एआई रोबोट को घर का काम सिखाकर 250 रुपए प्रति घंटा कमा रही हैं भारतीय महिलाएं
Anjali Dwivedi | Jun 12, 2026, 15:11 IST
AI को ट्रेनिंग दे रहीं भारतीय महिलाएं
भारतीय गृहणियां माथे पर फोन पहनकर घर के कामों की वीडियो बनाकर AI रोबोट को ट्रेन कर रही हैं। इस काम के लिए 250 रुपए प्रति घंटे मिल रहे हैं। तमिलनाडु स्थित कंपनी Objectways इस काम को अंजाम दे रही है।
चेन्नई की 25 साल की नागिरेड्डी श्रीरामयाचंद्रा माथे पर स्मार्टफोन बांधकर आम काटती हैं। यह वीडियो देश-विदेश की बड़ी टेक कंपनियों को बेचा जाता है। इन वीडियो से AI-संचालित रोबोट्स को घर का काम करना सिखाया जाता है। काम के बदले उन्हें 250 रुपए प्रति घंटे मिलते हैं। यह नई तरह की नौकरी है, जिसे AI Training कहा जाता है।
नागिरेड्डी श्रीरामयाचंद्रा कहती हैं कि घर का काम करने के लिए 250 रुपए प्रति घंटे और कौन देगा? उन्होंने यह भी कहा कि शायद वे खुद भी भविष्य में एक रोबोट ले लें। यह काम सुनने में आसान लगता है, लेकिन इसके पीछे एक बड़ी तकनीकी जरूरत छुपी है।
![माथे पर फोन पहनकर घर के काम रिकॉर्ड कर रहीं औरतें, क्यों इस जॉब में हो रही डॉलर्स में कमाई? वजह हैरान कर देगी - indian women earning money training ai robots]()
AI चैटबॉट और इमेज जेनरेटर डिजिटल डेटा से सीखते हैं। लेकिन असली दुनिया में हिलने-डुलने का तरीका सिखाना कहीं ज्यादा मुश्किल है।डेवलपर्स मानते हैं कि फर्स्ट-पर्सन रिकॉर्डिंग को खास AI मॉडल में डालने से रोबोट इंसानी हरकतों की नकल करना सीख जाते हैं।
कुछ AI ट्रेनर घर से काम करते हैं, कुछ फैक्ट्री में और कुछ खास स्टूडियो में। इसके लिए वीडियो ग्लास, हेड-माउंटेड कैमरा और मोशन सेंसर इस्तेमाल होते हैं। श्रीरामयाचंद्रा एक खास ऐप के जरिए यह वीडियो Objectways कंपनी को भेजती हैं। डिवाइस तब हैंड्स नॉट डिटेक्टेड बोलती है जब रिकॉर्डिंग ठीक से नहीं होती।
Objectways के भारत और अमेरिका दोनों में दफ्तर हैं। यह कंपनी Fortune 500 श्रेणी की बड़ी बहुराष्ट्रीय कंपनियों के साथ काम करती है। यह Amazon SageMaker के साथ भी काम करती है, जो मशीन-लर्निंग मॉडल बनाने का एक बड़ा प्लेटफॉर्म है।
Objectways के प्रमुख रवि शंकर ने बताया कि उनकी क्लाइंट कंपनियां कपड़े तहाना, कॉफी बनाना, सैंडविच बनाना जैसे काम की वीडियो मांगती हैं। उनके अनुसार, कुछ नौकरियां रोबोट के जिम्मे जाने के लिए ही हैं, ताकि इंसान बेहतर काम कर सकें। रवि शंकर तमिलनाडु में पले-बढ़े हैं और अब अमेरिका से काम चलाते हैं। वे तमिलनाडु के ही लोगों को रोजगार देते हैं।
Objectways के स्टूडियो में AI ट्रेनर नकली लेकिन पूरी तरह सजे-संवरे घरों में घरेलू काम करते हुए खुद को फिल्म करते हैं। कई हजार घंटे की रिकॉर्डिंग के बाद विविधता लाने के लिए कमरे का वॉलपेपर बदल दिया जाता है।
21 साल की इंजीनियरिंग ग्रेजुएट रानी बताती हैं कि हर वीडियो करीब चार मिनट की होती है और वे एक दिन में लगभग 90 वीडियो बनाती हैं। वे कहती हैं कि यह काम सहनीय है, लेकिन कैमरा हमेशा उनके साथ रहता है।
यह कंपनियां अमेरिका या यूरोप क्यों नहीं जातीं? इसका जवाब बिल्कुल सीधा है- पैसा। अमेरिका में किसी मजदूर का डेटा रिकॉर्ड करने के लिए एक घंटे के हजारों रुपए देने पड़ते हैं। लेकिन भारत में यह काम बहुत कम दाम में हो जाता है। भारत ने खुद को AI डेटा के निर्माण, प्रोसेसिंग और एनोटेशन का वैश्विक केंद्र बना लिया है।
ह्यूमनॉयड रोबोट का बाजार तेजी से बढ़ रहा है। निवेश बैंक Morgan Stanley का अनुमान है कि 2050 तक एक अरब से अधिक रोबोट उपयोग में आ सकते हैं, ज्यादातर औद्योगिक और व्यावसायिक कामों के लिए।
सरकारी थिंक टैंक नीति आयोग का कहना है कि एआई और रोजगार पर ज्यादातर चर्चाएं व्हाइट-कॉलर पेशेवरों पर केंद्रित रहती हैं और बिना तत्काल कार्रवाई के नौकरियां जाने की लगभग तय संभावना जताती हैं।
डिजिटल श्रम विशेषज्ञ अदिति सुरिए, जो बेंगलुरु स्थित IIHS (Indian Institute for Human Settlements) से जुड़ी हैं, का कहना है कि इस तरह की डेटा कलेक्शन सेवाएं भविष्य में और बढ़ेंगी। यह नई नौकरी आज रोजी-रोटी दे रही है। लेकिन यही डेटा कल के रोबोट बनाएगा जो शायद इन्हीं कामों में लग जाएं।
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घर का काम बना डेटा का खजाना
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क्यों चाहिए रोबोट को यह वीडियो?
कुछ AI ट्रेनर घर से काम करते हैं, कुछ फैक्ट्री में और कुछ खास स्टूडियो में। इसके लिए वीडियो ग्लास, हेड-माउंटेड कैमरा और मोशन सेंसर इस्तेमाल होते हैं। श्रीरामयाचंद्रा एक खास ऐप के जरिए यह वीडियो Objectways कंपनी को भेजती हैं। डिवाइस तब हैंड्स नॉट डिटेक्टेड बोलती है जब रिकॉर्डिंग ठीक से नहीं होती।
क्या है Objectways और क्या है इसका काम?
Objectways के प्रमुख रवि शंकर ने बताया कि उनकी क्लाइंट कंपनियां कपड़े तहाना, कॉफी बनाना, सैंडविच बनाना जैसे काम की वीडियो मांगती हैं। उनके अनुसार, कुछ नौकरियां रोबोट के जिम्मे जाने के लिए ही हैं, ताकि इंसान बेहतर काम कर सकें। रवि शंकर तमिलनाडु में पले-बढ़े हैं और अब अमेरिका से काम चलाते हैं। वे तमिलनाडु के ही लोगों को रोजगार देते हैं।
स्टूडियो में भी होती है ट्रेनिंग
21 साल की इंजीनियरिंग ग्रेजुएट रानी बताती हैं कि हर वीडियो करीब चार मिनट की होती है और वे एक दिन में लगभग 90 वीडियो बनाती हैं। वे कहती हैं कि यह काम सहनीय है, लेकिन कैमरा हमेशा उनके साथ रहता है।
भारत क्यों है AI डेटा का केंद्र?
रोबोट बाजार का भविष्य और खतरा
सरकारी थिंक टैंक नीति आयोग का कहना है कि एआई और रोजगार पर ज्यादातर चर्चाएं व्हाइट-कॉलर पेशेवरों पर केंद्रित रहती हैं और बिना तत्काल कार्रवाई के नौकरियां जाने की लगभग तय संभावना जताती हैं।
डिजिटल श्रम विशेषज्ञ अदिति सुरिए, जो बेंगलुरु स्थित IIHS (Indian Institute for Human Settlements) से जुड़ी हैं, का कहना है कि इस तरह की डेटा कलेक्शन सेवाएं भविष्य में और बढ़ेंगी। यह नई नौकरी आज रोजी-रोटी दे रही है। लेकिन यही डेटा कल के रोबोट बनाएगा जो शायद इन्हीं कामों में लग जाएं।
FAQ
AI रोबोट ट्रेनिंग के लिए क्या करना होता है?
माथे या सिर पर कैमरा लगाकर रोजमर्रा के काम जैसे खाना बनाना, कपड़े तहाना, सफाई करना आदि रिकॉर्ड करना होता है। यह वीडियो एक खास ऐप के जरिए कंपनी को भेजी जाती है। इस काम के लिए कोई खास तकनीकी जानकारी जरूरी नहीं है।- क्या यह काम भारत में आम लोगों को मिल सकता है?
अभी यह काम मेनली तमिलनाडु में Objectways जैसी कंपनियों के जरिए मिल रहा है। धीरे-धीरे यह क्षेत्र पूरे भारत में फैल रहा है। जिनके पास स्मार्टफोन और बुनियादी डिजिटल जानकारी है, वे इस तरह के काम के लिए आवेदन कर सकते हैं। - क्या रोबोट ट्रेन करने से भविष्य में नौकरियां जाएंगी?
यह एक बड़ा सवाल है। जो काम रोबोट सीख रहे हैं, वही काम भविष्य में वे खुद करेंगे। नीति आयोग भी इस पर चिंता जता चुका है। लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि इससे कुछ नए तरह के रोजगार भी बनेंगे।
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