मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के पक्ष में पूर्व जजों ने लिखा पत्र, एसआईआर को बताया सही, वोट चोरी के आरोप पर सवाल

Jitendra Shrivastava | Oct 08, 2026, 17:55 IST
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ज्ञानेश कुमार के समर्थन में 42 पूर्व जज
ज्ञानेश कुमार के समर्थन में 42 पूर्व जज

NEW DELHI. मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के समर्थन में 42 पूर्व जजों ने एक लेटर पर दस्तखत किए हैं। इसमें एसआईआर प्रक्रिया को सही बताया गया है। जजों के मुताबिक वोट चोरी के आरोप बिना सबूत लगाए जा रहे हैं। इससे चुनाव आयोग पर लोगों का भरोसा घट सकता है। सुप्रीम कोर्ट सुनवाई में एसआईआर की याचिकाएं लंबित हैं। कोर्ट ने आयोग से जवाब मांगा है।

आरोपों के बीच पूर्व जजों का लेटर

लेटर के केंद्र में हैं Gyanesh Kumar, यानी देश के मुख्य चुनाव आयुक्त। विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर (SIR – Special Intensive Revision) पर विवाद गहराया है। एसआईआर विवाद के बीच आया पूर्व जजों का लेटर चर्चा में है। इस पर 42 पूर्व जजों के दस्तखत हैं।

लेटर में शिकायतें लोकतांत्रिक और कानूनी तरीकों से उठाने की बात है। जजों ने एसआईआर प्रक्रिया को भी सही बताया है। Election Commission of India पर लगे आरोपों के सबूत नहीं दिए गए। यह जजों की दलील है। बिना सबूत हमले चुनावी प्रक्रिया पर लोगों का भरोसा कमजोर कर सकते हैं। जजों की असली चिंता भरोसे को लेकर है।

वोट चोरी के आरोप पर जजों की दलील

वोट चोरी के आरोप अदालतों में नहीं, बल्कि प्रेस कॉन्फ्रेंस में लगाए जाते हैं। जब आयोग शपथ पत्र मांगता है, तो कोई दाखिल नहीं किया जाता। EVM को हार के बाद ही दोषी ठहराया जाता है। उन्हीं मशीनों से मिली जीत पर कोई सवाल नहीं उठाया जाता। एक पार्टी जिसने पांच दशकों से अधिक समय तक इस देश पर शासन किया, अब दावा कर रही है कि जो व्यवस्था उसे सत्ता में लायी, वही धांधली वाली है।
By: जस्टिस हेमंत गुप्ता, जस्टिस पंकज मित्तल और अन्य, पूर्व जज, ओपन लेटर के हस्ताक्षरकर्ता
लेटर में कांग्रेस और कॉकरोच जनता पार्टी की तीखी आलोचना की गई है। हार के बाद ईवीएम (EVM – Electronic Voting Machine) को दोष देने का जिक्र है। जजों के मुताबिक उन्हीं मशीनों से मिली जीत पर सवाल नहीं उठाया जाता।

मदन राठौड़ का कांग्रेस पर हमला: चुनाव आयोग के खिलाफ प्रदर्शन को बताया 'राजनीतिक नौटंकी' | Madan Rathore attacks Congress: Calls protest against Election Commission 'political drama'
चुनाव आयोग के खिलाफ प्रदर्शन पर मदन राठौड़ का कांग्रेस पर हमला, बोले- कर रहे हैं राजनीतिक नौटंकी
08 Oct 2026 ,
By Ashish Bhardwaj
राजस्थान भाजपा अध्यक्ष मदन राठौड़ ने कांग्रेस के चुनाव आयोग के खिलाफ प्रदर्शन पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को अपनी शिकायत चुनाव आयोग में दर्ज करानी चाहिए। राठौड़ ने दावा किया कि प्रदर्शन से चुनाव प्रक्रिया पर कोई असर नहीं पड़ेगा। उन्होंने राहुल गांधी की महिला पुलिसकर्मी के साथ कथित हरकत पर भी सवाल उठाए।
राजस्थान भाजपा अध्यक्ष मदन राठौड़ ने कांग्रेस के चुनाव आयोग के खिलाफ प्रदर्शन पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को अपनी शिकायत चुनाव आयोग में दर्ज करानी चाहिए। राठौड़ ने दावा किया कि प्रदर्शन से चुनाव प्रक्रिया पर कोई असर नहीं पड़ेगा। उन्होंने राहुल गांधी की महिला पुलिसकर्मी के साथ कथित हरकत पर भी सवाल उठाए।

लेटर में जजों के 3 दावे जो चर्चा में हैं...

  • पहला: चुनावों को अवैध ठहराने की कोशिशें अशांति को बल दे सकती हैं। ये अराजक तत्वों को भी प्रोत्साहित कर सकती हैं।
  • दूसरा: चुनाव कराने वाले अधिकारियों को अपशब्द कहे जा रहे हैं। उन्हें सत्ता बदलने के बाद बदला लेने की चेतावनी भी दी जा रही है।
  • तीसरा: एक्टिविस्ट संगठन आरोपों को कानूनी रूप देने की कोशिश करते हैं। वे लगातार याचिकाएं लगाते हैं, पर शायद ही सबूत पेश करते हैं।

सितंबर में 2,000 लोगों ने मांगी रोक

अब जरा पीछे चलते हैं। सितंबर में 2,000 से ज्यादा नागरिकों ने एक ओपन लेटर लिखा था। उन्होंने कोर्ट से एसआईआर रोकने की अपील की थी। मांग थी कि वैधता और प्रक्रिया की स्वतंत्र जांच होने तक अभियान रुके।

लेटर सीजेआई (CJI – Chief Justice of India) सूर्यकांत को लिखा गया था। इसमें वोटर लिस्ट और आयोग के प्लेटफॉर्म की अनियमितताओं का मुद्दा था। जांच कोर्ट की निगरानी में हो, यह भी मांगा गया।

दस्तखत करने वालों में पूर्व नौसेना प्रमुख एडमिरल विष्णु भागवत थे। पूर्व आईएएस (IAS – Indian Administrative Service) अधिकारी अदिति मेहता ने भी दस्तखत किए। वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण भी शामिल थे। इतिहासकार आदित्य मुखर्जी और अभिनेता प्रकाश राज भी इस सूची में थे।

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मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर दिल्ली में चल रहे कांग्रेस और विपक्ष के आंदोलन का असर अब मध्य प्रदेश में भी दिखाई दे रहा है। राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और विपक्षी सांसदों को हिरासत में लिए जाने के विरोध में कांग्रेस ने गुरवार को काला दिवस मनाने का ऐलान किया है।
मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर दिल्ली में चल रहे कांग्रेस और विपक्ष के आंदोलन का असर अब मध्य प्रदेश में भी दिखाई दे रहा है। राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और विपक्षी सांसदों को हिरासत में लिए जाने के विरोध में कांग्रेस ने गुरवार को काला दिवस मनाने का ऐलान किया है।

जजों की टिप्पणी पर भी बहस

इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के जजों की बातें भी चर्चा में हैं। दो बयान 4 और 5 अक्टूबर को आए।

लाखों वोटरों के हक पर जज की बात

लाखों भारतीय नागरिकों को वोट देने के अधिकार से वंचित करने वाली कोई भी प्रक्रिया मूल रूप से मनमानी है।जस्टिस उज्जल भुइयां, सिटिंग जज, सुप्रीम कोर्ट
By: जस्टिस उज्जल भुइयां, सिटिंग जज, सुप्रीम कोर्ट
यह बात उन्होंने 4 अक्टूबर को नालसर (NALSAR – National Academy of Legal Studies and Research) यूनिवर्सिटी में कही थी।

ज्ञानेश कुमार के समर्थन में 42 पूर्व जज
ज्ञानेश कुमार के समर्थन में 42 पूर्व जज

लंबित मामले पर गवई की राय

किसी लंबित मामले पर सुप्रीम कोर्ट के मौजूदा जज को सार्वजनिक टिप्पणी नहीं करनी चाहिए। यह न्यायिक मर्यादा के खिलाफ है।गवई, पूर्व सीजेआई, सुप्रीम कोर्ट
By: गवई, पूर्व सीजेआई, सुप्रीम कोर्ट
गवई ने यह बात 5 अक्टूबर को कही।

राहुल गांधी आकाशवाणी भवन के बाहर डिटेन, प्रियंका गांधी संग धरने पर बैठे; कई विपक्षी सांसद हिरासत में | Rahul Gandhi detained outside Akashvani Bhavan, sits on protest with Priyanka Gandhi; several opposition MPs in custody
Rahul Gandhi detained: आकाशवाणी भवन के बाहर हंगामा, राहुल-प्रियंका समेत कई विपक्षी सांसद हिरासत में
06 Oct 2026 ,
By Sumit Kumar
चुनाव आयोग से मुलाकात की मांग को लेकर मंगलवार, 06 अक्टूबर को दिल्ली में विपक्ष का प्रदर्शन देर रात तक चला। संसद से मार्च निकालने के बाद राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और कई विपक्षी नेता आकाशवाणी भवन परिसर में धरने पर बैठ गए। करीब रात 8 बजे दिल्ली पुलिस ने राहुल गांधी समेत कई नेताओं को हिरासत में लेकर वहां से हटा दिया।
चुनाव आयोग से मुलाकात की मांग को लेकर मंगलवार, 06 अक्टूबर को दिल्ली में विपक्ष का प्रदर्शन देर रात तक चला। संसद से मार्च निकालने के बाद राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और कई विपक्षी नेता आकाशवाणी भवन परिसर में धरने पर बैठ गए। करीब रात 8 बजे दिल्ली पुलिस ने राहुल गांधी समेत कई नेताओं को हिरासत में लेकर वहां से हटा दिया।

सुप्रीम कोर्ट सुनवाई में क्या हुआ

एसआईआर प्रक्रिया से संबंधित याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट में लंबित हैं। चुनाव पैनल के नए कानून की वैधता पर भी सुनवाई बाकी है। नए कानून में मुख्य चुनाव आयुक्त के चयन पैनल से सीजेआई बाहर हैं।

5 अक्टूबर की सुप्रीम कोर्ट सुनवाई में कोर्ट ने अंतरिम आदेश देने से इनकार किया। मांग मुख्य चुनाव आयुक्त को अंतरिम तौर पर निलंबित करने की थी। हालांकि कोर्ट ने चुनाव आयोग को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। कोर्ट के मुताबिक बिना सहमति लिए गए फैसले वापस हो सकते हैं।

भरोसे की बहस और आगे क्या

सोचिए एक बार। अगर हर चुनाव के बाद नतीजों पर शक किया जाए, तो वोटर किस पर भरोसा करे? और अगर कोई प्रक्रिया लाखों लोगों का वोट का हक छीने, तो सवाल कौन पूछे? एक तरफ 42 पूर्व जज सबूत की मांग कर रहे हैं। दूसरी तरफ 2,000 से ज्यादा नागरिक स्वतंत्र जांच चाहते हैं। आयोग को नोटिस जारी हुआ है और जवाब का इंतजार है।

FAQ:

  1. पूर्व जजों का लेटर क्या कहता है?
    पूर्व जजों का लेटर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का समर्थन करता है और आरोप लगाते हैं कि वोट चोरी के दावे बिना सबूत के किए जा रहे हैं। जजों ने विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया को सही बताया है और चुनाव आयोग पर लगे आरोपों को निराधार करार दिया है।
  2. वोट चोरी के आरोपों के बारे में जजों की क्या दलील है?
    जजों का कहना है कि वोट चोरी के आरोप अदालतों में नहीं, बल्कि प्रेस कॉन्फ्रेंस में लगाए जाते हैं। वे यह भी बताते हैं कि हार के बाद ईवीएम (इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन) को दोषी ठहराना उचित नहीं है।
  3. सुप्रीम कोर्ट में एसआईआर प्रक्रिया से संबंधित सुनवाई का क्या हुआ?
    सुप्रीम कोर्ट ने 5 अक्टूबर को एसआईआर प्रक्रिया से संबंधित याचिकाओं पर सुनवाई की, जिसमें कोर्ट ने चुनाव आयोग को नोटिस जारी किया और बिना सहमति लिए गए फैसलों को वापस लेने की संभावना भी जताई। हालांकि, अंतरिम आदेश देने से इनकार कर दिया गया।
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  • Election Commission of India
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