बेटे ने पिता की हत्या कर नीले ड्रम में छिपाई लाश, सिर काटकर 21 किमी दूर फेंका

लखनऊ में बेटे ने अपने पिता की हत्या कर शव के टुकड़े कर दिए। हत्या की असल वजह बेटे की होटल खोलने की इच्छा और पिता का उस पर डॉक्टर बनने का दबाव था।

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Thesootr Network
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Photograph: (the sootr)

लखनऊ के आशियाना क्षेत्र में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई। एक 21 वर्षीय युवक ने अपने पिता की हत्या कर उनके शव को टुकड़ों में काटकर नीले ड्रम में छिपा दिया। यह घटना 20 फरवरी को घटित हुई। बताया जा रहा है कि पिता बेटे पर डॉक्टर बनने का दबाव बना रहा था। जबकि बेटा होटल खोलना चाहता था। 

आरोपी का नाम अक्षत है और उसका कहना था कि उसके पिता मानवेंद्र सिंह वर्धमान, जो कि एक पैथोलॉजी लैब के मालिक थे, चाहते थे कि वह डॉक्टर बने। अक्षत का सपना था कि वह एक होटल व्यवसाय शुरू करें। यह दोनों के बीच कई बार विवाद का कारण बना था। आरोप के मुताबिक, 20 फरवरी को हुई बहस के दौरान गुस्से में आकर अक्षत ने अपने पिता को गोली मार दी।

आरोपी का बचाव और वारदात का विवरण

अक्षत के अनुसार, उसके पिता ने उसे हमेशा NEET (नीट) क्वालीफाई करने के लिए मजबूर किया था, और यह उसके लिए असहनीय हो गया। 20 फरवरी की सुबह, अक्षत ने पिता से लड़ाई के बाद, लाइसेंसी राइफल से उन्हें गोली मार दी। जब बहन ने शोर मचाने की कोशिश की, तो उसने उसे धमकी दी कि अगर उसने किसी को कुछ बताया, तो उसे भी मार डालेगा। बहन डर के मारे चुप रही और घटना की जानकारी किसी से नहीं दी।

आरोपी ने शव को ठिकाने लगाने के बाद, शव के अंगों को काटने के लिए आरी खरीदी। इसके बाद उसने शव के सिर और कुछ हिस्सों को कार में रखा और 21 किलोमीटर दूर सदरौना गांव में फेंक दिया। बाकी अंगों को पॉलीथिन में लपेटकर नीले ड्रम में भर दिया।

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पुलिस की जांच और आरोपी की गिरफ्तारी

तीन दिन बाद, 23 फरवरी को अक्षत थाने पहुंचा और अपने पिता के गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस को जब पूछताछ में संदेह हुआ, तो अक्षत ने अपनी हत्या की बात कबूल कर ली। पुलिस उसे लेकर घटनास्थल पर गई और शव के टुकड़े बरामद किए, हालांकि सिर का हिस्सा अभी तक नहीं मिला है।

अक्षत का कहना था कि उसने यह कदम इसलिए उठाया क्योंकि उसके पिता हमेशा उसे डॉक्टर बनाने के लिए दबाव डालते थे, जबकि वह खुद एक होटल या रेस्टोरेंट का मालिक बनना चाहता था। अक्षत का कहना था कि वह MBBS (एमबीबीएस) के बजाय लॉन या रेस्टोरेंट का कारोबार करना चाहता था, जो उसके लिए अधिक आकर्षक था।

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आरोपी का परिवार और घटनास्थल की जानकारी

मानवेंद्र सिंह वर्धमान जो मूल रूप से जालौन जिले के निवासी थे, पैथोलॉजी लैब चलाते थे और शराब के कारोबार में भी शामिल थे। उनका परिवार काफी सालों से लखनऊ के आशियाना क्षेत्र में रह रहा था। उनका 21 वर्षीय बेटा अक्षत बीकॉम का छात्र था और उनकी 17 वर्षीय बेटी कृति 11वीं कक्षा की छात्रा थी।

अक्षत की मां का निधन कई साल पहले हो चुका था और इसके बाद मानवेंद्र सिंह ने अपनी बेटी और बेटे की परवरिश अकेले की थी। उनके परिवार में कोई विशेष दोस्ती नहीं थी, और अक्षत का परिवार से भी काफी सीमित संपर्क था।

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अक्षत की मानसिक स्थिति और उसका अतीत

अक्षत के मानसिक स्थिति का विश्लेषण करने पर यह बात सामने आई कि वह हमेशा से अपने पिता के दबाव को लेकर असंतुष्ट था। चार साल पहले, उसने घर से भागने का फैसला किया था और इसके बाद छह पन्नों का एक पत्र छोड़कर गया था, जिसमें उसने बताया था कि वह MBBS नहीं करना चाहता और उसे जबरदस्ती न किया जाए। हालांकि, कुछ दिनों बाद वह लौट आया था और अपने पिता से समझौता किया था, लेकिन उसके दिल में विद्रोह था।

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