OBC क्रीमी लेयर विवाद: IAS-IPS-IFS अफसरों के कैडर आवंटन पर सुप्रीम कोर्ट बनाएगी स्पेशल बेंच
Amresh Kushwaha | Aug 26, 2026, 10:20 IST
OBC क्रीमी लेयर विवाद
यूपीएससी 2025 के 958 चयनित आईएएस, आईपीएस और आईएफएस उम्मीदवारों का सेवा आवंटन सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। केंद्र चाहता है पुराने ओबीसी क्रीमी लेयर नियम से आवंटन हो। कोर्ट अब मामले के लिए विशेष बेंच बनाएगी।
समझें क्या है पूरा मामला...
- सुप्रीम कोर्ट यूपीएससी 2025 के 958 उम्मीदवारों का मामला सुनेगा।
- आईएएस, आईपीएस और आईएफएस आवंटन इसी मामले से जुड़ा है।
- केंद्र चाहता है पुराने ओबीसी क्रीमी लेयर नियम से आवंटन हो।
- मामले के लिए सुप्रीम कोर्ट विशेष बेंच बनाएगी।
- देरी से ट्रेनिंग, कैडर और वेतन तय होने में रुकावट आ सकती है।
विशेष बेंच क्यों बनानी पड़ी
वरिष्ठ अधिवक्ता संजय हेगड़े ने बताया कि पुराना फैसला जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आर महादेवन की बेंच ने दिया था। अब दोनों जज अलग अलग बेंच में बैठते हैं। इस वजह से चीफ जस्टिस ने कहा कि नई विशेष बेंच बनानी होगी। वे इस पर बाकी जजों से बात करेंगे।
पूरा विवाद कहां से शुरू हुआ
आईएएस, आईपीएस भर्ती का टाइमलाइन क्या रहा
केंद्र पुराने नियम से आवंटन क्यों चाहता है
इनमें से कई सामान्य वर्ग से परीक्षा में बैठे। कुछ ने ओबीसी कैटेगरी में आवेदन ही नहीं किया। ऐसे उम्मीदवारों ने उम्र में छूट और अतिरिक्त प्रयास जैसे फायदे भी नहीं लिए। अब नए नियम से दोबारा आकलन करने पर कुछ को फायदा मिल सकता है। इससे समान स्थिति वाले उम्मीदवारों में भेदभाव की आशंका बन रही है।
आवंटन में देरी से क्या नुकसान होगा
सरकार ने एलबीएसएनएए (Lal Bahadur Shastri National Academy of Administration), मसूरी के फाउंडेशन कोर्स का भी जिक्र किया है। यहीं नए आईएएस और आईपीएस अफसरों की ट्रेनिंग शुरू होती है। आवंटन में देरी से ट्रेनिंग, कैडर तय करना, वरिष्ठता और वेतन तय करना, सब कुछ प्रभावित हो सकता है।
केंद्र ने अदालत से क्या मांग की है
सरकार ने साफ किया है कि वह सुप्रीम कोर्ट के आदेश को कमजोर नहीं करना चाहती। उसकी मांग सिर्फ इतनी है कि सीएसई 2025 पर इसे कैसे लागू किया जाए, यह स्पष्ट हो। केंद्र ने अदालत से अनुरोध किया है कि 11 मार्च से पहले लागू पुराने नियम के आधार पर ही 958 उम्मीदवारों का सेवा आवंटन पूरा किया जाए। अब आगे विशेष बेंच के गठन पर सबकी नजर टिकी है।
यह खबर क्यों जरूरी है
ओबीसी क्रीमी लेयर जैसे संवेदनशील मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट का रुख आगे भी नीति निर्माण की दिशा तय करेगा। साथ ही यह दिखाता है कि न्यायपालिका पारदर्शी और निष्पक्ष प्रक्रिया के जरिए हर वर्ग के हितों को संतुलित करने की कोशिश कर रही है, जो लोकतांत्रिक और कानूनी मूल्यों के अनुरूप है।
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