26 जनवरी का इतिहास: 1950 की वो सुबह जब भारत बना दुनिया का सबसे बड़ा गणतंत्र
Kaushiki | Jan 26, 2026, 08:00 IST
republic day
भारत 1950 में संविधान लागू कर गणतंत्र बना। डॉ. राजेन्द्र प्रसाद पहले राष्ट्रपति बने। आज डिजिटल इंडिया के दौर में गणतंत्र दिवस और भी भव्य हो गया है।
आज के दिन की कहानी: इतिहास के पन्ने बताते हैं कि 26 जनवरी 1950 की सुबह बेहद खास थी। वो सुबह कोई आम सुबह नहीं थी। बल्कि सदियों के अंधेरे के बाद आजादी का पहला सुनहरा सूरज था।
पुरानी यादों के झरोखे से देखें तो दिल्ली की कड़कड़ाती ठंड में भी लोगों के दिलों में देशभक्ति की गर्मी उफान मार रही थी। लाल किले की प्राचीर से लेकर गलियों तक। हर तरफ बस एक ही गूंज थी - हमारा अपना संविधान, हमारा अपना गणतंत्र।
ब्रिटिश हुकूमत की बेड़ियां टूट चुकी थीं। करोड़ों भारतीयों की आंखों में एक आत्मनिर्भर भारत का सपना पल रहा था। उस दिन भारत ने न केवल कानून की किताब अपनाई, बल्कि दुनिया को बता दिया कि अब हम अपने भाग्य के विधाता खुद हैं।
यह सिर्फ एक कानून की किताब नहीं थी, बल्कि करोड़ों भारतीयों का सपना था। उस ठंडी सुबह ने भारत के लिए एक नई उम्मीद और स्वाभिमान का सवेरा लाया। इस दिन भारत का अपना संविधान लागू हुआ और हम आधिकारिक तौर पर गणतंत्र बने। आइए गणतंत्र भारत के इस कहानी को जानें...
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पहला
उस सुबह सी. राजगोपालाचारी ने भारत के अंतिम गवर्नर जनरल का पद छोड़ दिया था। उसी दिन डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने भारत के पहले राष्ट्रपति के रूप में शपथ ली। वे भारत के पहले राष्ट्रपति बने और देश के संवैधानिक प्रमुख का कार्यभार संभाला।
दिल्ली के इरविन स्टेडियम में तिरंगा लहराया गया और 21 तोपों की सलामी दी गई। वह पल केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि करोड़ों भारतीयों के सपनों की उड़ान थी। संविधान लागू होते ही भारत ने अपनी पुरानी औपनिवेशिक बेड़ियां पूरी तरह से तोड़ दीं।
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1950 में ही सारनाथ के अशोक स्तंभ को भारत के राष्ट्रीय प्रतीक के रूप में चुना गया। यह प्रतीक शांति, शक्ति और न्याय के प्रति भारत की निष्ठा को दर्शाता है।
इसके साथ ही 'सत्यमेव जयते' को हमारा राष्ट्रीय आदर्श वाक्य बनाया गया। अशोक स्तंभ का चयन भारत की प्राचीन संस्कृति और आधुनिक लोकतंत्र का अद्भुत मेल था।
तीन शेरों वाली यह आकृति हमारी एकता और साहस का प्रतीक बन गई। इसने दुनिया को संदेश दिया कि नया भारत अपने प्राचीन गौरव को नहीं भूला है। इसके साथ ही भारतीय तिरंगे को दुनिया ने एक लोकतांत्रिक देश के झंडे के रूप में पहचाना।
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हमारा संविधान 2 साल 11 महीने और 18 दिन में बनकर तैयार हुआ था। डॉ. बी.आर. अंबेडकर ने इस विशाल दस्तावेज के जरिए हर नागरिक को समानता दी।
1950 में लागू हुए इस संविधान ने भारत को दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र बनाया। इसमें नागरिकों के मौलिक अधिकार और कर्तव्यों को बहुत ही विस्तार से समझाया गया है। इसी संविधान की वजह से आज हम अपनी बात कहने की आजादी रखते हैं।
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क्या आप जानते हैं कि पहली गणतंत्र दिवस परेड राजपथ (कर्तव्य पथ) पर नहीं हुई थी? 1950 में मुख्य समारोह दिल्ली के इर्विन स्टेडियम (अब मेजर ध्यानचंद स्टेडियम) में हुआ था।
राष्ट्रपति डॉ. राजेन्द्र प्रसाद को 21 तोपों की सलामी दी गई और तिरंगा फहराया गया। उस वक्त करीब 15 हजार लोगों ने अपनी आंखों से इतिहास को बनते देखा था।
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1950 से शुरू हुआ ये सफर आज 2026 में डिजिटल इंडिया के मुकाम पर है। आज की परेड में सिर्फ टैंक और हथियार नहीं, बल्कि भारत की तकनीकी शक्ति दिखती है।
अब हम अपनी परेड में स्वदेशी ड्रोन, एआई और डिजिटल गवर्नेंस की झांकियां पेश करते हैं। कर्तव्य पथ पर होने वाला आयोजन अब पूरी दुनिया में लाइव स्ट्रीम किया जाता है।
हमारी सेनाएं अब आधुनिक हथियारों और साइबर विंग के साथ देश की रक्षा करती हैं। उस ठंडी सुबह ने भारत के लिए एक नई उम्मीद और स्वाभिमान का सवेरा लाया।
इस दिन भारत का अपना संविधान लागू हुआ और हम आधिकारिक तौर पर गणतंत्र बने। अब गणतंत्र दिवस केवल एक रस्म नहीं, बल्कि विकसित भारत का सबसे बड़ा उत्सव है।
![Indian flag rules - Indian flag rules: तिरंगा फहराने के नियम क्या हैं? क्या रात में फहरा सकते हैं? कागज के झंडे का क्या करें? पढ़िए पूरी गाइड - Indian flag rules]()
भारतीय तिरंगा सिर्फ एक कपड़ा नहीं, हमारी आन-बान और शान है। राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा, हमारी संप्रभुता और अखंडता का सबसे बड़ा प्रतीक है। इसे फहराना हर भारतीय के लिए गर्व का क्षण होता है।
लेकिन क्या आप जानते हैं कि तिरंगे को सम्मान देने के लिए 'Flag Code of India' के तहत कुछ सख्त नियम बनाए गए हैं? अक्सर लोग 15 अगस्त (Independence Day) और 26 जनवरी (Republic Day) के समारोहों में झंडा फहराने के तरीके को एक ही समझ लेते हैं। जबकि इन दोनों के पीछे का विज्ञान और भावना बिल्कुल अलग है।
चाहे वह Flag Hoisting (ध्वजारोहण) हो या Flag Unfurling (झंडा फहराना)। इन नियमों का पालन करना न केवल कानूनी अनिवार्यता है। बल्कि ये हमारे देश के प्रति हमारे सम्मान को भी दर्शाता है। आइए, इन महत्वपूर्ण नियमों को विस्तार से समझते हैं...
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Hoisting vs Unfurling: बेसिक अंतर समझें
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केसरिया रंग हमेशा ऊपर रहे
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डैमेज या फटे हुए झंडे का क्या करें
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भारतीय तिरंगा सिर्फ तीन रंगों का मेल नहीं, बल्कि 140 करोड़ भारतीयों की रगों में दौड़ने वाला गर्व है। इसकी गरिमा बनाए रखने के लिए हर नागरिक को इसके प्रतीकों का मतलब पता होना चाहिए।
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आज का इतिहास मेंहर दिन का अपना एक अलग महत्व होता है। 26 जनवरी का दिन भी इतिहास (आज की यादगार घटनाएं) में कई महत्वपूर्ण घटनाओं के लिए दर्ज है। इस दिन दुनिया में कई ऐसी घटनाएं हुईं, जिन्होंने इतिहास की दिशा बदल दी।
आइए जानते हैं 26 जनवरी (आज की तारीख का इतिहास) को भारत और विश्व में घटी कुछ प्रमुख घटनाओं के बारे में, जो आपके सामान्य ज्ञान को बढ़ा सकती हैं-
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पुरानी यादों के झरोखे से देखें तो दिल्ली की कड़कड़ाती ठंड में भी लोगों के दिलों में देशभक्ति की गर्मी उफान मार रही थी। लाल किले की प्राचीर से लेकर गलियों तक। हर तरफ बस एक ही गूंज थी - हमारा अपना संविधान, हमारा अपना गणतंत्र।
ब्रिटिश हुकूमत की बेड़ियां टूट चुकी थीं। करोड़ों भारतीयों की आंखों में एक आत्मनिर्भर भारत का सपना पल रहा था। उस दिन भारत ने न केवल कानून की किताब अपनाई, बल्कि दुनिया को बता दिया कि अब हम अपने भाग्य के विधाता खुद हैं।
यह सिर्फ एक कानून की किताब नहीं थी, बल्कि करोड़ों भारतीयों का सपना था। उस ठंडी सुबह ने भारत के लिए एक नई उम्मीद और स्वाभिमान का सवेरा लाया। इस दिन भारत का अपना संविधान लागू हुआ और हम आधिकारिक तौर पर गणतंत्र बने। आइए गणतंत्र भारत के इस कहानी को जानें...
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पहला गणतंत्र दिवस का वो ऐतिहासिक पल
दिल्ली के इरविन स्टेडियम में तिरंगा लहराया गया और 21 तोपों की सलामी दी गई। वह पल केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि करोड़ों भारतीयों के सपनों की उड़ान थी। संविधान लागू होते ही भारत ने अपनी पुरानी औपनिवेशिक बेड़ियां पूरी तरह से तोड़ दीं।
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राष्ट्रीय प्रतीकों का जन्म: अशोक स्तंभ की पहचान
इसके साथ ही 'सत्यमेव जयते' को हमारा राष्ट्रीय आदर्श वाक्य बनाया गया। अशोक स्तंभ का चयन भारत की प्राचीन संस्कृति और आधुनिक लोकतंत्र का अद्भुत मेल था।
तीन शेरों वाली यह आकृति हमारी एकता और साहस का प्रतीक बन गई। इसने दुनिया को संदेश दिया कि नया भारत अपने प्राचीन गौरव को नहीं भूला है। इसके साथ ही भारतीय तिरंगे को दुनिया ने एक लोकतांत्रिक देश के झंडे के रूप में पहचाना।
70 साल बाद उम्मीदों पर कितना खरा उतरा भारतीय संविधान | The Caravan
संविधान: लोकतंत्र की सबसे मजबूत नींव
1950 में लागू हुए इस संविधान ने भारत को दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र बनाया। इसमें नागरिकों के मौलिक अधिकार और कर्तव्यों को बहुत ही विस्तार से समझाया गया है। इसी संविधान की वजह से आज हम अपनी बात कहने की आजादी रखते हैं।
10 बजकर 18 मिनट पर गणतंत्र बना था भारत, पहली परेड में 3000 जवान-100 विमान, जानें कैसा था पहला Republic Day - republic day interesting facts gantantra diwas parade history ntc - AajTak
1950 से 2026 की डिजिटल क्रांति तक
राष्ट्रपति डॉ. राजेन्द्र प्रसाद को 21 तोपों की सलामी दी गई और तिरंगा फहराया गया। उस वक्त करीब 15 हजार लोगों ने अपनी आंखों से इतिहास को बनते देखा था।
एक के बाद एक धराशायी होते लोकतंत्र के 4 स्तम्भ' - 4 pillars of democracy falling one after the other-mobile
जब आधिकारिक तौर पर गणतंत्र बना भारत
अब हम अपनी परेड में स्वदेशी ड्रोन, एआई और डिजिटल गवर्नेंस की झांकियां पेश करते हैं। कर्तव्य पथ पर होने वाला आयोजन अब पूरी दुनिया में लाइव स्ट्रीम किया जाता है।
हमारी सेनाएं अब आधुनिक हथियारों और साइबर विंग के साथ देश की रक्षा करती हैं। उस ठंडी सुबह ने भारत के लिए एक नई उम्मीद और स्वाभिमान का सवेरा लाया।
इस दिन भारत का अपना संविधान लागू हुआ और हम आधिकारिक तौर पर गणतंत्र बने। अब गणतंत्र दिवस केवल एक रस्म नहीं, बल्कि विकसित भारत का सबसे बड़ा उत्सव है।
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शान का प्रतीक: तिरंगा
लेकिन क्या आप जानते हैं कि तिरंगे को सम्मान देने के लिए 'Flag Code of India' के तहत कुछ सख्त नियम बनाए गए हैं? अक्सर लोग 15 अगस्त (Independence Day) और 26 जनवरी (Republic Day) के समारोहों में झंडा फहराने के तरीके को एक ही समझ लेते हैं। जबकि इन दोनों के पीछे का विज्ञान और भावना बिल्कुल अलग है।
चाहे वह Flag Hoisting (ध्वजारोहण) हो या Flag Unfurling (झंडा फहराना)। इन नियमों का पालन करना न केवल कानूनी अनिवार्यता है। बल्कि ये हमारे देश के प्रति हमारे सम्मान को भी दर्शाता है। आइए, इन महत्वपूर्ण नियमों को विस्तार से समझते हैं...
Har Ghar Tiranga: सरकार ने झंडा नियमों में किया अहम बदलाव, अब अपने घरों में दिन या रात कभी भी फहरा सकेंगे तिरंगा- Explained
Hoisting vs Unfurling: बेसिक अंतर समझें
- Flag Hoisting (ध्वजारोहण): यह 15 अगस्त (स्वतंत्रता दिवस) पर होता है। इसमें झंडा पोल के नीचे बंधा होता है, जिसे रस्सी खींचकर ऊपर ले जाया जाता है और फिर फहराया जाता है। यह आजादी और नए राष्ट्र के उदय का प्रतीक है। स्वतंत्रता दिवस पर देश के प्रधानमंत्री ध्वजारोहण करते हैं।
- Flag Unfurling (झंडा फहराना): यह 26 जनवरी (गणतंत्र दिवस) पर होता है। इसमें (26 January) झंडा पहले से ही पोल के ऊपर पर बंधा होता है। राष्ट्रपति बस रस्सी खींचकर उसे खोलते हैं। यह इस बात का प्रतीक है कि देश पहले से ही आजाद है और अब हम अपना संविधान सेलिब्रेट कर रहे हैं।
- फ्लैग कोड के हिसाब से झंडा हमेशा खादी, कॉटन, सिल्क या ऊन का होना चाहिए। हालांकि, अब पॉलिस्टर के झंडों की भी अनुमति है। झंडे का शेप हमेशा रेक्टेंगुलर (आयताकार) होगा। उसका रेशियो 3:2 होना चाहिए।
क्या रात में भी छत पर फहरा सकते हैं तिरंगा? पहले जान लें ये जरूरी बातें - is it right or wrong to hoist the tricolor at night know what the law
केसरिया रंग हमेशा ऊपर रहे
- झंडा फहराते समय सबसे जरूरी बात यह है कि Saffron (केसरिया) रंग हमेशा टॉप पर होना चाहिए। इसे कभी भी उल्टा (हरा रंग ऊपर) नहीं फहराना चाहिए।
- तिरंगा हमेशा ऐसी जगह फहराया जाए जहां से वह स्पष्ट रूप से दिखे। झंडे के ऊपर या उसके बराबर में कोई दूसरा झंडा नहीं होना चाहिए। तिरंगा हमेशा अन्य सभी झंडों से ऊंचा रहेगा।
- पहले नियम था कि झंडा केवल सूर्योदय से सूर्यास्त तक ही फहराया जा सकता है। लेकिन 2022 के संशोधन के बाद, अब 'Har Ghar Tiranga' अभियान के तहत अगर झंडा खुले में या किसी नागरिक के घर पर फहराया जाता है। तो उसे दिन और रात दोनों समय फहराया जा सकता है। रात में फहराए जाने वाले तिरंगे के पास रोशनी का उचित प्रबंध होना चाहिए।
Independence Day 2022: Changes in rules for Independence Day now tricolor can be hoisted day and night | Jansatta
डैमेज या फटे हुए झंडे का क्या करें
- कभी भी कटा-फटा, गंदा या झुका हुआ झंडा नहीं फहराना चाहिए। अगर झंडा खराब हो गया है, तो उसे सड़क पर या कचरे में नहीं फेंकना चाहिए। इसे एकांत में पूरी गरिमा के साथ मर्यादित तरीके से डिस्पोज करना चाहिए।
- तिरंगे का इस्तेमाल किसी डेकोरेशन, यूनिफॉर्म या एक्सेसरी के रूप में नहीं किया जा सकता। झंडे पर कुछ भी लिखना या उस पर कोई विज्ञापन छापना कानूनन अपराध है। झंडे का इस्तेमाल किसी चीज को ढंकने के लिए भी नहीं होना चाहिए।
Har-Ghar Tiranga: तिरंगे को दिन-रात फहराये जाने की अनुमति मिलने के बाद नवीन जिंदल ने जताई खुशी, जानिए क्या है नया नियम - Har Ghar Tiranga Naveen Jindal expressed happiness ...
तिरंगे के कुछ नियम
- तीन रंगों का संगम: तिरंगे में सबसे ऊपर केसरिया (Saffron) शक्ति और साहस का, बीच में सफेद (White) शांति और सच्चाई का, और सबसे नीचे हरा (Green) देश की खुशहाली और विकास का प्रतीक है।
- अशोक चक्र (The Wheel of Law): सफेद पट्टी के केंद्र में गहरे नीले रंग का 'अशोक चक्र' है जिसमें 24 तीलियां होती हैं। यह चक्र गतिशीलता का प्रतीक है, जो संदेश देता है कि रुकने का नाम मृत्यु है और बढ़ते रहने का नाम जीवन।
- डिजाइनर
पिंगली वेंकैया : तिरंगे (तिरंगा डिजाइन)का वर्तमान स्वरूप महान स्वतंत्रता सेनानी पिंगली वेंकैया ने डिजाइन किया था। इसे 22 जुलाई 1947 को संविधान सभा द्वारा आधिकारिक तौर पर अपनाया गया था। - आधा झुका हुआ झंडा (Flag at Half-Mast): तिरंगा झंडा को केवल राष्ट्रीय शोक के समय ही आधा झुकाया जाता है। इसके अलावा किसी भी स्थिति में झंडा झुका हुआ नहीं होना चाहिए।
- शौर्य और बलिदान का प्रतीक: तिरंगा हमारे उन वीरों की याद दिलाता है जिन्होंने देश की आजादी के लिए अपना लहू दिया। युद्ध में शहीद हुए सैनिकों के पार्थिव शरीर को तिरंगे में लपेटना उन्हें दिया जाने वाला सर्वोच्च सम्मान है।
Reference Links
- Doordarshan National (YouTube): https://www.youtube.com/@DoordarshanNational
- Prasar Bharati Archives: https://prasarbharati.gov.in/archives/
- MyGov India (Republic Day Portal): https://www.mygov.in/rd2026
- President of India Official Website: https://presidentofindia.nic.in/
आज ही के दिन देश में पहली पंचवर्षीय योजना प्रकाशित की गई थी, पढ़ें आज का इतिहास
26 जनवरी की महत्वपूर्ण ऐतिहासिक घटनाएं
आइए जानते हैं 26 जनवरी (आज की तारीख का इतिहास) को भारत और विश्व में घटी कुछ प्रमुख घटनाओं के बारे में, जो आपके सामान्य ज्ञान को बढ़ा सकती हैं-
विश्व इतिहास की प्रमुख घटनाएं...
- 1500: स्पैनिश खोजकर्ता विसेंट यानेज़ पिनज़ोन ब्राजील के उत्तरी तट पर पहुँचने वाले पहले यूरोपीय बने।
- 1556: मुगल सम्राट हुमायूं की दिल्ली में अपने पुस्तकालय की सीढ़ियों से गिरने के कारण मृत्यु हुई।
- 1564: लिवोनियन युद्ध के दौरान लिथुआनियाई सेना ने रूसी सेना को करारी शिकस्त दी।
- 1699: कार्लोविट्ज़ की संधि के साथ मध्य यूरोप में ओटोमन साम्राज्य का वर्चस्व समाप्त हुआ।
- 1736: पोलैंड के राजा स्टैनिस्लाव प्रथम ने अपना सिंहासन त्याग दिया।
- 1748: ब्रिटेन, नीदरलैंड, ऑस्ट्रिया और सार्डिनिया ने फ्रांस के विरुद्ध एक गठबंधन संधि की।
- 1788: कैप्टन आर्थर फिलिप ने सिडनी में पहली स्थायी यूरोपीय बस्ती बसाई और ऑस्ट्रेलिया ब्रिटिश उपनिवेश बना।
- 1837: मिशिगन को संयुक्त राज्य अमेरिका के 26वें राज्य के रूप में शामिल किया गया।
- 1841: ब्रिटेन ने औपचारिक रूप से हांगकांग को अपनी कॉलोनी (उपनिवेश) घोषित किया।
- 1888: इंग्लैंड में लॉन टेनिस एसोसिएशन की स्थापना की गई।
- 1905: दक्षिण अफ्रीका की खदान में दुनिया का सबसे बड़ा हीरा 'कलिनन' (3106 कैरेट) मिला।
- 1931: हंगरी और ऑस्ट्रिया के बीच शांति संधि पर हस्ताक्षर हुए।
- 1949: पालोमर ऑब्ज़र्वेटरी (कैलिफ़ोर्निया) में हेल टेलीस्कोप ने पहली बार अंतरिक्ष का अवलोकन किया।
- 1956: इटली के कोर्तिना डी अम्पेज़ो में शीतकालीन ओलंपिक खेलों की शुरुआत हुई।
- 1978: मिस्र और इजराइल के बीच ऐतिहासिक 'कैम्प डेविड' समझौता हुआ।
- 1988: ब्रॉडवे का सबसे लंबा चलने वाला नाटक 'द फैंटम ऑफ द ओपेरा' पहली बार मंचित हुआ।
- 1998: अमेरिकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन ने मोनिका लेविंस्की के साथ संबंधों से सार्वजनिक रूप से इनकार किया।
- 1998: टेक्नोलॉजी कंपनी इंटेल ने अपना 333 मेगाहर्ट्ज पेंटियम II चिप लॉन्च किया।
- 2004: अफगानिस्तान के राष्ट्रपति हामिद करजई ने देश के नए लोकतांत्रिक संविधान पर हस्ताक्षर किए।
- 2006: संचार सेवा की दिग्गज कंपनी वेस्टर्न यूनियन ने अपनी टेलीग्राम सेवा स्थायी रूप से बंद की।
- 2010: जेम्स कैमरन की फिल्म 'अवतार' ने कमाई के मामले में 'टाइटेनियम' का रिकॉर्ड तोड़कर इतिहास रचा।
- 2014: टेनिस खिलाड़ी स्टैनिस्लास वावरिंका ने राफेल नडाल को हराकर अपना पहला ग्रैंड स्लैम जीता।
भारत की महत्वपूर्ण घटनाएं...
- 1950: भारत का अपना संविधान लागू हुआ और देश एक लोकतांत्रिक गणराज्य बना।
- 1950: डॉ. राजेन्द्र प्रसाद ने भारत के पहले राष्ट्रपति के रूप में शपथ ली।
- 1950: सारनाथ के अशोक स्तंभ को भारत के राष्ट्रीय प्रतीक चिह्न के रूप में अपनाया गया।
- 1950: सी. राजगोपालाचारी ने भारत के अंतिम गवर्नर जनरल का पद त्याग दिया।
- 1981: भारत में क्षेत्रीय हवाई सेवा 'वायुदूत' की शुरुआत हुई।
- 2001: गुजरात के भुज में आए विनाशकारी भूकंप में करीब 20,000 लोगों की जान चली गई।
- 2014: अंडमान और निकोबार में एक पर्यटक नौका डूबने से 21 लोगों की दुखद मृत्यु हुई।
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