समझें क्या है पूरा मामला...
- अरब सागर में यमन और सोमालिया तट पर बड़ी हाईजैकिंग हुई है।
- हूती विद्रोहियों और जलदस्युओं ने दो कार्गो जहाज कब्जे में लिए हैं।
- दोनों जहाजों पर कुल 22 भारतीय नाविक सवार हैं।
- फिलहाल सभी नाविक सुरक्षित बताए जा रहे हैं।
- विदेश मंत्रालय नाविकों की सुरक्षा के लिए कदम उठा रहा है।
अरब सागर एक बार फिर सुर्खियों में है। यमन और सोमालिया के तट के पास भारत के दो बड़े जहाज हाईजैक कर लिए गए हैं। इन जहाजों पर सवार 22 भारतीय नाविकों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। भारत सरकार से लेकर नाविक यूनियन तक सभी इस घटना पर नजर बनाए हुए हैं। जानकारों का मानना है कि यह हाईजैकिंग सिर्फ इत्तेफाक नहीं है।
क्या हुआ अरब सागर में?
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बाद अब अरब सागर भी गरमा गया है। होर्मुज से भी दुनिया का बड़ा तेल व्यापार होता है। यमन और सोमालिया तट के पास दो जहाज हाईजैक किए गए हैं। इन जहाजों पर कुल 22 भारतीय नाविक सवार थे। इन हमलों में ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों का हाथ माना जा रहा है। साथ ही सोमालिया के जलदस्यु भी इसमें शामिल बताए जा रहे हैं। मौजूदा ईरान युद्ध के बीच यह घटना और गंभीर मानी जा रही है।
यमन में हाईजैक शिबू जहाज
एरिट्रिया के झंडे वाला जहाज एमटी (Motor Tanker) शिबू गुरुवार, 20 अगस्त को हाईजैक हुआ। इसे यमन तट के पास अदन की खाड़ी में रोका गया। जहाज पर कुल 20 क्रू सदस्य मौजूद थे। इनमें से 16 नाविक भारतीय बताए जा रहे हैं। हाईजैक की खबर के बाद हड़कंप मच गया। कंपनी और परिवारों तक जानकारी पहुंचते ही चिंता बढ़ गई।
सोमालिया में हाईजैक लुतुफ
कैमरून के झंडे वाला जहाज एमवी (Merchant Vessel) लुतुफ भी हाईजैक हुआ है। इसे सोमालिया के पंटलैंड तट के पास कब्जे में लिया गया। इस जहाज पर 10 क्रू सदस्य सवार हैं। इनमें से 6 नाविक भारतीय हैं। सूत्रों के मुताबिक दोनों जहाजों के सभी नाविक फिलहाल सुरक्षित हैं। हाईजैक लुतुफ जहाज पर तुर्किये के हथियार और सैटेलाइट उपकरण भी मौजूद थे। इससे इस हाईजैकिंग की गंभीरता और बढ़ जाती है।
सरकार और यूनियन का रुख
फॉरवर्ड सीमेन यूनियन ऑफ इंडिया ने शुक्रवार, 21 अगस्त को चिंता जताई। यूनियन ने कहा कि ईरान युद्ध से भारतीय नाविकों पर खतरा बढ़ा है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने भी बयान दिया। उन्होंने कहा कि नाविकों की सुरक्षा के लिए हरसंभव प्रयास किए जाएंगे। सरकार इस मामले पर लगातार नजर रख रही है। जरूरत पड़ने पर कूटनीतिक स्तर पर भी बातचीत हो सकती है।
हमले क्यों बढ़ रहे हैं
एक्सपर्ट के मुताबिक हमले की वजह साफ है। वे फ्लोरिडा की मैरीटाइम अकेडमी में लीड इंस्ट्रक्टर हैं। उनका कहना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य पर पहले से ईरान का कब्जा है। अब यमन में ईरान समर्थक हूती विद्रोहियों ने सोमालिया के जलदस्युओं से हाथ मिला लिया है। इससे हमले तेज हुए हैं और ईरान की पकड़ और मजबूत हुई है। एक्सपर्ट मानते हैं कि यह सिर्फ शुरुआत हो सकती है।
ट्रम्प के लिए नई चुनौती
स्टीफेंसन का कहना है कि लाल सागर और स्वेज नहर मार्ग पर भी खतरा बढ़ा है। यह रास्ता यूरोप और एशिया के व्यापार के लिए बेहद अहम है। इसकी सुरक्षा अब अमेरिका के लिए नई चुनौती बन गई है। उनके मुताबिक अमेरिका एक साथ दो मोर्चे संभालना मुश्किल पाएगा। होर्मुज और स्वेज दोनों जगह अब खतरा बढ़ गया है।
जहाज कहां छुपाए गए?
एक्सपर्ट के मुताबिक हमलावरों के पास एके-47 जैसे हथियार थे। करीब 14 लड़ाके इस हाईजैकिंग में शामिल बताए जा रहे हैं। यमन और सोमालिया के तटों पर कई ऐसे इलाके हैं। वहां पहाड़ों की बड़ी गुफाएं मौजूद हैं, जिन्हें आउटक्रॉप्स कहा जाता है। हाईजैक किए गए जहाजों को इन्हीं गुफाओं में छिपाया जा सकता है। जहाजों के राडार बंद होने से उनकी ट्रैकिंग भी मुश्किल हो गई है। इससे बचाव अभियान और भी कठिन हो सकता है।
क्या सऊदी को संदेश है?
एक्सपर्ट के मुताबिक यह हमला सऊदी अरब को जवाब भी हो सकता है। ईरान सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्किये के रक्षा करार को अपने खिलाफ मानता है। अरब सागर में हुए ये हमले क्षेत्रीय दबदबे का संकेत भी हो सकते हैं। जानकार इसे सत्ता संतुलन बदलने की कोशिश भी बता रहे हैं।
हूती विद्रोहियों की ताकत
यमन में इस वक्त 2 लाख से ज्यादा ईरान समर्थित हूती विद्रोही मौजूद हैं। इनके पास 1000 किलोमीटर तक मार करने वाली मिसाइलें भी हैं। सोमालिया में जलदस्यु गिरोह भी काफी सक्रिय हैं। इनका कब्जा बाब-अल मंदेब जैसे अहम चोक पॉइंट पर है। लाल सागर और स्वेज नहर मार्ग से दुनिया का करीब 20 प्रतिशत व्यापार होता है। यही वजह है कि यह इलाका पूरी दुनिया के लिए बेहद अहम माना जाता है। इसी वजह से यहां हर छोटी घटना भी बड़ी बन जाती है।
आगे क्या हो सकता है
फिलहाल दोनों जहाजों पर सवार सभी नाविक सुरक्षित बताए जा रहे हैं। भारत सरकार हालात पर लगातार नजर रखे हुए है। विदेश मंत्रालय जल्द अगला अपडेट दे सकता है। नाविकों के परिवार भी उनकी सुरक्षित वापसी का इंतजार कर रहे हैं। आने वाले दिनों में इस मामले में और स्पष्टता आने की उम्मीद है।
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