बदले कानून : ठग अब नहीं होंगे 420, हत्यारों को 302 में नहीं मिलेगी सजा, जानें वजह
Jitendra Shrivastava | Jun 30, 2024, 17:52 IST
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देश-दुनिया। देश में अंग्रेजों के जमाने से चल रहे तीन आपराधिक कानून 1 जुलाई से बदल जाएंगे। कानूनों में प्रभावी होने के साथ ही इनमें शामिल धाराओं का क्रम भी बदल जाएगा। आइए जानते हैं आईपीसी की कुछ खास धाराओं के बदलाव के बारे में...
बदले कानून : देशभर में एक जुलाई से न्याय केंद्रित तीन नए कानून भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम लागू होने जा रहे हैं। स्वतंत्रता के बाद पहली बार कानूनों को दंड नहीं बल्कि, न्याय पर केंद्रित किया गया है। दिसंबर 2023 में संसद से पारित तीन कानून अगले महीने से पूरे देश में प्रभावी हो जाएंगे। तीनों नए कानून भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम कहे जाएंगे, जो क्रमश: भारतीय दंड संहिता (1860), आपराधिक प्रक्रिया संहिता (1898) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम (1872) का स्थान लेंगे।
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बता दें कि भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम को 12 दिसंबर 2023 को केंद्र सरकार ने लोकसभा में तीन संशोधित आपराधिक विधियकों को पेश किया था। इन विधेयकों को लोकसभा ने 20 दिसंबर, 2023 को और राज्यसभा ने 21 दिसंबर, 2023 को मंजूरी दी। राज्यसभा में विधेयकों को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा पेश किए जाने के बाद ध्वनि मत से पारित किया गया था। इसके बाद 25 दिसंबर, 2023 को राष्ट्रपति से मंजूरी के बाद विधेयक कानून बन गए, लेकिन इनके प्रभावी होने की तारीख 1 जुलाई, 2024 रखी गई। संसद में तीनों विधेयकों पर चर्चा के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा था कि इनमें सजा देने के बजाय न्याय देने पर फोकस किया गया है।
दंड प्रक्रिया संहिता यानी सीआरपीसी की जगह अब भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता ने ले ली है। CRPC की 484 धाराओं के बदले भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता में 531 धाराएं हैं। नए कानून में 177 प्रावधान बदले गए हैं, जबकि नौ नई धाराएं और 39 उपधाराएं जोड़ी हैं। इसके अलावा 35 धाराओं में समय सीमा तय की गई है। वहीं, नए भारतीय साक्ष्य अधिनियम में 170 प्रावधान हैं। इससे पहले वाले कानून में 167 प्रावधान थे। नए कानून में 24 प्रावधान बदले हैं।
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि कल का दिन मध्य प्रदेश और पूरे देश के लिए एक विशेष दिन रहने वाला है। भारतीय दंड संहिता अर्थात IPC व CrPC नियम बदलते हुए नए प्रकार के कानून लागू होने वाले हैं। यह तीनों कानून पूरे देश वासियों के लिए अंगीकार होंगे और इससे सुविधा मिलेगी।
ये बदला है न्याय संहिता में...
- भारतीय दंड संहिता में 511 धाराएं थीं, लेकिन भारतीय न्याय संहिता में धाराएं 358 रह गई हैं।
- संशोधन के जरिए इसमें 20 नए अपराध शामिल किए हैं, तो 33 अपराधों में सजा अवधि बढ़ाई है।
- 83 अपराधों में जुर्माने की रकम भी बढ़ाई है। 23 अपराधों में अनिवार्य न्यूनतम सजा का प्रावधान है।
- छह अपराधों में सामुदायिक सेवा की सजा का प्रावधान किया गया है।
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25 दिसंबर, 2023 को राष्ट्रपति से मंजूरी के बाद बने कानून
ये धाराएं बदली गई...
- धारा 124: आईपीसी की धारा 124 राजद्रोह से जुड़े मामलों में सजा का प्रावधान रखती थी। नए कानूनों में 'राजद्रोह' को एक नया शब्द 'देशद्रोह' मिला है यानी ब्रिटिश काल के शब्द को हटा दिया गया है। भारतीय न्याय संहिता में अध्याय 7 में राज्य के विरुद्ध अपराधों कि श्रेणी में 'देशद्रोह' को रखा गया है।
- धारा 144: आईपीसी की धारा 144 घातक हथियार से लैस होकर गैरकानूनी सभा में शामिल होना के बारे में थी। इस धारा को भारतीय न्याय संहिता के अध्याय 11 में सार्वजनिक शांति के विरुद्ध अपराध की श्रेणी में रखा गया है। अब भारतीय न्याय संहिता की धारा 187 गैरकानूनी सभा के बारे में है।
- धारा 302: पहले किसी की हत्या करने वाला धारा 302 में आरोपी बनाया जाता था। हालांकि, अब ऐसे अपराधियों को धारा 101 में सजा मिलेगी। नए कानून के अनुसार, हत्या की धारा को अध्याय 6 में मानव शरीर को प्रभावित करने वाले अपराध कहा जाएगा।
- धारा 307: नए कानून के अस्तित्व में आने से पहले हत्या करने के प्रयास में दोषी को आईपीसी की धारा 307 में सजा मिलती थी। अब ऐसे दोषियों को भारतीय न्याय संहिता की धारा 109 में सजा सुनाई जाएगी। इस धारा को भी अध्याय 6 में रखा गया है।
- धारा 376: दुष्कर्म से जुड़े अपराध में सजा को पहले आईपीसी की धारा 376 में परिभाषित किया गया था। भारतीय न्याय संहिता में इसे अध्याय 5 में महिलाओं और बच्चों के विरुद्ध अपराध की श्रेणी में जगह दी गई है। नए कानून में दुष्कर्म से जुड़े अपराध में सजा को धारा 63 में परिभाषित किया गया है। वहीं सामूहिक दुष्कर्म को आईपीसी की धारा 376 डी को नए कानून में धारा 70 में शामिल किया गया है।
- धारा 399: पहले मानहानि के मामले में आईपीसी की धारा 399 इस्तेमाल की जाती थी। नए कानून में अध्याय 19 में आपराधिक धमकी, अपमान, मानहानि, आदि में इसे जगह दी गई है। मानहानि को भारतीय न्याय संहिता की धारा 356 में रखा गया है।
- धारा 420: भारतीय न्याय संहिता में धोखाधड़ी या ठगी का अपराध 420 में नहीं, अब धारा 316 में आएगा। इस धारा को भारतीय न्याय संहिता में अध्याय 17 में संपत्ति की चोरी के विरुद्ध अपराधों की श्रेणी में रखा गया है।
CRPC और साक्ष्य अधिनियम में बदलाव
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