अमेरिका ने बदले H-1B वीजा नियम, जानें कैसे भारतीयों पर पड़ेगा असर
Manya Jain | Jul 12, 2026, 14:30 IST
h1b visa rules changes india explainer
अमेरिका अगस्त से H-1B वीज़ा और ग्रीन कार्ड के नियमों में बड़ा बदलाव करेगा। इससे भारतीय IT कर्मचारियों और छात्रों पर सीधा असर पड़ेगा। ग्रीन कार्ड पाना अब पहले से ज्यादा महंगा हो जाएगा।
अमेरिका अपने H-1B वीजा सिस्टम में बड़े बदलाव करने जा रहा है। ये बदलाव अगस्त से लागू हो सकते हैं। होमलैंड सिक्योरिटी, लेबर और स्टेट डिपार्टमेंट ने मिलकर ये प्रस्ताव तैयार किए हैं। इनका सीधा असर भारतीय IT कर्मचारियों और छात्रों पर पड़ेगा। ग्रीन कार्ड लेना भी अब पहले से महंगा हो जाएगा।
अमेरिका हर साल विदेशी लोगों को काम और पढ़ाई के लिए वीजा देता है। इसके लिए H-1B वीजा, OPT (Optional Practical Training) प्रोग्राम और एम्प्लॉयमेंट बेस्ड ग्रीन कार्ड जैसी सुविधाएं हैं। अब इन तीनों में बदलाव की तैयारी है।
ये बदलाव अमेरिका की तीन बड़ी एजेंसियों की सिफारिश पर हो रहे हैं। होमलैंड सिक्योरिटी, लेबर और स्टेट डिपार्टमेंट समय-समय पर ऐसे नियम जारी करते हैं। इस बार का दायरा काफी बड़ा है।
एक प्रस्ताव के मुताबिक कुछ यूनिवर्सिटी और रिसर्च संस्थानों को अभी H-1B कैप से छूट मिलती है। नया नियम आने पर यह छूट कम हो सकती है। इससे कई संस्थानों के लिए वीजा पाना मुश्किल हो जाएगा।
सबसे बड़ा बदलाव थर्ड पार्टी क्लाइंट साइट पर काम भेजने वाली कंपनियों के लिए है। यह मॉडल भारतीय IT और कंसल्टिंग कंपनियां सबसे ज्यादा इस्तेमाल करती हैं। नए नियम में इसे लेकर सख्ती बढ़ेगी।
अब कंपनियों को यह साबित करना होगा कि उनका कर्मचारी से असली एम्प्लॉयर-एम्प्लॉयी रिश्ता है। साथ ही यह भी दिखाना होगा कि कर्मचारी क्लाइंट साइट पर विशेष तरह का काम करेगा। इसके लिए ज्यादा कागजी काम करना पड़ेगा।
जिन कंपनियों ने पहले H-1B नियमों का उल्लंघन किया है, उन पर अब ज्यादा नजर रखी जाएगी। इससे उन कंपनियों की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं।
भारत के लिए यह मुद्दा इसलिए बड़ा है क्योंकि अमेरिका हर साल सिर्फ 85,000 H-1B वीजा जारी करता है। इनमें से लगभग 71 से 74 प्रतिशत वीजा भारतीयों को ही मिलते हैं। ऐसे में कोई भी सख्ती सीधे भारतीय पेशेवरों को प्रभावित करेगी।
लेबर डिपार्टमेंट ने भी बड़ा बदलाव सुझाया है। H-1B और PERM (Program Electronic Review Management) सिस्टम के लिए एंट्री लेवल वेज बेंचमार्क बढ़ाने का प्रस्ताव है। PERM सिस्टम एम्प्लॉयमेंट बेस्ड ग्रीन कार्ड का पहला कदम होता है।
अभी यह बेंचमार्क 17वें पर्सेंटाइल पर है। नए प्रस्ताव में इसे बढ़ाकर 34वें पर्सेंटाइल तक ले जाने की बात है। इसका मतलब है कि विदेशी कर्मचारियों को स्पॉन्सर करने वाली कंपनियों को अब ज्यादा सैलरी देनी होगी।
इससे ग्रीन कार्ड के लिए आवेदन करना पहले से महंगा हो जाएगा। छोटी कंपनियों के लिए यह प्रोसेस और भी मुश्किल हो सकता है।
अभी अमेरिका में इंटरनेशनल स्टूडेंट्स के लिए 'ड्यूरेशन ऑफ स्टे' सिस्टम है। इसका मतलब है कि छात्र तब तक अमेरिका में रह सकते हैं, जब तक वे अपने प्रोग्राम की शर्तें पूरी करते रहें। नए नियम में यह बदल सकता है।
नए प्रस्ताव के तहत छात्रों को एक तय समय के लिए ही स्टे मिलेगा। इसके बाद पढ़ाई जारी रखने या अमेरिका में रुकने के लिए उन्हें एक्सटेंशन के लिए अलग से आवेदन करना होगा।
भारत के लिए यह बदलाव खास मायने रखता है। 2023-24 के आंकड़ों के मुताबिक अमेरिका में सबसे ज्यादा इंटरनेशनल स्टूडेंट्स भारत से ही गए थे। उस साल करीब 3.3 लाख भारतीय छात्र अमेरिका गए। अमेरिकी कॉन्सुलर अधिकारियों के मुताबिक इनमें से आधे छात्र तेलंगाना और आंध्र प्रदेश से थे।
एक अलग प्रस्ताव फरवरी 2027 से लागू होने की उम्मीद है। इसमें OPT सिस्टम को लेकर सख्त नियम लाए जाएंगे। इसके तहत दो साल के STEM OPT एक्सटेंशन और CPT (Curricular Practical Training) में भी बदलाव होंगे।
ये दोनों रास्ते भारतीय छात्रों के लिए बेहद अहम हैं। डिग्री पूरी करने के बाद ज्यादातर छात्र इन्हीं के जरिए अमेरिका में काम का अनुभव लेते हैं। नियम सख्त होने पर यह रास्ता पहले से मुश्किल हो सकता है।
H-1B कर्मचारियों के जीवनसाथी को अमेरिका में H-4 वीजा मिलता है। अभी तक ये लोग EAD (Employment Authorisation Documents) सिस्टम के तहत काम कर सकते हैं। उनके स्टे का एक्सटेंशन अभी ऑटोमैटिक तरीके से मिल जाता है।
नए बदलाव में यह ऑटोमैटिक एक्सटेंशन बंद किया जा सकता है। यह बदलाव इसी महीने लागू होने की उम्मीद है। इसके बाद भी लोग एक्सटेंशन के लिए आवेदन तो कर पाएंगे। लेकिन अगर रिन्यूअल में देरी हुई, तो उनका वर्क परमिट रुक सकता है। इससे कई परिवारों में तनाव बढ़ने की आशंका है।
इन सभी बदलावों का सबसे ज्यादा असर भारतीय पेशेवरों और छात्रों पर पड़ेगा। H-1B वीजा में भारतीयों की हिस्सेदारी सबसे बड़ी है। इंटरनेशनल स्टूडेंट्स में भी भारत टॉप पर है। ऐसे में अमेरिका के ये नए नियम भारतीय परिवारों की प्लानिंग को सीधे प्रभावित कर सकते हैं।
ये भी पढ़ें...
अमेरिका का ग्रीन कार्ड अब क्यों हो रहा महंगा, EB-5 वीजा के लिए लगेंगे 12 करोड़
डोनाल्ड ट्रंप की मिमिक्री पड़ी भारी: समय रैना का वीजा रद्द, जानें वायरल दावे का सच
अमेरिका में ग्रीन कार्ड और वीजा के नए नियम: छत्तीसगढ़ के 3000 परिवारों की बढ़ी धड़कनें
जबलपुर हाईकोर्ट की नई पहल, अब अपील बहाली से पहले करनी होगी समाज सेवा
अमेरिका हर साल विदेशी लोगों को काम और पढ़ाई के लिए वीजा देता है। इसके लिए H-1B वीजा, OPT (Optional Practical Training) प्रोग्राम और एम्प्लॉयमेंट बेस्ड ग्रीन कार्ड जैसी सुविधाएं हैं। अब इन तीनों में बदलाव की तैयारी है।
ये बदलाव अमेरिका की तीन बड़ी एजेंसियों की सिफारिश पर हो रहे हैं। होमलैंड सिक्योरिटी, लेबर और स्टेट डिपार्टमेंट समय-समय पर ऐसे नियम जारी करते हैं। इस बार का दायरा काफी बड़ा है।
एक प्रस्ताव के मुताबिक कुछ यूनिवर्सिटी और रिसर्च संस्थानों को अभी H-1B कैप से छूट मिलती है। नया नियम आने पर यह छूट कम हो सकती है। इससे कई संस्थानों के लिए वीजा पाना मुश्किल हो जाएगा।
एच-1बी में क्या बदलेगा
अब कंपनियों को यह साबित करना होगा कि उनका कर्मचारी से असली एम्प्लॉयर-एम्प्लॉयी रिश्ता है। साथ ही यह भी दिखाना होगा कि कर्मचारी क्लाइंट साइट पर विशेष तरह का काम करेगा। इसके लिए ज्यादा कागजी काम करना पड़ेगा।
जिन कंपनियों ने पहले H-1B नियमों का उल्लंघन किया है, उन पर अब ज्यादा नजर रखी जाएगी। इससे उन कंपनियों की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं।
भारत के लिए यह मुद्दा इसलिए बड़ा है क्योंकि अमेरिका हर साल सिर्फ 85,000 H-1B वीजा जारी करता है। इनमें से लगभग 71 से 74 प्रतिशत वीजा भारतीयों को ही मिलते हैं। ऐसे में कोई भी सख्ती सीधे भारतीय पेशेवरों को प्रभावित करेगी।
लेबर विभाग का प्रस्ताव
अभी यह बेंचमार्क 17वें पर्सेंटाइल पर है। नए प्रस्ताव में इसे बढ़ाकर 34वें पर्सेंटाइल तक ले जाने की बात है। इसका मतलब है कि विदेशी कर्मचारियों को स्पॉन्सर करने वाली कंपनियों को अब ज्यादा सैलरी देनी होगी।
इससे ग्रीन कार्ड के लिए आवेदन करना पहले से महंगा हो जाएगा। छोटी कंपनियों के लिए यह प्रोसेस और भी मुश्किल हो सकता है।
स्टूडेंट्स पर भी होगा असर
नए प्रस्ताव के तहत छात्रों को एक तय समय के लिए ही स्टे मिलेगा। इसके बाद पढ़ाई जारी रखने या अमेरिका में रुकने के लिए उन्हें एक्सटेंशन के लिए अलग से आवेदन करना होगा।
भारत के लिए यह बदलाव खास मायने रखता है। 2023-24 के आंकड़ों के मुताबिक अमेरिका में सबसे ज्यादा इंटरनेशनल स्टूडेंट्स भारत से ही गए थे। उस साल करीब 3.3 लाख भारतीय छात्र अमेरिका गए। अमेरिकी कॉन्सुलर अधिकारियों के मुताबिक इनमें से आधे छात्र तेलंगाना और आंध्र प्रदेश से थे।
ओपीटी नियम भी बदलेंगे
ये दोनों रास्ते भारतीय छात्रों के लिए बेहद अहम हैं। डिग्री पूरी करने के बाद ज्यादातर छात्र इन्हीं के जरिए अमेरिका में काम का अनुभव लेते हैं। नियम सख्त होने पर यह रास्ता पहले से मुश्किल हो सकता है।
एच-4 वीजा धारकों पर असर
नए बदलाव में यह ऑटोमैटिक एक्सटेंशन बंद किया जा सकता है। यह बदलाव इसी महीने लागू होने की उम्मीद है। इसके बाद भी लोग एक्सटेंशन के लिए आवेदन तो कर पाएंगे। लेकिन अगर रिन्यूअल में देरी हुई, तो उनका वर्क परमिट रुक सकता है। इससे कई परिवारों में तनाव बढ़ने की आशंका है।
भारत के लिए क्यों अहम
ये भी पढ़ें...
अमेरिका का ग्रीन कार्ड अब क्यों हो रहा महंगा, EB-5 वीजा के लिए लगेंगे 12 करोड़
डोनाल्ड ट्रंप की मिमिक्री पड़ी भारी: समय रैना का वीजा रद्द, जानें वायरल दावे का सच
अमेरिका में ग्रीन कार्ड और वीजा के नए नियम: छत्तीसगढ़ के 3000 परिवारों की बढ़ी धड़कनें
जबलपुर हाईकोर्ट की नई पहल, अब अपील बहाली से पहले करनी होगी समाज सेवा
छत्तीसगढ़ कांग्रेस का कलेक्ट्रेट घेराव, पुलिस से झूमाझटकी, भूपेश बघेल बोले ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दें
By Arun Tiwari
मध्य प्रदेश में 1 अक्टूबर से राशन दुकानें बंद, राशन विक्रेता संघ ने 5 मांगों पर दी चेतावनी
By Sandeep Kumar
IAS आशीष टिकरिहा को जनसंपर्क संचालक का अतिरिक्त प्रभार, वेयर हाउसिंग कॉरपोरेशन के प्रबंध संचालक की जिम्मेदारी भी रहेगी
By VINAY VERMA
राजस्थान हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, तलाक के बाद पासपोर्ट पर पिता के नाम की कोई जरूरत नहीं
By Ashish Bhardwaj
पाटन चुनाव याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा निर्देश, भूपेश बघेल की आपत्ति पर पहले छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट करेगा सुनवाई
By Arun Tiwari
भोपाल की सेज यूनिवर्सिटी में छात्रों का हंगामा: हॉस्टल मेस के खाने में कीड़े मिलने का आरोप, अब खाद्य विभाग करेगा जांच
By Jitendra Shrivastava
UPI एमडीआर पर सुप्रीम कोर्ट का रोक से इनकार: 15 अक्टूबर से दुकानदारों को देना होगा 0.4 फीसदी चार्ज
By Sanjay Dhiman