कर्मचारियों पर पड़ी महंगाई की मार, मेट्रो सिटी छोड़ छोटे शहरों में हो रहे शिफ्ट
Aman Vaishnav | Jun 10, 2026, 10:35 IST
कर्मचारियों पर महंगाई की मार
बढ़ती महंगाई से परेशान 54% मेट्रो शहरों के कर्मचारी अब छोटे शहरों की तरफ रुख कर रहे हैं। इंडीड के सर्वे में सामने आया है कि महंगे घर और लंबे सफर के कारण लोग यह बड़ा फैसला ले रहे हैं।
समझें क्या है पूरा मामला...
- महंगाई की मारके कारण मेट्रो शहरों के कर्मचारी छोटे शहरों में शिफ्ट होने के लिए तैयार हैं।
- कर्मचारियों की कमाई उनके रहन-सहन और रोज के खर्चों के लिए कम पड़ रही है।
- कई सारे कर्मचारी अपनी आमदनी बढ़ाने के लिए अतिरिक्त काम कर रहे हैं।
- नौकरी बाजार में अब सैलरी से भी बड़ी प्राथमिकता नौकरी की सुरक्षा बन गई है।
- कंपनियों अब छोटे शहरों से हायरिंग करने को जरूरी मान रही हैं।
बड़े शहर क्यों छोड़ रहे लोग
एक ताजा सर्वे में एक हजार 207 कंपनियों और एक हजार 13 कर्मचारियों से बात की गई। इसमें चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए।
सर्वे बताता है कि 54% कर्मचारी टियर-2 और टियर-3 शहरों में जाने की सोच रहे हैं। ये वही कर्मचारी हैं जो पहले बड़े शहरों को ही तरक्की की राह मानते थे।
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महंगा घर बना सबसे बड़ी परेशानी
27% कर्मचारियों ने ट्रैफिक और बढ़ती जीवनशैली की लागत को अपनी सबसे बड़ी तकलीफ बताया। रोज घंटों जाम में फंसना और महंगा खाना-पीना उनकी थकान बढ़ा रहा है।
इसीलिए 77% कर्मचारी अब छोटे शहरों में रहने के लिए तैयार हैं। वे चाहते हैं कि काम भी वहीं मिले।
जॉब सिक्योरिटी बनी प्राथमिकता
यानी पैसे से ज्यादा लोग अब नौकरी की स्थिरता चाहते हैं। यह बदलाव दिखाता है कि महंगाई ने लोगों की सोच बदल दी है।
60% से ज्यादा कर्मचारी अब अतिरिक्त कमाई के तरीके खोज रहे हैं। इनमें से कई घर से काम करके साइड इनकम भी कमा रहे हैं।
कंपनियां भी बदल रही रणनीति
41% कंपनियों के लिए ज्यादा वेतन देने से बड़ी प्राथमिकता नीतियों की सुगमता है। यानी जहां काम करना आसान हो वहां जाना पसंद करती हैं।
73% कंपनियों को पता है कि महंगाई की वजह से उनके कर्मचारी आर्थिक दबाव में हैं। इसके बावजूद अभी तक बहुत कम कंपनियों ने वेतन बढ़ाया है।
छोटे शहरों को मिल रहा फायदा
टियर-2 और टियर-3 शहरों में जमीन सस्ती है। आने-जाने में कम वक्त लगता है। जीवन की गुणवत्ता भी बेहतर मानी जाती है।
इसीलिए दिल्ली, बेंगलुरु और मुंबई के कर्मचारी सबसे ज्यादा इस बदलाव में आगे हैं।
मिलेनियल की पसंद बदली
अब बड़ा शहर मतलब बड़ी परेशानी लगने लगा है। कम खर्च में बेहतर जिंदगी की चाहत उन्हें वापस खींच रही है।
क्या कहते हैं आंकड़े?
यह सर्वे देश की असली तस्वीर दिखाता है। महंगाई, बेरोजगारी का डर और घर की जरूरत, ये तीन चीजें मिलकर भारत के कामकाजी वर्ग की जिंदगी बदल रही हैं।
FAQ
- कर्मचारी बड़े शहर क्यों छोड़ रहे हैं?
सर्वे के अनुसार 56% कर्मचारियों के लिए महंगा आवास सबसे बड़ी वजह है। इसके अलावा ट्रैफिक और बढ़ती जीवनशैली की लागत भी परेशानी बढ़ा रही है। छोटे शहरों में कम खर्च में बेहतर जीवन की उम्मीद उन्हें खींच रही है। - आजकल कंपनियां छोटे शहरों में हायरिंग क्यों बढ़ा रही हैं?
43% कंपनियां मानती हैं कि टियर-2 और टियर-3 शहर अब बेहतर हायरिंग केंद्र बन रहे हैं। यहां संचालन लागत कम है और कुशल कर्मचारी भी उपलब्ध हैं। नीतियों की सुगमता भी कंपनियों को यहां आने के लिए प्रेरित कर रही है। - कर्मचारियों की प्राथमिकता सैलरी है या जॉब सिक्योरिटी?
एक सर्वे में 41% कर्मचारियों ने जॉब सिक्योरिटी को प्राथमिकता दी, जबकि 30% ने सैलरी को। यानी नौकरी की स्थिरता अब पैसे से ज्यादा जरूरी मानी जा रही है। महंगाई के दौर में लोग जोखिम से बचना चाहते हैं।
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