यूपीआई के बावजूद नकद का स्वैग बढ़ा, 40 लाख करोड़ कैश के साथ आंकड़ा ऑल-टाइम हाई पर पहुंचा
Amresh Kushwaha | Feb 18, 2026, 10:22 IST
india cash circulation record 40 lakh crore upi impact
भारत में डिजिटल क्रांति के बावजूद नकद का चलन जनवरी 2026 तक 40 लाख करोड़ के पार पहुंच गया है। जानें क्यों बढ़ रहा है कैश का स्वैग और क्या हैं इसके पीछे के मुख्य कारण...
भारत में डिजिटल क्रांति के बीच एक हैरान करने वाला आंकड़ा सामने आया है। जहां एक ओर चाय की टपरी से लेकर बड़े शोरूम तक हर जगह UPI के क्यूआर कोड नजर आ रहे हैं, वहीं दूसरी ओर भारतीयों के जेब और तिजोरियों में नकद की खनक कम होने के बजाय और बढ़ गई है।
SBI रिसर्च की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, जनवरी 2026 तक देश में कैश का चलन 40 लाख करोड़ रुपए के ऐतिहासिक स्तर पर पहुंच गया है।
आंकड़ों का खेल देखिए, यह किसी फिल्मी ट्विस्ट से कम नहीं है। जनवरी 2026 तक भारत में कुल चलन में मुद्रा (CiC) 40 लाख करोड़ रुपए हो गई है। यह पिछले साल के मुकाबले 11.1 प्रतिशत की बड़ी बढ़ोतरी दिखाती है।
सबसे दिलचस्प बात यह है कि इसमें से करीब 39 लाख करोड़ रुपए जनता के पास नकद के रूप में है। यानी देश के कुल कैश का लगभग 97.6 प्रतिशत हिस्सा सीधे लोगों के हाथों में है। अर्थशास्त्री इसे एक 'आर्थिक पहेली' मान रहे हैं, क्योंकि जब फोन से पेमेंट करना इतना आसान है, तो लोग नकद क्यों जमा कर रहे हैं?
इस नकद प्रेम के पीछे एक बड़ा कारण टैक्स और नोटिस का डर भी है। रिपोर्ट के मुताबिक, जुलाई 2025 में कर्नाटक में छोटे व्यापारियों को उनके UPI ट्रांजैक्शन के आधार पर करीब 18 हजार GST नोटिस भेजे गए थे। इसके बाद व्यापारियों में डर बैठ गया।
उन्होंने डिजिटल पेमेंट से दूरी बनाकर फिर से नकद का सहारा लिया। नतीजतन, अकेले कर्नाटक में ATM से कैश निकालने की रफ्तार हर महीने औसतन 37 करोड़ रुपए तक बढ़ गई।
जब बैंकों में जमा राशि पर ब्याज दर कम होता है, तो लोग पैसा घर रखना पसंद करते हैं। खासकर ग्रामीण इलाकों में यह आदत ज्यादा देखी जा रही है। वहां लोग सुरक्षा और तुरंत खर्च के लिए बैंक के बजाय घर में कैश रखना पसंद कर रहे हैं।
हाल के दिनों में सोने-चांदी की कीमतों में बढ़ोतरी ने भी नकद का फ्लो बढ़ा दिया है। लोग अपना पुराना निवेश बेचकर नकद हासिल कर रहे हैं।
नोटबंदी और दो हजार के नोटों के चलन से बाहर होने के बाद, अब भारतीय बाजार में 500 के नोट का पूरी तरह से दबदबा बन चुका है। मार्च 2025 तक कुल मुद्रा मूल्य का 86 प्रतिशत हिस्सा 500 के नोटों का है। दो हजार के नोट अब महज 0.02 प्रतिशत रह गए हैं।
RBI के निर्देशानुसार ATM में 100 और 200 के नोटों की उपलब्धता बढ़ाई गई है। इससे छोटे और मध्यम स्तर के लेन-देन में नकद का इस्तेमाल और आसान हो गया है।
भले ही कैश का आंकड़ा ऑल-टाइम हाई पर है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि डिजिटल पेमेंट पीछे रह गया है। Cash-to-GDP Ratio, जो वित्त वर्ष 2021 में 14.4 प्रतिशत था, अब 2026 में घटकर 11 प्रतिशत रह गया है।
इसका मतलब है कि अर्थव्यवस्था बढ़ रही है और डिजिटल पेमेंट का हिस्सा भी मजबूत हो रहा है। NPCI के आंकड़ों के मुताबिक, UPI के 86 प्रतिशत ट्रांजैक्शन 500 रुपए से कम के होते हैं। साफ है कि भारत अब एक ऐसे दौर में है जहां तकनीक (डिजिटल) और परंपरा (नकद) दोनों एक साथ चल रही है।
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SBI रिसर्च की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, जनवरी 2026 तक देश में कैश का चलन 40 लाख करोड़ रुपए के ऐतिहासिक स्तर पर पहुंच गया है।
डिजिटल की रफ्तार के बीच कैस का नया रिकॉर्ड
सबसे दिलचस्प बात यह है कि इसमें से करीब 39 लाख करोड़ रुपए जनता के पास नकद के रूप में है। यानी देश के कुल कैश का लगभग 97.6 प्रतिशत हिस्सा सीधे लोगों के हाथों में है। अर्थशास्त्री इसे एक 'आर्थिक पहेली' मान रहे हैं, क्योंकि जब फोन से पेमेंट करना इतना आसान है, तो लोग नकद क्यों जमा कर रहे हैं?
GST के नोटिस बना बड़ा कारण
उन्होंने डिजिटल पेमेंट से दूरी बनाकर फिर से नकद का सहारा लिया। नतीजतन, अकेले कर्नाटक में ATM से कैश निकालने की रफ्तार हर महीने औसतन 37 करोड़ रुपए तक बढ़ गई।
कम ब्याज के चलते लोग घर में रख रहे पैसा
हाल के दिनों में सोने-चांदी की कीमतों में बढ़ोतरी ने भी नकद का फ्लो बढ़ा दिया है। लोग अपना पुराना निवेश बेचकर नकद हासिल कर रहे हैं।
बाजार में 500 के नोटों का दबदबा
RBI के निर्देशानुसार ATM में 100 और 200 के नोटों की उपलब्धता बढ़ाई गई है। इससे छोटे और मध्यम स्तर के लेन-देन में नकद का इस्तेमाल और आसान हो गया है।
डिजिटल और कैश: अब साथ-साथ चलेगा देश
इसका मतलब है कि अर्थव्यवस्था बढ़ रही है और डिजिटल पेमेंट का हिस्सा भी मजबूत हो रहा है। NPCI के आंकड़ों के मुताबिक, UPI के 86 प्रतिशत ट्रांजैक्शन 500 रुपए से कम के होते हैं। साफ है कि भारत अब एक ऐसे दौर में है जहां तकनीक (डिजिटल) और परंपरा (नकद) दोनों एक साथ चल रही है।
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