2028 से पोट्रेल बाइक पर रोक, नहीं होंगे रजिस्ट्रेशन, दिल्ली सरकार ने जारी किया EV पॉलिसी ड्राफ्ट
Aman Vaishnav | Apr 11, 2026, 15:10 IST
delhi mp electric vehicle policy 2026 subsidy registration ban
दिल्ली सरकार ने प्रदूषण कम करने के लिए नई ईवी पॉलिसी लागू की है। इस नीति के हिसाब से 2028 से पेट्रोल से चलने वाले दोपहिया वाहनों का रजिस्ट्रेशन पूरी तरह बंद हो जाएगा। सरकारों ने नई गाड़ियों की खरीद पर भारी सब्सिडी और टैक्स छूट का ऐलान किया है।
राजधानी दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण के स्तर से राहत दिलाने के लिए दिल्ली सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। दिल्ली सीएम रेखा गुप्ता ने दिल्ली इलेक्ट्रिक व्हीकल पॉलिसी 2026-2030 के ड्राफ्ट को मंजूरी दे दी है।
इस नीति के तहत 1 अप्रैल 2028 से दिल्ली में पेट्रोल से चलने वाले दोपहिया वाहनों के रजिस्ट्रेशन पर पूरी तरह रोक लग जाएगी। यानी इसके बाद दिल्ली में केवल इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहन ही बिक सकेंगे।
दिलचस्प बात यह है कि प्रदूषण के खिलाफ यह मुहिम सिर्फ दिल्ली तक सीमित नहीं है। दिल्ली की तर्ज पर मध्य प्रदेश सरकार ने भी अपनी इलेक्ट्रिक वाहन नीति 2025 को प्रभावी ढंग से लागू किया है।
जहां दिल्ली का लक्ष्य 2028 तक पेट्रोल वाहनों को सड़कों से हटाना है, वहीं मध्य प्रदेश ने 2030 तक 80% थ्री-व्हीलर्स और 40% टू-व्हीलर्स को इलेक्ट्रिक करने का बड़ा लक्ष्य रखा है।
दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण को कम करने के लिए सरकार ने दिल्ली इलेक्ट्रिक व्हीकल पॉलिसी 2026-2030 का ड्राफ्ट जारी किया है। जनता इस नीति पर 30 दिनों तक अपना सुझाव दे सकती है। ये नीति चार साल के लिए है।
इसका मुख्य उद्देश्य इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देना, हवा की गुणवत्ता को सुधारना और एक साफ-सुथरे ट्रांसपोर्ट सिस्टम को मजबूत करना है।
ये पॉलिसी भारत के संविधान के अनुच्छेद 21 से प्रेरित है, जो स्वच्छ हवा और प्रदूषण रहित वातावरण को जीवन के अधिकार का हिस्सा मानता है।
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वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग की रिपोर्ट के अनुसार दिल्ली में सर्दियों के दौरान 23 प्रतिशत प्रदूषण के लिए वाहन जिम्मेदार होते हैं। खास बात यह है कि दोपहिया वाहन कुल वाहनों का करीब 67 प्रतिशत हैं।
इसलिए इन्हें जल्दी इलेक्ट्रिक वाहनों में बदलना बहुत जरूरी है। इसके अलावा तीन पहिया, कमर्शियल कार और छोटे मालवाहक वाहन भी प्रदूषण फैलाते हैं।
इस नीति का मुख्य उद्देश्य सभी प्रकार के वाहनों में इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देना है। साथ ही चार्जिंग नेटवर्क को बढ़ाना, बैटरी रीसाइक्लिंग सिस्टम तैयार करना और पेट्रोल-डीजल वाहनों पर निर्भरता को कम करना है।
सरकार ईवी खरीदने पर सीधे बैंक खाते में सब्सिडी देगी।
तीन पहिया वाले ई-ऑटो के लिए पहले साल 50 हजार रुपए तक की मदद दी जाएगी। साथ ही दूसरे साल 40 हजार रुपए और तीसरे साल 30 हजार रुपए तक की मदद मिलेगी।
वहीं छोटे इलेक्ट्रिक ट्रकों (एन1) पर पहले साल एक लाख रुपए तक का लाभ मिलेगा। साथ ही दूसरे साल 75 हजार रुपए और तीसरे साल 50 हजार रुपए तक का लाभ मिलेगा।
इसके अलावा अगर आप पुरानी बीएस-IV या उससे नीचे की गाड़ी स्क्रैप करते हैं, तो भी आपको प्रोत्साहन मिलेगा।
दोपहिया पर 10 हजार रुपए, तीन पहिया पर 25 हजार रुपए, कार पर 1 लाख रुपए (30 लाख रुपए तक की कीमत वाली, पहले 1 लाख लोगों तक) और एन1 ट्रक पर 50 हजार रुपए की मदद मिलेगी।
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दिल्ली में रजिस्ट्रेशन कराने पर सभी इलेक्ट्रिक वाहनों को रोड टैक्स और रजिस्ट्रेशन फीस में 100 प्रतिशत छूट मिलेगी। 30 लाख रुपए तक की इलेक्ट्रिक कारों को पूरी छूट मिलेगी और स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड वाहनों को 50 प्रतिशत छूट मिलेगी, लेकिन 30 लाख रुपए से ऊपर की कारों पर कोई छूट नहीं मिलेगी।
चार्जिंग और बैटरी स्वैपिंग नेटवर्क के लिए दिल्ली ट्रांसको लिमिटेड को नोडल एजेंसी बनाया जाएगा। यह संस्था चार्जिंग स्टेशनों के लिए प्लानिंग, लोकेशन तय करने और बिजली की उपलब्धता सुनिश्चित करेगी। इसके साथ ही एक डिजिटल पोर्टल और सिंगल विंडो सिस्टम भी बनाया जाएगा ताकि चार्जिंग स्टेशन लगाना आसान हो सके।
वाहन निर्माता कंपनियों को हर डीलरशिप पर कम से कम एक पब्लिक चार्जिंग स्टेशन लगाना होगा। इस स्टेशन में 2-3 व्हीलर और 4 व्हीलर के लिए अलग-अलग चार्जिंग पॉइंट होंगे।
दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति बैटरी कलेक्शन सेंटर बनाने और सुरक्षित तरीके से बैटरी के निपटान के लिए नियम तय करेगी। इसके अलावा बैटरी ट्रैकिंग सिस्टम भी विकसित किया जाएगा। इससे रीसाइक्लिंग और दोबारा उपयोग सुरक्षित तरीके से हो सकेगा।
1 जनवरी 2027 से सिर्फ इलेक्ट्रिक तीन पहिया वाहनों का रजिस्ट्रेशन होगा। वहीं 1 अप्रैल 2028 से केवल इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों का रजिस्ट्रेशन होगा।
स्कूल बसों में भी इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या बढ़ाना जरूरी होगा। पहले दो साल में 10 प्रतिशत, तीसरे साल 20 प्रतिशत और 2030 तक 30 प्रतिशत इलेक्ट्रिक बसों का लक्ष्य रखा गया है।
सरकारी विभागों में खरीदी जाने वाली सभी गाड़ियां इलेक्ट्रिक होंगी। दिल्ली परिवहन निगम की नई बसें भी इलेक्ट्रिक होंगी। इसके अलावा डिलीवरी और फ्लीट कंपनियों को 2026 से पेट्रोल-डीजल वाहनों को शामिल करने से रोका जाएगा।
पूरी प्रक्रिया को डिजिटल और पेपरलेस बनाया जाएगा। ट्रांसपोर्ट विभाग इस नीति को लागू करेगा और एक विशेष ईवी सेल बनाया जाएगा। इस पॉलिसी का मकसद दिल्ली को प्रदूषण मुक्त बनाना और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की दिशा में तेजी से कदम बढ़ाना है।
मध्यप्रदेश सरकार ने भी प्रदूषण कम करने के लिए दिल्ली की तरह इलेक्ट्रिक वाहन नीति 2025 लागू की है। ये नीति प्रदेश में 25 मई 2025 से प्रभावी है। इसका मकसद राज्य को इलेक्ट्रिक मोबिलिटी का हब बनाना है।
इस नीति के तहत सरकार ने उपभोक्ताओं और वाहन निर्माताओं के लिए कई स्कीम्स शुरू की हैं:
मध्य प्रदेश सरकार ने 2030 तक कई बड़े लक्ष्य तय किए हैं
इलेक्ट्रिक वाहन खरीदना होगा महंगा! खत्म हो रही है टैक्स छूट
इलेक्ट्रिक वाहन कितने खतरनाक? भारत के बड़े हादसे और सुरक्षा के नियम
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देश दुनिया न्यूज : एक बार चार्ज में चलेगी 80 किमी, कीमत जानकर हैरान रह जाएंगे
इस नीति के तहत 1 अप्रैल 2028 से दिल्ली में पेट्रोल से चलने वाले दोपहिया वाहनों के रजिस्ट्रेशन पर पूरी तरह रोक लग जाएगी। यानी इसके बाद दिल्ली में केवल इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहन ही बिक सकेंगे।
दिलचस्प बात यह है कि प्रदूषण के खिलाफ यह मुहिम सिर्फ दिल्ली तक सीमित नहीं है। दिल्ली की तर्ज पर मध्य प्रदेश सरकार ने भी अपनी इलेक्ट्रिक वाहन नीति 2025 को प्रभावी ढंग से लागू किया है।
जहां दिल्ली का लक्ष्य 2028 तक पेट्रोल वाहनों को सड़कों से हटाना है, वहीं मध्य प्रदेश ने 2030 तक 80% थ्री-व्हीलर्स और 40% टू-व्हीलर्स को इलेक्ट्रिक करने का बड़ा लक्ष्य रखा है।
इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देना है मकसद
इसका मुख्य उद्देश्य इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देना, हवा की गुणवत्ता को सुधारना और एक साफ-सुथरे ट्रांसपोर्ट सिस्टम को मजबूत करना है।
ये पॉलिसी भारत के संविधान के अनुच्छेद 21 से प्रेरित है, जो स्वच्छ हवा और प्रदूषण रहित वातावरण को जीवन के अधिकार का हिस्सा मानता है।
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23 प्रतिशत प्रदूषण के लिए वाहन जिम्मेदार
इसलिए इन्हें जल्दी इलेक्ट्रिक वाहनों में बदलना बहुत जरूरी है। इसके अलावा तीन पहिया, कमर्शियल कार और छोटे मालवाहक वाहन भी प्रदूषण फैलाते हैं।
इस नीति का मुख्य उद्देश्य सभी प्रकार के वाहनों में इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देना है। साथ ही चार्जिंग नेटवर्क को बढ़ाना, बैटरी रीसाइक्लिंग सिस्टम तैयार करना और पेट्रोल-डीजल वाहनों पर निर्भरता को कम करना है।
सरकार ईवी खरीदने पर सीधे बैंक खाते में सब्सिडी देगी।
- दोपहिया इलेक्ट्रिक वाहनों पर पहले साल 10 हजार रुपए प्रति किलोवाट (अधिकतम 30 हजार रुपए) दी जाएगी।
- दूसरे साल छद हजार 600 रुपए (अधिकतम 20 हजार रुपए) तक दी जाएगी।
- साथ ही तीसरे साल तीन हजार 300 रुपए (अधिकतम 10 हजार रुपए) की सब्सिडी मिलेगी।
इलेक्ट्रिक ऑटो पर कितनी सब्सिडी?
वहीं छोटे इलेक्ट्रिक ट्रकों (एन1) पर पहले साल एक लाख रुपए तक का लाभ मिलेगा। साथ ही दूसरे साल 75 हजार रुपए और तीसरे साल 50 हजार रुपए तक का लाभ मिलेगा।
दोपहिया वाहन और कार पर कितना लाभ
दोपहिया पर 10 हजार रुपए, तीन पहिया पर 25 हजार रुपए, कार पर 1 लाख रुपए (30 लाख रुपए तक की कीमत वाली, पहले 1 लाख लोगों तक) और एन1 ट्रक पर 50 हजार रुपए की मदद मिलेगी।
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टैक्स और रजिस्ट्रेशन फीस में 100 प्रतिशत छूट
चार्जिंग और बैटरी स्वैपिंग नेटवर्क के लिए दिल्ली ट्रांसको लिमिटेड को नोडल एजेंसी बनाया जाएगा। यह संस्था चार्जिंग स्टेशनों के लिए प्लानिंग, लोकेशन तय करने और बिजली की उपलब्धता सुनिश्चित करेगी। इसके साथ ही एक डिजिटल पोर्टल और सिंगल विंडो सिस्टम भी बनाया जाएगा ताकि चार्जिंग स्टेशन लगाना आसान हो सके।
पब्लिक चार्जिंग स्टेशन
दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति बैटरी कलेक्शन सेंटर बनाने और सुरक्षित तरीके से बैटरी के निपटान के लिए नियम तय करेगी। इसके अलावा बैटरी ट्रैकिंग सिस्टम भी विकसित किया जाएगा। इससे रीसाइक्लिंग और दोबारा उपयोग सुरक्षित तरीके से हो सकेगा।
स्कूल बसें भी होंगी इलेक्ट्रिक
स्कूल बसों में भी इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या बढ़ाना जरूरी होगा। पहले दो साल में 10 प्रतिशत, तीसरे साल 20 प्रतिशत और 2030 तक 30 प्रतिशत इलेक्ट्रिक बसों का लक्ष्य रखा गया है।
सरकारी विभागों में खरीदी जाने वाली सभी गाड़ियां इलेक्ट्रिक होंगी। दिल्ली परिवहन निगम की नई बसें भी इलेक्ट्रिक होंगी। इसके अलावा डिलीवरी और फ्लीट कंपनियों को 2026 से पेट्रोल-डीजल वाहनों को शामिल करने से रोका जाएगा।
पूरी प्रक्रिया को डिजिटल और पेपरलेस बनाया जाएगा। ट्रांसपोर्ट विभाग इस नीति को लागू करेगा और एक विशेष ईवी सेल बनाया जाएगा। इस पॉलिसी का मकसद दिल्ली को प्रदूषण मुक्त बनाना और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की दिशा में तेजी से कदम बढ़ाना है।
एमपी में इलेक्ट्रिक व्हीकल नीति
इस नीति के तहत सरकार ने उपभोक्ताओं और वाहन निर्माताओं के लिए कई स्कीम्स शुरू की हैं:
- अगर आप इलेक्ट्रिक वाहन खरीदते हैं तो आपको 100% रोड टैक्स और रजिस्ट्रेशन फीस की छूट मिलेगी।
- टू-व्हीलर इलेक्ट्रिक बाइक खरीदने पर 10 हजार रुपए तक की सब्सिडी या 5 हजार प्रति kWh की छूट मिलेगी (1 लाख वाहनों तक)।
- थ्री-व्हीलर इलेक्ट्रिक ऑटो-रिक्शा पर 20 हजार रुपए तक की सब्सिडी मिलेगी।
- 25 लाख से कम कीमत वाली पहली 10 हजार इलेक्ट्रिक फोर-व्हीलर कार पर 50 हजार रुपए तक की सब्सिडी (दो हजार 500 रुपए /kWh) मिलेगी।
- इलेक्ट्रिक वाहनों को शहरों के पार्किंग स्थलों में 1 साल तक मुफ्त पार्किंग मिलेगा।
- भोपाल
- इंदौर
- जबलपुर
- ग्वालियर
- उज्जैन
2030 तक का लक्ष्य
- 80% थ्री-व्हीलर्स इलेक्ट्रिक करेंगे।
- 40% टू-व्हीलर्स और 40% बसों को इलेक्ट्रिक करेंगे।
- 15% प्राइवेट कारों को भी इलेक्ट्रिक बना देंगे।
इलेक्ट्रिक वाहन खरीदना होगा महंगा! खत्म हो रही है टैक्स छूट
इलेक्ट्रिक वाहन कितने खतरनाक? भारत के बड़े हादसे और सुरक्षा के नियम
एमपी न्यूज: जल्द शुरु होंगी इलेक्ट्रिक बसें, 5 रूटों पर दौड़ेंगी 100 बसें
देश दुनिया न्यूज : एक बार चार्ज में चलेगी 80 किमी, कीमत जानकर हैरान रह जाएंगे
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