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News in Short
- BNP ने बांग्लादेश चुनाव में 299 में से 209 सीटें जीतीं।
- तारिक रहमान की प्रधानमंत्री बनने की संभावना मजबूत, 17 साल बाद लौटे।
- BNP की लीडरशिप में भारत-बांग्लादेश रिश्ते मजबूत होंगे।
- शेख हसीना का गढ़ गोपालगंज भी BNP ने जीता।
- जमात-ए-इस्लामी को चुनाव में करारी शिकस्त, NCP को भी खारिज किया गया।
News in Detail
बांग्लादेश के आम चुनाव में BNP ने बड़ी जीत हासिल की। BNP ने 299 सीटों में से 209 सीटें जीतीं। इस जीत से 150 सीटों का आंकड़ा पार किया। अब तक 286 सीटों के नतीजे घोषित हो चुके हैं। जमात-ए-इस्लामी के नेतृत्व वाले गठबंधन को 70 सीटें मिलीं। जमात प्रमुख शफीकुर रहमान ने ढाका-15 सीट से जीत दर्ज की।
20 साल बाद BNP की सरकार बनी है। 2008 से 2024 तक शेख हसीना की आवामी लीग सत्ता में थी। इस जीत से तारिक रहमान का प्रधानमंत्री बनना तय माना जा रहा है। तारिक ने दो सीटों से चुनाव लड़ा और दोनों पर जीत पाई। वे दिसंबर में 17 साल बाद देश लौटे थे।
BNP की जीत बड़ी वजह
- पूर्व पीएम शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग के हिंदू वोटर BNP में शिफ्ट हो गए। BNP ने अवामी लीग के गढ़ गोपालगंज के अलावा खुलना, सिलहट, चटगांव, और ठाकुरगंज में जीत हासिल की।
- जमात का अतीत आड़े आ गया, लोग बांग्लादेश के मुक्ति संग्राम में उसके विरोध को याद कर रहे थे। जमात इस दाग को नहीं धो पाई।
- स्टूडेंट्स की नेशनल सिटीजन पार्टी को आपसी फूट और जमात से गठबंधन का नुकसान हुआ। उन्हें पूरी तरह खारिज कर दिया गया।
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भारत-बांग्लादेश रिश्ते मजबूत होंगे: BNP
BNP के इलेक्शन मैनेजमेंट कमेटी के हेड नजरुल इस्लाम खान ने कहा कि तारिक रहमान की लीडरशिप में भारत-बांग्लादेश रिश्ते मजबूत होंगे। उन्होंने कहा कि BNP देश में लोकतंत्र की ताकत है। अब ये तय है कि देश चलाने की जिम्मेदारी BNP को मिलेगी। नजरुल इस्लाम ने कहा कि BNP ने दो-तिहाई सीटों पर जीत हासिल की है।
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पीएम मोदी ने तारिक रहमान को बधाई दी
पीएम मोदी ने तारिक रहमान को बांग्लादेश चुनाव में जीत पर बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह जीत बांग्लादेश की जनता के नेतृत्व पर विश्वास को दिखाती है। भारत हमेशा लोकतांत्रिक बांग्लादेश के साथ खड़ा रहेगा। पीएम मोदी ने दोनों देशों के रिश्तों को मजबूत करने और मिलकर विकास के लिए काम करने की इच्छा जताई।
I convey my warm congratulations to Mr. Tarique Rahman on leading BNP to a decisive victory in the Parliamentary elections in Bangladesh.
— Narendra Modi (@narendramodi) February 13, 2026
This victory shows the trust of the people of Bangladesh in your leadership.
India will continue to stand in support of a democratic,…
जमात-ए-इस्लामी की करारी शिकस्त
बांग्लादेश चुनाव में जमात-ए-इस्लामी बुरी तरह हारी है। गठबंधन को सिर्फ 70 सीटें मिलीं। शेख हसीना की सरकार गिराने वाली स्टूडेंट्स की पार्टी NCP को भी बांग्लादेशियों ने नकारा। अवामी लीग के वोट, खासकर हिंदू वोटर, BNP में शिफ्ट हो गए।
BNP ने अवामी लीग के गढ़ गोपालगंज के अलावा खुलना, सिलहट, चटगांव, और ठाकुरगंज में जीत हासिल की। जमात का इतिहास आड़े आ गया। लोगों को याद रहा कि उसने मुक्ति संग्राम का विरोध किया था। जमात इस दाग को नहीं धो पाई। NCP को आपसी फूट और जमात से गठबंधन ने नुकसान पहुंचाया। उन्हें पूरी तरह खारिज कर दिया गया।
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शेख हसीना के गढ़ में BPN ने लगाई सेंध
बांग्लादेश की पूर्व पीएम शेख हसीना का गढ़ गोपालगंज में BNP ने जीत दर्ज की। गोपालगंज-1 सीट पर सलीम जमान मोल्ला, गोपालगंज-2 पर डॉ. केएम बाबर और गोपालगंज-3 पर एसएम जिलानी जीते। ये तीनों BNP के उम्मीदवार थे। गोपालगंज शेख हसीना के पिता शेख मुजीब का घर था। शेख मुजीब का पैतृक गांव टुंगीपाड़ा भी इसी जिले में है। इस कारण यह क्षेत्र अवामी लीग का मजबूत गढ़ माना जाता है।
209 सीटें जीतकर बीएनपी सबसे आगे
बांग्लादेश के संसदीय चुनाव के नतीजे जारी हो गए हैं। बीएनपी ने 209 सीटें जीतीं। जमात-ए-इस्लामी ने 68, एनसीपी ने 6, बांग्लादेश खिलाफत मजलिस ने 2, इस्लामी आंदोलन बांग्लादेश ने 1, गण अधिकार ने 1, बीजेपी ने 1, गण संघित ने 1, खिलाफत मजलिस ने 1 और निर्दलीयों ने 7 सीटें जीतीं।
कौन हैं तारिक रहमान
तारिक रहमान पूर्व राष्ट्रपति जियाउर रहमान और पूर्व पीएम खालिदा जिया के बेटे हैं। BNP (बांग्लादेश राष्ट्रवादी पार्टी ) की जीत का पूरा श्रेय तारिक रहमान को जाता है। 2008 में तारिक को देश छोड़कर भागना पड़ा था। 17 साल निर्वासन के बाद 25 दिसंबर 2025 को वे बांग्लादेश लौटे। शेख हसीना सरकार ने उन पर 80 से ज्यादा केस दर्ज किए थे। उन्हें उम्रकैद और 17 साल की सजा मिल चुकी थी।
तारिक रहमान लंदन से पार्टी का काम संभालते रहे। उनकी वापसी BNP के लिए राजनीतिक बूस्टर साबित हुई। वे 2018 से पार्टी के एक्टिंग चेयरमैन थे। 9 जनवरी 2026 को उन्हें चेयरमैन बनाया गया। यह पद खालिदा जिया के निधन के बाद खाली हुआ था। खालिदा जिया का निधन 30 दिसंबर 2025 को हुआ।
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