बोल हरि बोल : इंदौर वाला धाकड़ सप्लायर फिर चर्चा में, समधी जी के अनादर पर भड़के मंत्रीजी और अफसर बन गए बीजेपी के कार्यकर्ता!
Harish Divekar | Mar 29, 2026, 11:22 IST
bol hari bol 29 march 2026 journalist harish divekar bhopal
मध्यप्रदेश की राजनीति में धाकड़ सप्लायर का दबदबा, मंत्रीजी के पंडितजी का खौफ और अफसरों की कार्यकर्ता वाली भूमिका ने सत्ता के गलियारों में हलचल मचा दी है। आज के बोल हरि बोल में पढ़िए इन घटनाओं के बारे में विस्तार से...
BHOPAL. मध्यप्रदेश की सियासत और सिस्टम के गलियारों में हर दिन कुछ न कुछ ऐसा पकता है, जो खुले मंच पर भले ही नजर न आए, पर अंदरखानों में उसकी खूब चर्चा होती है। कहीं प्रभाव का खेल चलता है, कहीं पद से ज्यादा पकड़ काम आती है। कहीं रिश्तों और रसूख के सहारे फैसलों की दिशा बदलती दिखाई देती है। आज के बोल हरि बोल में भी हम आपके लिए ऐसे ही किस्से लेकर आए हैं।
अब देखिए न इंदौर वाला एक धाकड़ सप्लायर सब पर भारी है। छह महीने में ही उसने जमकर माल कूट दिया है। उधर, विपक्ष के एक नेताजी इन दिनों एक अजीब तरह की समस्या से दो-चार हैं। इधर, समधी के अनादर पर मंत्रीजी भड़क उठे। एक दूसरे मंत्रीजी एक तृतीय श्रेणी कर्मचारी के कब्जे में हैं। अफसर भी इस कर्मचारी का कुछ नहीं बिगाड़ पा रहे हैं।
...तो चलिए खोलते हैं गॉशिप का पिटारा। आप भी दुनिया जहान की चिंता छोड़िए, सीधे नीचे उतर आईए और वरिष्ठ पत्रकार हरीश दिवेकर के लोकप्रिय कॉलम Bol Hari Bol के रोचक किस्सों का आनंद लीजिए।
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मध्यप्रदेश के चार बड़े महकमों में इंदौर के धाकड़ सप्लायर की खासी चर्चा है। उसका जलवा ऐसा है कि वह विभाग के अधिकारियों को जो टेंडर डॉक्यूमेंट बनाकर देता है, वैसा का वैसा टेंडर जारी होता है। हाल ये हैं कि न तो विभाग के अधिकारी और न ही टेंडर समिति के सदस्य धाकड़ के टेंडर में कोमा और बिंदी भी नहीं बदल सकते।
अंदरखानों की मानें तो धाकड़ ने पिछले छह महीने में ही चार विभागों के 800 करोड़ रुपए के टेंडर उठा लिए हैं। जनाब! धाकड़ पढ़कर यदि आप सप्लायर को किरार समझ रहे हैं तो आपको बता दें कि ये जैन है, बस यह अपने नाम के साथ धाकड़ लगाता है। सही भी है, काम भी वह धाकड़ तरीके से ही कर रहा है। अब सवाल ये है कि आखिर धाकड़ के सिर पर किस बड़े शख्स का हाथ है।
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सूबे के मुखिया डॉक्टर साहब के काबिना के एक कद्दवार मंत्री के स्टाफ में पदस्थ तृतीय श्रेणी का कर्मचारी इन दिनों फुल फॉर्म में है। दरअसल, यह नगर निगम का कर्मचारी है। पंडितजी के नाम से चर्चित इस कर्मचारी का जलवा इतना है कि यदि इसने कोई काम मना कर दिया तो फिर मंत्रीजी भी चाहकर उस काम को नहीं करा सकते हैं।
हालात ये हैं कि ओएसडी से लेकर हर दूसरा कर्मचारी पंडितजी के कारनामे मंत्रीजी को बता चुके हैं, लेकिन मंत्रीजी उसे अपने स्टाफ से हटाने की हिम्मत नहीं कर पा रहे। यही वजह है कि विभाग के सीनियर आईएएस अफसर भी तृतीय श्रेणी के इस कर्मचारी का कुछ नहीं बिगाड़ पा रहे। अब आप यदि मंत्रीजी का नाम जानना चाहते हैं तो इतना बता सकता हूं कि उनके पास दो बड़े महकमे हैं। बाकी मेहनत आप खुद कर लीजिए।
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कमलनाथ के गढ़ वाले एरिया में एक ठेकेदार कलाकार निकला है। उसने ब्यूरोक्रेट्स को चांदी की चमक दिखाकर काला सोना लूट लिया है। उसने जिला पंचायत से लेकर मंत्रालय तक ऐसी सेटिंग जमाई है कि वन क्षेत्र में स्टॉपडेम की मंजूरी लेकर करोड़ों का कोयला खोद डाला।
सांसद से लेकर स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने जब हंगामा किया, तब जाकर कलेक्टर साहब ने आनन-फानन में ठेकेदार की जेसीबी मशीन जब्त की है। मामला ऊपर तक पहुंचा तो ठेकेदार से सांठ-गांठ करने वाले एक्टिव हो गए। अब मामले को दबाने की कोशिशें की जा रही हैं। देखते हैं, आगे क्या होता है?
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भोपाल में समधी की आवभगत और सेवा में कमी क्या हुई, मंत्रीजी ने अफसरों को बिजली का झटका दे दिया है। मंत्रीजी की नाराजगी के बाद अफसर भी करते, उन्होंने अब इस मामले में ठीकरा आउटसोर्स कर्मचारी पर फोड़ दिया है। उस पर एक्शन लेकर मामला शांत करने की कोशिशें की जा रही हैं।
दरअसल, मंत्रीजी के विभाग के गेस्ट हाउस में ही समधी को न तो पीने का पानी मिला और ना ही साफ सुथरा कमरा। समधी ने भी अव्यवस्था पर मंत्रीजी की चुटकी ले ली। इसके बाद मंत्रीजी भमकते फिर रहे हैं। कह रहे हैं कि समधी के सामने मेरी इज्जत का कचरा करवा दिया। अब बात इज्जत और प्रतिष्ठा दोनों की है, सो मामला बाहर आ गया है।
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सूबे के मुखिया के जन्मदिन पर उन्हें बधाइयां देने के लिए नेताओं और प्रभावशाली लोगों का तांता लगा रहा। मेला जैसी स्थिति थी। कोई इंदौर से आया था तो कोई सागर से। हर कोई डॉक्टर साहब को अपना चेहरा दिखाना चाहता था, मिलकर उन्हें बधाई देना चाहता था। नेता और कार्यकर्ता को तो इस तरह की भीड़ में घुसकर गुलदस्ते देकर सेल्फी लेना और बधाई देने की आदत है, लेकिन यहां कुछ खास था।
यह पहली बार था, जब आईएएस अफसर भी डॉक्टर साहब को चेहरा दिखाने और गुलदस्ता देने के लिए भीड़ में धक्का-मुक्की करते देखे गए। यहीं एक दिलचस्प वाक्या यह हुआ कि भीड़ में अपने सीनियर अधिकारी को घुसते देखकर एक महिला आईएएस ने भी प्रयास किए। तभी भीड़ का जोर से धक्का लगा और मैडम झटका खाकर चार कदम दूर गिर गईं। इस तरह डॉक्टर साहब को मुंह दिखाना उन्हें भारी पड़ गया।
विपक्ष के एक बड़े नेताजी इन दिनों खासे परेशान हैं। उनकी इस उलझन की वजह पार्टी के भीतर कोई टकराव या सामंजस्य की कमी नहीं, बल्कि उनकी अपनी कमजोरी है। दरअसल, नेताजी का मानना है कि उनकी जमीनी पकड़ तो है, लेकिन समाज का बुद्धिजीवी वर्ग उन्हें भाव नहीं देता। वे जहां भी जाते हैं, वहां या तो गणमान्य जन आते ही नहीं हैं और यदि आते भी हैं तो कन्नी काटते रहते हैं।
पिछले दिनों बुद्धिजीवियों के साथ उन्होंने ऐसी ही एक मीटिंग रखी थी। यहां उन्होंने खुद यह स्वीकार किया कि वे बुद्धिजीवियों के खास नहीं बन पा रहे हैं। उन्होंने जब खुले मन से यह बात स्वीकार की तो वहां मौजूद गणमान्य जन भी एक पल के सन्न रह गए। चूंकि नेताजी के पास प्रदेश में सबसे बड़ा पद है, लिहाजा जब उन्होंने यह बात कही तो हर कोई दंग रह गया। किसी ने उनकी साफगोई की सराहना की तो कोई उन्हें सलाह देता नजर आया।
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अब देखिए न इंदौर वाला एक धाकड़ सप्लायर सब पर भारी है। छह महीने में ही उसने जमकर माल कूट दिया है। उधर, विपक्ष के एक नेताजी इन दिनों एक अजीब तरह की समस्या से दो-चार हैं। इधर, समधी के अनादर पर मंत्रीजी भड़क उठे। एक दूसरे मंत्रीजी एक तृतीय श्रेणी कर्मचारी के कब्जे में हैं। अफसर भी इस कर्मचारी का कुछ नहीं बिगाड़ पा रहे हैं।
...तो चलिए खोलते हैं गॉशिप का पिटारा। आप भी दुनिया जहान की चिंता छोड़िए, सीधे नीचे उतर आईए और वरिष्ठ पत्रकार हरीश दिवेकर के लोकप्रिय कॉलम Bol Hari Bol के रोचक किस्सों का आनंद लीजिए।
वाकई धाकड़ है ये तो...
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मध्यप्रदेश के चार बड़े महकमों में इंदौर के धाकड़ सप्लायर की खासी चर्चा है। उसका जलवा ऐसा है कि वह विभाग के अधिकारियों को जो टेंडर डॉक्यूमेंट बनाकर देता है, वैसा का वैसा टेंडर जारी होता है। हाल ये हैं कि न तो विभाग के अधिकारी और न ही टेंडर समिति के सदस्य धाकड़ के टेंडर में कोमा और बिंदी भी नहीं बदल सकते।
अंदरखानों की मानें तो धाकड़ ने पिछले छह महीने में ही चार विभागों के 800 करोड़ रुपए के टेंडर उठा लिए हैं। जनाब! धाकड़ पढ़कर यदि आप सप्लायर को किरार समझ रहे हैं तो आपको बता दें कि ये जैन है, बस यह अपने नाम के साथ धाकड़ लगाता है। सही भी है, काम भी वह धाकड़ तरीके से ही कर रहा है। अब सवाल ये है कि आखिर धाकड़ के सिर पर किस बड़े शख्स का हाथ है।
ये पंडितजी तो मंत्री से भी भारी है!
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सूबे के मुखिया डॉक्टर साहब के काबिना के एक कद्दवार मंत्री के स्टाफ में पदस्थ तृतीय श्रेणी का कर्मचारी इन दिनों फुल फॉर्म में है। दरअसल, यह नगर निगम का कर्मचारी है। पंडितजी के नाम से चर्चित इस कर्मचारी का जलवा इतना है कि यदि इसने कोई काम मना कर दिया तो फिर मंत्रीजी भी चाहकर उस काम को नहीं करा सकते हैं।
हालात ये हैं कि ओएसडी से लेकर हर दूसरा कर्मचारी पंडितजी के कारनामे मंत्रीजी को बता चुके हैं, लेकिन मंत्रीजी उसे अपने स्टाफ से हटाने की हिम्मत नहीं कर पा रहे। यही वजह है कि विभाग के सीनियर आईएएस अफसर भी तृतीय श्रेणी के इस कर्मचारी का कुछ नहीं बिगाड़ पा रहे। अब आप यदि मंत्रीजी का नाम जानना चाहते हैं तो इतना बता सकता हूं कि उनके पास दो बड़े महकमे हैं। बाकी मेहनत आप खुद कर लीजिए।
ठेकेदार निकला कलाकार
4197e579-684
कमलनाथ के गढ़ वाले एरिया में एक ठेकेदार कलाकार निकला है। उसने ब्यूरोक्रेट्स को चांदी की चमक दिखाकर काला सोना लूट लिया है। उसने जिला पंचायत से लेकर मंत्रालय तक ऐसी सेटिंग जमाई है कि वन क्षेत्र में स्टॉपडेम की मंजूरी लेकर करोड़ों का कोयला खोद डाला।
सांसद से लेकर स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने जब हंगामा किया, तब जाकर कलेक्टर साहब ने आनन-फानन में ठेकेदार की जेसीबी मशीन जब्त की है। मामला ऊपर तक पहुंचा तो ठेकेदार से सांठ-गांठ करने वाले एक्टिव हो गए। अब मामले को दबाने की कोशिशें की जा रही हैं। देखते हैं, आगे क्या होता है?
समधी जी से कोई कुछ कैसे कह सकता है?
4cf299fd-f42
भोपाल में समधी की आवभगत और सेवा में कमी क्या हुई, मंत्रीजी ने अफसरों को बिजली का झटका दे दिया है। मंत्रीजी की नाराजगी के बाद अफसर भी करते, उन्होंने अब इस मामले में ठीकरा आउटसोर्स कर्मचारी पर फोड़ दिया है। उस पर एक्शन लेकर मामला शांत करने की कोशिशें की जा रही हैं।
दरअसल, मंत्रीजी के विभाग के गेस्ट हाउस में ही समधी को न तो पीने का पानी मिला और ना ही साफ सुथरा कमरा। समधी ने भी अव्यवस्था पर मंत्रीजी की चुटकी ले ली। इसके बाद मंत्रीजी भमकते फिर रहे हैं। कह रहे हैं कि समधी के सामने मेरी इज्जत का कचरा करवा दिया। अब बात इज्जत और प्रतिष्ठा दोनों की है, सो मामला बाहर आ गया है।
आईएएस अफसर बने कार्यकर्ता
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सूबे के मुखिया के जन्मदिन पर उन्हें बधाइयां देने के लिए नेताओं और प्रभावशाली लोगों का तांता लगा रहा। मेला जैसी स्थिति थी। कोई इंदौर से आया था तो कोई सागर से। हर कोई डॉक्टर साहब को अपना चेहरा दिखाना चाहता था, मिलकर उन्हें बधाई देना चाहता था। नेता और कार्यकर्ता को तो इस तरह की भीड़ में घुसकर गुलदस्ते देकर सेल्फी लेना और बधाई देने की आदत है, लेकिन यहां कुछ खास था।
यह पहली बार था, जब आईएएस अफसर भी डॉक्टर साहब को चेहरा दिखाने और गुलदस्ता देने के लिए भीड़ में धक्का-मुक्की करते देखे गए। यहीं एक दिलचस्प वाक्या यह हुआ कि भीड़ में अपने सीनियर अधिकारी को घुसते देखकर एक महिला आईएएस ने भी प्रयास किए। तभी भीड़ का जोर से धक्का लगा और मैडम झटका खाकर चार कदम दूर गिर गईं। इस तरह डॉक्टर साहब को मुंह दिखाना उन्हें भारी पड़ गया।
नेताजी अलग परेशान हैं...
पिछले दिनों बुद्धिजीवियों के साथ उन्होंने ऐसी ही एक मीटिंग रखी थी। यहां उन्होंने खुद यह स्वीकार किया कि वे बुद्धिजीवियों के खास नहीं बन पा रहे हैं। उन्होंने जब खुले मन से यह बात स्वीकार की तो वहां मौजूद गणमान्य जन भी एक पल के सन्न रह गए। चूंकि नेताजी के पास प्रदेश में सबसे बड़ा पद है, लिहाजा जब उन्होंने यह बात कही तो हर कोई दंग रह गया। किसी ने उनकी साफगोई की सराहना की तो कोई उन्हें सलाह देता नजर आया।
द सूत्र पर पढ़िए बोल हरि बोल के अन्य कॉलम...
बछड़े की मौत के लिए प्रायश्चित, तबादलों की बेचैनी और पीएचक्यू में उलझन
बोल हरि बोल: सत्ता के गलियारों से फुसफुसाहटें… नाम नहीं, सिर्फ इशारे
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