भारत में सी-प्लेन सेवा की नई शुरुआत: हरिद्वार में विमान को सी-प्लेन में बदला, जल्द अंडमान में भरेगा उड़ान

Pawan Modiya | Apr 07, 2026, 21:39 IST
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Photograph: (the sootr)

भारत में पहली बार विमान को सी-प्लेन में बदला गया। हरिद्वार में सफल टेस्टिंग के बाद यह सी-प्लेन जल्द अंडमान-निकोबार में उड़ान भर सकता है। आने वाले वर्षों में सी-प्लेन सेवाएं भारत के एविएशन सेक्टर में नई क्रांति ला सकती हैं।

भारत के सिविल एविएशन सेक्टर में एक ऐतिहासिक कदम उठाया गया है। सोमवार को उत्तराखंड के हरिद्वार में पहली बार किसी सामान्य विमान को भारत में ही संशोधित कर सी-प्लेन (Seaplane) में परिवर्तित किया गया और उसकी सफल टेस्टिंग भी की गई।

यह उपलब्धि भारत के विमानन क्षेत्र के लिए एक बड़ी तकनीकी प्रगति मानी जा रही है, क्योंकि इससे पहले भारत में जो भी सी-प्लेन सेवाएं शुरू की गई थीं, वे पहले से बने हुए सी-प्लेन थे जिन्हें सीधे विदेश से आयात किया गया था।

इस बार पहली बार एक टर्बोप्रॉप विमान को भारत में ही फ्लोट्स (Floats) लगाकर पानी पर उतरने और उड़ान भरने योग्य बनाया गया है। यदि आगे की सभी तकनीकी और सुरक्षा जांच सफल रहती हैं, तो यह सी-प्लेन जल्द ही अंडमान-निकोबार द्वीप समूह में सेवा देना शुरू कर सकता है।

हरिद्वार में हुआ सी-प्लेन का सफल परीक्षण

सोमवार को कनाडा में निर्मित डी हैविलैंड डीएचसी-6 ट्विन ऑटर (De Havilland DHC-6 Twin Otter) विमान ने हरिद्वार स्थित गंगा बैराज से ट्रायल फ्लाइट भरी। यह विमान पहले एक सामान्य विमान था, जिसे भारत में तकनीकी संशोधन कर सी-प्लेन में परिवर्तित किया गया।

टेस्टिंग के दौरान विमान ने पानी से टेकऑफ और लैंडिंग की क्षमता का सफल प्रदर्शन किया। विशेषज्ञों के अनुसार यह परीक्षण भारत में सी-प्लेन तकनीक के विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

सी-प्लेन क्या होता है?

सी-प्लेन (Seaplane) एक ऐसा विमान होता है जो

  • पानी की सतह पर उतर सकता है
  • नदी, झील या समुद्र से टेकऑफ कर सकता है
  • रनवे के बिना भी संचालन संभव बनाता है
इसमें विशेष फ्लोट्स (Floats) या नाव जैसी संरचना लगी होती है जिससे यह पानी पर स्थिर रह सकता है।

किस कंपनी के पास है यह विमान

यह विमान अब स्काईहॉप एविएशन (Skyhop Aviation) के पास है, जिसका नेतृत्व अवनि सिंह कर रही हैं। इस विमान को अंतिम संचालन की अनुमति नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) से मिलनी बाकी है। यदि सभी औपचारिकताएं पूरी हो जाती हैं, तो यह सी-प्लेन जल्द ही अंडमान-निकोबार द्वीप समूह में यात्रियों के लिए उड़ान भर सकता है।

पहले किस एयरलाइन का हिस्सा था यह विमान

यह विमान पहले फ्लाई बिग एयरलाइन (FlyBig Airline) के बेड़े का हिस्सा था।

हालांकि कुछ समय पहले इस एयरलाइन ने अपना संचालन बंद कर दिया था, जिसके बाद इस विमान को संशोधित कर सी-प्लेन में परिवर्तित करने की योजना बनाई गई।

सरकार की सी-प्लेन सेवा को बढ़ावा देने की नीति के बाद इस परियोजना को तेजी से आगे बढ़ाया गया।

DGCA ने दी उड़ान योग्यता की मंजूरी

केंद्रीय विमानन सचिव समीर सिन्हा के निर्देश के बाद इस विमान को फ्लोट्स लगाकर सी-प्लेन में बदलने की प्रक्रिया शुरू की गई।

इसके बाद विमान में तकनीकी संशोधन किए गए और DGCA (Directorate General of Civil Aviation) ने विमान को उड़ान योग्यता प्रमाण पत्र (Airworthiness Certificate) जारी कर दिया।

इसके साथ ही इसके संचालन की प्रक्रिया को भी मंजूरी दे दी गई है।

सी-प्लेन के प्रमुख फायदे

सी-प्लेन सेवाएं कई मायनों में बेहद उपयोगी मानी जाती हैं:

✔ दूरदराज इलाकों में बिना एयरपोर्ट के हवाई सेवा
✔ पर्यटन को बढ़ावा
✔ छोटी दूरी की यात्रा में समय की बचत
✔ आपदा या बाढ़ के समय राहत कार्य में मदद
✔ द्वीप क्षेत्रों में बेहतर कनेक्टिविटी

भारत में सी-प्लेन सेवा का महत्व

भारत एक विशाल देश है जहां कई ऐसे क्षेत्र हैं जहां हवाई अड्डा बनाना मुश्किल या महंगा होता है। सी-प्लेन सेवाएं इन क्षेत्रों को जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।

विशेष रूप से:

  • अंडमान-निकोबार द्वीप समूह
  • लक्षद्वीप
  • पूर्वोत्तर भारत
  • पर्यटन स्थल
इन स्थानों पर सी-प्लेन सेवाएं शुरू होने से पर्यटन और आर्थिक गतिविधियों में तेजी आ सकती है।

पर्यटन उद्योग को मिलेगा बड़ा लाभ

भारत में कई खूबसूरत पर्यटन स्थल ऐसे हैं जहां पहुंचना कठिन होता है।

सी-प्लेन सेवा शुरू होने से पर्यटक:

  • सीधे झीलों या समुद्री तटों तक पहुंच सकेंगे
  • यात्रा का समय कम होगा
  • नए पर्यटन मार्ग विकसित होंगे
विशेषज्ञों का मानना है कि इससे इको-टूरिज्म और एडवेंचर टूरिज्म को भी बढ़ावा मिलेगा।

आपातकालीन स्थितियों में भी उपयोगी

सी-प्लेन सिर्फ पर्यटन या यात्री सेवा के लिए ही नहीं बल्कि आपदा प्रबंधन में भी बेहद उपयोगी साबित हो सकते हैं।

उदाहरण के लिए:

  • बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत सामग्री पहुंचाना
  • मेडिकल इमरजेंसी में मरीजों को निकालना
  • दूरदराज द्वीपों तक तेज़ पहुंच
इस वजह से कई देशों में सी-प्लेन का इस्तेमाल आपातकालीन सेवाओं के लिए भी किया जाता है।

सरकार की योजना: देशभर में सी-प्लेन नेटवर्क

भारत सरकार लंबे समय से सी-प्लेन नेटवर्क विकसित करने की योजना पर काम कर रही है। केंद्र सरकार का लक्ष्य है कि देश के कई प्रमुख जलाशयों और नदियों को सी-प्लेन मार्ग के रूप में विकसित किया जाए।

संभावित स्थानों में शामिल हैं:

  • गुजरात
  • अंडमान-निकोबार
  • केरल
  • असम
  • उत्तराखंड
यदि यह योजना सफल होती है तो भारत में जल आधारित हवाई परिवहन का एक नया नेटवर्क विकसित हो सकता है।

आगे क्या होगा?

फिलहाल इस सी-प्लेन के कुछ और तकनीकी परीक्षण किए जाएंगे।

इन परीक्षणों में शामिल हैं:

  1. सुरक्षा परीक्षण
  2. संचालन क्षमता जांच
  3. मौसम और जल स्थितियों में उड़ान परीक्षण
यदि सभी परीक्षण सफल होते हैं, तो यह विमान जल्द ही अंडमान-निकोबार में नियमित सेवा शुरू कर सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में सी-प्लेन सेवाएं भारत के एविएशन सेक्टर में नई क्रांति ला सकती हैं।

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