माइनस 22 डिग्री फ्रीजर में 12 साल से कैद हैं आशुतोष महाराज, भक्तों को उम्मीद एक दिन जागेंगे
Kaushiki | Jan 30, 2026, 13:30 IST
nurmahal
12 साल पहले स्वर्गवासी हो चुके आशुतोष महाराज के शिष्यों को भरोसा है कि वे समाधि में हैं। भक्त उनके लौटने का इंतजार कर रहे हैं। इसी उम्मीद में डेरा लगातार फल-फूल रहा है। आइए जानते हैं इस अनोखी कहानी के बारे में...
पंजाब का जालंधर जिला एक अनोखे इतिहास का गवाह बन रहा है। यहां के नूरमहल में एक ऐसा डेरा है, जहां वक्त थम गया है। यहां दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान (DJJS) के संस्थापक आशुतोष महाराज पिछले 12 सालों से एक बंद चैंबर में लेटे हुए हैं।
ये कोई साधारण कमरा नहीं है, बल्कि एक हाई-टेक फ्रीजर है। इसका तापमान हमेशा -22 डिग्री सेल्सियस रहता है। विज्ञान की नजर में महाराज को 29 जनवरी 2014 को ही क्लीनिकली डेड यानि मृत घोषित कर दिया गया था। हालांकि लाखों भक्तों के लिए वे केवल गहरी समाधि में लीन हैं। भक्तों का मानना है कि महाराज जी ने अपनी मर्जी से शरीर त्यागकर समाधि ली है और वे एक दिन वापस लौटेंगे।
![A photograph of Ashutosh Maharaj lying in a freezer has gone viral on social media. State officials have ordered his cremation, declaring him dead. His followers, however, reject the claim.]()
आपको जानकर हैरानी होगी कि महाराज के शरीर को सुरक्षित रखने के लिए डेरे के अंदर सुरक्षा के बेहद कड़े इंतजाम किए गए हैं। पंजाब पुलिस के जवान हर एंट्री पॉइंट पर तैनात रहते हैं।
यहां सीसीटीवी कैमरों से निगरानी होती है। जिस चैंबर में महाराज का शरीर रखा है, वहां केवल 10 खास शिष्यों और डॉक्टरों को ही जाने की अनुमति है। बाकी भक्त केवल बाहर से ही दर्शन और प्रार्थना कर सकते हैं।
दिलचस्प बात ये है कि हर छह महीने में डॉक्टरों की एक टीम महाराज के शरीर का इंस्पेक्शन करती है। ये टीम अपनी रिपोर्ट पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट को सौंपती है ताकि कानून व्यवस्था बनी रहे।
![Mahesh Kumar was born to Devanand and Mateshwari of Ishpur. He had nine siblings, including Dr Bhavendra Jha, former vice chancellor of Lal Bahadur Sanskrit Vidyapeeth, Delhi.]()
ये मामला केवल आस्था तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सालों तक अदालतों के चक्कर भी काटता रहा है। बिहार के दरभंगा निवासी दलीप झा ने दावा किया था कि वे आशुतोष महाराज के जैविक पुत्र हैं।
1970 के दशक में अपनी पत्नी और एक महीने के बेटे को छोड़कर वो अचानक गायब हो गए। दलीप ने हाई कोर्ट में अर्जी दी थी कि उन्हें पिता का शरीर अंतिम संस्कार के लिए सौंपा जाए। शुरुआत में अदालत ने अंतिम संस्कार का आदेश दिया, लेकिन बाद में इसे बदल दिया गया।
अब डेरे को चिकित्सा विशेषज्ञों की निगरानी में शरीर को सुरक्षित रखने की कानूनी अनुमति मिली हुई है। डेरे के अधिकारियों का कहना है कि महाराज पहले भी कई बार लंबी समाधि में जाते रहे हैं।
![Sri Satpal Maharaj (Right) initiated him into sanyas on 14 April 1973, instructing him to wear orange and preach, considering his educational background.]()
हैरानी की बात ये है कि पिछले 12 सालों में इस संस्थान का साम्राज्य घटने के बजाय और बढ़ा है। पंजाब में करीब 40-50 लाख अनुयायियों के साथ ये डेरा अब अमेरिका, यूरोप और ऑस्ट्रेलिया तक फैल चुका है। खास बात ये है कि आशुतोष महाराज ने अपना कोई उत्तराधिकारी या सेकंड-इन-कमांड नियुक्त नहीं किया था।
डेरे का पूरा कामकाज 10 वरिष्ठ शिष्यों की एक कोर टीम बहुत ही अनुशासन के साथ संभालती है। ये डेरा अब एक सेल्फ-स्टाइल टाउनशिप बन चुका है। इसे पंजाब सरकार ने दिव्य ग्राम के रूप में रजिस्टर्ड किया है।
![Ashutosh Maharaj’s ashram in Nurmahal spreads over 100 acres.]()
रिपोर्ट्स बताती है कि, नूरमहल का ये कॉम्प्लेक्स करीब 100 एकड़ में फैला हुआ है। यहां हर चीज आधुनिक और व्यवस्थित है। ये उत्तर भारत की सबसे बड़ी गौशालाओं में से एक है।
यहां करीब एक हजार देसी गायें पाली जाती हैं। डेरा 300 एकड़ जमीन पर ऑर्गेनिक खेती करता है। यहां तक कि ड्रैगन फ्रूट जैसे फल उगाता है।
संस्थान की अपनी फार्मेसी है जो 250 से ज्यादा आयुर्वेदिक उत्पाद बनाती है जिनमें कई पेटेंट दवाएं भी शामिल हैं। इसके अलावा यहां अपने वर्कशॉप, रेस्टोरेंट और रहने के लिए हाई-टेक कमरे भी मौजूद हैं।
![Divya Jyoti Jagrati Sansthan was established in 1991. Its headquarters opened in Delhi and Pitampura in 1997. Later, Ashutosh Maharaj made Nurmahal his base.]()
रिपोर्ट के मुताबिक, नूरमहल से 3 किमी दूर स्थित ये डेरा हमेशा विवादों में रहा। सिख समुदाय के कुछ वर्गों के साथ उनके मतभेद Khalistan movement के दौरान और बढ़ गए। DJJS की स्थापना 1991 में हुई। लेकिन 2009 में लुधियाना में हुई हिंसक झड़पों के बाद तनाव चरम पर पहुंच गया।
इस रोचक किस्सेहिंसा (feature) के बाद महाराज को Z-plus security दी गई। पंजाब की राजनीति में डेरों का बड़ा वोट बैंक होने के कारण उन्हें नेताओं का भारी समर्थन मिला। इससे उनकी सुरक्षा और प्रभाव बढ़ता गया। रोचक न्यूज
अन्य विवादित
भारत के पहले अखबार हिक्की बंगाल गजट की कहानी
जब अंग्रेजों के आगे नहीं झुके Lala Lajpat Rai
राष्ट्रपिता के आध्यात्मिक-राजनीतिक बलिदान का दिन
1950 की वो सुबह जब भारत बना दुनिया का सबसे बड़ा गणतंत्र
ये कोई साधारण कमरा नहीं है, बल्कि एक हाई-टेक फ्रीजर है। इसका तापमान हमेशा -22 डिग्री सेल्सियस रहता है। विज्ञान की नजर में महाराज को 29 जनवरी 2014 को ही क्लीनिकली डेड यानि मृत घोषित कर दिया गया था। हालांकि लाखों भक्तों के लिए वे केवल गहरी समाधि में लीन हैं। भक्तों का मानना है कि महाराज जी ने अपनी मर्जी से शरीर त्यागकर समाधि ली है और वे एक दिन वापस लौटेंगे।
A photograph of Ashutosh Maharaj lying in a freezer has gone viral on social media. State officials have ordered his cremation, declaring him dead. His followers, however, reject the claim.
फ्रीजर का पहरा और डॉक्टरों की निगरानी
यहां सीसीटीवी कैमरों से निगरानी होती है। जिस चैंबर में महाराज का शरीर रखा है, वहां केवल 10 खास शिष्यों और डॉक्टरों को ही जाने की अनुमति है। बाकी भक्त केवल बाहर से ही दर्शन और प्रार्थना कर सकते हैं।
दिलचस्प बात ये है कि हर छह महीने में डॉक्टरों की एक टीम महाराज के शरीर का इंस्पेक्शन करती है। ये टीम अपनी रिपोर्ट पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट को सौंपती है ताकि कानून व्यवस्था बनी रहे।
Mahesh Kumar was born to Devanand and Mateshwari of Ishpur. He had nine siblings, including Dr Bhavendra Jha, former vice chancellor of Lal Bahadur Sanskrit Vidyapeeth, Delhi.
अदालती चक्कर और विरासत की लड़ाई
1970 के दशक में अपनी पत्नी और एक महीने के बेटे को छोड़कर वो अचानक गायब हो गए। दलीप ने हाई कोर्ट में अर्जी दी थी कि उन्हें पिता का शरीर अंतिम संस्कार के लिए सौंपा जाए। शुरुआत में अदालत ने अंतिम संस्कार का आदेश दिया, लेकिन बाद में इसे बदल दिया गया।
अब डेरे को चिकित्सा विशेषज्ञों की निगरानी में शरीर को सुरक्षित रखने की कानूनी अनुमति मिली हुई है। डेरे के अधिकारियों का कहना है कि महाराज पहले भी कई बार लंबी समाधि में जाते रहे हैं।
Sri Satpal Maharaj (Right) initiated him into sanyas on 14 April 1973, instructing him to wear orange and preach, considering his educational background.
बिना गुरु के बढ़ता सेल्फ एम्प्लॉयमेंट का मॉडल
डेरे का पूरा कामकाज 10 वरिष्ठ शिष्यों की एक कोर टीम बहुत ही अनुशासन के साथ संभालती है। ये डेरा अब एक सेल्फ-स्टाइल टाउनशिप बन चुका है। इसे पंजाब सरकार ने दिव्य ग्राम के रूप में रजिस्टर्ड किया है।
Ashutosh Maharaj’s ashram in Nurmahal spreads over 100 acres.
गौशाला, ऑर्गेनिक खेती और अपना बिजनेस एम्पायर
यहां करीब एक हजार देसी गायें पाली जाती हैं। डेरा 300 एकड़ जमीन पर ऑर्गेनिक खेती करता है। यहां तक कि ड्रैगन फ्रूट जैसे फल उगाता है।
संस्थान की अपनी फार्मेसी है जो 250 से ज्यादा आयुर्वेदिक उत्पाद बनाती है जिनमें कई पेटेंट दवाएं भी शामिल हैं। इसके अलावा यहां अपने वर्कशॉप, रेस्टोरेंट और रहने के लिए हाई-टेक कमरे भी मौजूद हैं।
Divya Jyoti Jagrati Sansthan was established in 1991. Its headquarters opened in Delhi and Pitampura in 1997. Later, Ashutosh Maharaj made Nurmahal his base.
वायलेंस और प्रोटेक्शन
इस रोचक किस्सेहिंसा (feature) के बाद महाराज को Z-plus security दी गई। पंजाब की राजनीति में डेरों का बड़ा वोट बैंक होने के कारण उन्हें नेताओं का भारी समर्थन मिला। इससे उनकी सुरक्षा और प्रभाव बढ़ता गया। रोचक न्यूज
अन्य विवादित बाबा और उनके कारनामे
- गुरमीत राम रहीम:
डेरा सच्चा सौदा प्रमुख को 2017 में साध्वियों के यौन शोषण और हत्या के मामले में दोषी करार दिया गया। रंगीन मिजाज और फिल्मी शौक रखने वाले इस बाबा को कोर्ट ने उम्रकैद की सजा सुनाई है और वह फिलहाल जेल में है। - आसाराम बापू:
करोड़ों अनुयायियों वाले इस बाबा को 2013 में एक नाबालिग लड़की के साथ बलात्कार के मामले में जोधपुर कोर्ट ने दोषी ठहराया। उन पर जमीन कब्जाने और बच्चों की संदिग्ध हत्याओं जैसे कई अन्य संगीन आरोप भी लगे, जिसके कारण वे अब आजीवन कारावास काट रहे हैं। - चंद्रास्वामी:
यह बाबा पूर्व प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव के बेहद करीब थे, लेकिन इनका नाम राजीव गांधी हत्याकांड के षड्यंत्र में भी उछला। हथियारों की दलाली, हवाला कारोबार और विदेशी मुद्रा कानून के उल्लंघन जैसे अंतरराष्ट्रीय विवादों ने इनकी छवि को पूरी तरह धूमिल कर दिया। - संत रामपाल:
सिंचाई विभाग के इंजीनियर से बाबा बने रामपाल ने हरियाणा के बरवाला में अपना किला बनाया, जहाँ पुलिस के साथ खूनी संघर्ष हुआ। उनके आश्रम से भारी मात्रा में हथियार और आपत्तिजनक दवाएं मिलीं; फिलहाल वे देशद्रोह और हत्या के मामले में जेल में बंद हैं। - नित्यानंद स्वामी:
एक अभिनेत्री के साथ कथित सेक्स सीडी वायरल होने के बाद यह बाबा विवादों में आए और उन पर धोखाधड़ी व अश्लीलता के केस चले। गिरफ्तारी और बेल के बाद वे भारत से फरार हो गए और अब सोशल मीडिया के जरिए अपना अलग 'कैलासा' देश चलाने का दावा करते हैं। - स्वामी भीमानंद (इच्छाधारी बाबा):
खुद को इच्छाधारी संत बताने वाले इस बाबा का असली नाम शिवमूरत द्विवेदी था, जो पहले एक होटल में गार्ड का काम करता था। इसे दिल्ली पुलिस ने प्रवचन की आड़ में हाई-प्रोफाइल सेक्स रैकेट और देह व्यापार चलाने के आरोप में गिरफ्तार किया था।
भारत के पहले अखबार हिक्की बंगाल गजट की कहानी
जब अंग्रेजों के आगे नहीं झुके Lala Lajpat Rai
राष्ट्रपिता के आध्यात्मिक-राजनीतिक बलिदान का दिन
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