अब साल में 2 बार एडमिशन दे सकेंगे विश्वविद्यालय व कॉलेज, UGC ने दी इजाजत
Jitendra Shrivastava | Jun 11, 2024, 21:02 IST
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देश-दुनिया। विश्वविद्यालयों के रेगुलर कोर्सेज में छात्र-छात्राओं को साल में दो बार एडमिशन लेने का मौका मिलेगा। यूजीसी ने विश्वविद्यालयों और कॉलेजों को साल में दो बार प्रवेश लेने की अनुमति दे दी है। 2024-25 से ही यह सुविधा शुरू हो जाएगी
NEWDELHI. अब यूनिवर्सिटी और कॉलेज में साल में 2 बार एडमिशन लेने का मौका मिलेगा। यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन यानी UGC ने यूनिवर्सिटीज और हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूट्स में साल में दो बार एडमिशन की प्रक्रिया शुरू करने की मंजूरी दे दी है। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के अध्यक्ष एम जगदीश कुमार ने मंगलवार को यह जानकारी दी। उच्च शिक्षा संस्थानों में शैक्षणिक वर्ष 2024-25 से ही यह सुविधा शुरू हो जाएगी।
कुमार ने बताया कि यह निर्णय 5 मई को आयोजित यूजीसी की बैठक के दौरान लिया गया था। वर्तमान में विश्वविद्यालय और कॉलेज हर साल जुलाई-अगस्त में रेगुलर कोर्सेज में छात्रों को एडमिशन देते हैं और भारत में सभी उच्च शिक्षा संस्थानों में जुलाई-अगस्त से सेशन शुरू होता है और मई-जून में समाप्त होता है। पिछले साल, यूजीसी ने शैक्षणिक वर्ष के दौरान जनवरी और जुलाई में दो बार ओपन एंड डिस्टेंस लर्निंग (ओडीएल) और ऑनलाइन मोड में छात्रों को दाखिला देने की अनुमति दी थी। यूजीसी के अध्यक्ष एम जगदीश कुमार ने कहा कि पिछले वर्ष के फैसले का फायदा लगभग पांच लाख स्टूडेंट्स को मिला। उन्होंने एक साल का इंतजार नहीं कर पड़ा। उन्हें अकादमिक वर्ष के पूछ में ही अपने डिग्री कोर्स में शामिल होने में मदद मिली।
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कुमार ने कहा कि यूजीसी द्वारा ओपन एंड डिस्टेंस लर्निंग (ओडीएल) और ऑनलाइन मोड के लिए एक वर्ष में दो बार एडमिशन लेने की अनुमति देने के बाद यूजीसी पोर्टल पर उच्च शिक्षा संस्थानों द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, जुलाई 2022 में कुल 19,73,056 छात्रों का एडमिशन हुआ और जनवरी 2023 में ओडीएल और ऑनलाइन कोर्सेज अतिरिक्त 4,28,854 छात्र शामिल हुए।” यूजीसी अध्यक्ष ने कहा कि इस शानदार रिजल्ट को देखते हुए काउंसिल ने रेगुलर कोर्सेज के लिए भी साल में दो बार एडमिशन (जनवरी-फरवरी और जुलाई -अगस्त) लिए जाने की अनुमति देने का निर्णय लिया है। उच्च शिक्षा संस्थानों में शैक्षणिक वर्ष 2024-25 से ही यह सुविधा शुरू हो जाएगी।
साल में दो बार यूनिवर्सिटी एडमिशन होने से उन स्टूडेंट्स को फायदा होगा जिनके 12वीं बोर्ड रिजल्ट देरी से घोषित हुए हैं या फिर हेल्थ या निजी समस्याओं के चलते वह एग्जाम में नहीं बैठ सका था। दो बार एडमिशन होने से इंडस्ट्री साल में दो बार कैंपस प्लेसमेंट के लिए आएगी, इससे संस्थान में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। कुमार ने कहा कि दुनिया भर के विश्वविद्यालय पहले से ही द्विवार्षिक (छह छह माह में) एडमिशन सिस्टम का पालन कर रहे हैं। यदि भारतीय उच्च शिक्षा संस्थान द्विवार्षिक एडमिशन प्रक्रिया को अपनाते हैं, तो हमारे उच्च शिक्षा संस्थान अपने अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और छात्र आदान-प्रदान को बढ़ा सकते हैं। इससे हमारी वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता में सुधार होगा, और हम वैश्विक शैक्षिक मानकों के अनुरूप होंगे।"
UGC ने 2 अप्रैल को PhD एडमिशन के नियमों में भी बदलाव किया है। 2024-25 सेशन से PhD एडमिशन के लिए नेशनल एलिजिबिलिटी टेस्ट यानी NET के स्कोर स्वीकार किए जाएंगे। अभी PhD कोर्सेज में दाखिले के लिए यूनिवर्सिटीज अलग-अलग एडमिशन टेस्ट आयोजित करती थीं। ऐसे में नई व्यवस्था से अब PhD कैंडिडेट्स को एडमिशन के लिए एक से ज्यादा एग्जाम्स नहीं देने होंगे। ये फैसला NEP 2020 के तहत लिया गया है। 13 मार्च को आयोजित UGC की 578वीं बैठक में ये फैसला लिया गया। इसका सुझाव एक एक्सपर्ट कमेटी द्वारा दिया गया था। UGC NET साल में दो बार जून और दिसंबर में आयोजित किया जाता है। NET स्कोरकार्ड की मदद से कैंडिडेट्स जूनियर रिसर्च फेलोशिप (JRF) और असिस्टेंट प्रोफेसर की भर्तियों के लिए एलिजिबिल होते हैं।
जनवरी और जुलाई में दो बार होंगे एडमिशन
कुमार ने बताया कि यह निर्णय 5 मई को आयोजित यूजीसी की बैठक के दौरान लिया गया था। वर्तमान में विश्वविद्यालय और कॉलेज हर साल जुलाई-अगस्त में रेगुलर कोर्सेज में छात्रों को एडमिशन देते हैं और भारत में सभी उच्च शिक्षा संस्थानों में जुलाई-अगस्त से सेशन शुरू होता है और मई-जून में समाप्त होता है। पिछले साल, यूजीसी ने शैक्षणिक वर्ष के दौरान जनवरी और जुलाई में दो बार ओपन एंड डिस्टेंस लर्निंग (ओडीएल) और ऑनलाइन मोड में छात्रों को दाखिला देने की अनुमति दी थी। यूजीसी के अध्यक्ष एम जगदीश कुमार ने कहा कि पिछले वर्ष के फैसले का फायदा लगभग पांच लाख स्टूडेंट्स को मिला। उन्होंने एक साल का इंतजार नहीं कर पड़ा। उन्हें अकादमिक वर्ष के पूछ में ही अपने डिग्री कोर्स में शामिल होने में मदद मिली।
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2024-25 से ही यह सुविधा शुरू हो जाएगी
कुमार ने कहा कि यूजीसी द्वारा ओपन एंड डिस्टेंस लर्निंग (ओडीएल) और ऑनलाइन मोड के लिए एक वर्ष में दो बार एडमिशन लेने की अनुमति देने के बाद यूजीसी पोर्टल पर उच्च शिक्षा संस्थानों द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, जुलाई 2022 में कुल 19,73,056 छात्रों का एडमिशन हुआ और जनवरी 2023 में ओडीएल और ऑनलाइन कोर्सेज अतिरिक्त 4,28,854 छात्र शामिल हुए।” यूजीसी अध्यक्ष ने कहा कि इस शानदार रिजल्ट को देखते हुए काउंसिल ने रेगुलर कोर्सेज के लिए भी साल में दो बार एडमिशन (जनवरी-फरवरी और जुलाई -अगस्त) लिए जाने की अनुमति देने का निर्णय लिया है। उच्च शिक्षा संस्थानों में शैक्षणिक वर्ष 2024-25 से ही यह सुविधा शुरू हो जाएगी।
उन स्टूडेंट्स को फायदा होगा जिनके रिजल्ट देरी से घोषित हुए
साल में दो बार यूनिवर्सिटी एडमिशन होने से उन स्टूडेंट्स को फायदा होगा जिनके 12वीं बोर्ड रिजल्ट देरी से घोषित हुए हैं या फिर हेल्थ या निजी समस्याओं के चलते वह एग्जाम में नहीं बैठ सका था। दो बार एडमिशन होने से इंडस्ट्री साल में दो बार कैंपस प्लेसमेंट के लिए आएगी, इससे संस्थान में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। कुमार ने कहा कि दुनिया भर के विश्वविद्यालय पहले से ही द्विवार्षिक (छह छह माह में) एडमिशन सिस्टम का पालन कर रहे हैं। यदि भारतीय उच्च शिक्षा संस्थान द्विवार्षिक एडमिशन प्रक्रिया को अपनाते हैं, तो हमारे उच्च शिक्षा संस्थान अपने अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और छात्र आदान-प्रदान को बढ़ा सकते हैं। इससे हमारी वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता में सुधार होगा, और हम वैश्विक शैक्षिक मानकों के अनुरूप होंगे।"
इसी साल बदला है PhD एडमिशन का नियम
UGC ने 2 अप्रैल को PhD एडमिशन के नियमों में भी बदलाव किया है। 2024-25 सेशन से PhD एडमिशन के लिए नेशनल एलिजिबिलिटी टेस्ट यानी NET के स्कोर स्वीकार किए जाएंगे। अभी PhD कोर्सेज में दाखिले के लिए यूनिवर्सिटीज अलग-अलग एडमिशन टेस्ट आयोजित करती थीं। ऐसे में नई व्यवस्था से अब PhD कैंडिडेट्स को एडमिशन के लिए एक से ज्यादा एग्जाम्स नहीं देने होंगे। ये फैसला NEP 2020 के तहत लिया गया है। 13 मार्च को आयोजित UGC की 578वीं बैठक में ये फैसला लिया गया। इसका सुझाव एक एक्सपर्ट कमेटी द्वारा दिया गया था। UGC NET साल में दो बार जून और दिसंबर में आयोजित किया जाता है। NET स्कोरकार्ड की मदद से कैंडिडेट्स जूनियर रिसर्च फेलोशिप (JRF) और असिस्टेंट प्रोफेसर की भर्तियों के लिए एलिजिबिल होते हैं।
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