किसान क्रेडिट कार्ड धारकों को कर्ज मिलना होगा और आसान, वित्त मंत्री आज करेंगी किसान ऋण पोर्टल की शुरुआत
Pratibha Rana | Sept 19, 2023, 24:00 IST
किसान क्रेडिट कार्ड धारकों को कर्ज मिलना होगा और आसान, वित्त मंत्री आज करेंगी किसान ऋण पोर्टल की शुरुआत
केंद्र सरकार आज यानी 19 सितंबर को बड़ी सौगात देने जा रही है। मंगलवार को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर वाम किसान पोर्टल लॉन्च करेंगे।
NEW DELHI. केंद्र सरकार आज यानी 19 सितंबर को बड़ी सौगात देने जा रही है। आज ( 19 सितंबर) मंगलवार को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर वाम किसान पोर्टल लॉन्च करेंगे। पोर्टल से किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) धारक सब्सिडी वाले लोन का आसानी लाभ उठा सकेंगे। कार्यक्रम के तहत एक केसीसी डोर-टू-डोर अभियान और एक मौसम सूचना नेटवर्क डेटा सिस्टम पोर्टल भी लॉन्च किया जाएगा, जो दिल्ली के पूसा कॉम्प्लेक्स में आयोजित किया जाएगा।
पोर्टल का फायदा
इस पोर्टल के माध्यम से किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) धारकों को सब्सिडी वाला कर्ज पाने में मदद मिलेगी। कार्यक्रम में डोर-टू-डोर केसीसी अभियान और वेदर इन्फार्मेशन नेटवर्क डाटा सिस्टम (विंडस) पोर्टल को भी लॉन्च किया जाएगा।
मार्च तक कितने थे केसीसी अकाउंट
30 मार्च तक लगभग 7.35 करोड़ केसीसी अकाउंट थे, जिनकी कुल स्वीकृत ऋण सीमा 8.85 लाख करोड़ रुपए है। आंकड़ों के अनुसार, केंद्र सरकार ने चालू वित्त वर्ष में अप्रैल से अगस्त के दौरान रियायती ब्याज दर पर 6,573.50 करोड़ रुपए का कृषि-ऋण वितरित किया है। किसान क्रेडिट के लाभ अन्य किसानों को भी मिल सकें, इसके लिए पीएम किसान योजना के तहत चयनित गैर केसीसी धारकों को चिह्नित किया गया है।
क्या है केसीसी?
किसान क्रेडिट कार्ड योजना (केसीसी) 1998 में राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) द्वारा तैयार एक मॉडल योजना के आधार पर शुरू की गई थी। किसान क्रेडिट कार्ड योजना किसानों के लिए पर्याप्त और समय पर लोन प्राप्त करने की प्रक्रिया को सरल बनाने के उद्देश्य से लाई गई थी। इससे किसानों को बीज, उर्वरक, कीटनाशक आदि कृषि आदानों की खरीद में मदद मिलेगी। केसीसी में फसल के बाद के खर्च, उपभोग की आवश्यकताएं, कृषि और संबद्ध गतिविधियों के लिए ऋण आवश्यकताओं में निवेश भी शामिल है। यह योजना वाणिज्यिक बैंकों, लघु वित्त बैंकों और सहकारी समितियों द्वारा कार्यान्वित की जाती है।
योजना की पात्रता?
- वैसे व्यक्तिगत किसान जो मालिक/खेतीदार हैं।
- जो बटाईदार, किराएदार किसान हैं।
- बटाईदारों, किसानों, किरायेदार किसानों आदि के स्वयं सहायता समूह।
- किसान फसलों के उत्पादन या पशुपालन जैसी गतिविधियों में शामिल हैं
- मछली किसान, मछुआरे, एसएचजी, जेएलजी और महिला समूह
- वे मछुआरे जिनके पास पंजीकृत नाव या किसी अन्य प्रकार की मछली पकड़ने वाली नाव है और जिनके पास मुहाने या समुद्र में मछली पकड़ने के लिए आवश्यक लाइसेंस या अनुमति है।
- मुर्गी पालन करने वाले किसान और यहां तक कि जो भेड़, खरगोश, बकरी, सूअर आदि पालते हैं।
- डेयरी: किसान, डेयरी किसान, एसएचजी, जेएलजी, और किरायेदार किसान जो शेड के मालिक हैं, पट्टे पर देते हैं या किराए पर लेते हैं।
पोर्टल का फायदा
इस पोर्टल के माध्यम से किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) धारकों को सब्सिडी वाला कर्ज पाने में मदद मिलेगी। कार्यक्रम में डोर-टू-डोर केसीसी अभियान और वेदर इन्फार्मेशन नेटवर्क डाटा सिस्टम (विंडस) पोर्टल को भी लॉन्च किया जाएगा।
मार्च तक कितने थे केसीसी अकाउंट
30 मार्च तक लगभग 7.35 करोड़ केसीसी अकाउंट थे, जिनकी कुल स्वीकृत ऋण सीमा 8.85 लाख करोड़ रुपए है। आंकड़ों के अनुसार, केंद्र सरकार ने चालू वित्त वर्ष में अप्रैल से अगस्त के दौरान रियायती ब्याज दर पर 6,573.50 करोड़ रुपए का कृषि-ऋण वितरित किया है। किसान क्रेडिट के लाभ अन्य किसानों को भी मिल सकें, इसके लिए पीएम किसान योजना के तहत चयनित गैर केसीसी धारकों को चिह्नित किया गया है।
क्या है केसीसी?
किसान क्रेडिट कार्ड योजना (केसीसी) 1998 में राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) द्वारा तैयार एक मॉडल योजना के आधार पर शुरू की गई थी। किसान क्रेडिट कार्ड योजना किसानों के लिए पर्याप्त और समय पर लोन प्राप्त करने की प्रक्रिया को सरल बनाने के उद्देश्य से लाई गई थी। इससे किसानों को बीज, उर्वरक, कीटनाशक आदि कृषि आदानों की खरीद में मदद मिलेगी। केसीसी में फसल के बाद के खर्च, उपभोग की आवश्यकताएं, कृषि और संबद्ध गतिविधियों के लिए ऋण आवश्यकताओं में निवेश भी शामिल है। यह योजना वाणिज्यिक बैंकों, लघु वित्त बैंकों और सहकारी समितियों द्वारा कार्यान्वित की जाती है।
योजना की पात्रता?
- वैसे व्यक्तिगत किसान जो मालिक/खेतीदार हैं।
- जो बटाईदार, किराएदार किसान हैं।
- बटाईदारों, किसानों, किरायेदार किसानों आदि के स्वयं सहायता समूह।
- किसान फसलों के उत्पादन या पशुपालन जैसी गतिविधियों में शामिल हैं
- मछली किसान, मछुआरे, एसएचजी, जेएलजी और महिला समूह
- वे मछुआरे जिनके पास पंजीकृत नाव या किसी अन्य प्रकार की मछली पकड़ने वाली नाव है और जिनके पास मुहाने या समुद्र में मछली पकड़ने के लिए आवश्यक लाइसेंस या अनुमति है।
- मुर्गी पालन करने वाले किसान और यहां तक कि जो भेड़, खरगोश, बकरी, सूअर आदि पालते हैं।
- डेयरी: किसान, डेयरी किसान, एसएचजी, जेएलजी, और किरायेदार किसान जो शेड के मालिक हैं, पट्टे पर देते हैं या किराए पर लेते हैं।
MP कर्मचारी प्रमोशन: 10 साल बाद पदोन्नति, अब 4 साल की छूट पर अटका मामला, राज्य कर्मचारी संघ ने सीएम मोहन यादव से की मांग
By Atul Dwivedi
एमपी भाजपा में 30 सितंबर को तीन दिग्गजों की एकसाथ आमद, 236 दिन बाद मिला प्रदेश संगठन महामंत्री
By Ramanand Tiwari
मध्य प्रदेश भाजपा में अब लक्ष्मण रेखा कौन खींचेगा? चंद्रशेखर की होगी असली परीक्षा
By Ramanand Tiwari
मध्य प्रदेश के किसानों को बड़ी राहत: मिनी ट्रैक्टर पर मिलेगी 50 प्रतिशत तक सब्सिडी, ऑनलाइन पोर्टल पर ऐसे करें आवेदन
By Jitendra Shrivastava
mp-top-news: खबरें काम की... ब्राह्मणों ने कभी शासन नहीं किया, नरोत्तम मिश्रा बोले खामोशी को कमजोरी न समझें
By Sanjay Dhiman
झाबुआ संयुक्त कलेक्टर अक्षय सिंह की नौकरी खतरे में, फर्जी जाति प्रमाणपत्र में ऐसे घिरे
By Sanjay Gupta
बस्तर में बाढ़ का जायजा लेने पहुंचे CM साय, प्रभावित परिवारों से मिले, 10 हजार रुपए अतिरिक्त सहायता की घोषणा
By Arun Tiwari