18 मार्च का इतिहास: बलबीर राज कपूर कैसे बनें बॉलीवुड के शशि, जानें पूरी कहानी
आज के दिन की कहानी: बॉलीवुड के सबसे हैंडसम और चार्मिंग हीरो की बात हो तो शशि कपूर का नाम सबसे पहले आता है। उनकी डिंपल वाली मुस्कान पर लाखों लड़कियां फिदा थीं।
शशि कपूर का जन्म 18 मार्च 1938 को कोलकाता में हुआ। ये वो समय था, जब भारतीय सिनेमा अपनी पहचान बना रहा था। माता-पिता ने बड़े प्यार से उनका नाम बलबीर राज कपूर रखा था। घर के लोग उन्हें प्यार से शशि कहकर पुकारते थे। वे बचपन से ही थिएटर की दुनिया में रमे हुए थे।
शशि कपूर ने कभी अपने बड़े भाइयों के नाम का फायदा नहीं उठाया। उन्होंने पर्दे के पीछे से अपनी मेहनत से नई पहचान बनाई। बलबीर राज से शशि बनने का उनका सफर बहुत ही शानदार रहा है।
शशि कपूर ने बाल कलाकार के रूप में अपनी क्यूटनेस से सबका दिल जीता। वह भारत के पहले ग्लोबल स्टार बनकर विदेशों में भी चमके। उनका 'मेरे पास मां है' डायलॉग आज भी गूंजता है।
थिएटर से शुरू हुआ एक्टिंग का सफर
शशि कपूर का बचपन नाटकों के बीच गुजरा था। वे अपने पिता के पृथ्वी थिएटर में काम करते थे। उन्होंने बचपन में ही एक्टिंग की बारीकियां सीख ली थीं। वे पर्दे के पीछे रहकर लाइट और पर्दे संभालते थे। शशि कपूर को एक्टिंग विरासत में मिली थी।
शशि कपूर के भाई राज कपूर और शम्मी कपूर पहले से स्टार थे। लेकिन शशि ने अपनी राह खुद बनाने का फैसला किया। उन्होंने कभी भी बड़े भाई की सिफारिश का सहारा नहीं लिया। वो कड़ी मेहनत और लगन पर भरोसा रखते थे।
जब बलबीर राज कपूर बने बॉलीवुड के शशि
शशि कपूर का बलबीर राज से शशि बनने का सफर बहुत ही दिलचस्प है। कपूर खानदान के इस लाडले का असली नाम बलबीर राज कपूर ही था। लेकिन उन्हें बचपन से ही चांद और उसकी रोशनी से बहुत लगाव था।
शशि कपूर की मां ने देखा कि उन्हें चंद्रमा (मून) बहुत पसंद है। इसलिए उन्होंने प्यार से उनका नाम शशि रख दिया, जिसका अर्थ ही चंद्रमा होता है। जब उन्होंने बतौर बाल कलाकार फिल्मों में कदम रखा, तो उन्हें इसी नाम से क्रेडिट दिया गया।
धीरे-धीरे दुनिया बलबीर को भूल गई। वो सदाबहार शशि कपूर के नाम से मशहूर हो गए। उन्होंने बतौर बाल कलाकार फिल्मों में काम शुरू किया था।
फिल्म आग और आवारा में उन्होंने छोटे राज कपूर का रोल किया। उनकी क्यूटनेस ने सबका दिल जीत लिया था। जवान होने के बाद उन्होंने मुख्य अभिनेता के तौर पर शुरुआत की। फिल्म धर्मपुत्र से उन्होंने लीड एक्टर के रूप में कदम रखा।
शशि कपूर की लव स्टोरी
शशि कपूर की लव स्टोरी किसी फिल्म से कम नहीं थी। उन्हें थिएटर के दौरान जेनिफर केंडल से प्यार हो गया था। जेनिफर एक विदेशी थिएटर ग्रुप की कलाकार थीं। दोनों ने परिवार की मर्जी के खिलाफ जाकर शादी की थी।
जेनिफर ने शशि के जीवन को पूरी तरह बदल दिया था। वो उनके जीवन का सबसे बड़ा सपोर्ट सिस्टम थीं। जेनिफर के जाने के बाद शशि बिल्कुल अकेले पड़ गए थे। उनकी यादें उनके आखिरी समय तक उनके साथ रहीं।
मेरे पास मां है वाला डायलॉग
जब भी शशि कपूर का नाम आता है, फिल्म दीवार याद आती है। अमिताभ बच्चन के सामने उनका वो डायलॉग अमर हो गया। "मेरे पास मां है" आज भी हर बच्चे की जुबान पर है।
इस फिल्म ने उन्हें सुपरस्टार की रेंज में खड़ा कर दिया। उन्होंने अमिताभ बच्चन के साथ कई सुपरहिट फिल्में दीं। उनकी जोड़ी को ऑडियंस ने बहुत ज्यादा प्यार दिया था। शशि कपूर अपनी सादगी के लिए हमेशा जाने जाते रहे।
इंटरनेशनल सिनेमा में भारत का लहराया परचम
शशि कपूर सिर्फ बॉलीवुड तक सीमित नहीं थे। वे भारत के पहले ग्लोबल स्टार कहे जाते हैं। उन्होंने कई अंग्रेजी और इंटरनेशनल फिल्मों में काम किया। मर्चेंट आइवरी प्रोडक्शंस के साथ उन्होंने शानदार फिल्में दीं।
सिद्धार्थ और शेक्सपियर वाला जैसी फिल्में इसका बेस्ट उदाहरण हैं। उन्होंने भारतीय कला को ग्लोबल प्लेटफार्म पर पहचान दिलाई। उनकी अंग्रेजी बोलने का अंदाज बहुत ही इम्प्रेससिव था।
पृथ्वी थिएटर और आर्ट के लिए डेडिकेशन
शशि कपूर को अपनी जड़ों से बहुत प्यार था। उन्होंने अपने पिता के सपने को जिंदा रखा। उन्होंने मुंबई में पृथ्वी थिएटर का रीकंस्ट्रक्ट कराया। वे चाहते थे कि नए कलाकारों को मंच मिले। उन्होंने फिल्मों से कमाए पैसे को थिएटर में लगाया।
एक्टिंग के साथ उन्होंने फिल्में प्रोड्यूस भी कीं। जुनून, कलयुग और उत्सव जैसी फिल्में उन्होंने बनाईं। ये फिल्में कमर्शियल नहीं बल्कि कलात्मक ज्यादा थीं। उन्होंने बॉक्स ऑफिस की चिंता कभी नहीं की थी।
शशि कपूर सिनेमा में कुछ नया और मीनिंगफुल करना चाहते थे। निर्देशन के क्षेत्र में उन्होंने फिल्म अजूबा बनाई। इस फिल्म में उन्होंने अमिताभ बच्चन को डायरेक्ट किया था।
पुरस्कार और सम्मान का सफर
शशि कपूर को उनके योगदान के लिए कई अवॉर्ड मिले। उन्हें तीन बार नेशनल फिल्म अवॉर्ड से नवाजा गया। भारत सरकार ने उन्हें पद्म भूषण सम्मान दिया था।
साल 2014 में उन्हें दादा साहब फाल्के अवॉर्ड मिला। ये भारतीय सिनेमा का सबसे बड़ा सम्मान माना जाता है। वह हमेशा एक विनम्र इंसान बने रहे। उनकी मुस्कान आखिरी समय तक वैसी ही बनी रही।
एक महान युग का अंत
4 दिसंबर 2017 को ये महान सितारा डूब गया। शशि कपूर ने लंबी बीमारी के बाद अंतिम सांस ली। उनके जाने से बॉलीवुड का एक सुनहरा अध्याय खत्म हो गया।
लेकिन उनकी फिल्में और डायलॉग हमेशा जिंदा रहेंगे। वह एक ऐसे अभिनेता थे जिन्होंने सबको प्यार दिया। उनकी यादें आज भी प्रशंसकों के दिलों में बसी हैं।
शशि कपूर जन्मदिन
शशि कपूर की कुछ यादगार फिल्में
- दीवार (1975)
यह फिल्म शशि कपूर के करियर की सबसे बड़ी पहचान है। इसमें उनका डायलॉग "मेरे पास मां है" आज भी दुनियाभर में मशहूर है। - सत्यम शिवम सुंदरम (1978)
इस फिल्म में शशि कपूर ने एक इंजीनियर का रोल निभाया था। फिल्म के गाने और उनकी एक्टिंग ने इसे एक क्लासिक लव स्टोरी बना दिया। - नमक हलाल (1982)
अमिताभ बच्चन के साथ उनकी यह कॉमेडी-एक्शन फिल्म सुपरहिट रही। - कभी कभी (1976)
ये खूबसूरत रोमांटिक ड्रामा फिल्म थी। शशि कपूर की सादगी और स्माइल ने इस फिल्म में चार चांद लगा दिए थे। - त्रिशूल (1978)
इस फिल्म में शशि कपूर ने अमिताभ बच्चन और संजीव कुमार के साथ स्क्रीन शेयर की। फैमिली ड्रामा और एक्शन से भरपूर यह फिल्म ब्लॉकबस्टर रही। - जब जब फूल खिले (1965)
इसमें शशि कपूर ने एक मासूम कश्मीरी नाविक का किरदार निभाया था। फिल्म का गाना "परदेसियों से ना अखियां मिलाना" आज भी गुनगुनाया जाता है। - जुनून (1978)
ये फिल्म 1857 के विद्रोह पर आधारित एक गंभीर ड्रामा थी। इस फिल्म को शशि कपूर ने खुद प्रोड्यूस किया था और नेशनल अवॉर्ड जीता। - शान (1980)
ये एक हाई-बजट एक्शन थ्रिलर फिल्म थी। फिल्म में शशि और अमिताभ की जोड़ी ने कुलभूषण खरबंदा यानी शाकाल से टक्कर ली थी। - सुहाग (1979)
इस फिल्म में शशि कपूर ने एक पुलिस ऑफिसर का रोल प्ले किया था। दो भाइयों की बिछड़ने और मिलने की यह कहानी दर्शकों को खूब पसंद आई। - उत्सव (1984)
पुराने भारत की स्टोरी पर बेस्ड ये फिल्म शशि कपूर की आर्टिस्टिक थिंकिंग दिखाती है। फिल्म का म्यूजिक और सेट डिजाइन बहुत ही बेहतरीन था।
References Links:
- Britannica - Shashi Kapoor Biography
- NDTV - Shashi Kapoor: The Global Indian Star
- Filmfare - Shashi Kapoor Birthday Remembering Shashi Kapoor
- Shashi Kapoor Birth Anniversary Prithvi Theatre Official Website
18 मार्च की महत्वपूर्ण ऐतिहासिक घटनाएं
आज का इतिहास मेंहर दिन का अपना एक अलग महत्व होता है। 18 मार्च का दिन भी इतिहास (आज की यादगार घटनाएं) में कई महत्वपूर्ण घटनाओं के लिए दर्ज है। इस दिन दुनिया में कई ऐसी घटनाएं हुईं, जिन्होंने इतिहास की दिशा बदल दी।
आइए जानते हैं 18 मार्च (आज की तारीख का इतिहास) को भारत और विश्व में घटी कुछ प्रमुख घटनाओं के बारे में, जो आपके सामान्य ज्ञान को बढ़ा सकती हैं-
विश्व इतिहास की प्रमुख घटनाएं...
- 1229: छठे धर्मयुद्ध के दौरान फ्रेडरिक II ने खुद को यरूशलेम का राजा घोषित किया।
- 1241: पोलैंड पर मंगोलों के पहले आक्रमण में क्राकोव शहर को बुरी तरह लूटा गया।
- 1314: फ्रांस के राजा फिलिप चतुर्थ ने जैक्स डी मोले को जिंदा जलवा दिया था।
- 1741: न्यूयॉर्क के फोर्ट जॉर्ज में गुलामों द्वारा कथित आगजनी से '1741 का षड्यंत्र' शुरू हुआ।
- 1871: पेरिस में विद्रोह के बाद ऐतिहासिक 'पेरिस कम्यून' सरकार की स्थापना हुई।
- 1874: अमेरिका और हवाई के बीच एक विशेष व्यापारिक संधि पर हस्ताक्षर हुए।
- 1892: कनाडा में मशहूर 'स्टेनली कप' (आइस हॉकी ट्रॉफी) दान करने का संकल्प लिया गया।
- 1906: रोमानियाई आविष्कारक ट्रेलियन वुइया ने पहली बार भारी विमान को उड़ाने में सफलता पाई।
- 1920: ग्रीस ने आधिकारिक तौर पर ग्रेगोरियन कैलेंडर का इस्तेमाल शुरू किया।
- 1921: पीस ऑफ रीगा संधि के साथ पोलिश-सोवियत युद्ध का औपचारिक अंत हुआ।
- 1922: राजद्रोह के मामले में ब्रिटिश अदालत ने महात्मा गांधी को 6 साल की सजा सुनाई।
- 1925: टोक्यो में भीषण आग लगने से लगभग 3,000 इमारतें खाक हो गईं।
- 1953: पश्चिमी तुर्की में आए विनाशकारी भूकंप से 250 से ज्यादा लोगों की मौत हुई।
- 1965: सोवियत पायलट एलेक्सी लियोनोव ने अंतरिक्ष में पहली बार 'स्पेसवॉक' कर इतिहास रचा।
- 1970: मजदूरी में भेदभाव को लेकर अमेरिका के डाक कर्मियों ने दो हफ्ते की बड़ी हड़ताल की।
- 1971: पेरू में हुए भीषण भूस्खलन के कारण 200 लोगों की जान चली गई।
- 1978: पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री जुल्फिकार अली भुट्टो को फांसी देने का फैसला सुनाया गया।
- 1985: मशहूर ऑस्ट्रेलियाई ड्रामा 'नेबर्स' का पहला एपिसोड टीवी पर प्रसारित हुआ।
- 1990: अमेरिका के एक म्यूजियम से 500 मिलियन डॉलर की कलाकृतियां चोरी हुईं, जो आज तक नहीं मिलीं।
- 1995: दिग्गज बास्केटबॉल खिलाड़ी माइकल जॉर्डन ने 17 महीने बाद एनबीए में वापसी की घोषणा की।
- 1996: फिलीपींस के नाइट क्लब में लगी भीषण आग में 162 लोगों की मौत हो गई।
- 1997: तुर्की में रूस का एक विमान दुर्घटनाग्रस्त हुआ, जिसमें 50 यात्रियों की मौत हुई।
- 2000: उगांडा में एक प्रलय दिवस संप्रदाय के 230 सदस्यों ने सामूहिक आत्मदाह किया।
- 2005: अमेरिका में टेरी शियावो की फीडिंग ट्यूब हटाने के आदेश पर इच्छामृत्यु पर वैश्विक बहस छिड़ी।
- 2006: संयुक्त राष्ट्र ने एक नई 'मानवाधिकार परिषद' के गठन के प्रस्ताव को मंजूरी दी।
- 2007: पाकिस्तान क्रिकेट टीम के कोच बॉब वूल्मर होटल के कमरे में संदिग्ध परिस्थितियों में मृत मिले।
- 2012: जोआचिन गौक को जर्मनी के नए राष्ट्रपति के रूप में चुना गया।
भारत के इतिहास की प्रमुख घटनाएं...
- 1801: भारत में कोलकाता के पास पहले आयुध निर्माण कारखाने की स्थापना हुई।
- 1938: हिंदी सिनेमा के सदाबहार और हैंडसम अभिनेता शशि कपूर (बलबीर राज) का जन्म हुआ।
- 1944: नेताजी सुभाषचंद्र बोस की आजाद हिंद फौज ने बर्मा के रास्ते भारतीय सीमा में प्रवेश किया।
- 2008: सुनील भारती मित्तल अमेरिका की 'विशिष्ट उद्यमी अकादमी' में शामिल होने वाले पहले भारतीय बने।
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