इंटरनेशनल डेस्क. दुनिया की सबसे बड़ी साइबर क्राइम वेबसाइट और साइबर अपराधियों के बीच पॉपुलर मार्केटप्लेस- जेनिसिस मार्केट को अब सीज कर दिया गया है। इसके लिए अमेरिकी खुफिया एजेंसी- फेडरल ब्यूरो ऑफ इंवेस्टिगेशनसमेत 17 देशों की लॉ एनफोर्समेंट एजेंसियों ने एक खास ऑपरेशन चलाया था। इस ऑपरेशन को 'ऑपरेशन कुकी मॉन्स्टर' नाम दिया गया, जिसके तहत 100 से ज्यादा साइबर अपराधी दबोचे गए हैं।
IP एड्रेस और डिजिटल फिंगरप्रिंट बनाने वाला डेटा बेचा जाता था
जेनेसिस मार्केट में लोगों के लॉगिन डिटेल्स, IP एड्रेस और डिजिटल फिंगरप्रिंट बनाने वाला अन्य डेटा बेचा जाता था। बताया जाता है कि यहां साइबर अपराधी एक डॉलर से कम कीमत में भी लोगों की पर्सनल डिटेल्स खरीद लिया करते थे और फ्रॉड करते थे। इन डिटेल्स के जरिए आसानी से बैंकिंग और शॉपिंग अकाउंट्स हैक कर लिए जाते थे। 'ऑपरेशन कुकी मॉन्स्टर' के तहत ये कदम उठाया गया है।
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इनके नेतृत्व में हुआ ऑपरेशन
'ऑपरेशन कुकी मॉन्स्टर' अमेरिकी खुफिया एजेंसी- फेडरल ब्यूरो ऑफ इंवेस्टिगेशन (FBI) ने ऑपरेशन का नेतृत्व किया। ब्रिटेन की नेशनल क्राइम एजेंसी (NCA), डच नेशनल पुलिस, ऑस्ट्रेलियन फेडरल पुलिस और अन्य यूरोपीय देशों की पुलिस इसमें शामिल रहीं। जेनेसिस मार्केट में बिक्री के लिए 2 मिलियन लोगों के 80 मिलियन क्रेडेंशियल्स और डिजिटल फिंगरप्रिंट थे।
200 जगहों पर तलाशी और 120 लोग अरेस्ट
'ऑपरेशन कुकी मॉन्स्टर' के तहत दुनियाभर में 200 जगहों पर तलाशी अभियान चलाए गए। इस दौरान 120 ऐसे लोगों को गिरफ्तार किया गया, जो जेनेसिस मार्केट से लोगों की पर्सनल डिटेल्स खरीदते थे। ब्रिटेन की नेशनल क्राइम एजेंसी ने बताया कि उसने 24 साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया।
जेनिसिस मार्केट की 6 साल पहले हुई थी शुरुआत
जेनिसिस मार्केट को 2017 में बनाया गया था। आसान शब्दों में कहें तो ये एक आम वेबसाइट की तरह ही होती है। इसे डार्क वेब के साथ ओपन वेब में भी ऑपरेट किया जाता है। यूजर यहां अंग्रेजी भाषा में इंटरेक्ट कर सकता है। यहां पैसे देकर आसानी से दूसरे लोगों के अमेजॉन, फेसबुक, पे-पाल, नेटफ्लिक्स, ईबे, उबर के पासवर्ड खरीदे जा सकते हैं। अगर लोग पासवर्ड बदल भी देते थे, तो इसकी जानकारी भी जेनिसिस मार्केट में रहती थी। यहां लोगों की लोकेशन से जुड़ी जानकारी भी बेची जाती थीं।