रेलवे की बदहाल व्यवस्था, 201 स्टेशनों पर शौचालय की कमी, 458 पर नलों से बह रहा जहर

Aman Vaishnav | Aug 17, 2026, 07:55 IST
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रेलवे की बदहाल व्यवस्था
रेलवे की बदहाल व्यवस्था

भारतीय रेलवे के सैकड़ों स्टेशनों पर पेयजल में ई-कोलाई बैक्टीरिया पाया गया है। साथ ही शौचालय जैसी मूलभूत सुविधाओं की भारी कमी का भी खुलासा हुआ है।

देश के रेलवे स्टेशनों पर यात्रियों को मिलने वाली सुविधाओं की पोल खुल गई है। संसद में पेश हुई एक रिपोर्ट में कई चौंकाने वाली बातें सामने आई हैं।

रिपोर्ट के अनुसार कई स्टेशनों के पीने के पानी में खतरनाक बैक्टीरिया मिला है। शौचालय, मूत्रालय और नल जैसी बुनियादी सुविधाएं भी अधूरी पाई गई हैं। यह रिपोर्ट यात्री सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती है।

संसद में पेश हुई रिपोर्ट

बता दें कि नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG – Comptroller and Auditor General of India) ने यह रिपोर्ट 12 अगस्त को संसद में पेश की थी।

रिपोर्ट का नाम भारतीय रेलवे के गैर-उपनगरीय रेलवे स्टेशनों पर यात्री सुविधाएं और स्वच्छता है। इसमें रेलवे स्टेशनों की असल स्थिति की गहराई से पड़ताल की गई है।

कैग ने देश भर के 512 गैर-उपनगरीय स्टेशनों का निरीक्षण किया। इनमें से 458 स्टेशन, यानी 89 प्रतिशत से ज्यादा, न्यूनतम सुविधाओं से वंचित मिले। कहीं सेवाएं पूरी तरह गायब थीं। कहीं सेवाएं तय मानकों से नीचे थीं।

बड़े स्टेशनों पर भी कमी

कई अहम एनएसजी-1 (NSG-1 – Non-Suburban Grade 1) स्टेशनों पर भी सुविधाएं अधूरी मिलीं। इनमें छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस, हावड़ा, सियालदह, नई दिल्ली और मुंबई सेंट्रल शामिल हैं। यहां बैठने की जगह, मूत्रालय, शौचालय, कूड़ेदान और ट्रेन संकेतक बोर्ड तक ठीक से मौजूद नहीं थे।

पानी में मिला खतरनाक बैक्टीरिया

कैग रिपोर्टके मुताबिक छह क्षेत्रों के 59 केंद्रों पर पेयजल की जांच हुई। कई जगह पानी में ई-कोलाई बैक्टीरिया मिला। यह बैक्टीरिया शरीर में जाने पर गंभीर संक्रमण फैला सकता है।

दक्षिण रेलवे के कोयंबटूर और पलक्कड़ जंक्शन पर कूलरों के पानी में ई-कोलाई मिला। दक्षिण मध्य रेलवे के हैदराबाद स्टेशन पर भी यही समस्या पाई गई।

सेंट्रल रेलवे के सीएसएमटी (CSMT – Chhatrapati Shivaji Maharaj Terminus), भिवंडी रोड, कल्याण और लोनावला में भी वाटर कूलर के नमूने फेल हुए। पूर्वी रेलवे के मधुपुर स्टेशन पर भी यही बैक्टीरिया मिला।

रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि 2022-23 में आठ जोन के 49 स्टेशनों पर और 2023-24 में नौ जोन के 56 स्टेशनों पर प्लेटफॉर्म के नलों से लिए नमूनों में बैक्टीरिया मिला।

सुविधाओं की भारी कमी

कैग की रिपोर्ट में कई आंकड़े दिए गए हैं। 201 स्टेशनों पर शौचालय नहीं हैं। 403 स्टेशनों पर मूत्रालय नहीं मिले। 2 हजार 35 स्टेशनों पर पीने के पानी के नल तक नहीं हैं।

इसके अलावा जांचे गए स्टेशनों में 12 पर पानी के नल, आठ पर पंखे और आठ पर वाटर कूलर नदारद मिले। पांच स्टेशनों पर साइनबोर्ड तक नहीं थे। यह छोटी लगने वाली कमियां यात्रियों के रोजमर्रा के सफर को मुश्किल बना देती हैं।

2018 में तय हुए थे मानक

बता दें कि रेलवे बोर्ड ने अप्रैल 2018 में स्टेशनों के लिए न्यूनतम सुविधाओं के मानक तय किए थे। सभी स्टेशनों को 31 अगस्त 2018 तक इन्हें लागू करने का निर्देश दिया गया था।

इनमें पेयजल, प्रतीक्षा कक्ष, बैठने की जगह, प्लेटफॉर्म कैनोपी, मूत्रालय, शौचालय, ऊंचा प्लेटफॉर्म, पंखा, फुट ओवरब्रिज, कूड़ेदान, घड़ी और अनाउंसमेंट सिस्टम शामिल थे। सात साल बाद भी कई स्टेशनों पर ये मानक पूरे नहीं हुए हैं।

रोज सफर करते हैं करोड़ों यात्री

देश में कुल 5 हजार 908 गैर-उपनगरीय स्टेशन हैं। 2023-24 में रेलवे ने रोज 7 हजार 424 से ज्यादा गैर-उपनगरीय ट्रेनें चलाईं। उस साल करीब 292.4 करोड़ यात्रियों ने सफर किया। इतनी बड़ी संख्या को देखते हुए कैग ने स्वच्छता और सुविधाओं को बेहद जरूरी बताया है।

कैग ने दी सलाह

कैग ने पानी की गुणवत्ता को खास तौर पर गंभीर मुद्दा बताया है। इसने जल आपूर्ति की नियमित जांच और तय मानकों के मुताबिक पेयजल परीक्षण की सिफारिश की है।

यह रिपोर्ट मुख्य रूप से 2019-20 से 2023-24 तक के आंकड़ों पर आधारित है। कुछ पुरानी और हाल की घटनाओं को भी इसमें शामिल किया गया है।

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