छह लाख बैरल तेल लेकर आ रहा ईरानी तेल टैंकर पिंग शुन मुड़ा चीन की ओर, वजह अनजान

thesootr Desk | Apr 03, 2026, 15:12 IST
Share
Ping Shun tanker
Ping Shun tanker

ईरान से 6 लाख बैरल तेल लेकर भारत आ रहा टैंकर पिंग शुन अचानक चीन की ओर मुड़ गया। यह 7 साल में भारत की सबसे बड़ी ईरानी तेल खेप होती। अमेरिकी प्रतिबंधों की वजह से यह सौदा फंसा।

समझें क्या है पूरा मामला

  • ईरान से 6 लाख बैरल तेल लेकर भारत आ रहा जहाज अचानक चीन की ओर मुड़ गया।
  • यह जहाज पिंग शुन है जो अफ्रामैक्स श्रेणी का टैंकर है।
  • 7 साल में ईरान से भारत की यह सबसे बड़ी संभावित तेल खेप होती।
  • अमेरिकी प्रतिबंधों के चलते भुगतान और बीमा से जुड़े मुद्दे अभी भी अनसुलझे हैं।
  • जहाज की दिशा अभी अंतिम नहीं है और यह कभी भी फिर मुड़ सकता है।

समंदर के बीच बदली जहाज की दिशा

अरब सागर के बीच एक टैंकर ने अचानक अपनी दिशा बदल दी। यह जहाज ईरानी कच्चे तेल से भरा था और भारत की तरफ आ रहा था। लेकिन अब इसके संकेत चीन की तरफ है। इस खबर ने भारत और ईरान के बीच तेल व्यापार की उम्मीदों पर एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।

कमोडिटी एनालिटिक्स फर्म केप्लर (Kpler) के आंकड़ों के हवाले से Bloomberg ने यह रिपोर्ट (Bloomberg report corroborates) दी है। रिपोर्ट के मुताबिक टैंकर पिंग शुन (Ping Shun) पहले भारत के गुजरात स्थित वडीनार बंदरगाह पहुंचने का संकेत दे रहा था। अब यही जहाज चीन के डोंगयिंग (Dongying) बंदरगाह की ओर जाने का संकेत दे रहा है।

कौन है यह जहाज?

पिंग शुन एक अफ्रामैक्स (Aframax) श्रेणी का तेल टैंकर है जो 2002 में बनाया गया था। अमेरिका ने 2025 में इस जहाज पर प्रतिबंध लगाया था। यह जहाज ईरान के खार्ग (Kharg) द्वीप से लगभग 6 लाख बैरल कच्चा तेल लेकर निकला था। खार्ग द्वीप ईरान के तेल निर्यात का सबसे बड़ा केंद्र है। ईरान का करीब 90 फीसदी तेल निर्यात इसी द्वीप से होता है।

7 साल में सबसे बड़ी खेप थी यह

भारत ने मई 2019 से ईरानी कच्चे तेल की खरीद बंद कर दी थी। यह फैसला अमेरिकी प्रतिबंधों की वजह से लिया गया था। तब से लेकर अब तक भारत ने ईरान से तेल नहीं खरीदा। इस लिहाज से पिंग शुन की यह खेप 7 साल में ईरान से भारत की सबसे बड़ी संभावित तेल आपूर्ति होती। इसीलिए यह जहाज और इसकी यात्रा भारत (india crude oil) के लिए काफी अहमियत रखती थी।

4 अप्रैल को आना था वाडीनार

इस सप्ताह की शुरुआत में पिंग शुन ने भारत के वाडीनार बंदरगाह पहुंचने का संकेत दिया था। उम्मीद थी कि करीब एक महीने की समुद्री यात्रा के बाद यह जहाज 4 अप्रैल 2026 को वडीनार (gujrat)| पहुंच जाएगा। लेकिन अचानक इसने दक्षिण की ओर यू-टर्न ले लिया और अब यह चीन के डोंगयिंग बंदरगाह की तरफ बढ़ रहा है।

हालांकि यह अभी अंतिम स्थिति नहीं है। रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि इस जहाज की दिशा कभी भी बदल सकती है।

क्यों मुड़ा यह जहाज?

अभी तक इसकी कोई आधिकारिक वजह सामने नहीं आई है। लेकिन इसके पीछे अमेरिकी प्रतिबंधों की जटिलताएं बड़ी भूमिका निभा रही हैं। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने समुद्र में मौजूद ईरानी मालवाहक जहाजों पर अस्थायी रूप से जुर्माना माफ किया है। यह छूट 1 महीने के लिए है। लेकिन भुगतान, माल ढुलाई और बीमा से जुड़े मुद्दे अभी भी बड़ी रुकावट बने हुए हैं। इन अनसुलझे मुद्दों की वजह से संभावित सौदा पेचीदा बना हुआ है।

अमेरिका ने ईरानी तेल खरीद की मंजूरी तो दी है लेकिन व्यावहारिक दिक्कतें अभी बाकी हैं।

खार्ग द्वीप पर भी मंडरा रहा खतरा

ट्रंप प्रशासन ने हाल ही में ईरान के खार्ग द्वीप को लेकर सख्त चेतावनी दी है। ट्रंप ने कहा है कि अगर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz crisis) को फिर से खोलने और तनाव घटाने की बातचीत कामयाब नहीं हुई तो बड़ा सैन्य कदम उठाया जा सकता है। ऐसे में ईरान से तेल खरीदना और भी जोखिम भरा हो गया है।

भारत के लिए इसका मतलब क्या है?

भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कच्चे तेल का आयातक देश है। सस्ते ईरानी तेल की जरूरत भारत को हमेशा रही है। अगर ये सौदा हो जाता तो यह न सिर्फ सस्ता तेल होता बल्कि भारत-ईरान व्यापारिक रिश्तों को नई जान भी मिलती। लेकिन अमेरिकी प्रतिबंधों की जटिलताएं और जहाज का रास्ता बदलना यह बताता है कि अभी यह रास्ता आसान नहीं है।

यह खबर क्यों जरूरी है?

यह खबर भारत की ऊर्जा सुरक्षा और विदेश नीति दोनों से जुड़ी है। भारत अपनी जरूरत का 85 फीसदी से ज्यादा कच्चा तेल आयात करता है। ईरानी तेल सस्ता होता है और पहले भारत इसका बड़ा खरीदार था। 2019 से बंद इस व्यापार को फिर शुरू करना भारत के लिए आर्थिक रूप से फायदेमंद हो सकता है। लेकिन अमेरिकी प्रतिबंधों की छाया और मध्य पूर्व में चल रहे संघर्ष (अमेरिका ईरान जंग)के बीच यह फैसला कूटनीतिक रूप से भी संवेदनशील है।

मध्य प्रदेश के सीमेंट उद्योग पर संकट के बादल, ईरान युद्ध के कारण कीमतों में हो सकता है इजाफा

इंदौर में 129 करोड़ का पेट्रोल-डीजल घोटाला, 7 व्यापारियों पर FIR दर्ज

भारत ने रूस से बढ़ाया तेल आयात, अब चीन जा रहा रूसी तेल टैंकर भी आएगा भारत, खत्म होगी तेल की टेंशन

प्रधानमंत्री आवास योजना में लापरवाही; सुस्त अफसरों पर सरकार ने चलाया हंटर; 6 नगर निगमों को नोटिस

Tags:
  • india crude oil
  • Bloomberg report corroborates
  • gujrat
  • स्ट्रेट ऑफ होर्मुज
  • अमेरिका ईरान जंग
  • Strait of Hormuz crisis
गूगल पर द सूत्र चुनें ! Add as a preferredsource on Google
MP कर्मचारी प्रमोशन: 10 साल बाद पदोन्नति, अब 4 साल की छूट पर अटका मामला, राज्य कर्मचारी संघ ने सीएम मोहन यादव से की मांग

By Atul Dwivedi

MP कर्मचारी प्रमोशन: 10 साल बाद पदोन्नति, अब 4 साल की छूट पर अटका मामला, राज्य कर्मचारी संघ ने सीएम मोहन यादव से की मांग
एमपी भाजपा में 30 सितंबर को तीन दिग्गजों की एकसाथ आमद, 236 दिन बाद मिला प्रदेश संगठन महामंत्री

By Ramanand Tiwari

एमपी भाजपा में 30 सितंबर को तीन दिग्गजों की एकसाथ आमद, 236 दिन बाद मिला प्रदेश संगठन महामंत्री
मध्य प्रदेश भाजपा में अब लक्ष्मण रेखा कौन खींचेगा? चंद्रशेखर की होगी असली परीक्षा

By Ramanand Tiwari

मध्य प्रदेश भाजपा में अब लक्ष्मण रेखा कौन खींचेगा? चंद्रशेखर की होगी असली परीक्षा
मध्य प्रदेश के किसानों को बड़ी राहत: मिनी ट्रैक्टर पर मिलेगी 50 प्रतिशत तक सब्सिडी, ऑनलाइन पोर्टल पर ऐसे करें आवेदन

By Jitendra Shrivastava

मध्य प्रदेश के किसानों को बड़ी राहत: मिनी ट्रैक्टर पर मिलेगी 50 प्रतिशत तक सब्सिडी, ऑनलाइन पोर्टल पर ऐसे करें आवेदन
mp-top-news: खबरें काम की... ब्राह्मणों ने कभी शासन नहीं किया, नरोत्तम मिश्रा बोले खामोशी को कमजोरी न समझें

By Sanjay Dhiman

mp-top-news: खबरें काम की... ब्राह्मणों ने कभी शासन नहीं किया, नरोत्तम मिश्रा बोले खामोशी को कमजोरी न समझें
झाबुआ संयुक्त कलेक्टर अक्षय सिंह की नौकरी खतरे में, फर्जी जाति प्रमाणपत्र में ऐसे घिरे

By Sanjay Gupta

झाबुआ संयुक्त कलेक्टर अक्षय सिंह की नौकरी खतरे में, फर्जी जाति प्रमाणपत्र में ऐसे घिरे
बस्तर में बाढ़ का जायजा लेने पहुंचे CM साय, प्रभावित परिवारों से मिले, 10 हजार रुपए अतिरिक्त सहायता की घोषणा

By Arun Tiwari

बस्तर में बाढ़ का जायजा लेने पहुंचे CM साय, प्रभावित परिवारों से मिले, 10 हजार रुपए अतिरिक्त सहायता की घोषणा