कंगारुओं के खिलाफ हमेशा बोलता है रोहित शर्मा का बल्ला, फाइनल में ऑस्ट्रेलियाई टीम के मैन टारगेट होंगे हिटमैन
BP Shrivastava | Nov 18, 2023, 24:00 IST
कंगारुओं के खिलाफ हमेशा बोलता है रोहित शर्मा का बल्ला, फाइनल में ऑस्ट्रेलियाई टीम के मैन टारगेट होंगे हिटमैन
रोहित को ऑस्ट्रेलिया गेंदबाजी खूब भाती है। रोहित का पहला दोहरा शतक भी इसी टीम के खिलाफ आया था। बेंगलुरु में 209 रनों की उनकी पारी आज भी फैंस भूले नहीं हैं। फाइनल में रोहित ऑस्ट्रेलिया के मुख्य टारगेट होंगे।
BHOPAL. वर्ल्ड कप 2023 का फाइनल 19 नवंबर को अहमदाबाद में भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच खेला जाएगा। भारतीय फैंस में 24 घंटे पहले से ही एक्साइटमेंट शुरू हो गया है। टीम इंडिया अपनी सरजमीं पर खिताब जीतकर तीसरी बार वर्ल्ड कप ट्रॉफी को चूमना चाहेगा, वहीं 5 बार की विजेता कंगारू टीम 2015 के बाद 6वीं बार चैंपियन बनने का सपना देख रही है। कुल मिलाकर वर्ल्ड कप का महामुकाबला रोमांचक और संघर्षपूर्ण होगा। कंगारुओं को जहां बल्लेबाजी में कप्तान रोहित शर्मा से लेकर विराट कोहली, श्रेयस अय्यर और केएल राहुल तो गेंदबाजी में शमी, बुमराह, सिराज, कुलदीप और जडेजा की चुनौती मिलेगी। इस सब के बीच रोहित अकेले ही कंगारुओं पर भारी पड़ सकते हैं। रोहित को ऑस्ट्रेलिया गेंदबाजी खूब भाती है। रोहित का पहला दोहरा शतक भी इसी टीम के खिलाफ आया था। बेंगलुरु में 209 रनों की उनकी पारी आज भी फैंस भूले नहीं हैं।
कंगारुओं के खिलाफ खूब बोलता है रोहित का बल्ला
कंगारुओं को यह पता है कि रोहित का बल्ला उनके खिलाफ बहुत बोलता है। इसलिए रविवार को फाइनल में रोहित ऑस्ट्रेलियाई टीम के मुख्य टारगेट पर होंगे। कप्तान कमिंस को पता है कि रोहित ने उनकी टीम के खिलाफ 8 वनडे सेंचुरी और 9 फीफ्टी जमाई हैं। वहं भारत-ऑस्ट्रेलिया की प्रतिद्वंद्विता से अच्छी तरह वाकिफ हैं। 10 साल पहले ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 7 वनडे मैचों की सीरीज को भला कौन भूल सकता है। जयपुर में कंगारुओं के खिलाफ पहला शतक, 141 रन पर नाबाद रहते हुए शानदार क्लास और तूफानी बल्लेबाजी दिखाई थी। संयोग से उस दिन 359 रन का टारगेट था। इसी तरह का टारगेट 2003 में ऑस्ट्रेलिया ने भारत को वर्ल्ड कप के फाइनल में दिया था। हालांकि इसे टीम इंडिया अचीव नहीं कर पाई थी।
रोहित ने शतक से तीन साल सूखे को खत्म किया
रोहित का वह सैकड़ा न केवल तीन साल के शतक के सूखे को समाप्त करने में उनकी सहायता के लिए काम आया, बल्कि भारत को 43.3 ओवर में 359 रन का पीछा करने में भी सक्षम बनाया, जिसमें विराट कोहली ने नाबाद 52 गेंदों में शतक बनाया था। कोहली ने अपने वनडे इतिहास में इससे ज्यादा विस्फोटक पारी नहीं खेली थी। इसने रोहित को सफेद गेंद के फॉर्मेट में सलामी बल्लेबाज के रूप में वह फिक्स हो गए थे। उसी सीरीज में दिवाली के आस-पास हुए सीरीज के अंतिम वनडे में रोहित ने दोहरा शतक जड़कर इतिहास रच दिया था।
आंकड़ों की गवाही- कंगारुओं के खिलाफ रोहित का रिकॉर्ड
रोहित शर्मा के बचपन के कोच दिनेश लाड ने उन्हें 10 साल की उम्र से ट्रेनिंग दी है। कहते हैं कि रोहित जैसा मैदान पर दिखता है वैसा है नहीं। वह स्मार्ट और केंद्रित है। गौर कीजिए कि उन्होंने इस विश्व कप में कैसे नेतृत्व किया है। हर गेंदबाजी परिवर्तन ने काम किया है। उन्होंने विभिन्न स्थितियों के लिए अपने आपको तैयार किया था। जब उन्हें बचाव करने की आवश्यकता थी तब बचाव किया और जब उन्हें विकेटों की आवश्यकता थी तब हमला किया। लाड ने कहा कि रोहित के आक्रामक दृष्टिकोण ने अन्य खिलाड़ियों के लिए चीजों को आसान बना दिया है। विराट खूबसूरती से बल्लेबाजी कर रहा है, लेकिन रोहित की तेज शुरुआत ने उसे आगे बढ़ने और फिर गति देने की अनुमति दी है। श्रेयस और केएल के साथ भी ऐसा ही है। दोनों को सेट होने का समय मिल रहा है और फिर विस्फोट हो रहा है क्योंकि हिट करने का कोई तत्काल दबाव नहीं है। एक लीडर के रूप में, उन्होंने उदाहरण के तौर पर नेतृत्व किया है। कोच लाड कहते हैं कि आत्मविश्वास, रोहित की सबसे बड़ी ताकत है।
कंगारुओं के खिलाफ खूब बोलता है रोहित का बल्ला
कंगारुओं को यह पता है कि रोहित का बल्ला उनके खिलाफ बहुत बोलता है। इसलिए रविवार को फाइनल में रोहित ऑस्ट्रेलियाई टीम के मुख्य टारगेट पर होंगे। कप्तान कमिंस को पता है कि रोहित ने उनकी टीम के खिलाफ 8 वनडे सेंचुरी और 9 फीफ्टी जमाई हैं। वहं भारत-ऑस्ट्रेलिया की प्रतिद्वंद्विता से अच्छी तरह वाकिफ हैं। 10 साल पहले ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 7 वनडे मैचों की सीरीज को भला कौन भूल सकता है। जयपुर में कंगारुओं के खिलाफ पहला शतक, 141 रन पर नाबाद रहते हुए शानदार क्लास और तूफानी बल्लेबाजी दिखाई थी। संयोग से उस दिन 359 रन का टारगेट था। इसी तरह का टारगेट 2003 में ऑस्ट्रेलिया ने भारत को वर्ल्ड कप के फाइनल में दिया था। हालांकि इसे टीम इंडिया अचीव नहीं कर पाई थी।
रोहित ने शतक से तीन साल सूखे को खत्म किया
रोहित का वह सैकड़ा न केवल तीन साल के शतक के सूखे को समाप्त करने में उनकी सहायता के लिए काम आया, बल्कि भारत को 43.3 ओवर में 359 रन का पीछा करने में भी सक्षम बनाया, जिसमें विराट कोहली ने नाबाद 52 गेंदों में शतक बनाया था। कोहली ने अपने वनडे इतिहास में इससे ज्यादा विस्फोटक पारी नहीं खेली थी। इसने रोहित को सफेद गेंद के फॉर्मेट में सलामी बल्लेबाज के रूप में वह फिक्स हो गए थे। उसी सीरीज में दिवाली के आस-पास हुए सीरीज के अंतिम वनडे में रोहित ने दोहरा शतक जड़कर इतिहास रच दिया था।
आंकड़ों की गवाही- कंगारुओं के खिलाफ रोहित का रिकॉर्ड
- रोहित शर्मा के आंकड़ों पर एक नजर डालें तो भारतीय कप्तान ने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ अब तक 44 वनडे मैचों 58.30 की शानदार औसत से 2332 रन बनाए हैं।
- कंगारुओं के खिलाफ 8 सेंचुरी के साथ 9 फिफ्टी भी जमाई हैं।
- रोहित ने पीली जर्सी टीम के खिलाफ 187 चौके और 84 छक्के जमा चुके हैं।
- उनका इस टीम के खिलाफ सर्वाधिक स्कोर 209 है। जो 2013 में बेंगलुरु में बनाया था। इसके अलावा भारत कभी अहमदाबाद में कभी वनडे मुकाबला नहीं हारा है।
- साल 1987 में इसी ग्राउंड पर जिम्बाब्वे के खिलाफ 26 अक्टूबर को पहले मैच में जीत मिली थी। तब भारत ने 192 रन के टारगेट को आसानी से 7 विकेट से जीत लिया था।
- साल 2011 में वर्ल्ड कप मुकाबले में ऑस्ट्रेलिया को 4 विकेट से मात मिली थी। भारत ने 261 रन के लक्ष्य को 6 विकेट खोकर हासिल कर लिया था।
रोहित शर्मा के बचपन के कोच दिनेश लाड ने उन्हें 10 साल की उम्र से ट्रेनिंग दी है। कहते हैं कि रोहित जैसा मैदान पर दिखता है वैसा है नहीं। वह स्मार्ट और केंद्रित है। गौर कीजिए कि उन्होंने इस विश्व कप में कैसे नेतृत्व किया है। हर गेंदबाजी परिवर्तन ने काम किया है। उन्होंने विभिन्न स्थितियों के लिए अपने आपको तैयार किया था। जब उन्हें बचाव करने की आवश्यकता थी तब बचाव किया और जब उन्हें विकेटों की आवश्यकता थी तब हमला किया। लाड ने कहा कि रोहित के आक्रामक दृष्टिकोण ने अन्य खिलाड़ियों के लिए चीजों को आसान बना दिया है। विराट खूबसूरती से बल्लेबाजी कर रहा है, लेकिन रोहित की तेज शुरुआत ने उसे आगे बढ़ने और फिर गति देने की अनुमति दी है। श्रेयस और केएल के साथ भी ऐसा ही है। दोनों को सेट होने का समय मिल रहा है और फिर विस्फोट हो रहा है क्योंकि हिट करने का कोई तत्काल दबाव नहीं है। एक लीडर के रूप में, उन्होंने उदाहरण के तौर पर नेतृत्व किया है। कोच लाड कहते हैं कि आत्मविश्वास, रोहित की सबसे बड़ी ताकत है।
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