/sootr/media/media_files/2026/02/05/baisa-2026-02-05-18-35-19.jpg)
Photograph: (the sootr)
News In Short
- साध्वी प्रेम बाईसा की मौत के मामले में एसआईटी ने डीएनए और अन्य सैंपल्स की एफएसएल में भेजी गई जांच।
- एसआईटी ने साध्वी के पिता और केयर टेकर का पॉलीग्राफ टेस्ट कराने का भी निर्णय लिया।
- जहर की पुष्टि के लिए 35 सैंपल भेजे गए, जिनमें बर्तन, चादर, तौलिया और दवाइयों की बोतलें शामिल।
- वेजाइनल स्वाब सैंपल की जांच के जरिए यह पता लगाने की कोशिश कि मानव सीमन मौजूद था या नहीं।
- जांच प्रक्रिया में लग सकता है 7 से 10 दिन का समय, हर एंगल से मामले की हो रही जांच।
News In Detail
राजस्थान के जोधपुर में साध्वी प्रेम बाईसा की मौत की मिस्ट्री खोलने के लिए एसआईटी पॉलीग्राफ टेस्ट का सहारा लेगी। उसने संदेह के दायरे में आए साध्वी के पिता और आश्रम केयरटेकर का पॉलीग्रफ टेस्ट कराने का निर्णय निया है। इस मामले में एसआईटी ने डीएनए जांच, विसरा और अन्य महत्वपूर्ण सैंपल्स को एफएसएल को भेज रखा है।
डीएनए जांच की प्रक्रिया शुरू
साध्वी प्रेम बाईसा की मौत की जांच के लिए एसआईटी ने उनके बाल और अन्य उपयोग की गई वस्तुओं के सैंपल एफएसएल को भेजे हैं। विसरा जांच के लिए भी सैंपल भेजे गए है। एफएसएल के निदेशक डॉ. अजय शर्मा ने बताया कि इस जांच में जहर की पुष्टि करने के लिए 35 सैंपल भेजे हैं। इनमें बर्तन, आश्रम की मिट्टी, चादर, तौलिया, कंघा, डस्टबिन, इंजेक्शन की सीरींज और दवाइयों की बोतलें शामिल हैं।
जहर की होगी जांच
एफएसएल के निदेशक डॉ. अजय शर्मा ने बताया कि सैंपल में शरीर के प्रमुख अंगों, जैसे लीवर, फेफड़े, हार्ट और आंत के सैंपल भी शामिल हैं। इन सैंपल्स से यह निर्धारित किया जाएगा कि साध्वी को जहर दिया गया था या नहीं। इसके अलावा, एसआईटी ने अस्थमा से संबंधित पुरानी दवाओं का भी परीक्षण कराने का आदेश दिया है। इस जांच में 7 से 10 दिनों का समय लग सकता है।
वेजाइनल स्वाब सैंपल की जांच
डॉ. अजय शर्मा ने यह भी बताया कि साध्वी प्रेम बाईसा के वेजाइनल स्वाब सैंपल की जांच की जा रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि इसमें मानव सीमन मौजूद है या नहीं। यदि सीमन की पुष्टि होती है, तो पुलिस संबंधित व्यक्तियों के सैंपल लेकर डीएनए मिलान कर सकती है। यह जांच एक अहम कदम हो सकती है, ताकि सच्चाई का पर्दाफाश किया जा सके।
हर एंगल से जांच जारी
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल किसी भी नतीजे पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। इस पूरे मामले की जांच एसआईटी हर एंगल से कर रही है। जब तक सभी कड़ियां नहीं जुड़ जातीं, तब तक किसी भी संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। साध्वी प्रेम बाईसा की मौत अब सिर्फ एक सामान्य घटना नहीं, बल्कि एक रहस्यमय केस बन चुकी है। इसका सच सामने लाने के लिए एसआईटी पूरी गंभीरता से काम कर रही है।
कैसे हुई थी प्रेम बाईसा की मौत
साध्वी प्रेम बाइसा की तबियत 28 जनवरी को ख़राब हुई थी। इसके बाद कम्पाउंडर ने उन्हें दो इंजेकशन स्टेरॉयड डेक्सोना और दर्द निवारक डायनपार दिए गए थे। इसके करीब 20 मिनट बाद सूचना मिली कि साध्वी की तबीयत अचानक और भी बिगड़ गई है। उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया। जहां डॉक्टर ने उन्हें मृत घोषित कर दिया
पॉलीग्राफ टेस्ट क्या होता है?
पॉलीग्राफ टेस्ट, जिसे आमतौर पर "लाइ डिटेक्टर टेस्ट" भी कहा जाता है। एक वैज्ञानिक उपकरण होता है जो शरीर की शारीरिक प्रतिक्रियाओं का माप लेकर यह निर्धारित करता है कि व्यक्ति सच बोल रहा है या झूठ। यह टेस्ट मुख्य रूप से तीन शारीरिक संकेतों पर आधारित होता है:
- दिल की धड़कन – दिल की धड़कन में परिवर्तन।
- श्वसन दर – सांसों की गति में बदलाव।
- पसीने की उत्पत्ति – पसीने की मात्रा का माप।
पॉलीग्राफ टेस्ट कैसे काम करता है?
जब कोई व्यक्ति झूठ बोलता है, तो उसके शरीर में कुछ शारीरिक बदलाव होते हैं, जैसे कि दिल की धड़कन तेज हो जाना, सांसों का तेज होना या पसीने का अधिक होना। पॉलीग्राफ इन संकेतों को रिकॉर्ड करता है और उसे एक ग्राफ पर प्रदर्शित करता है। इससे यह पता चल सकता है कि व्यक्ति सच बोल रहा है या झूठ।
सच्चाई का पता कैसे लगाते हैं?
शारीरिक प्रतिक्रिया का मूल्यांकन: टेस्ट के दौरान जब व्यक्ति से सवाल पूछे जाते हैं, तो शरीर की शारीरिक प्रतिक्रियाओं का मूल्यांकन किया जाता है। यदि किसी सवाल का जवाब देने पर शारीरिक प्रतिक्रियाएँ सामान्य से ज्यादा होती हैं, तो इसका मतलब हो सकता है कि व्यक्ति झूठ बोल रहा है या वह सवाल उसे तनावपूर्ण लग रहा है।
संदिग्ध संकेतों की पहचान: अगर किसी विशेष सवाल का जवाब देते वक्त व्यक्ति की शारीरिक प्रतिक्रियाएँ आमतौर पर बढ़ जाती हैं, तो यह संकेत हो सकता है कि वह सवाल व्यक्ति के लिए किसी तरह का दबाव या तनाव उत्पन्न कर रहा है, जो आमतौर पर झूठ बोलने की स्थिति में होता है।
तुलना और विश्लेषण: पॉलीग्राफ के परिणामों की तुलना यह देखने के लिए की जाती है कि किस सवाल पर शारीरिक प्रतिक्रियाएँ ज्यादा थीं और किस पर कम। इस तरह से यह पता चलता है कि किस सवाल पर व्यक्ति ने असामान्य शारीरिक प्रतिक्रियाएँ दीं, जो संभावित रूप से झूठ बोलने का संकेत हो सकती हैं।
ये भी पढ़े:-
राजस्थान बोर्ड परीक्षा: आंसरशीट में होंगे 4-4 पेज कम, पहली बार कॉपी में होगा बार कोड
एमपी, सीजी और राजस्थान में बदल रहा मौसम: घना कोहरा, ठंड और बारिश का अलर्ट जारी
विश्वेन्द्र सिंह की बढ़ती भगवा निकटता, क्या बदलने वाले हैं राजस्थान के सियासी समीकरण?
/sootr/media/agency_attachments/dJb27ZM6lvzNPboAXq48.png)
Follow Us