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News in short
- कृषि मंत्री ने कहा कि हिंदी बोलने वालों को नौकरी नहीं मिलती और वे मजदूरी करते हैं।
- बीजेपी और DMK ने मंत्री के बयान का विरोध किया।
- बयान विधानसभा चुनाव से कुछ हफ्ते पहले आया है, जहां भाषा एक बड़ा मुद्दा है।
- केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि किसी भी भाषा को थोपने का सवाल नहीं है।
- तमिलनाडु में सरकार की भाषा नीति में तमिल और अंग्रेजी को प्राथमिकता दी जाती है।
News in Detail
तमिलनाडु के कृषि मंत्री एमआरके पन्नीरसेल्वम ने बयान दिया हैं। उन्होंने कहा कि उत्तर भारत से आए लोग केवल हिंदी जानते हैं। इस वजह से उन्हें अच्छी नौकरियां नहीं मिलतीं। वे टेबल साफ करने, मजदूरी करने या पानी पूरी बेचते हैं। पन्नीरसेल्वम ने बुधवार को यह बातें एक सार्वजनिक कार्यक्रम में कही। उन्होंने कहा कि तमिलनाडु की दो-भाषा नीति के कारण हमारे बच्चे विदेशों में काम कर रहे हैं।
बीजेपी और विपक्षी पार्टी DMK नेता के बयान का विरोध कर रहे हैं। तमिलनाडु बीजेपी ने सोशल मीडिया X पर वीडियो शेयर किया। उन्होंने लिखा कि यह व्यक्तिगत टिप्पणी नहीं, बल्कि एक पैटर्न है। भाजपा ने कहा कि DMK के नेता उत्तर भारतीयों और हिंदी बोलने वालों का मजाक उड़ाते हैं। जब तमिलनाडु में प्रवासी मजदूरों के खिलाफ हिंसा बढ़ रही है, तो ऐसे बयान गैर-जिम्मेदाराना हैं।
मंत्री के बयान पर क्या बोले अन्य नेता
- केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने कहा कि कुछ नेता बयान देकर सुर्खियों में रहना चाहते हैं। एनडीए सरकार प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में 'सबका साथ, सबका विकास' के सिद्धांत पर चल रही है।
- समाजवादी पार्टी के सांसद अवधेश प्रसाद ने इस बयान को घटिया बताया। उन्होंने कहा कि उत्तर भारत ने देश के आधे से अधिक प्रधानमंत्रियों को जन्म दिया है। यह अपमान है।
- कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम ने कहा कि तमिलनाडु को अन्य राज्यों के कामगारों की जरूरत है। उन्होंने कहा कि कामगारों का स्वागत है और वे राज्य में सुरक्षित हैं।
- जेडीयू सांसद संजय कुमार झा ने कहा कि उत्तर भारतीयों ने जहां भी काम किया, वहां अर्थव्यवस्था को मजबूत किया। उन्होंने कांग्रेस से इस पर प्रतिक्रिया देने की बात की।
- बीजेपी सांसद संजय जायसवाल ने कहा कि डीएमके नेताओं की टिप्पणियां उनकी मानसिकता को दर्शाती हैं। उन्होंने कहा कि इस बार तमिलनाडु में डीएमके का सफाया होना चाहिए।
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तमिलनाडु में भाषा हमेशा एक मुद्दा
यह बयान विधानसभा चुनाव से कुछ हफ्ते पहले आया है। सत्तारूढ़ DMK कांग्रेस के साथ गठबंधन में है, लेकिन सीट बंटवारे पर मतभेद हैं। DMK लगातार दूसरी बार सत्ता में लौटने की कोशिश कर रही है। AIADMK ने बीजेपी के साथ गठबंधन किया है। तमिलनाडु में भाषा हमेशा एक भावनात्मक मुद्दा रहा है। इस बार भी यह चुनाव प्रचार का बड़ा मुद्दा बनने की संभावना है। इस बहस के केंद्र में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) है।
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सरकारी स्कूलों में तमिल और अंग्रेजी
दक्षिण भारत के राज्यों ने हमेशा हिंदी थोपने का विरोध किया है। तमिलनाडु में 1930 और 1960 के दशक में भाषा को लेकर दंगे हुए थे। राज्य के सरकारी स्कूलों में तमिल और अंग्रेजी पढ़ाई जाती है। शिक्षा मंत्री अंबिल महेश पोय्यामोझी ने कहा कि इससे छात्र अपनी भाषा और संस्कृति से जुड़े रहते हैं। वे अंग्रेजी सीखकर दुनिया से जुड़ पाते हैं।
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भाषा को थोपने का सवाल नहीं
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने तमिलनाडु के विरोध पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि किसी भी भाषा को थोपने का सवाल नहीं है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति का उद्देश्य विदेशी भाषाओं पर निर्भरता कम करना है। इसका मकसद छात्रों को अपनी भाषाई जड़ों से जोड़ना है।
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