राजस्थान में 53 साल बाद 35 शहीद सैनिकों के परिवारों को नौकरी का रास्ता खुला; सैनिक कल्याण बोर्ड में नहीं मिला रिकॉर्ड
Jyoti Mahender Bhardwaj | Oct 27, 2026, 12:19 IST
35 सैनिकों के आश्रितों का रिकॉर्ड जुटाने में जुटेगा विभाग
राजस्थान सरकार ने ऑपरेशन कैक्टस लिलि में घायल होने के बाद 31 अक्टूबर 1972 तक उपचार के दौरान शहीद हुए 35 सैनिकों के आश्रितों को अनुकंपा नियुक्ति देने के लिए नियमों में संशोधन किया है। लेकिन सैनिक कल्याण निदेशालय और कई जिला कार्यालयों में इन परिवारों का रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं मिला।
राजस्थान में 1971 के भारत-पाक युद्ध के दौरान घायल होने के बाद इलाज के दौरान शहीद हुए 35 सैनिकों के परिवारों को सरकारी नौकरी मिलने का रास्ता खुल गया है। राज्य सरकार ने करीब 53 साल बाद नियमों में संशोधन कर इन परिवारों को अनुकंपा नियुक्ति के दायरे में शामिल किया है। लेकिन हैरानी की बात यह है कि राजस्थान सैनिक कल्याण निदेशालय के पास इन शहीदों के नाम-पते और उनके आश्रितों का पूरा ब्योरा उपलब्ध नहीं है। ऐसे में नौकरी देने का प्रावधान बनने के बावजूद लाभार्थी परिवारों तक पहुंचना विभाग के लिए चुनौती बना हुआ है।
राजस्थान सैनिक कल्याण निदेशालय ने ऑपरेशन कैक्टस लिलि के दौरान घायल होने के बाद इलाज में शहीद हुए सैनिकों के परिवारों को अनुकंपा नियुक्ति देने के लिए नियमों में संशोधन का प्रस्ताव तैयार किया था। सरकार ने नियमों में बदलाव कर दिया, लेकिन अब तक इन 35 शहीदों के आश्रितों की पहचान और उनके मामलों का रिकॉर्ड सामने नहीं आया है।
जयपुर समेत एक दर्जन से अधिक जिला सैनिक कल्याण कार्यालयों में पड़ताल के दौरान इन परिवारों से संबंधित कोई प्रकरण प्रक्रियाधीन नहीं मिला। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब लाभार्थियों की जानकारी ही उपलब्ध नहीं है, तो उन्हें योजना का लाभ कैसे मिलेगा।
राजस्थान सैनिक कल्याण निदेशक ब्रिगेडियर सुरेंद्र सिंह के अनुसार, निदेशालय ने 35 शहीद सैनिकों के परिवारों को नौकरी देने का प्रस्ताव तैयार किया था। सरकार ने नियमों में संशोधन कर दिया है।
उन्होंने कहा कि जिलों से जैसे-जैसे आश्रितों के प्रस्ताव आएंगे, उन्हें आगे की कार्रवाई के लिए भेजा जाएगा। निदेशालय का उद्देश्य वर्ष 1971-72 के दौरान शहीद हुए सैनिकों के उन परिवारों को भी नियुक्ति का लाभ दिलाना है, जो अब तक पुराने नियमों के कारण इससे वंचित रह गए थे।
जयपुर के अलावा बाड़मेर, बालोतरा, ब्यावर, भीलवाड़ा, चित्तौड़गढ़, अजमेर, सीकर, चूरू, झुंझुनूं, नीमकाथाना, कोटा, नागौर, भरतपुर और भीम के सैनिक कल्याण कार्यालयों में जानकारी जुटाई गई। इन कार्यालयों में ऑपरेशन कैक्टस लिलि के दौरान घायल होने के बाद इलाज के दौरान शहीद हुए सैनिकों के आश्रितों का कोई मामला संज्ञान में नहीं आया।
नीमकाथाना के सैनिक कल्याण अधिकारी रिटायर्ड कर्नल रघुनाथ सिंह शेखावत ने बताया कि उनके कार्यालय में ऐसा कोई प्रकरण नहीं है। ब्यावर के सैनिक कल्याण अधिकारी रिटायर्ड कर्नल महेंद्र सिंह ने भी इसी तरह की जानकारी दी।
ब्यावर क्षेत्र के मेडाडा गांव के रहने वाले सैनिक मिट्ठू के आश्रित का मामला कलेक्टर के पास विचाराधीन बताया गया है। मिट्ठू दिसंबर 1971 में भारत-पाक युद्ध के दौरान शहीद हुए थे।
राजस्थान मृत सशस्त्र बल कार्मिक (शहीद) के आश्रितों को नियुक्ति नियम-2022 के तहत पहले 15 अगस्त 1947 से 31 दिसंबर 1971 के बीच वीरगति प्राप्त करने वाले और सेना की ओर से बैटल कैजुअल्टी घोषित सैनिकों के परिवार के एक सदस्य को अनुकंपा नियुक्ति देने का प्रावधान था।
भारत-पाक युद्ध दिसंबर 1971 में समाप्त हो गया था, लेकिन कुछ सैनिक दुश्मन के साथ झड़पों या ऑपरेशन के दौरान घायल होने के बाद उपचार के दौरान शहीद हुए। इन सैनिकों की मृत्यु 1 जनवरी 1972 से 31 अक्टूबर 1972 के बीच हुई थी। पुराने नियमों में निर्धारित समय-सीमा के कारण उनके परिवारों को नियुक्ति का लाभ नहीं मिल पाया।
करीब दो साल पहले राज्य सरकार ने इन परिवारों को राहत देने के लिए नियमों में संशोधन का फैसला किया था। इसके तहत 31 अक्टूबर 1972 तक घायल होने के बाद उपचार के दौरान वीरगति प्राप्त करने वाले सैनिकों के आश्रितों को भी अनुकंपा नियुक्ति देने का निर्णय लिया गया।
बजट घोषणा और कैबिनेट की मंजूरी के बाद कार्मिक विभाग ने राजस्थान मृत सशस्त्र बल कार्मिक (शहीद) के आश्रितों को नियुक्ति नियम-2022 में संशोधन किया। इससे उन परिवारों के लिए नौकरी का रास्ता खुला, जो पहले तय समय-सीमा के कारण लाभ से बाहर रह गए थे।
राजस्थान सैनिक कल्याण निदेशालय के आंकड़ों के अनुसार, ऑपरेशन कैक्टस लिलि में प्रदेश के कुल 361 सैनिक शहीद हुए थे। इनमें से 326 सैनिक युद्ध के दौरान शहीद हुए, जबकि 35 सैनिक ऑपरेशन के दौरान घायल होने के बाद उपचार के दौरान चल बसे।
सरकार ने इन 35 सैनिकों के परिवारों को भी अनुकंपा नियुक्ति देने का फैसला किया है। नियमों में संशोधन होने के बावजूद आश्रितों की पहचान और उनके रिकॉर्ड की कमी के कारण इस फैसले को जमीन पर लागू करना चुनौती बना हुआ है।
अब जिला सैनिक कल्याण कार्यालयों और संबंधित विभागों के सामने इन 35 शहीद सैनिकों के परिवारों की पहचान करने और उनके आश्रितों का विवरण जुटाने की चुनौती है। निदेशालय के अनुसार, जिलों से प्रस्ताव मिलने पर उन्हें आगे बढ़ाया जाएगा। जब तक परिवारों की जानकारी और जरूरी दस्तावेज नहीं मिलते, तब तक नियुक्ति की प्रक्रिया आगे बढ़ाना मुश्किल रहेगा।
53 साल बाद नौकरी की उम्मीद
जयपुर समेत एक दर्जन से अधिक जिला सैनिक कल्याण कार्यालयों में पड़ताल के दौरान इन परिवारों से संबंधित कोई प्रकरण प्रक्रियाधीन नहीं मिला। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब लाभार्थियों की जानकारी ही उपलब्ध नहीं है, तो उन्हें योजना का लाभ कैसे मिलेगा।
सैनिक कल्याण निदेशालय ने क्या कहा?
उन्होंने कहा कि जिलों से जैसे-जैसे आश्रितों के प्रस्ताव आएंगे, उन्हें आगे की कार्रवाई के लिए भेजा जाएगा। निदेशालय का उद्देश्य वर्ष 1971-72 के दौरान शहीद हुए सैनिकों के उन परिवारों को भी नियुक्ति का लाभ दिलाना है, जो अब तक पुराने नियमों के कारण इससे वंचित रह गए थे।
14 से ज्यादा जिला कार्यालयों में नहीं मिला रिकॉर्ड
नीमकाथाना के सैनिक कल्याण अधिकारी रिटायर्ड कर्नल रघुनाथ सिंह शेखावत ने बताया कि उनके कार्यालय में ऐसा कोई प्रकरण नहीं है। ब्यावर के सैनिक कल्याण अधिकारी रिटायर्ड कर्नल महेंद्र सिंह ने भी इसी तरह की जानकारी दी।
ब्यावर क्षेत्र के मेडाडा गांव के रहने वाले सैनिक मिट्ठू के आश्रित का मामला कलेक्टर के पास विचाराधीन बताया गया है। मिट्ठू दिसंबर 1971 में भारत-पाक युद्ध के दौरान शहीद हुए थे।
पुराने नियमों के कारण 35 परिवार रह गए थे वंचित
भारत-पाक युद्ध दिसंबर 1971 में समाप्त हो गया था, लेकिन कुछ सैनिक दुश्मन के साथ झड़पों या ऑपरेशन के दौरान घायल होने के बाद उपचार के दौरान शहीद हुए। इन सैनिकों की मृत्यु 1 जनवरी 1972 से 31 अक्टूबर 1972 के बीच हुई थी। पुराने नियमों में निर्धारित समय-सीमा के कारण उनके परिवारों को नियुक्ति का लाभ नहीं मिल पाया।
दो साल पहले हुआ फैसला, फिर बदले गए नियम
बजट घोषणा और कैबिनेट की मंजूरी के बाद कार्मिक विभाग ने राजस्थान मृत सशस्त्र बल कार्मिक (शहीद) के आश्रितों को नियुक्ति नियम-2022 में संशोधन किया। इससे उन परिवारों के लिए नौकरी का रास्ता खुला, जो पहले तय समय-सीमा के कारण लाभ से बाहर रह गए थे।
ऑपरेशन कैक्टस लिलि में राजस्थान के 361 सैनिक शहीद
सरकार ने इन 35 सैनिकों के परिवारों को भी अनुकंपा नियुक्ति देने का फैसला किया है। नियमों में संशोधन होने के बावजूद आश्रितों की पहचान और उनके रिकॉर्ड की कमी के कारण इस फैसले को जमीन पर लागू करना चुनौती बना हुआ है।
आगे क्या?
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