परिवहन विभाग ने 32 साल बाद बढ़ाईं वाहन सेवाओं की फीस, परमिट और लाइसेंस बनवाना हुआ महंगा
Harrison Masih | Sept 19, 2026, 13:07 IST
वाहन परमिट और ड्राइविंग लाइसेंस के नए नियम के नए नियम
परिवहन विभाग ने 32 साल बाद अपनी विभिन्न सेवाओं की फीस बढ़ा दी है। इससे टैक्सी और ट्रक जैसे वाहनों के दस्तावेज बनवाना महंगा हो गया है। परमिट की फीस में भारी बढ़ोतरी हुई है, जिससे वाहन मालिकों पर असर पड़ेगा। किसानों और कुछ वर्गों को इस शुल्क वृद्धि से राहत दी गई है। नई फीस व्यवस्था से परिवहन कारोबार से जुड़े लोगों की लागत बढ़ेगी।
समझें क्या है पूरा मामला...
ड्राइविंग लाइसेंस की डुप्लीकेट कॉपी लेने और चालक अनुज्ञप्ति यानी लाइसेंस की दूसरी कॉपी निकलवाने पर अब लगभग दोगुना शुल्क देना होगा। वहीं परमिट की फीस 2500 रुपए से सीधे 10 हजार रुपए तक बढ़ा दी गई है।
अगर देरी से परमिट रिन्यू कराया गया, तो जुर्माना भी बढ़ता जाएगा। नई व्यवस्था में परमिट का समय खत्म होने के बाद देरी से रिन्यू कराने पर शुल्क बढ़ता जाएगा। देरी के हिसाब से शुल्क बढ़ता है, 90 दिन तक अलग शुल्क, 180 दिन तक अलग और 365 दिन से ज्यादा देरी होने पर स्वयं वाहन मालिक के जेब पर उतना ही भार पड़ेगा।
किन लोगों पर पड़ेगा सबसे ज्यादा असर
परमिट समय पर रिन्यू नहीं कराया गया, तो अब अलग से भारी जुर्माना देना होगा। इससे कई वाहन मालिकों की जेब पर सीधा असर पड़ सकता है।
प्रमुख सुविधाओं का नया शुल्क
व्यावसायिक वाहन प्रशिक्षण पत्र का शुल्क 200 से बढ़कर 500 रुपए हो गया है। निजी लाइट मोटर वाहन के अस्थायी पंजीयन का शुल्क 200 से बढ़ाकर 500 रुपए किया गया है, जबकि व्यावसायिक लाइट मोटर वाहन के अस्थायी पंजीयन के लिए अब 500 की जगह 1000 रुपए देने होंगे। वृद्धिकर के अस्थायी पंजीयन का शुल्क 150 से बढ़ाकर 300 रुपए कर दिया गया है।
परमिट शुल्क में सबसे बड़ी बढ़ोतरी
मालवाहक परमिट जारी या नवीनीकरण कराने पर पहले 2000 रुपए लगते थे, जो अब बढ़कर 5000 रुपए हो गया है। मालवाहक के नेशनल परमिट के लिए अब 2000 की जगह 6000 रुपए चुकाने होंगे।
सबसे बड़ी बढ़ोतरी यात्री बस परमिट में हुई है, जहां पहले 2500 रुपए लगते थे, अब यह शुल्क बढ़कर 10 हजार रुपए हो गया है, यानी करीब चार गुना बढ़ोतरी। किराए पर लिए बस परमिट की दूसरी प्रति का शुल्क भी 500 से बढ़ाकर 1000 रुपए किया गया है। RTO के निर्णय या आदेश के विरुद्ध याचिका दायर करने का शुल्क भी 200 से बढ़ाकर 2000 रुपए कर दिया गया है।
प्रदेश में कितनी बसें होंगी प्रभावित
इसके अलावा प्रदेश में करीब 10 हजार सिटी बसों के नवीन परमिट के लिए भी आवेदन आ चुके हैं। इतनी बड़ी संख्या को देखते हुए इस शुल्क वृद्धि का असर व्यापक स्तर पर महसूस किया जाएगा।
किसानों और कुछ वर्गों को राहत
इसके अलावा अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के आवेदकों को भी नई दर का आधा ही शुल्क देना होगा।
अब आगे क्या
आने वाले दिनों में यह देखा जाएगा कि यात्री और माल भाड़े पर इस शुल्क वृद्धि का कितना असर पड़ता है और क्या इसका बोझ अंततः आम उपभोक्ताओं पर स्थानांतरित होता है।
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