फूड सेफ्टी की हकीकत: राजस्थान में मिलावट पर सिर्फ 31 को सजा, एमपी और छ्त्तीसगढ़ के हाल भी अच्छे नहीं
CHAKRESH | Oct 27, 2026, 12:56 IST
खाने में मिलावट के मामले बढ़े। हर पांच में से एक फूड सेंपल जांच में फेल हुए।
खाने में मिलावट पर संसद में रखे गए एफएसएसएआई रिपोर्ट के आंकड़े चौंकाते हैं। साल 2025-26 में दो लाख 23,808 सेंपल की जांच हुई। इनमें 40 हजार 023 फूड सेंपल फेल हुए, यानी हर पांच में से करीब एक। लेकिन मिलावटखोरों को सजा सिर्फ एक हजार 918 मामलों में मिली। पांच साल का हाल और भी खराब रहा है। फेल सेंपल में केवल 3.3% मामलों में सजा सुनाई गई है।
पांच साल में 1.85 लाख सेंपल फेल
इन आंकड़ों से पता चलता है कि बड़ी संख्या में मामलों में जुर्माना लगाकर कार्रवाई पूरी कर दी गई। सजा मिलने वाले मामलों की संख्या इसके मुकाबले काफी कम रही।
हर साल बढ़ी सजा की दर
इसके बाद भी स्थिति में थोड़ा सुधार आया। 2023-24 में सजा की दर 3.4% और 2024-25 में 3.7% रही। 2025-26 में यह बढ़कर 4.8% हो गई। यानी कार्रवाई में सुधार के बावजूद फेल सेंपल के मुकाबले सजा पाने वाले मामलों की संख्या कम है। फूड एडल्ट्रेशन यानी खाने में मिलावट रोकने के लिए सिर्फ सेंपल की जांच करना ही काफी नहीं है। दोषियों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई भी जरूरी है।
दूध के 37% सेंपल तय मानकों पर फेल
यह जानकारी केंद्रीय पशुपालन मंत्री राजीव रंजन सिंह ने लोकसभा में दी। दूध का इस्तेमाल लगभग हर घर में होता है। ऐसे में इसके नमूनों का इतनी बड़ी संख्या में फेल होना लोगों की चिंता बढ़ाता है।
मध्यप्रदेश में सजा की दर कम
छत्तीसगढ़ में 10.4% सेंपल फेल
जानें एक्सपर्ट की राय
एफएसएसएआई ने खाने में मिलावट रोकने के लिए कई कदम उठाए हैं। जागरूकता अभियान चलाए गए हैं और मोबाइल फूड टेस्टिंग लैब के लिए फंड दिया गया है।
By: प्रतापराव जाधव, केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री
यूपी में आधे से ज्यादा सेंपल फेल
इससे पता चलता है कि बड़ी संख्या में गड़बड़ी मिलने के बाद भी दोषियों को सजा दिलाना चुनौती बना हुआ है। दूसरे राज्यों के आंकड़े भी ध्यान देने लायक हैं। हरियाणा में 31% और झारखंड में 27.8% सेंपल फेल हुए हैं। महाराष्ट्र में यह आंकड़ा 17.4% और पंजाब में 13.2% रहा।
राजस्थान में 4,594 सेंपल फेल, सजा सिर्फ 31 मामलों में
उत्तर प्रदेश और राजस्थान को मिलाकर देखें, तो देश के कुल फेल नमूनों में इन दोनों राज्यों की हिस्सेदारी करीब 62.5% है। इसके उलट, कुल सजा के मामलों में इनका हिस्सा करीब 19% ही है। यानी इन राज्यों में सेंपल फेल होने के मामले ज्यादा हैं, लेकिन सजा के मामले उस अनुपात में नहीं हैं।
तमिलनाडु और केरल में सजा की दर बेहतर
हरियाणा में सजा की दर करीब 16% और दिल्ली में 14.7% रही। वहीं, दिए गए आंकड़ों के मुताबिक पश्चिम बंगाल, तेलंगाना, झारखंड, गोवा, असम, बिहार और पुडुचेरी में किसी भी मामले में सजा दर्ज नहीं हुई। इन आंकड़ों से सवाल उठता है कि जब सभी राज्यों में खाद्य सुरक्षा कानून लागू है, तो कार्रवाई के नतीजों में इतना अंतर क्यों है? यह अंतर जांच, कानूनी कार्रवाई और मामलों के निपटारे की प्रक्रिया पर ध्यान देने की जरूरत दिखाता है।
खाद्य सुरक्षा कानून में सजा का प्रावधान क्या है?
ध्यान देने वाली बात यह है कि हर फेल नमूना मिलावट का मामला नहीं होता। जांच में असुरक्षित खाद्य पदार्थ, तय मानकों से कमजोर गुणवत्ता वाले उत्पाद और गलत लेबल वाले सामान भी शामिल हो सकते हैं। सरकार इन सभी श्रेणियों का अलग-अलग ब्योरा नहीं देती।
सरकार के मुताबिक, करीब 98% खाद्य कारोबारी राज्यों के दायरे में आते हैं। इसलिए खाद्य पदार्थों की जांच और नियम तोड़ने वालों के खिलाफ कार्रवाई में राज्य सरकारों की भूमिका अहम है।
11 हजार 493 लाइसेंस हुए रद्द
लेकिन केवल निरीक्षण बढ़ाना ही काफी नहीं है। जांच में गड़बड़ी मिलने पर समय पर कार्रवाई और दोषियों को सजा मिलना भी जरूरी है। जब सजा की दर कम रहती है, तो नियम तोड़ने वालों पर कार्रवाई का डर कमजोर पड़ सकता है।
आम लोगों के लिए यह खबर क्यों जरूरी है?
दूध, घी, मसाले और मिठाई जैसी चीजें रोजमर्रा के खाने का हिस्सा हैं। इसलिए इनकी गुणवत्ता का सीधा संबंध लोगों की सेहत से है। फूड सेंपल का फेल होना बताता है कि बाजार में मिलने वाले सभी उत्पाद तय मानकों पर खरे नहीं उतरते।संविधान का अनुच्छेद 21 जीवन के अधिकार से जुड़ा है। वहीं, अनुच्छेद 47 सार्वजनिक स्वास्थ्य सुधारने की जिम्मेदारी राज्य को सौंपता है।
ऐसे में खाद्य सुरक्षा से जुड़े मामलों में जांच के साथ जवाबदेही भी जरूरी है। सरकार और संबंधित विभागों के सामने चुनौती है कि मिलावट और घटिया खाद्य पदार्थों के मामलों में कार्रवाई प्रभावी हो। लोगों की थाली सुरक्षित बनाने के लिए नियमों का पालन और दोषियों के खिलाफ समय पर कार्रवाई दोनों जरूरी हैं।
FAQs
- साल 2025-26 में देश में कितने खाद्य नमूने फेल हुए?
साल 2025-26 में देशभर में 40,023 खाद्य नमूने तय मानकों पर खरे नहीं उतरे। - पांच साल में खाद्य मिलावट के कितने मामलों में दोषियों को सजा मिली?
पिछले पांच वर्षों में, केवल 6,203 मामलों में दोषियों को सजा मिली है। - उत्तर प्रदेश में खाद्य नमूनों के फेल होने की दर क्या है?
उत्तर प्रदेश में 2025-26 में 51.7% खाद्य नमूने फेल हुए, जिसमें 39,519 नमूनों की जांच की गई थी।
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