Census 2027: 16 साल बाद जनगणना, इस बार क्या-क्या होगा नया? जानिए पिछली बार से कितनी अलग होगी प्रक्रिया
Amresh Kushwaha | Nov 02, 2026, 23:38 IST
Census 2027 में पहली बार डिजिटल जनगणना होगी। ऑनलाइन जानकारी देने की सुविधा के साथ जाति से जुड़े आंकड़े भी जुटाए जाएंगे।
देश में जनगणना 2027 की तैयारियां तेज हो गई हैं। इस बार लोगों की गिनती का तरीका पहले से काफी अलग होगा। जनगणना के दूसरे चरण में सरकारी कर्मचारी घर-घर जाकर परिवारों से जानकारी जुटाएंगे। इसके साथ ही लोगों को ऑनलाइन अपनी जानकारी भरने की सुविधा भी मिलेगी। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, दूसरे चरण की जनगणना 25 जनवरी से 28 फरवरी 2027 तक चलेगी।
इसके बाद 1 से 5 मार्च तक समीक्षा का काम किया जाएगा। जनगणना के लिए आधार तिथि 1 मार्च 2027 की रात 12 बजे तय की गई है।
खास बात यह है कि इस बार देश में पहली बार पूरी तरह डिजिटल तरीके से जनगणना की जाएगी। इसमें जाति से जुड़ी जानकारी भी दर्ज की जाएगी। इससे पहले 2021 में जनगणना होनी थी, लेकिन कोरोना महामारी के कारण इसे टालना पड़ा था।
भारत में जनगणना का काम दो हिस्सों में किया जा रहा है। पहले चरण में मकानों की सूची तैयार करने और आवास से जुड़ी जानकारी जुटाने का काम किया गया था। यह प्रक्रिया 1 अप्रैल 2026 से शुरू होकर सितंबर तक चली थी।
अब दूसरे चरण में देश की आबादी की गिनती होगी। इसमें परिवार के सदस्यों, उनकी सामाजिक और अन्य जरूरी जानकारियों को दर्ज किया जाएगा।
घर-घर जाकर जानकारी लेने से पहले 10 से 24 जनवरी 2027 तक लोगों को ऑनलाइन जानकारी भरने का मौका मिलेगा। इसके बाद सरकारी कर्मचारी घर पहुंचकर विवरण की जांच करेंगे।
जनगणना का सामान्य कार्यक्रम सभी राज्यों में एक जैसा नहीं रहेगा। भारत के महापंजीयक एवं जनगणना आयुक्त मृत्युंजय कुमार नारायण की ओर से जारी अधिसूचना के मुताबिक, मणिपुर को अगली घोषणा तक इस कार्यक्रम से अलग रखा गया है।
इसके अलावा गोवा, उत्तर प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड, लद्दाख और हिमाचल प्रदेश तथा जम्मू-कश्मीर के बर्फबारी वाले क्षेत्रों में भी अलग कार्यक्रम लागू होगा।
रिपोर्टों के अनुसार, चुनाव वाले राज्यों में घर-घर जाकर जानकारी जुटाने का काम 35 दिनों में पूरा किया जाएगा। वहीं, बर्फीले क्षेत्रों के लिए मौसम को ध्यान में रखते हुए अलग व्यवस्था की जाएगी।
पहली बार पूरी तरह
इस बार जनगणना में सबसे बड़ा बदलाव डिजिटल तकनीक का इस्तेमाल है। गृह मंत्रालय के मुताबिक, यह देश की पहली डिजिटल जनगणना होगी।
इसमें कर्मचारी मोबाइल के जरिए लोगों की जानकारी दर्ज करेंगे। इसके लिए एक डिजिटल पोर्टल बनाया गया है। साथ ही सैटेलाइट तस्वीरों की मदद से तैयार नक्शों का इस्तेमाल भी किया जाएगा।
इससे जनगणना के काम की निगरानी करना और आंकड़ों को सुरक्षित रखना आसान हो सकता है। इस पूरे अभियान के लिए केंद्र सरकार ने 11 हजार 718 करोड़ रुपए का बजट मंजूर किया है।
इस बार लोगों को एक नई सुविधा भी दी गई है, जिसे Self-Enumeration कहा गया है। इसके तहत परिवार के सदस्य सरकारी कर्मचारियों के आने से पहले खुद ऑनलाइन अपनी जानकारी भर सकेंगे।
यह सुविधा पूरी तरह वैकल्पिक होगी। यानी किसी के लिए ऑनलाइन जानकारी देना अनिवार्य नहीं है। इसके लिए पोर्टल 16 भाषाओं में उपलब्ध रहेगा।
ऑनलाइन फॉर्म भरने के बाद परिवार को एक यूनिक सेल्फ-एन्यूमरेशन आईडी मिलेगी। बाद में जनगणना कर्मचारी घर पहुंचकर दी गई जानकारी का मिलान और सत्यापन करेंगे।
जनगणना 2027 का एक और बड़ा बदलाव जातियों की गिनती है। 30 अप्रैल 2025 को कैबिनेट कमेटी ऑन पॉलिटिकल अफेयर्स ने जनगणना में जाति गणना को शामिल करने का फैसला लिया था।
आजादी के बाद यह पहली जनगणना होगी, जिसमें पूरी आबादी की जाति से जुड़ी जानकारी दर्ज की जाएगी। अब तक सामान्य जनगणना में अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के आंकड़े ही दर्ज किए जाते थे।
इस बार लोगों से उनकी जाति पूछी जाएगी और वही जानकारी दर्ज की जाएगी, जो वे खुद बताएंगे। प्रश्नावली में लोगों को पहले से OBC जैसी अलग-अलग श्रेणियों में बांटने के बजाय उनकी बताई गई जाति का विवरण लिया जाएगा।
जाति के आंकड़े सामने आने के बाद आरक्षण, सरकारी योजनाओं और संसाधनों के बंटवारे को लेकर चर्चा बढ़ सकती है।
जनगणना 2027 में लोगों से पूछे जाने वाले सवालों की संख्या भी बढ़ाई गई है। इस बार कुल 40 सवाल तय किए गए हैं, जबकि 2011 की जनगणना में 29 सवाल पूछे गए थे।
इसमें जाति के साथ शिक्षा, साक्षरता और डिजिटल साक्षरता से जुड़ी जानकारी भी शामिल होगी। आधार और वोटर आईडी जैसी जानकारी शामिल होने की बात भी सामने आई है।
इस बार ऑनलाइन जानकारी भरने की सुविधा और दूसरे चरण की प्रक्रिया को मिलाकर जनगणना का काम करीब 50 दिनों तक चलेगा। इसके मुकाबले 2011 में यह प्रक्रिया करीब 20 दिनों में पूरी हुई थी।
केंद्र सरकार ने जनगणना 2027 के लिए 11,718 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं। यह देश में अब तक होने वाले सबसे बड़े जनगणना अभियानों में से एक है।
भारत में पिछली जनगणना साल 2011 में हुई थी। उस समय देश की कुल आबादी करीब 1.21 अरब दर्ज की गई थी। इसमें 62.32 करोड़ पुरुष और 58.75 करोड़ महिलाएं थीं। उस दौरान देश में परिवारों की कुल संख्या 24.95 करोड़ थी।
साल 2011 में जाति से जुड़े आंकड़े मुख्य जनगणना के बजाय अलग से सामाजिक-आर्थिक और जाति जनगणना (SECC) के माध्यम से जुटाए गए थे।
जनगणना 2027 की प्रक्रिया को लेकर कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि सरकार जनगणना के जरिए नागरिकता से जुड़ी जानकारी जुटाने की कोशिश कर रही है।
उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक खबर का हवाला देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह की आलोचना की।
जिस खबर का उन्होंने जिक्र किया, उसमें दावा किया गया था कि उत्तर प्रदेश में जनगणना कर्मचारियों के प्रशिक्षण के दौरान एक प्रशिक्षक ने कहा कि फिलहाल नागरिकता साबित करने वाला कोई एक तय दस्तावेज नहीं है। अगर जनगणना के दौरान सही जानकारी दर्ज होती है, तो भविष्य में इसका इस्तेमाल नागरिकता के प्रमाण के रूप में किया जा सकता है।
जयराम रमेश ने इस पर आपत्ति जताते हुए कहा कि नागरिकता का फैसला चुनाव आयोग या जनगणना प्रक्रिया के माध्यम से नहीं किया जा सकता। उन्होंने केंद्र सरकार के इस कथित कदम को गैरकानूनी बताया है।
जनगणना 2027 में डिजिटल तकनीक, ऑनलाइन जानकारी और जाति गणना जैसे बड़े बदलाव किए जा रहे हैं। ऐसे में सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह होगी कि सभी लोगों की जानकारी सही तरीके से दर्ज हो और डिजिटल व्यवस्था बिना किसी परेशानी के काम करे।
इसके अलावा जाति से जुड़े आंकड़ों को लेकर भी देशभर में चर्चा होने की संभावना है। अब सबकी नजर इस बात पर रहेगी कि नई व्यवस्था के तहत जनगणना का काम कितनी आसानी से और कितनी सटीकता के साथ पूरा होता है।
खास बात यह है कि इस बार देश में पहली बार पूरी तरह डिजिटल तरीके से जनगणना की जाएगी। इसमें जाति से जुड़ी जानकारी भी दर्ज की जाएगी। इससे पहले 2021 में जनगणना होनी थी, लेकिन कोरोना महामारी के कारण इसे टालना पड़ा था।
दो चरणों में पूरी होगी जनगणना
अब दूसरे चरण में देश की आबादी की गिनती होगी। इसमें परिवार के सदस्यों, उनकी सामाजिक और अन्य जरूरी जानकारियों को दर्ज किया जाएगा।
घर-घर जाकर जानकारी लेने से पहले 10 से 24 जनवरी 2027 तक लोगों को ऑनलाइन जानकारी भरने का मौका मिलेगा। इसके बाद सरकारी कर्मचारी घर पहुंचकर विवरण की जांच करेंगे।
कुछ राज्यों में अलग होगा जनगणना का कार्यक्रम
इसके अलावा गोवा, उत्तर प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड, लद्दाख और हिमाचल प्रदेश तथा जम्मू-कश्मीर के बर्फबारी वाले क्षेत्रों में भी अलग कार्यक्रम लागू होगा।
रिपोर्टों के अनुसार, चुनाव वाले राज्यों में घर-घर जाकर जानकारी जुटाने का काम 35 दिनों में पूरा किया जाएगा। वहीं, बर्फीले क्षेत्रों के लिए मौसम को ध्यान में रखते हुए अलग व्यवस्था की जाएगी।
पहली बार पूरी तरह Digital Census
इसमें कर्मचारी मोबाइल के जरिए लोगों की जानकारी दर्ज करेंगे। इसके लिए एक डिजिटल पोर्टल बनाया गया है। साथ ही सैटेलाइट तस्वीरों की मदद से तैयार नक्शों का इस्तेमाल भी किया जाएगा।
इससे जनगणना के काम की निगरानी करना और आंकड़ों को सुरक्षित रखना आसान हो सकता है। इस पूरे अभियान के लिए केंद्र सरकार ने 11 हजार 718 करोड़ रुपए का बजट मंजूर किया है।
Self-Enumeration से लोग खुद भर सकेंगे जानकारी
यह सुविधा पूरी तरह वैकल्पिक होगी। यानी किसी के लिए ऑनलाइन जानकारी देना अनिवार्य नहीं है। इसके लिए पोर्टल 16 भाषाओं में उपलब्ध रहेगा।
ऑनलाइन फॉर्म भरने के बाद परिवार को एक यूनिक सेल्फ-एन्यूमरेशन आईडी मिलेगी। बाद में जनगणना कर्मचारी घर पहुंचकर दी गई जानकारी का मिलान और सत्यापन करेंगे।
पहली बार पूरी आबादी की जाति से जुड़ी जानकारी जुटाई जाएगी
आजादी के बाद यह पहली जनगणना होगी, जिसमें पूरी आबादी की जाति से जुड़ी जानकारी दर्ज की जाएगी। अब तक सामान्य जनगणना में अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के आंकड़े ही दर्ज किए जाते थे।
इस बार लोगों से उनकी जाति पूछी जाएगी और वही जानकारी दर्ज की जाएगी, जो वे खुद बताएंगे। प्रश्नावली में लोगों को पहले से OBC जैसी अलग-अलग श्रेणियों में बांटने के बजाय उनकी बताई गई जाति का विवरण लिया जाएगा।
जाति के आंकड़े सामने आने के बाद आरक्षण, सरकारी योजनाओं और संसाधनों के बंटवारे को लेकर चर्चा बढ़ सकती है।
इस बार पूछे जाएंगे 40 सवाल
इसमें जाति के साथ शिक्षा, साक्षरता और डिजिटल साक्षरता से जुड़ी जानकारी भी शामिल होगी। आधार और वोटर आईडी जैसी जानकारी शामिल होने की बात भी सामने आई है।
इस बार ऑनलाइन जानकारी भरने की सुविधा और दूसरे चरण की प्रक्रिया को मिलाकर जनगणना का काम करीब 50 दिनों तक चलेगा। इसके मुकाबले 2011 में यह प्रक्रिया करीब 20 दिनों में पूरी हुई थी।
जनगणना के लिए 11,718 करोड़ रुपये का बजट
भारत में पिछली जनगणना साल 2011 में हुई थी। उस समय देश की कुल आबादी करीब 1.21 अरब दर्ज की गई थी। इसमें 62.32 करोड़ पुरुष और 58.75 करोड़ महिलाएं थीं। उस दौरान देश में परिवारों की कुल संख्या 24.95 करोड़ थी।
साल 2011 में जाति से जुड़े आंकड़े मुख्य जनगणना के बजाय अलग से सामाजिक-आर्थिक और जाति जनगणना (SECC) के माध्यम से जुटाए गए थे।
जनगणना के तरीके पर कांग्रेस ने उठाए सवाल
उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक खबर का हवाला देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह की आलोचना की।
जिस खबर का उन्होंने जिक्र किया, उसमें दावा किया गया था कि उत्तर प्रदेश में जनगणना कर्मचारियों के प्रशिक्षण के दौरान एक प्रशिक्षक ने कहा कि फिलहाल नागरिकता साबित करने वाला कोई एक तय दस्तावेज नहीं है। अगर जनगणना के दौरान सही जानकारी दर्ज होती है, तो भविष्य में इसका इस्तेमाल नागरिकता के प्रमाण के रूप में किया जा सकता है।
जयराम रमेश ने इस पर आपत्ति जताते हुए कहा कि नागरिकता का फैसला चुनाव आयोग या जनगणना प्रक्रिया के माध्यम से नहीं किया जा सकता। उन्होंने केंद्र सरकार के इस कथित कदम को गैरकानूनी बताया है।
अब आगे क्या होगी सबसे बड़ी चुनौती?
इसके अलावा जाति से जुड़े आंकड़ों को लेकर भी देशभर में चर्चा होने की संभावना है। अब सबकी नजर इस बात पर रहेगी कि नई व्यवस्था के तहत जनगणना का काम कितनी आसानी से और कितनी सटीकता के साथ पूरा होता है।
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