाराज ने मुगलों और सुल्तानों के सिक्कों को टक्कर देने के लिए अपने राज्य की स्वतंत्र मुद्रा जारी की थी। उन्होंने सोने के सिक्के चलाए जिन्हें 'होन' कहा जाता था और तांबे के सिक्के जारी किए जिन्हें 'शिवराई' कहा जाता था। इन सिक्कों पर देवनागरी लिपि में श्री राजा शिव छत्रपति अंकित था। - गुरिल्ला युद्ध (गनिमी कावा) के उस्ताद
शिवाजी महाराज को भारत में गुरिल्ला युद्ध यानी छापामार युद्ध नीति का जनक माना जाता है। मराठा इतिहास में इसे 'गनिमी कावा' कहा जाता था। वे अपनी छोटी सी सेना के साथ अचानक पहाड़ों और जंगलों से निकलकर मुगलों की विशाल सेना पर हमला करते थे और पलक झपकते ही गायब हो जाते थे। उनकी इस कला का जवाब मुगलों के पास भी नहीं था। - धर्मनिरपेक्ष और कुशल शासक
भले ही शिवाजी महाराज ने 'हिंदू स्वराज' की स्थापना की थी, लेकिन वे सभी धर्मों का बेहद सम्मान करते थे। उनकी सेना और अंगरक्षकों में कई भरोसेमंद मुस्लिम अधिकारी शामिल थे। जैसे उनके तोपखाने के प्रमुख इब्राहिम खान थे और उनके नौसेना के कमांडर सिद्दी हिलाल थे। उनके राज्य में किसी भी मस्जिद या पवित्र ग्रंथ को नुकसान पहुंचाने की सख्त मनाही थी। - दुनिया का पहला इंजीनियर किंग
शिवाजी महाराज को उनके अभूतपूर्व निर्माण कार्यों के कारण इंजीनियर किंग भी कहा जा सकता है। उन्होंने अपने जीवनकाल में लगभग 300 से अधिक किलों का जीर्णोद्धार कराया और नए किले बनवाए। पहाड़ी किलों की वास्तुकला ऐसी थी कि दुश्मन के लिए उन पर चढ़ाई करना नामुमकिन जैसा था।
छत्रपति शिवाजी महाराज का संदेश
छत्रपति शिवाजी महाराज का जीवन हमें साहस और स्वाभिमान की सीख देता है। उन्होंने सिखाया कि साधन कम होने पर भी हौसले से जीत हासिल की जा सकती है। उनकी नीतियां आज के लोकतंत्र के लिए भी बहुत जरूरी हैं।
वे हमेशा सर्वधर्म समभाव की भावना में अटूट विश्वास रखते थे। उनके दरबार और सेना में कई मुस्लिम अधिकारी भी उच्च पदों पर तैनात थे। उन्होंने कभी भी धर्म के आधार पर किसी से कोई भेदभाव नहीं किया।
उनका पूरा जीवन मातृभूमि की रक्षा के लिए पूरी तरह समर्पित रहा। 3 अप्रैल 1680 को रायगढ़ किले में इस महान नायक ने अंतिम सांस ली थी। लेकिन उनके विचार और आदर्श आज भी हर भारतीय के दिल में जिंदा हैं।
Reference Links:
- मराठा इतिहास: maratha-empire-history-archives
- रायगढ़ किला गाइड: raigad-fort-tourism-guide
- भारतीय नौसेना का इतिहास: indian-navy-history-shivaji
- छत्रपति शिवाजी महाराज जीवन परिचय: chhatrapati-shivaji-maharaj-biography
6 जून की महत्वपूर्ण ऐतिहासिक घटनाएं
आज का इतिहास मेंहर दिन का अपना एक अलग महत्व होता है। 06 जून का दिन भी इतिहास (आज की यादगार घटनाएं) में कई महत्वपूर्ण घटनाओं के लिए दर्ज है। इस दिन दुनिया में कई ऐसी घटनाएं हुईं, जिन्होंने इतिहास की दिशा बदल दी।
आइए जानते हैं 06 जून (आज की तारीख का इतिहास) को भारत और विश्व में घटी कुछ प्रमुख घटनाओं के बारे में, जो आपके सामान्य ज्ञान को बढ़ा सकती हैं- हिंदी भाषा सम्मान होल्कर साम्राज्य
विश्व और भारत इतिहास की प्रमुख घटनाएं...
- 1674: रायगढ़ के किले में वीर शिवाजी महाराज का विधिवत राज्याभिषेक हुआ और उन्हें 'छत्रपति' की महान उपाधि दी गई।
- 1995: पाकिस्तान में बाल अपराधियों को कोड़े मारने अथवा उनकी फ़ांसी की सज़ा पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाया गया।
- 1997: बैंकॉक में भारत, बांग्लादेश, श्रीलंका और थाईलैंड ने मिलकर 'बिस्टेक' नामक आर्थिक सहयोग समूह का गठन किया।
- 2001: नेपाल राजघराने के प्रत्यक्षदर्शी रिश्तेदार राजीव शाही ने प्रेस में बयान दिया कि शाही परिवार पर गोलियाँ दीपेन्द्र ने ही चलाई थीं।
- 2002: इस्रायली सेना ने रामल्ला में फ़िलिस्तीनी नेता यासिर अराफात के मुख्य मुख्यालय पर एक बड़ा हमला किया।
- 2004: अमेरिका के भूतपूर्व और बेहद लोकप्रिय राष्ट्रपति रोनाल्ड रीगन का लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया।
- 2005: बहुप्रतीक्षित ऐतिहासिक ईरान-पाकिस्तान-भारत गैस पाइप लाइन योजना पर भारत और पाकिस्तान के बीच सहमति बनी।
- 2008: कर्नाटक में बी. एस. येदयुरप्पा की अगुवाई वाली बीजेपी की पहली सरकार ने विधानसभा में विश्वास मत हासिल किया।
- 2008: अंतर्राष्ट्रीय स्पेस स्टेशन (ISS) में जापानी स्पेस लैब 'कीबो' ने आधिकारिक तौर पर कार्य करना शुरू किया।
- 1748: पटियाला रियासत के महान और प्रतापी महाराजा अमर सिंह का जन्म आज ही के दिन हुआ था।
- 1699: भारत के 16वें मुग़ल बादशाह आलमगीर द्वितीय का जन्म हुआ था, जिन्होंने 1754 से 1759 ई. तक राज्य किया।
- 1829: भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना में मुख्य भूमिका निभाने वाले अवकाश प्राप्त अंग्रेज़ अधिकारी ए. ओ. ह्यूम का जन्म हुआ था।
- 1879: भारत की आज़ादी के लिये अपना जीवन समर्पित करने वाले महान क्रान्तिकारी उपेन्द्रनाथ बंधोपाध्याय का जन्म हुआ था।
- 1881: हिंदी भाषा और साहित्य के प्रसिद्ध व मूर्धन्य साहित्यकार गिरिधर शर्मा नवरत्न का जन्म हुआ था।
- 1884: उर्दू अदब की दुनिया के बेहद मशहूर और प्रसिद्ध शायर शौक़ बहराइची का जन्म हुआ था।
- 1891: 'कन्नड कहानी के प्रवर्तक' के रूप में विख्यात महान कवि और उपन्यासकार मास्ति वेंकटेश अय्यंगार का जन्म हुआ था।
- 1901: स्वतंत्रता सेनानी और इण्डोनेशिया के प्रथम राष्ट्रपति सुकर्णो का जन्म आज ही के दिन हुआ था।
- 1902: भारत की संविधान सभा की महत्वपूर्ण महिला सदस्य एनी मसकैरिनी का जन्म हुआ था।
- 1919: हिन्दी सिनेमा जगत के एक बेहद प्रसिद्ध और सदाबहार गीतकार राजेन्द्र कृष्ण का जन्म हुआ था।
- 1924: भारतीय राजनीति के दिग्गज और जनता पार्टी के वरिष्ठ राजनीतिज्ञ एस. आर. बोम्मई का जन्म हुआ था।
- 1930: हिन्दी फ़िल्म जगत के दिग्गज और बेहद लोकप्रिय अभिनेता सुनील दत्त का जन्म आज ही के दिन हुआ था।
- 1936: भारतीय सिनेमा के इतिहास में बड़ा नाम रखने वाले प्रसिद्ध फ़िल्म निर्माता डी. रामानायडू का जन्म हुआ था।
- 1939: भारत का नाम दुनिया भर में रोशन करने वाले प्रसिद्ध एथलीट गुरबचन सिंह रंधावा का जन्म हुआ था।
- 1945: भारतीय राज्य नागालैंड के बेहद वरिष्ठ और सम्मानित पत्रकार टी. सेनका आव का जन्म हुआ था।
- 1946: बिहार की राजनीति में बहुत ख़ासा और मजबूत प्रभाव रखने वाले राजनीतिज्ञ रघुवंश प्रसाद सिंह का जन्म हुआ था।
- 1955: हिन्दी साहित्य जगत के बेहद लोकप्रिय और प्रसिद्ध रहस्यमयी उपन्यासकार वेद प्रकाश शर्मा का जन्म हुआ था।
- 1957: लोक जनशक्ति पार्टी के वरिष्ठ नेता और भारतीय राजनीतिज्ञ पशुपति कुमार पारस का जन्म हुआ था।
- 1968: दिल्ली के सातवें मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल का जन्म हुआ था।
- 1957: दर्शनशास्त्र के प्रसिद्ध विद्वान और इलाहाबाद विश्वविद्यालय में दर्शन विभाग के पूर्व अध्यक्ष रामचंद्र दत्तात्रेय रानाडे का निधन हुआ।
- 1967: भारत के प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्त्ता और राजनेता कैप्टन अवधेश प्रताप सिंह का निधन आज ही के दिन हुआ था।
- 1982: कर्नाटक के 8वें मुख्यमंत्री और दिग्गज राजनेता डी. देवराज अर्स का निधन हुआ था।
- 1982: भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के वरिष्ठ राजनीतिज्ञ और पुडुचेरी के पूर्व मुख्यमंत्री वी. वेंकटसुब्बा रेड्डीयर का निधन हुआ था।
- 1986: प्रसिद्ध कन्नड़ कहानीकार, उपन्यासकार और ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित साहित्यकार मास्ति वेंकटेश अय्यंगार का निधन हुआ था।
- 2020: हिंदी और बंगाली सिनेमा के जाने-माने, बेहद सादगी पसंद पटकथा लेखक और फिल्म निर्देशक बासु चटर्जी का निधन हुआ था।
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