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पंजाब का जालंधर जिला एक अनोखे इतिहास का गवाह बन रहा है। यहां के नूरमहल में एक ऐसा डेरा है, जहां वक्त थम गया है। यहां दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान (DJJS) के संस्थापक आशुतोष महाराज पिछले 12 सालों से एक बंद चैंबर में लेटे हुए हैं।
ये कोई साधारण कमरा नहीं है, बल्कि एक हाई-टेक फ्रीजर है। इसका तापमान हमेशा -22 डिग्री सेल्सियस रहता है। विज्ञान की नजर में महाराज को 29 जनवरी 2014 को ही क्लीनिकली डेड यानि मृत घोषित कर दिया गया था। हालांकि लाखों भक्तों के लिए वे केवल गहरी समाधि में लीन हैं। भक्तों का मानना है कि महाराज जी ने अपनी मर्जी से शरीर त्यागकर समाधि ली है और वे एक दिन वापस लौटेंगे।
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फ्रीजर का पहरा और डॉक्टरों की निगरानी
आपको जानकर हैरानी होगी कि महाराज के शरीर को सुरक्षित रखने के लिए डेरे के अंदर सुरक्षा के बेहद कड़े इंतजाम किए गए हैं। पंजाब पुलिस के जवान हर एंट्री पॉइंट पर तैनात रहते हैं।
यहां सीसीटीवी कैमरों से निगरानी होती है। जिस चैंबर में महाराज का शरीर रखा है, वहां केवल 10 खास शिष्यों और डॉक्टरों को ही जाने की अनुमति है। बाकी भक्त केवल बाहर से ही दर्शन और प्रार्थना कर सकते हैं।
दिलचस्प बात ये है कि हर छह महीने में डॉक्टरों की एक टीम महाराज के शरीर का इंस्पेक्शन करती है। ये टीम अपनी रिपोर्ट पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट को सौंपती है ताकि कानून व्यवस्था बनी रहे।
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अदालती चक्कर और विरासत की लड़ाई
ये मामला केवल आस्था तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सालों तक अदालतों के चक्कर भी काटता रहा है। बिहार के दरभंगा निवासी दलीप झा ने दावा किया था कि वे आशुतोष महाराज के जैविक पुत्र हैं।
1970 के दशक में अपनी पत्नी और एक महीने के बेटे को छोड़कर वो अचानक गायब हो गए। दलीप ने हाई कोर्ट में अर्जी दी थी कि उन्हें पिता का शरीर अंतिम संस्कार के लिए सौंपा जाए। शुरुआत में अदालत ने अंतिम संस्कार का आदेश दिया, लेकिन बाद में इसे बदल दिया गया।
अब डेरे को चिकित्सा विशेषज्ञों की निगरानी में शरीर को सुरक्षित रखने की कानूनी अनुमति मिली हुई है। डेरे के अधिकारियों का कहना है कि महाराज पहले भी कई बार लंबी समाधि में जाते रहे हैं।
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बिना गुरु के बढ़ता सेल्फ एम्प्लॉयमेंट का मॉडल
हैरानी की बात ये है कि पिछले 12 सालों में इस संस्थान का साम्राज्य घटने के बजाय और बढ़ा है। पंजाब में करीब 40-50 लाख अनुयायियों के साथ ये डेरा अब अमेरिका, यूरोप और ऑस्ट्रेलिया तक फैल चुका है। खास बात ये है कि आशुतोष महाराज ने अपना कोई उत्तराधिकारी या सेकंड-इन-कमांड नियुक्त नहीं किया था।
डेरे का पूरा कामकाज 10 वरिष्ठ शिष्यों की एक कोर टीम बहुत ही अनुशासन के साथ संभालती है। ये डेरा अब एक सेल्फ-स्टाइल टाउनशिप बन चुका है। इसे पंजाब सरकार ने दिव्य ग्राम के रूप में रजिस्टर्ड किया है।
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गौशाला, ऑर्गेनिक खेती और अपना बिजनेस एम्पायर
रिपोर्ट्स बताती है कि, नूरमहल का ये कॉम्प्लेक्स करीब 100 एकड़ में फैला हुआ है। यहां हर चीज आधुनिक और व्यवस्थित है। ये उत्तर भारत की सबसे बड़ी गौशालाओं में से एक है।
यहां करीब एक हजार देसी गायें पाली जाती हैं। डेरा 300 एकड़ जमीन पर ऑर्गेनिक खेती करता है। यहां तक कि ड्रैगन फ्रूट जैसे फल उगाता है।
संस्थान की अपनी फार्मेसी है जो 250 से ज्यादा आयुर्वेदिक उत्पाद बनाती है जिनमें कई पेटेंट दवाएं भी शामिल हैं। इसके अलावा यहां अपने वर्कशॉप, रेस्टोरेंट और रहने के लिए हाई-टेक कमरे भी मौजूद हैं।
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वायलेंस और प्रोटेक्शन
रिपोर्ट के मुताबिक, नूरमहल से 3 किमी दूर स्थित ये डेरा हमेशा विवादों में रहा। सिख समुदाय के कुछ वर्गों के साथ उनके मतभेद Khalistan movement के दौरान और बढ़ गए। DJJS की स्थापना 1991 में हुई। लेकिन 2009 में लुधियाना में हुई हिंसक झड़पों के बाद तनाव चरम पर पहुंच गया।
इस रोचक किस्से हिंसा (feature) के बाद महाराज को Z-plus security दी गई। पंजाब की राजनीति में डेरों का बड़ा वोट बैंक होने के कारण उन्हें नेताओं का भारी समर्थन मिला। इससे उनकी सुरक्षा और प्रभाव बढ़ता गया। रोचक न्यूज
अन्य विवादित बाबा और उनके कारनामे
गुरमीत राम रहीम:
डेरा सच्चा सौदा प्रमुख को 2017 में साध्वियों के यौन शोषण और हत्या के मामले में दोषी करार दिया गया। रंगीन मिजाज और फिल्मी शौक रखने वाले इस बाबा को कोर्ट ने उम्रकैद की सजा सुनाई है और वह फिलहाल जेल में है।
आसाराम बापू:
करोड़ों अनुयायियों वाले इस बाबा को 2013 में एक नाबालिग लड़की के साथ बलात्कार के मामले में जोधपुर कोर्ट ने दोषी ठहराया। उन पर जमीन कब्जाने और बच्चों की संदिग्ध हत्याओं जैसे कई अन्य संगीन आरोप भी लगे, जिसके कारण वे अब आजीवन कारावास काट रहे हैं।
चंद्रास्वामी:
यह बाबा पूर्व प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव के बेहद करीब थे, लेकिन इनका नाम राजीव गांधी हत्याकांड के षड्यंत्र में भी उछला। हथियारों की दलाली, हवाला कारोबार और विदेशी मुद्रा कानून के उल्लंघन जैसे अंतरराष्ट्रीय विवादों ने इनकी छवि को पूरी तरह धूमिल कर दिया।
संत रामपाल:
सिंचाई विभाग के इंजीनियर से बाबा बने रामपाल ने हरियाणा के बरवाला में अपना किला बनाया, जहाँ पुलिस के साथ खूनी संघर्ष हुआ। उनके आश्रम से भारी मात्रा में हथियार और आपत्तिजनक दवाएं मिलीं; फिलहाल वे देशद्रोह और हत्या के मामले में जेल में बंद हैं।
नित्यानंद स्वामी:
एक अभिनेत्री के साथ कथित सेक्स सीडी वायरल होने के बाद यह बाबा विवादों में आए और उन पर धोखाधड़ी व अश्लीलता के केस चले। गिरफ्तारी और बेल के बाद वे भारत से फरार हो गए और अब सोशल मीडिया के जरिए अपना अलग 'कैलासा' देश चलाने का दावा करते हैं।
स्वामी भीमानंद (इच्छाधारी बाबा):
खुद को इच्छाधारी संत बताने वाले इस बाबा का असली नाम शिवमूरत द्विवेदी था, जो पहले एक होटल में गार्ड का काम करता था। इसे दिल्ली पुलिस ने प्रवचन की आड़ में हाई-प्रोफाइल सेक्स रैकेट और देह व्यापार चलाने के आरोप में गिरफ्तार किया था।
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