प्रो. मनोज दयाल कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता विश्वविद्यालय के नए कुलपति नियुक्त

छत्तीसगढ़ के कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता विश्वविद्यालय के नए कुलपति के रूप में प्रो. मनोज दयाल की नियुक्ति की गई है । जानिए क्या है उनके अनुभव और विश्वविद्यालय के लिए यह निर्णय क्यों महत्वपूर्ण है।

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Rajesh Lahoti
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Pro. Manoj Dayal appointed as the new Vice Chancellor of Kushabhau Thackeray Journalism University

Photograph: (the sootr)

News in Short

  • प्रो. मनोज दयाल को कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता विश्वविद्यालय का नया कुलपति नियुक्त किया गया।
  • यह नियुक्ति राज्यपाल के आदेश पर 19 फरवरी 2026 को हुई।
  • प्रो. दयाल का अनुभव जनसंचार और अकादमिक प्रशासन में लंबा है।
  • विश्वविद्यालय को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने की चुनौती उनके सामने है।
  • छात्रों को शैक्षणिक सत्र, नियुक्तियों में पारदर्शिता और शोध गतिविधियों की उम्मीद है। 

News in Detail

RAIPUR. राजधानी रायपुर स्थित कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय को नया कुलपति मिल गया है। राजभवन से जारी आदेश के अनुसार प्रोफेसर मनोज दयाल को विश्वविद्यालय का कुलपति नियुक्त किया गया है।

यह नियुक्ति राज्यपाल एवं कुलाधिपति द्वारा छत्तीसगढ़ कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय अधिनियम, 2004 तथा उसके संशोधन अधिनियम, 2025 की धारा 11 (1) के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए की गई है।

राजभवन, रायपुर से 19 फरवरी 2026 को जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि प्रो. मनोज दयाल, जो वर्तमान में हरियाणा के हिसार स्थित गुरु जम्भेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के जनसंचार विभाग में प्रोफेसर के रूप में कार्यरत रहे हैं, कार्यभार ग्रहण करने की तिथि से कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय, रायपुर के कुलपति के रूप में पदभार संभालेंगे। उनके कार्यकाल, सेवा शर्तें और अन्य सुविधाएं विश्वविद्यालय अधिनियम एवं संबंधित नियमों के अनुसार निर्धारित होंगी।

क्यों अहम है यह नियुक्ति?

कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता विश्वविद्यालय राज्य का एकमात्र विशेषीकृत मीडिया विश्वविद्यालय है, जिसकी स्थापना पत्रकारिता और जनसंचार शिक्षा को समर्पित उद्देश्य से की गई थी। पिछले कुछ वर्षों में विश्वविद्यालय प्रशासनिक और शैक्षणिक चुनौतियों से भी जूझता रहा है। ऐसे में बाहरी राज्य से एक अनुभवी शिक्षाविद् की नियुक्ति को नई दिशा देने वाले कदम के रूप में देखा जा रहा है।

विश्वविद्यालय में पूर्व में भी कुलपति पद को लेकर कई बार चर्चा और विवाद सामने आए थे। कार्यकाल पूर्ण होने के बाद नए कुलपति की नियुक्ति में देरी तथा प्रभार व्यवस्था के चलते शैक्षणिक निर्णयों की गति प्रभावित हुई थी। इससे पहले कार्यरत कुलपतियों के समय विश्वविद्यालय ने कई शैक्षणिक पहलें शुरू की थीं, जिनमें नए कोर्स, शोध गतिविधियों का विस्तार और डिजिटल मीडिया अध्ययन को बढ़ावा देना शामिल था। हालांकि प्रशासनिक स्थिरता की कमी को लेकर समय-समय पर सवाल भी उठे।

प्रो. मनोज दयाल का अनुभव क्या कहता है?

प्रो. दयाल जनसंचार शिक्षा के क्षेत्र में लंबे समय से सक्रिय रहे हैं। मीडिया अध्ययन, शोध और अकादमिक प्रशासन का अनुभव उन्हें विश्वविद्यालय के लिए उपयोगी साबित कर सकता है। हरियाणा जैसे राज्य में केंद्रीय विश्वविद्यालय प्रणाली के साथ काम करने का अनुभव छत्तीसगढ़ के इस विशेषीकृत विश्वविद्यालय को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने में मददगार माना जा रहा है।

सूत्रों के अनुसार, चयन प्रक्रिया में अकादमिक योग्यता, प्रशासनिक अनुभव और शोध कार्यों को प्राथमिकता दी गई। विश्वविद्यालय को राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप ढालने, शोध आधारित पत्रकारिता को बढ़ावा देने और डिजिटल मीडिया के उभरते क्षेत्रों में पाठ्यक्रम विकसित करने की चुनौती नए कुलपति के सामने होगी।

आगे की राह

राज्य में मीडिया शिक्षा के विस्तार और गुणवत्ता सुधार को लेकर लंबे समय से मांग उठती रही है। विश्वविद्यालय के छात्र और संकाय सदस्य अब उम्मीद कर रहे हैं कि नए कुलपति के नेतृत्व में शैक्षणिक सत्र नियमित होंगे, नियुक्तियों में पारदर्शिता आएगी और शोध गतिविधियों को नई ऊर्जा मिलेगी।

राजभवन के आदेश के बाद अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि प्रो. मनोज दयाल कब कार्यभार ग्रहण करते हैं और उनकी प्राथमिकताएं क्या होंगी। विश्वविद्यालय प्रशासनिक स्थिरता और अकादमिक मजबूती की दिशा में किस तरह आगे बढ़ता है, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा। कुल मिलाकर, यह नियुक्ति न केवल विश्वविद्यालय बल्कि छत्तीसगढ़ में मीडिया शिक्षा की दिशा तय करने वाला महत्वपूर्ण फैसला मानी जा रही है।

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