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Photograph: (THESOOTR)
News in Short
- मैक्रों ने भारत से बच्चों के सोशल मीडिया उपयोग पर बैन लगाने की अपील की।
- फ्रांस में 15 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया बैन की तैयारी।
- मैक्रों ने सोशल मीडिया को बच्चों के लिए सुरक्षित बनाने की बात की।
- मैक्रों ने भारत के डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर की सराहना की और उसकी सफलता की उदाहरण दी।
- भारत की 1.4 बिलियन लोगों के लिए डिजिटल आइडेंटिटी की सफलता को साझा किया।
News in Detail
दुनिया के कई देशों में बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर रोक लग चुकी है। ऑस्ट्रेलिया समेत कई देशों ने बच्चों के फेसबुक और इंस्टाग्राम जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर बैन लगा दिया है। अब भारत में भी बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर बैन लगाने की मांग की जा रही है।
इंडिया एआई समिट में फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों ने पीएम मोदी से बड़ी डिमांड की। उन्होंने कहा कि 15 साल से कम उम्र के बच्चों पर फ्रांस में सोशल मीडिया बैन की तैयारी है। वह भारत से भी इसी तरह की उम्मीद रखते हैं।
मैक्रों ने एआई समिट में बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता बताते हुए कहा कि जो चीज असल दुनिया में नहीं है, वह बच्चों को इंटरनेट पर नहीं दिखनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि सोशल मीडिया और इंटरनेट को बच्चों के लिए सुरक्षित बनाना प्लेटफॉर्म, सरकार और रेगुलेटर्स की जिम्मेदारी है।
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मैक्रों ने पीएम मोदी के सामने ये अपील
पीएम मोदी के सामने इमैनुएल मैक्रों ने कहा कि फ्रांस 15 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल नेटवर्क पर बैन लगाएगा। ग्रीस, स्पेन और अन्य यूरोपीय देश भी इस पहल में शामिल हैं। मैक्रों ने उम्मीद जताई कि भारत भी इस मुहिम से जुड़ेगा। उन्होंने कहा कि यह बहुत अच्छी खबर होगी कि भारत भी बच्चों की सुरक्षा के लिए कदम उठाएगा। उन्होंने कहा कि बच्चों की सुरक्षा सिर्फ नियम बनाने का नहीं, सभ्यता का सवाल है।
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क्या बोले मैक्रों?
फ्रांस के प्रेसिडेंट इमैनुएल मैक्रों ने इंडिया-AI इम्पैक्ट समिट 2026 में एक दिलचस्प कहानी सुनाई। उन्होंने मुंबई के एक स्ट्रीट वेंडर का उदाहरण दिया। एक दशक पहले वह बैंक अकाउंट नहीं खोल पाता था।
अब वह आसानी से ऑनलाइन पेमेंट सिस्टम का इस्तेमाल करता है। अपने भाषण की शुरुआत 'नमस्ते' कहकर करते हुए मैक्रों ने होस्ट का धन्यवाद किया। उन्होंने कहा, मिस्टर प्राइम मिनिस्टर, आपके द्वारा होस्ट किए गए इस समिट में वापस आकर खुशी हो रही है।
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मैक्रों ने सुनाई स्ट्रीट वेंडर की कहानी
मैक्रों ने भारत की टेक्नोलॉजी में तरक्की को दिखाने के लिए एक किस्सा शेयर किया। उन्होंने कहा, दस साल पहले मुंबई में एक स्ट्रीट वेंडर बैंक अकाउंट नहीं खोल सकता था। कोई एड्रेस नहीं था, कोई पेपर नहीं थे, कोई एक्सेस नहीं था।
आज वही वेंडर अपने फोन पर तुरंत और फ्री में पेमेंट लेता है। यह सिर्फ एक टेक स्टोरी नहीं है। यह एक सिविलाइजेशन स्टोरी है। इंडिया ने 1.4 बिलियन लोगों के लिए डिजिटल आइडेंटिटी बनाई, जो किसी और देश ने नहीं बनाई।
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1.4 बिलियन लोगों के लिए डिजिटल आइडेंटिटी
इंडिया के डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के स्केल पर जोर देते हुए उन्होंने कहा, इंडिया ने कुछ ऐसा बनाया जो दुनिया के किसी और देश ने नहीं बनाया। 1.4 बिलियन लोगों के लिए डिजिटल आइडेंटिटी। एक पेमेंट सिस्टम जो हर महीने 20 बिलियन ट्रांजैक्शन प्रोसेस करता है। एक हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर जिसने 500 मिलियन डिजिटल हेल्थ IDs जारी किए हैं।
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