El Nino: 56 साल तक देश के लिए बंद रही थी मानसून की भविष्यवाणी
CHAKRESH | Jun 07, 2026, 15:25 IST
imd el nino monsoon discovery gilbert walker
1920 के दशक में IMD प्रमुख सर गिल्बर्ट वॉकर ने Southern Oscillation खोजा, जो El Nino का वायुमंडलीय आधार है। यह वही खोज है जिस पर आज की वैश्विक मौसम भविष्यवाणी टिकी है।
भारत ने खोजा El Nino का राज
क्या आप जानते हैं कि El Nino का वो वायुमंडलीय आधार, जिस पर आज दुनिया भर की मौसम भविष्यवाणियां टिकी हैं, पहली बार किसी विदेशी लैब में नहीं, बल्कि भारत के मौसम विभाग के दफ्तर में खोजा गया था? और वो भी तब जब कंप्यूटर का नाम भी नहीं था।
समझें क्या है मामला...
दशकों बाद नॉर्वेजियन-अमेरिकी मौसम वैज्ञानिक Jacob Bjerknes ने इस वायुमंडलीय घटना को समुद्र की सतह के तापमान बदलाव यानी El Nino से जोड़ा। आज इस पूरी प्रक्रिया को ENSO कहते हैं। ये धरती के हर बड़े मौसम को प्रभावित करती है। वहीं, इस पूरी कहानी की शुरुआत भारत में हुई थी।
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यह आपसे क्यों जुड़ा है?
साथ ही आपके राज्य में बिजली-पानी का भविष्य है। उस भविष्यवाणी की जड़ें उसी खोज में हैं जो सौ साल पहले एक अंग्रेज गणितज्ञ ने भारत में बैठकर की थी।
पहले क्या था
यह तरीका काम तो करता था लेकिन क्यों होता है इसका जवाब किसी के पास नहीं था।
वॉकर ने यह समझ लिया था कि भारत का मानसून कोई अकेली, बंद घटना नहीं है। यह एक बड़े ग्लोबल सिस्टम का हिस्सा है। इसीलिए उन्होंने दुनिया भर के मौसम डेटा को खंगालना शुरू किया।ॉ
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क्या हुआ और क्यों
वॉकर ने दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में वायुमंडलीय दबाव के आंकड़े जोड़े। साथ ही तीन बड़े oscillation systems पाए। दो Pacific Ocean में, एक Atlantic में।
वॉकर ने देखा कि जब Pacific के पूर्वी सिरे पर हवा का दबाव बढ़ता है, तो पश्चिमी सिरे पर घटता है। फिर उलटा। यह see-saw पैटर्न इतना consistent था कि उन्होंने इसे एक अलग phenomenon माना। इसे उन्होंने Southern Oscillation कहा, क्योंकि यह तीनों में सबसे दक्षिण की तरफ था।
असली ब्रेकथ्रू यह था
दशकों बाद 1960 के आखिर में, Jacob Bjerknes ने उस मिसिंग लिंक को जोड़ा। उन्होंने दिखाया कि Southern Oscillation और El Nino अलग-अलग नहीं हैं। वे एक ही feedback loop के दो हिस्से हैं।
समुद्र गर्म होता है तो हवा बदलती है, हवा बदलती है तो समुद्र और गर्म होता है। और यही वो moment था जब दुनिया को ENSO मिला।
कौन थे सर गिल्बर्ट वॉकर
कौन थे Jacob Bjerknes
दोनों साइड्स की बात
वहीं दूसरी तरफ एक कड़वा सच भी है। वॉकर की खोज के बाद भी IMD की भविष्यवाणियां दशकों तक अविश्वसनीय रहीं। इतनी अविश्वसनीय कि 1932 से 1988 तक, यानी पूरे 56 साल, IMD ने पूरे देश के लिए मानसून भविष्यवाणी देना बंद कर दिया।
सिर्फ नॉर्थवेस्ट इंडिया और पेनिनसुलर रीजन के लिए अनुमान दिया जाता था। वो भी qualitative यानी slightly above normal जैसे vague शब्दों में, न कि इस साल 95% रेनफॉल होगी। जैसी concrete संख्या में।
क्यों? क्योंकि मानसून और ENSO का संबंध केसुअल नहीं है। El Nino आए तो मानसून कमजोर होगा ही, यह जरूरी नहीं। यह एक complex, probabilistic relationship है।
आगे क्या होगा
Climate change के चलते extreme weather events पहले से अलग पैटर्न दिखा रहे हैं। ENSO और मानसून का वो पुराना रिलेशनशिप अब उतना रिलायबल नहीं रहा।
वैज्ञानिक अब यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि warming planet पर Walker का equation कैसे बदलेगा।
एक बात जो आप नहीं जानते थे
एक और बात: उनके नाम पर एक atmospheric circulation pattern है जिसे आज Walker Circulation कहते हैं। यह वही सर्कुलेशन है जो El Nino के दौरान कमजोर पड़ती है और पूरी दुनिया के मौसम को हिला देती है।
यह खबर क्यों जरूरी है?
यह जानना जरूरी है कि इस पूरी वैज्ञानिक समझ की नींव भारत ने रखी थी। ताकि हम अपने वैज्ञानिक संस्थानों को वो सम्मान दे सकें जिसके वे हकदार हैं। और ताकि भविष्य में मौसम नीति और disaster preparedness में science को केंद्र में रखा जाए।
FAQ
- El Nino क्या होता है और इसका मॉनसून पर क्या असर पड़ता है?
El Nino एक समुद्री घटना है जिसमें Pacific Ocean का पूर्वी हिस्सा सामान्य से ज्यादा गर्म हो जाता है। इसके चलते भारत में मॉनसून की बारिश कम हो सकती है। हालांकि यह हर बार जरूरी नहीं होता क्योंकि मॉनसून एक complex system है। - Southern Oscillation की खोज कब और कहां हुई?
Southern Oscillation की खोज 1920 के दशक में भारत में हुई। IMD के तत्कालीन प्रमुख सर गिल्बर्ट वॉकर ने Pacific Ocean में हवा के दबाव के इस see-saw pattern को identify किया था। - IMD ने 56 साल तक पूरे देश की मॉनसून भविष्यवाणी क्यों बंद कर दी थी?
1932 से 1988 तक IMD ने all-India quantitative forecast देना बंद कर दिया क्योंकि मॉनसून और ENSO का संबंध causal नहीं था। reliable predictors की कमी थी। इस दौरान सिर्फ दो regions के लिए vague qualitative forecasts दिए जाते थे।
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