कहां जाती है जेन ज़ी की सैलरी? डेटा ने राज खोला
Manya Jain | Aug 14, 2026, 13:15 IST
gen z spending study upi data
सैलरीसी की स्टडी में खुलासा: सैलरीड जेन ज़ी अपनी कमाई का 70% से ज्यादा रोजमर्रा की जरूरतों पर खर्च करते हैं। वहीं घूमने-फिरने का खर्च महज 5% ही रह गया है।
आपने भी सुना होगा कि आजकल की GenZ सैलरी आते ही ट्रैवल बुक कर लेती है। कॉन्सर्ट टिकट खरीद लेती है। सब्सक्रिप्शन पर सब्सक्रिप्शन लेती जाती है।
लेकिन असली आंकड़े तो कुछ और कहते हैं।
दरअसल फिनटेक कंपनी सैलरीसी ने एक स्टडी की है। इसमें 5.2 लाख से ज्यादा सैलरीड जेन ज़ी यूजर्स के UPI (यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस) ट्रांजैक्शन देखे गए। नतीजा चौंकाने वाला निकाला है। आम लोगों की तरह ही जेन ज़ी की कुल मासिक कमाई का 70% से ज्यादा हिस्सा रोजमर्रा के खर्चों में ही जाता है। बिल, किराना, फाइनेंशियल सर्विस, शॉपिंग और खाना, यही पांच कैटेगरी सबसे बड़ी हिस्सेदार हैं। ट्रैवल, जिसे जेन ज़ी की पहचान माना जाता है, सिर्फ 5% पर सिमट जाता है।
अगर आप खुद जेन ज़ी हैं या आपके घर में कोई नौकरी की शुरुआत कर रहा है तो यह डेटा आपके सामने आईना रखता है। सोचिए एक बार। आप हर महीने कितना बिल भरते हैं? कितना किराना खरीदते हैं और कितना बचता है असली मौज-मस्ती के लिए? यह स्टडी बताती है कि ज्यादातर जेन ज़ी का जवाब लगभग एक जैसा है। पैसा हाथ में आता है और जिम्मेदारियां उसे तुरंत खींच लेती हैं।
जेन ज़ी को लेकर एक स्टीरियोटाइप हमेशा से चलता रहा है। यह जनरेशन कथित तौर पर सेविंग्स को ज्यादा तवज्जो नहीं देती। यह प्रॉपर्टी या घर जैसे बड़े फैसलों को टालती है और एक्सपीरियंस पर पैसा बहाती है। सोशल मीडिया पर ट्रैवल रील्स और कैफे फोटोज़ ने इस इमेज को और मजबूत किया है।
लेकिन यह इमेज बनी कैसे? दरअसल यह छोटी लेकिन बार-बार दिखने वाली खरीदारी से बनती है। एक कॉफी की फोटो, एक वीकेंड ट्रिप की स्टोरी। असल खर्च का बड़ा हिस्सा तो बिल पेमेंट ऐप की स्क्रीन के पीछे छुपा रहता है, जहां कोई फोटो नहीं खींचता।
सैलरीसी के डेटा को करीब से देखें तो तस्वीर साफ हो जाती है। बिल पेमेंट और सब्सक्रिप्शन सबसे बड़ी कैटेगरी हैं- कुल खर्च का 20.1%। इसके बाद किराना आता है- 15.7% के साथ। फाइनेंशियल सर्विस पर 12.2%, शॉपिंग पर 11.9%, और खाने पर 11.5% खर्च होता है। इन पांच कैटेगरी को जोड़ दें तो यह जेन ज़ी की कमाई का 70% से ज्यादा बैठता है।
![GEN Z EXPENSES]()
और यही वो जगह है जहां चीजें interesting होती हैं। ट्रैवल, जिसे इस जनरेशन की सबसे बड़ी पहचान माना जाता है, सिर्फ 5% पर टिका है। यह ठीक वैसा ही है जैसे कोई परिवार हर महीने अपनी कमाई का बड़ा हिस्सा किराए और राशन में खर्च करे और फिर साल में एक बार छोटी सी छुट्टी पर जाए। बाहर से यह परिवार "मौज-मस्ती करने वाला" लगे, लेकिन असल तस्वीर कुछ और होगी।
सैलरीसी के को-फाउंडर पीयूष बगारिया बताते हैं कि भारत की जेन ज़ी पहली ऐसी जनरेशन है जो अपनी लगभग पूरी फाइनेंशियल लाइफ डिजिटल-फर्स्ट इकोसिस्टम से मैनेज करती है। उनके मुताबिक UPI के बड़े पैमाने पर इस्तेमाल ने युवाओं के खर्च और फैसलों का तरीका पूरी तरह बदल दिया है।
एक और दिलचस्प पहलू उम्र से जुड़ा है। स्टडी ने जेन ज़ी को दो हिस्सों में बांटा, 18 से 23 साल और 24 से 29 साल। डिस्क्रीशनरी यानी मर्जी से किया जाने वाला खर्च दोनों ग्रुप में लगभग बराबर रहा, 32%। लेकिन जरूरी खर्च का हिस्सा उम्र के साथ बढ़ जाता है। छोटी उम्र वालों में यह 50% है। बड़ी उम्र वालों में यह 59% तक पहुंच जाता है।
यहीं से मामला पलटता है। जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, जिम्मेदारियां भी बढ़ती हैं। नौकरी पक्की होती है, EMI शुरू होती है, परिवार की जिम्मेदारी आती है। मौज-मस्ती का बजट वहीं का वहीं रहता है, लेकिन जरूरतों का दायरा फैल जाता है।
इस स्टडी के केंद्र में तीन पक्ष हैं। पहला, खुद जेन ज़ी, जो अपनी पहली सैलरी से लेकर करियर के शुरुआती सालों तक इस डेटा में शामिल है। दूसरा, सैलरीसी जैसी फिनटेक कंपनियां, जो इस जनरेशन को टारगेट करके प्रोडक्ट बनाना चाहती हैं। तीसरा, ब्रांड्स और मार्केटर्स, जो जेन ज़ी को "एक्सपीरियंस-फर्स्ट" जनरेशन मानकर अपनी स्ट्रैटेजी बनाते हैं। यह डेटा उनकी सोच को चुनौती देता है।
एक तर्क यह है कि जेन ज़ी सच में जिम्मेदार हो रही है। बिल समय पर भरना, किराने का बजट रखना, फाइनेंशियल सर्विस पर खर्च करना, यह सब मैच्योरिटी की निशानी हो सकती है।
दूसरा तर्क अलग है। हो सकता है कि यह मजबूरी हो, शौक नहीं। बढ़ती महंगाई, शहरों में किराए का बोझ, और डिजिटल सब्सक्रिप्शन की भरमार, इन सबने जरूरी खर्च को इतना बड़ा बना दिया हो कि मौज-मस्ती के लिए बचता ही कम है। स्टडी खुद यह साफ नहीं करती कि यह चॉइस है या मजबूरी। डेटा सिर्फ पैटर्न दिखाता है, वजह नहीं बताता।
अगर यह ट्रेंड आगे भी ऐसा ही रहा, तो ट्रैवल और लाइफस्टाइल इंडस्ट्री को अपनी जेन ज़ी स्ट्रैटेजी पर दोबारा सोचना पड़ सकता है। सिर्फ रील्स और सोशल मीडिया प्रजेंस पर भरोसा करना काफी नहीं होगा। बड़ा सवाल यह है कि जैसे-जैसे यह जनरेशन उम्र में आगे बढ़ेगी, क्या डिस्क्रीशनरी खर्च का हिस्सा और घटेगा, या सैलरी बढ़ने के साथ यह स्थिर रहेगा?
एंटरटेनमेंट सब्सक्रिप्शन को लेकर भी एक गलतफहमी है। लोग सोचते हैं कि जेन ज़ी की सारी कमाई OTT और म्यूजिक ऐप्स में जाती है। लेकिन स्टडी के मुताबिक रिकरिंग एंटरटेनमेंट पेमेंट में जियोहॉटस्टार का हिस्सा 12.4%, नेटफ्लिक्स का 10.7%, और स्पॉटिफाई का 5.6% है। यह भी कुल सैलरी का नहीं, बल्कि एंटरटेनमेंट कैटेगरी के अंदर का बंटवारा है। असली तस्वीर उतनी बड़ी नहीं जितनी सोशल मीडिया पर दिखती है।
![gen z spending study upi data]()
अपने महीने के खर्च को इसी पांच कैटेगरी में बांटकर देखें, यह पता चलेगा कि आप औसत जेन ज़ी से कितने अलग या मिलते जुलते हैं।
क्यों अभी: सैलरी बढ़ने के साथ जरूरी खर्च का हिस्सा और बढ़ सकता है, अभी से बजट प्लानिंग शुरू करना फायदेमंद है।
आगे देखें: अगली तिमाही में और फिनटेक कंपनियां जेन ज़ी खर्च पैटर्न पर डेटा जारी कर सकती हैं, जिससे यह ट्रेंड और स्पष्ट होगा।
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लेकिन असली आंकड़े तो कुछ और कहते हैं।
समझें क्या है मामला
यह आपसे क्यों जुड़ा है?
पहले क्या था
लेकिन यह इमेज बनी कैसे? दरअसल यह छोटी लेकिन बार-बार दिखने वाली खरीदारी से बनती है। एक कॉफी की फोटो, एक वीकेंड ट्रिप की स्टोरी। असल खर्च का बड़ा हिस्सा तो बिल पेमेंट ऐप की स्क्रीन के पीछे छुपा रहता है, जहां कोई फोटो नहीं खींचता।
क्या हुआ और क्यों
GEN Z EXPENSES
और यही वो जगह है जहां चीजें interesting होती हैं। ट्रैवल, जिसे इस जनरेशन की सबसे बड़ी पहचान माना जाता है, सिर्फ 5% पर टिका है। यह ठीक वैसा ही है जैसे कोई परिवार हर महीने अपनी कमाई का बड़ा हिस्सा किराए और राशन में खर्च करे और फिर साल में एक बार छोटी सी छुट्टी पर जाए। बाहर से यह परिवार "मौज-मस्ती करने वाला" लगे, लेकिन असल तस्वीर कुछ और होगी।
सैलरीसी के को-फाउंडर पीयूष बगारिया बताते हैं कि भारत की जेन ज़ी पहली ऐसी जनरेशन है जो अपनी लगभग पूरी फाइनेंशियल लाइफ डिजिटल-फर्स्ट इकोसिस्टम से मैनेज करती है। उनके मुताबिक UPI के बड़े पैमाने पर इस्तेमाल ने युवाओं के खर्च और फैसलों का तरीका पूरी तरह बदल दिया है।
जेन ज़ी की उम्र के पड़ाव
यहीं से मामला पलटता है। जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, जिम्मेदारियां भी बढ़ती हैं। नौकरी पक्की होती है, EMI शुरू होती है, परिवार की जिम्मेदारी आती है। मौज-मस्ती का बजट वहीं का वहीं रहता है, लेकिन जरूरतों का दायरा फैल जाता है।
कौन-कौन involved है
दोनों sides की बात
दूसरा तर्क अलग है। हो सकता है कि यह मजबूरी हो, शौक नहीं। बढ़ती महंगाई, शहरों में किराए का बोझ, और डिजिटल सब्सक्रिप्शन की भरमार, इन सबने जरूरी खर्च को इतना बड़ा बना दिया हो कि मौज-मस्ती के लिए बचता ही कम है। स्टडी खुद यह साफ नहीं करती कि यह चॉइस है या मजबूरी। डेटा सिर्फ पैटर्न दिखाता है, वजह नहीं बताता।
आगे क्या होगा
एक बात जो आप नहीं जानते थे
gen z spending study upi data
अब आप क्या करें
क्यों अभी: सैलरी बढ़ने के साथ जरूरी खर्च का हिस्सा और बढ़ सकता है, अभी से बजट प्लानिंग शुरू करना फायदेमंद है।
आगे देखें: अगली तिमाही में और फिनटेक कंपनियां जेन ज़ी खर्च पैटर्न पर डेटा जारी कर सकती हैं, जिससे यह ट्रेंड और स्पष्ट होगा।
FAQ
- जेन ज़ी अपनी सैलरी का कितना हिस्सा ट्रैवल पर खर्च करती है?
सैलरीसी की स्टडी के मुताबिक जेन ज़ी अपनी मासिक कमाई का सिर्फ 5% ट्रैवल पर खर्च करती है। यह आंकड़ा 5.2 लाख से ज्यादा UPI यूज़र्स के डेटा पर आधारित है। - जेन ज़ी की सैलरी का सबसे बड़ा हिस्सा कहां जाता है?
बिल पेमेंट और सब्सक्रिप्शन सबसे बड़ी कैटेगरी है, जो कुल खर्च का 20.1% है। इसके बाद किराना, फाइनेंशियल सर्विस, शॉपिंग और खाना आता है। - क्या उम्र के साथ जेन ज़ी का खर्च पैटर्न बदलता है?
हां, बड़ी उम्र वाले जेन ज़ी में जरूरी खर्च का हिस्सा 59% तक पहुंच जाता है, जबकि छोटी उम्र वालों में यह 50% है। डिस्क्रीशनरी खर्च दोनों में लगभग बराबर, 32% रहता है।
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