47 साल की दूरी मिटाने की कोशिश: ईरान-अमेरिका वार्ता में उठे सुरक्षा, सेना और अर्थव्यवस्था के मुद्दे
Jitendra Shrivastava | Apr 11, 2026, 23:44 IST
Photograph: (thesootr)
INTERNATIONAL DESK. इस्लामाबाद में ईरान-अमेरिका सीजफायर वार्ता का दूसरा दौर शुरू। 47 साल बाद दोनों देशों की ऐतिहासिक आमने-सामने बातचीत, ईरान ने लेबनान पर हमले रोकने की मांग की।
News In Short
- इस्लामाबाद में ईरान-अमेरिका वार्ता का दूसरा दौर शुरू।
- 47 साल बाद दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक बैठक हुई।
- ईरान ने लेबनान पर इजराइली हमले रोकने की मांग की।
- वेंस और गालिबाफ ने अपने-अपने देशों का नेतृत्व किया।
- विफल वार्ता की जिम्मेदारी ईरान ने अमेरिका पर डाली।
News In Detail
अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और ईरानी संसद स्पीकर गालिबाफ इस ऐतिहासिक शांति वार्ता का नेतृत्व कर रहे हैं। यह वार्ता मध्य-पूर्व में स्थायी शांति की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है।
इस्लामाबाद बना वार्ता का केंद्र
इस दौर में दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडलों ने सुरक्षा, राजनीति, सेना, अर्थव्यवस्था और कानून से जुड़े अहम मुद्दों पर चर्चा की। यह बैठक इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद पहली बार हो रही है। दोनों देशों के नेता इतने बड़े स्तर पर सीधे आमने-सामने बैठे हैं।
वेंस और गालिबाफ की अगुवाई में बैठक
इस्लामाबाद रवाना होने से पहले वेंस ने कहा था कि उन्हें बातचीत से अच्छे नतीजों की उम्मीद है। साथ ही उन्होंने ईरान को चेतावनी दी कि वह अमेरिका के साथ कोई चालाकी न करे। दोनों नेताओं की यह मुलाकात अंतरराष्ट्रीय कूटनीति (International Diplomacy) के लिहाज से बेहद अहम मानी जा रही है।
ईरान की मांग: लेबनान पर हमले तुरंत बंद हों
ट्रम्प की चेतावनी और पाकिस्तान की भूमिका
पाकिस्तानी आर्मी चीफ आसिम मुनीर, विदेश मंत्री इशाक डार और गृहमंत्री मोहसिन नकवी ने वेंस का स्वागत किया। इससे पहले आसिम मुनीर शुक्रवार रात ईरानी प्रतिनिधिमंडल को रिसीव करने एयरपोर्ट पहुंचे थे।
विफलता की जिम्मेदारी अमेरिका पर: ईरान
ईरान का कहना है कि इजराइल और अमेरिका के फैसले आपस में जुड़े हुए हैं। इसलिए वार्ता विफल होने पर जिम्मेदारी अमेरिका पर भी होगी। यह बयान अंतरराष्ट्रीय संबंधों (International Relations) में ईरान की सख्त स्थिति को दर्शाता है।
लेबनान-इजराइल वार्ता की अगली कड़ी
यह कदम मध्य-पूर्व में व्यापक शांति प्रयासों (Peace Efforts) का हिस्सा माना जा रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि इन दोनों वार्ताओं का नतीजा क्षेत्रीय स्थिरता (Regional Stability) पर गहरा असर डालेगा। दुनिया की नजरें अब इस्लामाबाद और वाशिंगटन दोनों पर टिकी हैं।
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