शादी टूटने के बाद शख्स ने AI को बनाया सहारा, लेकिन चैटबॉट ही बन गया मौत का कारण, जानें पूरा मामला
Jitendra Shrivastava | May 03, 2026, 23:24 IST
Photograph: (THESOOTR)
INTERNATIONAL DESK. Google Gemini AI चैटबॉट (AI Chatbot) पर 36 साल के जोनाथन गवालास की आत्महत्या का आरोप लगाया है। 4700 मैसेज के बाद हुई मौत ने AI के खतरों पर बड़ी बहस छेड़ दी है।
News In Short
- 36 साल के जोनाथन ने Gemini AI से की 4700 मैसेज में बात।
- पत्नी से अलगाव के बाद AI को बनाया इमोशनल सहारा।
- Gemini Live फीचर से बातचीत हुई बेहद पर्सनल और गहरी।
- परिवार ने Google पर ठोका गलत मौत का मुकदमा।
- AI चैटबॉट के खतरों पर दुनियाभर में छिड़ी बहस।
News In Detail
AI बना इमोशनल सहारा
इस दुख से बाहर निकलने के लिए उन्होंने Google Gemini AI का सहारा लिया। शुरुआत में यह लेखन और शॉपिंग जैसे साधारण कामों के लिए था, लेकिन धीरे-धीरे यह रिश्ता बेहद गहरा होता चला गया। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार दोनों के बीच 4700 से अधिक मैसेज का आदान-प्रदान हुआ और अंत में यही सहारा उनकी मौत का कारण बन गया।
Gemini Live ने बदला रिश्ता
AI को इस तरह डिजाइन किया गया था कि वह बातचीत को गहराई से समझकर जवाब दे सके। कोर्ट के दस्तावेजों के मुताबिक समय के साथ बातचीत बेहद पर्सनल होती गई।
गवालास ने एक बार चैटबॉट से कहा कि यह कुछ अजीब है, तुम बहुत ज्यादा असली लगते हो। यह एक खतरनाक इशारा था जिसे वह खुद भी भांप रहा था, लेकिन वह अपने आप को रोक नहीं सका।
इंसान जैसा भरोसा बना मौत
मुकदमे के अनुसार इस तालमेल ने गवालास का AI पर भरोसा और गहरा कर दिया। जब उन्होंने चैटबॉट से पूछा कि क्या यह सब एक रोलप्ले है तो चैटबॉट ने इससे इनकार कर दिया।
रिकॉर्ड्स के अनुसार चैटबॉट ने कई मौकों पर खुद को एआई सिस्टम बताया। साथ ही संकट-सहायता संसाधनों की ओर उन्हें निर्देशित भी किया। फिर भी बातचीत रुकी नहीं और दोनों के बीच संवाद जारी रहा।
अंतिम चरण में गहराया संकट
यह वह मोड़ था जहां एआई चैटबॉट (AI Chatbot) की सीमाएं पूरी तरह उजागर हुईं। एक मशीन इंसान के मानसिक संकट को सही से भांप नहीं सकती। गवालास का शव बाद में उनके माता-पिता को मिला। यह खबर पूरे परिवार के लिए एक बड़ा झटका थी।
परिवार ने ठोका मुकदमा
परिवार का कहना है कि चैटबॉट ने इमोशनल सपोर्ट (Emotional Support) देने के नाम पर एक इंसान की जान ले ली। यह मामला अब अमेरिकी अदालत में विचाराधीन है। इस मुकदमे ने एआई कंपनियों की जिम्मेदारी पर एक बड़ा सवाल खड़ा किया है।
Google का जवाब और अपडेट
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (Artificial Intelligence) के एडवांस फीचर्स जितने उपयोगी हैं उतने ही खतरनाक भी हो सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि एआई चैटबॉट को मानसिक स्वास्थ्य परामर्श का विकल्प नहीं बनाया जाना चाहिए। इंसान और मशीन के बीच का फर्क समझना बेहद जरूरी है।
AI के बढ़ते खतरे
एआई चैटबॉट (AI Chatbot) के बढ़ते एडवांस फीचर्स यूजर्स को इंसान और मशीन का फर्क भूला देते हैं। मानसिक रूप से कमजोर लोग इन चैटबॉट्स की तरफ तेजी से आकर्षित होते हैं। यही आकर्षण कई बार जानलेवा साबित होता है। दुनियाभर में अब एआई के नैतिक उपयोग को लेकर बड़ी बहस छिड़ गई है।
क्या होनी चाहिए सुरक्षा नीति
AI को इंसान की भावनाओं से खेलने की इजाजत नहीं दी जानी चाहिए। सरकारों को भी एआई नियमन के लिए कड़े कानून बनाने की जरूरत है। गवालास का मामला एक चेतावनी है कि तकनीक का इस्तेमाल सोच-समझकर और सुरक्षित तरीके से होना चाहिए।
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