बीबीसी के पत्रकार मार्क टुली का निधन, भोपाल गैस कांड के कवरेज में थी महत्वपूर्ण भूमिका

भारत में बीबीसी के पूर्व ब्यूरो चीफ सर मार्क टुली का रविवार को निधन हो गया। वह 1984 भोपाल गैस त्रासदी पर रिपोर्टिंग करने वाले प्रमुख पत्रकार थे।

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Sandeep Kumar
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News in Short

  • सर मार्क टुली का 25 जनवरी 2026 को निधन हुआ, उम्र 90 साल थी।
  • टुली ने 1984 की भोपाल गैस त्रासदी की रिपोर्टिंग की थी।
  • छह दशक तक भारत में रहने के बाद, उन्होंने स्वतंत्र पत्रकारिता की।
  • टुली ने भुट्टो और गांधी की हत्या तक को कवर किया।
  • उन्हें 2002 में नाइटहुड और 2005 में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया।

News in Detail

भारत में बीबीसी के पूर्व ब्यूरो चीफ और वरिष्ठ पत्रकार सर मार्क टुली का रविवार, 25 जनवरी 2026 को निधन हो गया। बीबीसी के अनुसार, 90 वर्षीय टुली ने नई दिल्ली में आखिरी सांस ली। टुली ने 1984 की भोपाल गैस त्रासदी की रिपोर्टिंग की थी।

बीबीसी के दिल्ली ब्यूरो प्रमुख के रूप में, उन्होंने गैस रिसाव की भयावहता को उजागर किया। उन्होंने आपदा के बाद पीड़ितों के लिए मदद की पैरवी की। 2016 में, उन्होंने बीबीसी रेडियो 4 पर 'भोपाल मेडिकल अपील' के लिए चैरिटी अपील पढ़ी।

गैस त्रासदी के लिए कांग्रेस को ठहराया जिम्मेदार

भोपाल गैस त्रासदी को उन्होंने अपने करियर का सबसे दुखद क्षण बताया, जिसके लिए कांग्रेस को जिम्मेदार ठहराया। इंदिरा गांधी की हत्या की कवरेज में भी उनकी भूमिका यादगार रही, हालांकि उस दिन वे मसूरी में थे। महात्मा गांधी के प्रशंसक टुली ने कहा कि उनकी सोच को अपनाना हर भारतीय का प्रयास होना चाहिए।

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टुली छह दशक से अधिक भारत में रहे

सर मार्क टुली, जो छह दशक से अधिक भारत में रहे। उन्होंने कहा था कि भारत में विभिन्न धर्मों के लोग एक साथ रहते हैं। बीबीसी के दक्षिण एशिया ब्यूरो प्रमुख के रूप में, उन्होंने भारत की प्रगति को सराहा। उन्होंने कृषि में बदलाव और समावेशी विकास की वकालत भी की। टुली साहब ने नए भारत को निरंतरता का नाम दिया, जहां समृद्धि सभी तक पहुंचे। उनकी विनम्रता और गहराई आज भी प्रेरित करती है। भारत उनके बिना अधूरा सा लगता है।

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स्वतंत्र पत्रकारिता की

बीबीसी से अलग होने के बाद मार्क टुली स्वतंत्र पत्रकारिता कर रहे थे। 2009 में एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा था कि उनका करियर सिर्फ मेहनत का नतीजा नहीं था। उन्होंने इसमें किस्मत और ईश्वर का हाथ माना था। मार्क टुली उस दौर के पत्रकार थे, जब भारत में टेलीविजन नहीं था। रेडियो केवल सरकार के हाथ में था। उन्होंने अपनी पहचान का श्रेय बीबीसी को भी दिया था।

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घमंड होना पत्रकारिता के लिए अच्छा नहीं

टुली ने पत्रकारिता में पहचान मिलने पर कहा था कि ऐसा कुछ नहीं है। घमंड होना पत्रकारिता के लिए अच्छा नहीं था। उन्होंने घमंड को सबसे बड़ा पाप बताया था। भुट्टो की फांसी की स्टोरी को लेकर उन्होंने कहा था कि वह मेरी स्टोरी नहीं थी, वह भुट्टो की स्टोरी थी।

कलकत्ता में पैदा हुए थे मार्क टुली

मार्क टुली का जन्म कलकत्ता में हुआ था। उन्होंने अपनी स्कूलिंग दार्जिलिंग से की थी। ट्रिनिटी हॉल, कैम्ब्रिज से हिस्ट्री और थियोलॉजी में मास्टर्स किया था। उन्होंने दो साल तक फर्स्ट रॉयल ड्रैगून में काम किया। फिर वह एबेफील्ड सोसाइटी के रीजनल डायरेक्टर बन गए। 1964 में वह बीबीसी (BBC) में शामिल हुए। वह चार दशकों तक बीबीसी में रहे। 1972 से 1994 तक वह बीबीसी के दिल्ली संवाददाता थे।

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टुली ने लिखी थी कई किताबें

इस दौरान उन्होंने भारत और दक्षिण एशियाई क्षेत्र के कई मुद्दों को कवर किया। उन्होंने कई किताबें लिखी हैं, जिनमें द लाइव्स ऑफ जीसस, नो फुल स्टॉप्स इन इंडिया, इंडियाज अनएंडिंग जर्नी और लेटेस्ट नॉन-स्टॉप इंडिया शामिल हैं। मार्क को 2002 में नाइटहुड की उपाधि मिली। 2005 में उन्हें पद्म भूषण से सम्मानित किया गया।

हिंदी-बंगाली सीखने से रोका गया था

अपने बचपन और मां से जुड़ा एक किस्सा साझा करते हुए उन्होंने बताया कि उनका जन्म कोलकाता के टॉलीगंज में हुआ था। उनके पिता एक कंपनी में ग्लैंडर रॉबर्ट्सनॉब में पार्टनर थे। उनकी मां का जन्म बांग्लादेश के ऑकेरा जंक्शन में हुआ था। उनका बचपन कलकत्ता में बीता था। उन्होंने बताया कि वह भारतीय बच्चों के साथ नहीं खेलते थे, केवल अंग्रेज बच्चों के साथ रहते थे। उन्होंने यह भी बताया कि उन्हें हिंदी पढ़ने-लिखने से रोका जाता था। एक बार जब वह हिंदी बोल रहे थे, तब उनकी देखरेख में रखी गई आया ने थप्पड़ मार दिया था।

भुट्टो और गांधी की हत्या तक को कवर किया

टुली वह पत्रकार थे जिन्होंने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री जुल्फिकार अली भुट्टो के मुकदमे से लेकर इंदिरा गांधी की हत्या तक को कवर किया। उनके पूर्व सहयोगी सतीश जैकब ने उनके निधन की पुष्टि की है। सर मार्क टुली का निधन एक युग के अंत का प्रतीक है। भारत के इस प्रिय पत्रकार को याद करते हुए, उनके साक्षात्कार की यादें ताजा हो जाती हैं, जिसमें उन्होंने भारत की आत्मा को गहराई से उकेरा।

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