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ISLAMABAD. बिलावल जरदारी भुट्टो ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ सारी हदें पार कर दी। न्यूयार्क में प्रेस कॉन्फ्रेंस में बिलावल ने मोदी को हत्यारा बताया। उन्होंने कहा ओसामा बिन लादेन तो मर चुका है, लेकिन 'गुजरात का हत्यारा' अभी जिंदा है और वो भारत का प्रधानमंत्री है। आपने (अमेरिका) यहां आने पर उन पर बैन लगा दिया था। वो प्रधानमंत्री बनने के बाद ही यहां आ पाए। भारत में आरएसएस के प्रधानमंत्री है और एस जयशंकर आरएसएस के विदेश मंत्री है।
“Osama Bin laden is dead but the butcher of Gujarat lives and he is the PM of India.” ~ Bilawal Bhutto Zardari @BBhuttoZardaripic.twitter.com/7AcekdaUFZ
— @UrbanShrink (@UrbanShrink) December 16, 2022
पाकिस्तान में बढ़ते आतंकवादी हमलों के लिए भारत को जिम्मेदार बताया
पाकिस्तान के विदेश मंत्री बिलावल ने पाकिस्तान में बढ़ते आतंकवादी हमलों के लिए भारत को जिम्मेदार बताया। उन्होंने कहा बाहरी तत्व बलूचिस्तान में अस्थिरता पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं। भारत सरकार गांधी की विचारधारा में विश्वास करने के बजाय उनके कातिल के सिद्धांतों में विश्वास करती है। भारत सरकार हिटलर से प्रभावित है। पाकिस्तान के विदेश मंत्री बिलावल की ओर से 15 दिसंबर यानी गुरुवार को भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर की 9/11 के मास्टरमाइंड ओसामा बिन लादेन को पनाह देने वाली टिप्पणी पर पलटवार किया गया।
एस जयशंकर ने लगाई थी क्लास
14 दिसंबर यानी बुधवार को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में बोलते हुए विदेश मंत्री एस जयशंकर ने यूएन में कश्मीर मुद्दे को उठाने के लिए पाकिस्तान को फटकार लगाई थी। पाकिस्तान को नसीहत देते हुए जयशंकर ने कहा था कि जिस देश ने अल-कायदा नेता ओसामा बिन लादेन जैसे आतंकवादी को पनाह दी हो और अपने पड़ोसी देश की संसद पर हमला किया हो, उसे उपदेश नहीं देना चाहिए।
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भुट्टो ने यूएनएससी में भारत को शामिल करने की मांग का किया था विरोध
पाकिस्तान के विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में कश्मीर मुद्दे को उठाते हुए कहा था कि यूएनएससी मुख्य रूप से वैश्विक शांति और सुरक्षा बनाए रखने के लिए जिम्मेदार है। यूएनएससी में भारत को शामिल करने की मांग पर भु्ट्टो ने कहा था कि इसमें नए सदस्यों को जोड़ने से सुरक्षा परिषद में यूएन के अधिकतर सदस्य देशों के उपस्थित होने के अवसर कम मिलेंगे, इसलिए हमें सभी सदस्य देशों की संप्रभुता को ध्यान में रखना चाहिए।