7 मई का इतिहास: पढ़ें एशिया के पहले नोबेल पुरस्कार विजेता महानायक रबींद्रनाथ टैगोर की कहानी

Kaushiki | May 07, 2026, 08:00 IST
rabindranath-tagore
रबींद्रनाथ टैगोर एशिया के पहले नोबेल पुरस्कार विजेता थे। उन्होंने भारत और बांग्लादेश का राष्ट्रगान लिखा। वे शिक्षा और साहित्य के क्षेत्र में एक महान हस्ती थे।

आज के दिन की कहानी: कलकत्ता के जोड़ासांको हवेली में एक बहुत ही अद्भुत बालक का जन्म हुआ। तारीख थी 7 मई 1861 और परिवार था प्रसिद्ध ठाकुर परिवार। पिता देवेंद्रनाथ और माता शारदा देवी ने नाम रखा रबींद्रनाथ। उन्हें प्यार से सभी लोग रबी कहकर पुकारते थे। रबी का मन चारदीवारी के अंदर वाली पढ़ाई में बिल्कुल नहीं लगा।



वे अक्सर खिड़की से बाहर की प्रकृति को निहारते रहते थे। उन्हें खुले आसमान और पेड़ों से बहुत ही ज्यादा लगाव था। इसी लगाव ने उन्हें भविष्य का महान 'विश्वकवि' बना दिया। छोटी उम्र से ही उन्होंने कविताएं और कहानियां लिखना शुरू किया।



रवींद्रनाथ टैगोर के राष्ट्र निर्माण में 5 महत्वपूर्ण योगदान -


रवींद्रनाथ टैगोर का बचपन

रवींद्रनाथ टैगोर (1861-1941) भारत के एक महान कवि, लेखक और दार्शनिक थे। उन्हें दुनिया गुरुदेव के नाम से भी जानती है। टैगोर का बचपन सामान्य बच्चों से काफी अलग था; वे एक खुले विचार वाले बालक थे जिन्हें चार-दीवारी के अंदर रहकर स्कूल की पढ़ाई करना बिलकुल पसंद नहीं था। उन्हें लगता था कि स्कूल एक जेल की तरह है जहां बच्चों की रचनात्मकता दब जाती है।



Rabindranath Tagore ancestral house attack Bangladesh muhammad yunus govt reaction came after India


रवींद्रनाथ टैगोर की शिक्षा

उनकी प्रारंभिक शिक्षा मुख्य रूप से घर पर ही हुई। यहां उन्हें गणित, इतिहास, भूगोल और साहित्य पढ़ाने के लिए निजी शिक्षक आते थे। उनके पिता देवेंद्रनाथ टैगोर ने उन्हें प्रकृति से जुड़ने और शारीरिक व्यायाम के लिए भी प्रोत्साहित किया।



उच्च शिक्षा के लिए वे 1878 में इंग्लैंड गए और यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन में कानून की पढ़ाई शुरू की। लेकिन साहित्य में गहरी रुचि होने के कारण उन्होंने बिना डिग्री लिए ही भारत लौटने का फैसला किया।



उन्होंने अपनी शिक्षा किताबों से ज्यादा प्रकृति और अनुभवों से प्राप्त की। इसके कारण आगे चलकर उन्होंने शांतिनिकेतन जैसे खुले विद्यालय की स्थापना की। उन्हें उनकी प्रसिद्ध कृति गीतांजलि के लिए 1913 में साहित्य का नोबेल पुरस्कार मिला।



रवींद्रनाथ टैगोर ने 3 देशों को दिया राष्ट्रगान! 8 साल की उम्र में लिख डाली पहली कविता, 16 के हुए तो


नोबेल पुरस्कार का गौरव

रबींद्रनाथ टैगोर की लेखनी में एक बहुत ही ज्यादा ताकत थी। उन्होंने बंगाली साहित्य को पूरी दुनिया के सामने लाकर खड़ा किया। उनकी सबसे प्रसिद्ध कृति का नाम गीतांजलि है। इसी किताब के लिए उन्हें 1913 में नोबेल पुरस्कार मिला।



वे यह सम्मान पाने वाले एशिया के पहले व्यक्ति बने। उनकी कविताओं में ईश्वर, प्रकृति और मानवता का मेल दिखता है। टैगोर ने हजारों गीत लिखे जिन्हें रबींद्र संगीत कहा जाता है। दुनिया में वे इकलौते कवि हैं जिनके गीत दो देशों के राष्ट्रगान बने।



भारत का जन गण मन और बांग्लादेश का आमार सोनार बांग्ला। उन्होंने समाज में फैली बुराइयों के खिलाफ हमेशा आवाज उठाई। गुरुदेव की कलम से कई अमर रचनाएं निकली हैं। उनकी रचनाएं आज भी पाठकों को प्रेरणा देती रहती हैं।



  • गीतांजलि (Gitanjali): यह भक्ति और मानवता की कविताओं का महान संग्रह है। इसी किताब के लिए टैगोर को नोबेल पुरस्कार मिला था।
  • गोरा (Gora): यह उनकी सबसे प्रसिद्ध और बड़ी दार्शनिक उपन्यास है। इसमें धर्म और राजनीति पर बहुत गहरी चर्चा की गई है।
  • काबुलीवाला (Kabuliwala): यह एक छोटी बच्ची और एक व्यापारी की कहानी है। यह पिता और पुत्री के प्रेम की भावुक दास्तां है।
  • चोखेर बाली (Chokher Bali): यह मानवीय संबंधों और जटिल भावनाओं की जटिल कहानी है। यह आधुनिक बंगाली साहित्य की एक बहुत बड़ी उपलब्धि है।
जन गण मन: रवींद्रनाथ टैगोर का एकता, इतिहास और विरासत का राष्ट्रगान


महात्मा और गुरुदेव का रिश्ता

रबींद्रनाथ टैगोर का भारतीय देशभक्तों के साथ बहुत गहरा (रवींद्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय) नाता था। महात्मा गांधी और टैगोर एक-दूसरे का बहुत सम्मान करते थे। टैगोर ने ही गांधी जी को 'महात्मा' की उपाधि दी थी। बदले में गांधी जी उन्हें 'गुरुदेव' कहकर पुकारते थे।



हालांकि दोनों के विचारों में कई बार थोड़े मतभेद होते थे। लेकिन दोनों का लक्ष्य भारत की आजादी और शिक्षा ही था। टैगोर चरखा चलाने के बजाय मानसिक आजादी पर जोर देते थे। उनकी दोस्ती भारतीय इतिहास के सबसे सुंदर अध्यायों में से एक है।



रवींद्रनाथ टैगोर ने 3 देशों को दिया राष्ट्रगान! 8 साल की उम्र में लिख डाली पहली कविता, 16 के हुए तो


आजादी की लड़ाई में साथ

टैगोर का नाता नेताजी सुभाष चंद्र बोस से भी रहा। जब नेताजी कांग्रेस के अध्यक्ष बने तो टैगोर बहुत खुश थे। उन्होंने नेताजी को 'देशनायक' की उपाधि देकर सम्मानित किया था। टैगोर चाहते थे कि युवा भारत अपनी संस्कृति को पहचाने।



उन्होंने हमेशा अन्याय के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद रखी। जलियांवाला बाग हत्याकांड के बाद टैगोर का दिल दहल गया था। विरोध स्वरूप उन्होंने अंग्रेजों की 'नाइटहुड' उपाधि वापस कर दी। उन्होंने साबित किया कि कलम तलवार से भी ज्यादा ताकतवर है।



जन-मन के अध्येता रबींद्रनाथ ठाकुर - दुधवा लाइव


शांतिनिकेतन: शिक्षा का एक नया मंदिर

टैगोर ने शिक्षा के क्षेत्र में भी क्रांतिकारी बदलाव किए। उन्होंने पश्चिम बंगाल के बोलपुर में शांतिनिकेतन की स्थापना की। यहां बच्चे पेड़ों के नीचे बैठकर पढ़ाई करते थे। वे चाहते थे कि शिक्षा बोझ नहीं बल्कि खुशी बने।



शांतिनिकेतन बाद में 'विश्व भारती' विश्वविद्यालय के रूप में उभरा। यहां कला, संगीत और साहित्य की शिक्षा पर जोर दिया गया। टैगोर का मानना था कि सच्ची शिक्षा प्रकृति के करीब मिलती है। आज भी शांतिनिकेतन टैगोर के सपनों को जिंदा रखे हुए है।



Rabindranath Tagore Jayanti 2022: भारत का ही नहीं इस देश का राष्ट्रगान भी रवींद्रनाथ टैगोर ने ही लि


70 की उम्र में चित्रकारी

रबींद्रनाथ टैगोर सिर्फ लिखने तक ही सीमित नहीं रहे। उन्होंने 60 साल की उम्र के बाद चित्रकारी सीखी। उनके चित्र आधुनिक कला का एक बहुत बेहतरीन नमूना हैं। उन्होंने अपनी लेखनी से समाज की कुरीतियों पर प्रहार किया। टैगोर ने शांति और मानवता का संदेश पूरी दुनिया को दिया।



वे मानते थे कि पूरा विश्व ही एक परिवार है। 7 अगस्त 1941 को यह महान हस्ती हमेशा के लिए सो गई। लेकिन उनके गीत और विचार आज भी हमें राह दिखाते हैं।



रबींद्र संगीत आज भी बंगाल की संस्कृति का आधार है। उन्होंने भारतीय कला को एक नई और आधुनिक दिशा दी। उनका जीवन कला और ज्ञान का एक अनंत सागर था।



Reference Links:

7 मई की महत्वपूर्ण ऐतिहासिक घटनाएं

आज का इतिहास मेंहर दिन का अपना एक अलग महत्व होता है। 7 मई का दिन भी इतिहास (आज की यादगार घटनाएं) में कई महत्वपूर्ण घटनाओं के लिए दर्ज है। इस दिन दुनिया में कई ऐसी घटनाएं हुईं, जिन्होंने इतिहास की दिशा बदल दी।



आइए जानते हैं 7 मई (आज की तारीख का इतिहास) को भारत और विश्व में घटी कुछ प्रमुख घटनाओं के बारे में, जो आपके सामान्य ज्ञान को बढ़ा सकती हैं-



विश्व इतिहास की प्रमुख घटनाएं...

  • 351: सीरियाई यहूदियों ने पूर्वी रोमन साम्राज्य के सीज़र कॉन्स्टेंटियस गैलस के विरुद्ध विद्रोह किया।
  • 1663: लंदन में ड्रूरी लेन स्थित 'रॉयल' नाम का दुनिया का पहला थियेटर खुला।
  • 1697: स्टॉकहोम का शाही महल एक भीषण आग में पूरी तरह नष्ट हो गया।
  • 1727: रूस की महारानी कैथरीन प्रथम ने यूक्रेन से यहूदियों को निष्कासित करने का आदेश दिया।
  • 1748: ऑस्ट्रियाई उत्तराधिकार युद्ध के दौरान फ्रांसीसी सैनिकों ने मास्ट्रिच पर कब्जा किया।
  • 1763: ओटावा जनजाति के प्रमुख पोंटियाक ने फोर्ट डेट्रॉइट पर हमला कर 'पोंटियाक युद्ध' की शुरुआत की।
  • 1771: शमूएल हर्न ने कनाडा की प्रसिद्ध कॉपर मीन नदी की खोज की।
  • 1775: तुर्की राज्य बुकोविना आधिकारिक तौर पर ऑस्ट्रिया से अलग हुआ।
  • 1785: जॉन प्येर और जॉन जैफ़्रिज ने पहली बार गुब्बारे में बैठकर इंग्लिश चैनल पार किया।
  • 1794: फ्रांसीसी क्रांति के दौरान मैक्सिमिलियन रोबेस्पिएरे ने 'सुप्रीम की पंथ' (Cult of the Supreme Being) की स्थापना की।
  • 1824: लुडविग वान बीथोवेन की प्रसिद्ध 'सिम्फनी नंबर 9' का वियना में पहली बार प्रीमियर हुआ।
  • 1832: लंदन की संधि के तहत ग्रीस (यूनान) को एक स्वतंत्र राज्य घोषित किया गया।
  • 1864: दुनिया का सबसे पुराना जीवित क्लिपर जहाज 'सिटी ऑफ एडेलदेवास' इंग्लैंड में लॉन्च हुआ।
  • 1875: जापान और रूस के बीच ऐतिहासिक सेंट पीटर्सबर्ग की संधि पर हस्ताक्षर किए गए।
  • 1895: अलेक्जेंडर पोपोव ने अपना रेडियो रिसीवर (लाइटनिंग डिटेक्टर) रूसी भौतिक समाज के सामने पेश किया।
  • 1920: सोवियत रूस ने मॉस्को की संधि के तहत जॉर्जिया की स्वतंत्रता को मान्यता दी।
  • 1920: पोलिश-सोवियत युद्ध के दौरान पोलिश सैनिकों ने कीव शहर पर कब्जा कर लिया।
  • 1934: फिलीपींस के तट पर 'पर्ल ऑफ लाओ त्ज़ू' मिला, जिसे दुनिया का सबसे बड़ा मोती माना जाता है।
  • 1940: ब्रिटिश संसद में नेतृत्व संकट पर बहस शुरू हुई, जिसके बाद विंस्टन चर्चिल प्रधानमंत्री बने।
  • 1946: मासारू इबुका और एकियो मोरीटा ने 'सोनी' कंपनी की नींव (टोक्यो टेलीकॉम इंजीनियरिंग कॉर्पोरेशन के रूप में) रखी।
  • 1952: जेफ्री डम्मर ने पहली बार वाशिंगटन में 'एकीकृत सर्किट' (IC) का विचार सार्वजनिक रूप से प्रस्तुत किया।
  • 1960: सोवियत नेता निकिता ख्रुश्चेव ने अमेरिकी जासूस पायलट फ्रांसिस गैरी पॉवर्स को पकड़ने की घोषणा की।
  • 1964: पैसिफिक एयर लाइंस की फ्लाइट 773 कैलिफोर्निया में दुर्घटनाग्रस्त हुई, जिसमें 44 लोग मारे गए।
  • 1976: एलेक्जेंडर ग्राहम बेल को उनके क्रांतिकारी आविष्कार 'टेलीफोन' का पेटेंट मिला।
  • 1986: पैट्रिक मॉरो विश्व की सात सबसे ऊंची चोटियों (Seven Summits) पर चढ़ने वाले पहले व्यक्ति बने।
  • 1998: ऑटोमोबाइल दिग्गज डेमलर-बेंज और क्रिसलर कॉर्पोरेशन का विलय होकर 'डेमलर क्रिसलर' बना।
  • 2002: चीन नॉर्दर्न एयरलाइंस का विमान पीले समुद्र में दुर्घटनाग्रस्त हुआ, जिसमें 112 लोगों की मौत हुई।
  • 2007: इजरायली पुरातत्वविदों ने 'हेरोद द ग्रेट' के प्रथम शताब्दी ईसा पूर्व के मकबरे की खोज की।
  • 2008: दिमित्री मेदवेदेव ने रूस के तीसरे राष्ट्रपति के रूप में शपथ ली।
  • 2010: चिली आधिकारिक तौर पर आर्थिक सहयोग और विकास संगठन (OECD) का 31वां सदस्य बना।
  • 2010: वैज्ञानिकों ने निएंडरथल जीनोम का मसौदा पेश कर इंसानों के निएंडरथल पूर्वज होने के प्रमाण दिए।

भारत के इतिहास की प्रमुख घटनाएं...

  • 1861: महान भारतीय कवि, लेखक और दार्शनिक रबींद्रनाथ टैगोर का कलकत्ता में जन्म हुआ।
  • 1913: रबींद्रनाथ टैगोर अपनी काव्य रचना 'गीतांजलि' के लिए साहित्य का नोबेल पुरस्कार जीतने वाले पहले एशियाई बने।

आज का इतिहास से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें...

12 जनवरी का इतिहास: National Youth Day, जानें विवेकानंद का भारतीय दर्शन



11 जनवरी का इतिहास: ताशकंद में क्या हुआ था, पढ़ें शास्त्री जी के निधन की कहानी



आज का इतिहास: सरदार वल्लभ भाई पटेल की जयंती पर जानें उनके वल्लभ से सरदार बनने तक का सफर



आज का इतिहास: कैसे खड़ी हुई थी दुनिया की सबसे बड़ी आजादी की मशाल Statue of Liberty



Tags:
  • Rabindranath Tagore
  • रवींद्रनाथ टैगोर
  • आज का इतिहास
  • कलकत्ता
  • राष्ट्रगान
  • नोबेल पुरस्कार
  • आज की तारीख का इतिहास
  • आज की यादगार घटनाएं
  • आज के दिन की कहानी
  • रवींद्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय