कैंची धाम जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए बड़ा अपडेट, दर्शन से पहले कराना पड़ सकता है रजिस्ट्रेशन
Anshika Singh Chauhan | Oct 07, 2026, 17:54 IST
कैंची धाम दर्शन में पहले और अब क्या बदला, कैंची धाम नए नियम की पूरी जानकारी एक नजर में, आसान शब्दों में
उत्तराखंड के प्रसिद्ध कैंची धाम में लगातार बढ़ रही श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने नई व्यवस्था बनाने की तैयारी शुरू कर दी है। बाबा नीम करौली के दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं को आने वाले समय में पहले से रजिस्ट्रेशन कराना पड़ सकता है। प्री-रजिस्ट्रेशन की व्यवस्था शुरू की जा सकती है।
पिछले वीकेंड कैंची धाम में 50 हजार से ज्यादा श्रद्धालु पहुंचे थे। इससे मंदिर परिसर से लेकर भवाली-अल्मोड़ा हाईवे तक भारी दबाव देखने को मिला। कई जगह ट्रैफिक व्यवस्था प्रभावित हुई। पार्किंग की समस्या भी बढ़ गई।
इसके बाद कुमाऊं कमिश्नर दीपक रावत की अध्यक्षता में अधिकारियों की बैठक हुई। इसमें कैंची धाम के लिए स्थायी क्राउड मैनेजमेंट सिस्टम तैयार करने पर चर्चा की गई। प्रशासन का उद्देश्य यह है कि किसी भी दिन कैंची धाम में आने वाली संभावित भीड़ का पहले ही अंदाजा लगाया जा सके। उसी हिसाब से ट्रैफिक, पार्किंग, सुरक्षा और शटल बसों की व्यवस्था की जा सके।
बैठक में श्रद्धालुओं के लिए अनिवार्य रजिस्ट्रेशन सिस्टम (Kainchi dham registration) लागू करने का प्रस्ताव सामने आया है। डीएम और एसएसपी की ओर से राज्य सरकार को इस संबंध में संयुक्त प्रस्ताव भेजा जाएगा। शासन की मंजूरी मिलने के बाद कैंची धाम में प्री-रजिस्ट्रेशन की व्यवस्था शुरू की जा सकती है। अभी यह व्यवस्था लागू नहीं हुई है। यह फिलहाल प्रस्ताव के स्तर पर है। अंतिम फैसला राज्य सरकार की मंजूरी के बाद होगा। प्रशासन का मानना है कि अगर पहले से पता हो कि किस दिन कितने श्रद्धालु कैंची धाम पहुंचेंगे तो व्यवस्थाएं बेहतर तरीके से की जा सकेंगी।
प्रशासन की बैठक में रोजाना 20 हजार से 25 हजार श्रद्धालुओं की संख्या को फिलहाल व्यावहारिक माना गया है। यानी आने वाले समय में कैंची धाम में दर्शन करने वाले श्रद्धालुओं की संख्या तय की जा सकती है। हालांकि 20 से 25 हजार की संख्या अभी अंतिम नहीं है।
मंदिर की व्यवस्था, पार्किंग, ट्रैफिक और अन्य सुविधाओं को देखते हुए इसमें आगे बदलाव भी हो सकता है। प्रशासन का फोकस इस बात पर है कि एक साथ इतनी भीड़ न पहुंचे जिससे मंदिर परिसर और मुख्य हाईवे पर व्यवस्था बिगड़ जाए।
कैंची धाम (Kainchi Dham) मंदिर परिसर में प्रवेश और बाहर निकलने की व्यवस्था भी बदली जाएगी। अभी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के आने-जाने से एक ही जगह दबाव बढ़ जाता है। इसी को देखते हुए एंट्री और एग्जिट के रास्ते अलग रखने पर सहमति बनी है। इससे श्रद्धालुओं की आवाजाही एक दिशा में हो सकेगी। आमने-सामने आने वाली भीड़ कम होगी।
इस व्यवस्था को सुरक्षा के लिहाज से भी जरूरी माना जा रहा है। मंदिर में बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चे भी बड़ी संख्या में पहुंचते हैं। अलग रास्ते होने से किसी आपात स्थिति में श्रद्धालुओं को मंदिर परिसर से बाहर निकालना भी आसान होगा।
कुमाऊं कमिश्नर दीपक रावत ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे कैंची धाम आने से पहले होटल या होमस्टे की व्यवस्था कर लें। बिना बुकिंग के पहुंचने वाले श्रद्धालु बाद में होटल तलाशते हैं। इसके कारण वाहन सड़कों पर घूमते रहते हैं और ट्रैफिक का दबाव बढ़ जाता है।
इसी वजह से प्रशासन श्रद्धालुओं को पहले से होटल्स में बुकिंग (Kainchi Dham pre booking) कराने की सलाह दे रहा है। जरूरत पड़ने पर होटल बुकिंग की जांच भी की जा सकती है। हालांकि इसका उद्देश्य श्रद्धालुओं को परेशान करना नहीं बल्कि सड़कों और पार्किंग पर बढ़ते दबाव को कम करना है।
कैंची धाम में अब केवल बड़े धार्मिक आयोजनों से पहले ही नहीं बल्कि हर वीकेंड से पहले भी अधिकारियों की बैठक होगी। इसमें एसडीएम, सीओ और एआरटीओ स्तर के अधिकारी शामिल होंगे।बैठक में अनुमान लगाया जाएगा कि वीकेंड पर कितने श्रद्धालु आ सकते हैं। उसी हिसाब से ट्रैफिक डायवर्जन, पार्किंग और शटल बसों की योजना बनाई जाएगी।
भीड़ ज्यादा होने पर भवाली और आसपास के इलाकों से कैंची धाम तक विशेष शटल सेवाएं चलाई जा सकती हैं। इसमें परिवहन विभाग और केएमओयू (KMOU) की भी भूमिका रहेगी।
कैंची धाम की भीड़ का असर केवल मंदिर परिसर तक सीमित नहीं रहता। मंदिर भवाली-अल्मोड़ा हाईवे के पास है। यह सड़क अल्मोड़ा के साथ बागेश्वर और पिथौरागढ़ जाने वाले लोगों के लिए भी महत्वपूर्ण है। जब कैंची धाम में अचानक हजारों श्रद्धालु पहुंचते हैं तो इस हाईवे पर भी लंबा जाम लग सकता है। इसीलिए प्रशासन चाहता है कि कैंची धाम जाने वाले श्रद्धालुओं की संख्या पहले से पता रहे। इससे सामान्य यात्रियों और स्थानीय लोगों को भी राहत मिल सकेगी।
बैठक में निजी मोटरसाइकिलों को टैक्सी के रूप में इस्तेमाल किए जाने का मुद्दा भी उठा। बिना अनुमति निजी बाइक का कमर्शियल इस्तेमाल करने वालों के खिलाफ परिवहन विभाग कार्रवाई करेगा।ऐसे वाहनों की जांच के साथ जब्ती जैसी कार्रवाई भी की जा सकती है। प्रशासन का कहना है कि नियमों के खिलाफ वाहन चलाने वालों पर सख्ती की जाएगी।
कैंची धाम में बढ़ती भीड़ के साथ होटल, होमस्टे और स्थानीय दुकानों का कारोबार भी बढ़ा है। इसी बीच श्रद्धालुओं से ज्यादा कीमत लेने की शिकायतें भी सामने आई हैं। अब दुकानदारों को अपनी रेट लिस्ट साफ दिखाई देने वाली जगह पर लगानी होगी।
अगर कोई दुकानदार तय या उचित कीमत से ज्यादा पैसा लेता पाया गया तो उसके खिलाफ कार्रवाई हो सकती है। होटलों और होमस्टे में ज्यादा किराया वसूलने की शिकायतों की भी जांच की जाएगी।गंभीर गड़बड़ी मिलने पर लाइसेंस या अनुमति पर कार्रवाई भी हो सकती है।
कैंची धाम के पास बहने वाली शिप्रा नदी का धार्मिक महत्व भी है। प्रशासन के अनुसार नदी में गंदगी फैलाने, कपड़े धोने, पिकनिक करने और दूसरे नियमों का उल्लंघन करने वालों पर निगरानी बढ़ाई जाएगी। वन विभाग के कर्मचारियों की ड्यूटी भी लगाई जा सकती है।
नियम तोड़ने वालों के खिलाफ चालान की कार्रवाई भी की जाएगी। प्रशासन का कहना है कि श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या के साथ नदी की स्वच्छता और पवित्रता बनाए रखना भी जरूरी है।
स्थानीय मान्यता के अनुसार शिप्रा नदी का बाबा नीम करौली से खास संबंध माना जाता है। एक प्रसिद्ध कथा के मुताबिक एक बार भंडारे में घी खत्म हो गया था। बाबा ने भक्तों से शिप्रा नदी से पानी लाने के लिए कहा। मान्यता है कि जब उस पानी को कढ़ाई में डाला गया तो वह घी में बदल गया। बाद में बाबा ने उतना ही घी वापस नदी को लौटाने के लिए कहा। इसी तरह की धार्मिक मान्यताओं के कारण श्रद्धालुओं के बीच शिप्रा नदी का विशेष महत्व है।
कैंची धाम में पिछले कुछ समय से श्रद्धालुओं की संख्या तेजी से बढ़ी है। वीकेंड, छुट्टियों और विशेष धार्मिक अवसरों पर एक साथ हजारों लोग दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। पिछले वीकेंड यह संख्या 50 हजार के पार पहुंच गई थी। इससे मंदिर परिसर, सड़क, पार्किंग और आसपास के क्षेत्रों में व्यवस्थाओं पर भारी दबाव पड़ा।
अब प्रशासन भीड़ पहुंचने के बाद इंतजाम करने के बजाय पहले से तैयारी करना चाहता है। इसी वजह से रजिस्ट्रेशन, श्रद्धालुओं की संभावित सीमा, अलग एंट्री-एग्जिट, शटल सेवा, ट्रैफिक मैनेजमेंट और होटल निगरानी जैसी व्यवस्थाओं पर काम किया जा रहा है।
फिलहाल सबसे अहम बात यह है कि अनिवार्य रजिस्ट्रेशन और 20 से 25 हजार श्रद्धालुओं की सीमा अभी प्रस्तावित व्यवस्था का हिस्सा है। शासन की मंजूरी के बाद ही इसकी अंतिम तस्वीर साफ होगी।
इसके बाद कुमाऊं कमिश्नर दीपक रावत की अध्यक्षता में अधिकारियों की बैठक हुई। इसमें कैंची धाम के लिए स्थायी क्राउड मैनेजमेंट सिस्टम तैयार करने पर चर्चा की गई। प्रशासन का उद्देश्य यह है कि किसी भी दिन कैंची धाम में आने वाली संभावित भीड़ का पहले ही अंदाजा लगाया जा सके। उसी हिसाब से ट्रैफिक, पार्किंग, सुरक्षा और शटल बसों की व्यवस्था की जा सके।
कैंची धाम जाने से पहले कराना पड़ सकता है रजिस्ट्रेशन
कैंची धाम में श्रद्धालुओं की हो सकती है सीमा
मंदिर की व्यवस्था, पार्किंग, ट्रैफिक और अन्य सुविधाओं को देखते हुए इसमें आगे बदलाव भी हो सकता है। प्रशासन का फोकस इस बात पर है कि एक साथ इतनी भीड़ न पहुंचे जिससे मंदिर परिसर और मुख्य हाईवे पर व्यवस्था बिगड़ जाए।
कैंची धाम में अलग होंगे एंट्री और एग्जिट के रास्ते
इस व्यवस्था को सुरक्षा के लिहाज से भी जरूरी माना जा रहा है। मंदिर में बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चे भी बड़ी संख्या में पहुंचते हैं। अलग रास्ते होने से किसी आपात स्थिति में श्रद्धालुओं को मंदिर परिसर से बाहर निकालना भी आसान होगा।
होटल बुकिंग पहले कराने की सलाह
इसी वजह से प्रशासन श्रद्धालुओं को पहले से होटल्स में बुकिंग (Kainchi Dham pre booking) कराने की सलाह दे रहा है। जरूरत पड़ने पर होटल बुकिंग की जांच भी की जा सकती है। हालांकि इसका उद्देश्य श्रद्धालुओं को परेशान करना नहीं बल्कि सड़कों और पार्किंग पर बढ़ते दबाव को कम करना है।
वीकेंड से पहले कैंची धाम पर बड़ी बैठक
भीड़ ज्यादा होने पर भवाली और आसपास के इलाकों से कैंची धाम तक विशेष शटल सेवाएं चलाई जा सकती हैं। इसमें परिवहन विभाग और केएमओयू (KMOU) की भी भूमिका रहेगी।
कैंची धाम के भवाली-अल्मोड़ा हाईवे पर भी है प्रशासन की नजर
अवैध बाइक टैक्सी पर होगी कार्रवाई
कैंची धाम में दुकानों को लगानी होगी रेट लिस्ट
अगर कोई दुकानदार तय या उचित कीमत से ज्यादा पैसा लेता पाया गया तो उसके खिलाफ कार्रवाई हो सकती है। होटलों और होमस्टे में ज्यादा किराया वसूलने की शिकायतों की भी जांच की जाएगी।गंभीर गड़बड़ी मिलने पर लाइसेंस या अनुमति पर कार्रवाई भी हो सकती है।
शिप्रा नदी में पिकनिक और गंदगी पर होगी सख्ती
नियम तोड़ने वालों के खिलाफ चालान की कार्रवाई भी की जाएगी। प्रशासन का कहना है कि श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या के साथ नदी की स्वच्छता और पवित्रता बनाए रखना भी जरूरी है।
बाबा नीम करौली से जुड़ी है शिप्रा नदी की मान्यता
क्यों बदल रही है कैंची धाम की व्यवस्था
अब प्रशासन भीड़ पहुंचने के बाद इंतजाम करने के बजाय पहले से तैयारी करना चाहता है। इसी वजह से रजिस्ट्रेशन, श्रद्धालुओं की संभावित सीमा, अलग एंट्री-एग्जिट, शटल सेवा, ट्रैफिक मैनेजमेंट और होटल निगरानी जैसी व्यवस्थाओं पर काम किया जा रहा है।
फिलहाल सबसे अहम बात यह है कि अनिवार्य रजिस्ट्रेशन और 20 से 25 हजार श्रद्धालुओं की सीमा अभी प्रस्तावित व्यवस्था का हिस्सा है। शासन की मंजूरी के बाद ही इसकी अंतिम तस्वीर साफ होगी।
FAQ
- क्या कैंची धाम जाने के लिए रजिस्ट्रेशन अनिवार्य हो गया है?
अभी नहीं, यह सिर्फ प्रस्ताव है। जिलाधिकारी और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक सिफारिश शासन को भेजेंगे। अंतिम व्यवस्था शासन के फैसले के बाद साफ होगी। - कैंची धाम में रोज कितने श्रद्धालुओं को दर्शन मिलेंगे?
चर्चा में रोज 20 से 25 हजार की सीमा रखी गई है। यह अंतिम संख्या नहीं है। हालात और सुविधाओं के हिसाब से बदलाव हो सकता है। - क्या बिना होटल बुकिंग के कैंची धाम जा सकते हैं?
श्रद्धालुओं से पहले से बुकिंग कराने की अपील की गई है। बुकिंग की जांच भी हो सकती है। प्रशासन का मकसद परेशान करना नहीं, ट्रैफिक काबू करना है।
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