अमित शाह ने कहा- लोकसभा चुनाव के पहले लागू होगा CAA, ये देश का एक्ट

BP shrivastava | Feb 11, 2024, 08:11 IST
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Amit shsah
केंद्रीय मंत्री अमित शाह ET नाउ-ग्लोबल बिजनेस समिट में बोलते हुए।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा है कि लोकसभा चुनाव से पहले देश में सिटिजनशिप अमेंडमेंट एक्ट (CAA) लागू हो जाएगा। उन्होंने कहा कि CAA देश का एक्ट है, इसे हम जरुर नोटिफाई करेंगे। इसे चुनाव से पहले नोटिफाई किया जाएगा और लागू भी किया जाएगा।

NEW DELHI. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा है कि लोकसभा चुनाव से पहले देश में सिटिजनशिप अमेंडमेंट एक्ट (CAA) लागू हो जाएगा। उन्होंने कहा कि CAA देश का एक्ट है, इसे हम जरुर नोटिफाई करेंगे। इसे चुनाव से पहले नोटिफाई किया जाएगा और चुनाव से पहले इसे लागू भी किया जाएगा। इसे लेकर कोई कन्फ्यूजन नहीं होना चाहिए।

CAA को लेकर कांग्रेस वादे से मुकरी


अमित शाह ने शनिवार, 10 फरवरी को ET नाउ-ग्लोबल बिजनेस समिट में ये बातें कहीं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार ने CAA लागू करने का वादा किया था। जब कई देशों में अल्पसंख्यक लोगों पर अत्याचार हो रहे थे, तो कांग्रेस ने रिफ्यूजियों को भरोसा दिलाया था कि वे भारत आ सकते हैं। उन्हें यहां की नागरिकता दी जाएगी, लेकिन अब कांग्रेस अपनी बात से मुकर रही है।

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मुस्लिम समुदाय को उकसाया जा रहा, इसमें नागरिकता छीनने का प्रावधान नहीं है


गृह मंत्री ने कहा कि हमारे देश के अल्पसंख्यक समुदायों, खासतौर पर मुस्लिम समुदाय को उकसाया जा रहा है। CAA किसी की नागरिकता नहीं छीन सकता है, क्योंकि इसमें ऐसा कोई प्रावधान ही नहीं है। CAA ऐसा एक्ट है जो बांग्लादेश, अफगानिस्तान और पाकिस्तान में अत्याचार सह रहे रिफ्यूजियों को नागरिकता दिलाएगा।

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अलग-अलग मुद्दों पर अमित शाह ने कहीं ये बड़ी बातें...


  • लोकसभा चुनाव 2024 पर: आजाद भारत का ये पहला ऐसा चुनाव होगा, जिसमें भारत को महान राष्ट्र बनाने के एजेंडे पर चुनाव लड़ा जाएगा और जनता का फैसला भी महान भारत के मुद्दे पर ही आएगा। पीएम मोदी ने 2047 तक आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत का एजेंडा देश की जनता के सामने रखा है। मेरा मानना है कि 2047 से पहले पीएम मोदी के तीसरे टर्म में ही इसका ज्यादातर काम पूरा कर लिया जाएगा। जहां तक चुनाव के नतीजों का सवाल है, उसमें कोई सस्पेंस नहीं बचा है। जिनके सामने हमें चुनाव लड़ना है, वे भी संसद में आश्वस्त दिखते हैं कि इस बार भी उन्हें विपक्ष में ही बैठना है।
  • बीजेपी की विचारधारा पर: बीजेपी अपनी विचारधारा, अपने एजेंडा और अपने कार्यक्रम के साथ अडिग है। कई साथी आते हैं, कई साथी चले जाते हैं। बीजेपी ने कभी किसी साथी को NDA से नहीं निकाला है, हमने हमेशा गठबंधन का धर्म निभाया है। हमारी विचारधारा जनसंघ की स्थापना से लेकर आज तक एक ही है और भविष्य में भी इसमें कोई बदलाव नहीं होगा। ये विचारधारा जिसे भी सही लगती है, वो हमारे साथ आए तो उनका स्वागत हैं।
  • NDA बनाम I.N.D.I अलायंस पर: ये चुनाव NDA बनाम I.N.D.I गठबंधन नहीं बल्कि घोर निराशा और उज्ज्वल भविष्य के बीच है। ये चुनाव भ्रष्टाचार से युक्त शासन और भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस के बीच में है। ये चुनाव आतंकवादियों के साथ बातचीत की पॉलिसी वालों और आतंकवाद को खत्म करने की पॉलिसी वालों के बीच में है।
  • श्वेत पत्र पर: श्वेत पत्र से स्पष्ट हो गया है कि कांग्रेस और भ्रष्टाचार दोनों एक-दूसरे के पर्याय हैं। सिर्फ UPA 1 और UPA 2 में ही 12 लाख करोड़ के घोटाले करके इन्होंने जनता में एक निराशा का माहौल बना दिया था। आज 10 साल बाद हमारे विरोधी भी हम पर 1 पैसे के भी घोटाले का आरोप नहीं लगा सकते, इस प्रकार का शासन हमने दिया है।
    पीएम मोदी की जाति पर हुई कंट्रोवर्सी पर: मैं देश के सामने साफ करना चाहता हूं कि मोदी जी की जाति गुजरात में 25 जुलाई, 1994 को लिस्ट की गई। उस समय गुजरात के मुख्यमंत्री कांग्रेस के ही छबील दास मेहता थे। नरेंद्र मोदी उस समय तक एक भी चुनाव नहीं लड़े थे।
  • राहुल गांधी पर: राहुल गांधी की पॉलिसी है- झूठ बोलो, सार्वजनिक रूप से बोलो और बार-बार बोलो। ये बड़े दुर्भाग्य की बात है कि पीएम मोदी जैसे नेता की जाति पर कोई चर्चा कर रहा है। पीएम मोदी ने कहा है कि मैं OBC हूं और ओबीसी एक वर्ग होता है, जाति नहीं ये शायद राहुल गांधी जी को उनके अध्यापकों ने नहीं पढ़ाया।
  • भारत रत्न पर: जिन 3 महापुरुषों को शुक्रवार को भारत रत्न दिया गया है, उन्होंने अपने-अपने समय में देश के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। आज देश में किसानों की भूमि अगर उनके नाम पर है तो इसका संपूर्ण यश चौधरी चरण सिंह जी को जाता है, क्योंकि जब जवाहरलाल नेहरू प्रधानमंत्री थे, तो वो कम्युनिस्ट पैटर्न पर सामूहिक खेती की योजना लेकर आए थे, तब चौधरी चरण सिंह अकेले ऐसे नेता थे जिन्होंने इसका विरोध किया और कांग्रेस छोड़ दी थी।
  • राम मंदिर पर: लगभग 500 साल से दुनियाभर के लोग मानते थे कि प्रभु राम का मंदिर वहीं बनना चाहिए, जहां उनका जन्म हुआ था। बहुत सारे आंदोलन हुए, कानूनी लड़ाई लड़ी गई, लेकिन वर्षों तक इस मामले को दबाया गया, कभी तुष्टिकरण की राजनीति के कारण और कभी कानून व्यवस्था का भय दिखाकर दबाया गया। राम मंदिर के पक्ष में फैसला आने के बाद कोई हार-जीत का सवाल नहीं आया और न ही किसी ने जुलूस निकाला। आज गौरव के साथ भव्य राम मंदिर बन गया है।
  • पीएम मोदी की पॉलिसी पर: नरेंद्र मोदी सरकार की पॉलिसी बहुत साफ है- सबके साथ संवाद करना, लेकिन संवाद के बाद भी अगर कोई हथियार लेकर देश में अशांति फैलाता है, तो उसके साथ कठोर से कठोर कार्रवाई करना, ये हमारी स्पष्ट नीति है।

हमारे ही समय में (2019-24) पूर्वोत्तर में 20 से अधिक शांति समझौते हुए हैं। 9 हजार से ज्यादा उग्रवादियों ने हथियार डालकर सरेंडर किया और वे मुख्यधारा में शामिल हो गए हैं। कई सीमा विवाद हमारी सरकार ने सुलझाए हैं।

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शाह ने कहा था- CAA को लागू होने से कोई नहीं रोक सकता


पिछले साल दिसंबर में कोलकाता में एक रैली के दौरान भी गृह मंत्री शाह ने कहा था कि CAA को लागू होने से कोई नहीं रोक सकता है। शाह ने घुसपैठ, भ्रष्टाचार, राजनीतिक हिंसा और तुष्टीकरण के मुद्दों पर ममता बनर्जी को घेरा था। उन्होंने लोगों से ममता सरकार को बंगाल से हटाने और 2026 विधानसभा चुनाव में बीजेपी को चुनने का आग्रह किया था।

वहीं, 12 दिन पहले केंद्रीय मंत्री शांतनु ठाकुर ने कहा था कि मैं गांरटी देता हूं कि देशभर में 7 दिनों के अंदर नागरिक संशोधन अधिनियम (CAA) लागू हो जाएगा। बनगांव से बीजेपी के सांसद ठाकुर दक्षिण 24 परगना के काकद्वीप में एक रैली को संबोधित कर रहे थे।

2019 में लोकसभा-राज्यसभा से बिल पास हो चुका


11 दिसंबर 2019 को राज्यसभा में नागरिकता संशोधन विधेयक 2019 (CAB) के पक्ष में 125 और खिलाफ में 99 वोट पड़े थे। अगले दिन 12 दिसंबर 2019 को इसे राष्ट्रपति की मंजूरी मिल गई। देशभर में भारी विरोध के बीच बिल दोनों सदनों से पास होने के बाद कानून की शक्ल ले चुका था। इसे गृहमंत्री अमित शाह ने 9 दिसंबर को लोकसभा में पेश किया था।

1955 के कानून में किए गए बदलाव


2016 में नागरिकता संशोधन विधेयक 2016 (CAA) पेश किया गया था। इसमें 1955 के कानून में कुछ बदलाव किया जाना था। ये बदलाव थे, भारत के तीन मुस्लिम पड़ोसी देश बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान से आए गैर मुस्लिम शरणार्थियों को नागरिकता देना। 12 अगस्त 2016 को इसे संयुक्त संसदीय कमेटी के पास भेजा गया। कमेटी ने 7 जनवरी 2019 को रिपोर्ट सौंपी थी।

विरोध में भड़के दंगों में 50 से ज्यादा जानें गईं


लोकसभा में आने से पहले ही ये बिल विवाद में था, लेकिन जब ये कानून बन गया तो उसके बाद इसका विरोध और तेज हो गया। दिल्ली के कई इलाकों में प्रदर्शन हुए। 23 फरवरी 2020 की रात जाफराबाद मेट्रो स्टेशन पर भीड़ के इकट्ठा होने के बाद भड़की हिंसा, दंगों में तब्दील हो गई।

चार राज्यों में CAA के विरोध में प्रस्ताव पारित हो चुका है


CAA बिल के संसद के दोनों सदनों से पास होने के बाद 4 राज्य इसके विरोध में विधानसभा में प्रस्ताव पारित कर चुके हैं। सबसे पहले केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने दिसंबर 2019 में CAA के खिलाफ प्रस्ताव पेश करते हुए कहा कि यह धर्मनिरपेक्ष नजरिए और देश के ताने बाने के खिलाफ है। इसमें नागरिकता देने से धर्म के आधार पर भेदभाव होगा।

इसके बाद पंजाब और राजस्थान सरकार ने विधानसभा में CAA के खिलाफ प्रस्ताव पारित किया। चौथा राज्य पश्चिम बंगाल था, जहां इस बिल के विरोध में प्रस्ताव पारित किया गया। पश्चिम बंगाल की CM ने कहा था- बंगाल में हम CAA, NPR और NRC की अनुमति नहीं देंगे।

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