आईडीएफसी से लेकर पीएनबी घोटाले तक, बैंकिंग वर्ल्ड के वो बड़े घोटाले जिन्होंने पूरे देश को चौंकाया

IDFC First Bank में 590 करोड़ रुपए का फ्रॉड हुआ है। इस खबर के बाद बैंक का शेयर करीब 20% तक गिर गया है। अब ऐसे में सवाल उठता है कि बैंकिंग वर्ल्ड में और कौन-कौन से बड़े घोटाले हुए हैं, जिन्होंने पूरे देश को हिला दिया। चलिए जानते हैं

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Kaushiki
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BANK FRAUD ALERT: शेयर बाजार की हरियाली के बीच IDFC First Bank से आई एक खबर ने निवेशकों के होश उड़ा दिए हैं। बैंक की चंडीगढ़ ब्रांच में 590 करोड़ रुपए का एक बड़ा घोटाला सामने आया है। ये धोखाधड़ी हरियाणा सरकार के खातों से जुड़ी है। 

इस खबर के बाहर आते ही बैंक का शेयर 20% तक क्रैश हो गया। बैंकिंग सिस्टम में बढ़ते ऐसे फ्रॉड्स ने सुरक्षा पर फिर से बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

हैरानी की बात ये है कि यह सिर्फ IDFC की कहानी नहीं है। देश के कई और बड़े बैंक भी ऐसे घोटालों की मार झेल चुके हैं। आइए जानते हैं बैंकिंग इतिहास के उन बड़े धोखों के बारे में जिन्होंने पूरे सिस्टम को हिला कर रख दिया।

क्या है IDFC बैंक का 590 करोड़ का फ्रॉड

आईडीएफसी बैंक की चंडीगढ़ ब्रांच में सोमवार (23 फरवरी) की सुबह बड़ा खेल हुआ। यहां हरियाणा सरकार के कुछ सरकारी खाते ऑपरेटेड थे। जांच में पता चला कि 590 करोड़ रुपए गायब हैं।

जब विभाग ने अपना पैसा ट्रांसफर करना चाहा, तब मामला खुला। बैंक ने तुरंत कार्रवाई करते हुए चार अधिकारियों को सस्पेंड किया। इस खबर के आते ही शेयर 20% गिर गया।

इसमें लोअर सर्किट लग गया। महज कुछ ही घंटों में इन्वेस्टर्स के 14 हजार करोड़ रुपए स्वाहा हो गए। बैंक ने चार अधिकारियों को सस्पेंड कर पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। बैंक अब इस मामले की फॉरेंसिक ऑडिट करवा रहा है।

बैंकिंग इतिहास के कुछ अन्य बड़े धोखे

पीएनबी घोटाला

नीरव मोदी ने फर्जी कागजों (LoUs) के जरिए बैंक को 13 हजार करोड़ रुपए का चूना लगाया। दो अधिकारियों की मदद से विदेशी कंपनियों को बिना किसी गारंटी के पैसा भेजा गया। ये भारत के सबसे बड़े बैंकिंग फ्रॉड्स में से एक माना जाता है।

नीरव मोदी एक बड़े डायमंड कारोबारी थे। इन्होंने बैंक अधिकारियों के साथ मिलकर PNB को हजारों करोड़ का चूना लगाया। धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप लगने के बाद वह देश छोड़कर भाग गए और अब एक घोषित भगोड़े हैं।

बैंक ऑफ बड़ौदा फ्रॉड

साल 2015 में दिल्ली की एक ब्रांच से छह हजार करोड़ रुपए हांगकांग भेजे गए थे। ये पैसा इंपोर्ट के एडवांस पेमेंट के नाम पर भेजा गया। जबकि असल में कोई सामान आया ही नहीं था। इसे अवैध रेमिटेंस का एक बहुत बड़ा मामला माना गया।

अवैध रेमिटेंस (Illegal Remittance) का मतलब है बैंकिंग नियमों को तोड़कर या गलत जानकारी देकर पैसा चोरी-छिपे विदेश भेजना। आसान भाषा में ये काले धन को सफेद करने या टैक्स चोरी के लिए बिना किसी असली व्यापार के विदेशी खातों में पैसा ट्रांसफर करना है।

यस बैंक घोटाला

को-फाउंडर राणा कपूर पर आरोप था कि उन्होंने लोन देने के बदले मोटी रिश्वत (किकबैक) ली। ये पूरा खेल करीब तीन हजार सात सौ करोड़ रुपए के निवेश और लोन से जुड़ा हुआ था। इसी घोटाले के बाद बैंक की हालत खराब हुई और आरबीआई को दखल देना पड़ा।

राणा कपूर ने दिल्ली यूनिवर्सिटी से पढ़ाई के बाद सिटी बैंक और राबोबैंक जैसे बड़े संस्थानों में काम किया। उन्होंने यस बैंक की नींव रखी, लेकिन बाद में रिश्वतखोरी और घोटाले के आरोपों के चलते उन्हें जेल जाना पड़ा।

इंडसइंड बैंक गड़बड़ी

साल 2025 में बैंक के अकाउंटिंग सिस्टम में दो हजार करोड़ रुपए के नुकसान को छिपाने का मामला खुला। नियमों की अनदेखी और इनसाइडर ट्रेडिंग के आरोपों के बाद बैंक के सीईओ ने इस्तीफा दिया था। सेबी ने भी इस मामले में कई कड़े कदम उठाए थे।

आईसीआईसीआई बैंक विवाद

चंदा कोचर के कार्यकाल में वीडियोकॉन ग्रुप को नियमों के खिलाफ 3,250 करोड़ के लोन दिए गए। आरोप था कि इस डील के बदले उनके पति की कंपनी को आर्थिक फायदा पहुंचाया गया था।

इस मामले की जांच सीबीआई और ईडी ने की और कोचर को पद छोड़ना पड़ा। चंदा कोचर ICICI बैंक की बड़ी अधिकारी थीं। उन्हें 2018 में वीडियोकॉन ग्रुप को गलत तरीके से लोन देने के आरोपों के कारण इस्तीफा देना पड़ा था। उन पर अपने पद का फायदा उठाकर परिवार को लाभ पहुंचाने और रिश्वतखोरी के गंभीर आरोप लगे थे।

सावधानी ही है एकमात्र बचाव

आईडीएफसी के इस मामले ने फिर से सवाल उठाए हैं। क्या बैंकिंग सिस्टम में पारदर्शिता की कमी अब भी है? आरबीआई लगातार बैंकों को सुरक्षा बढ़ाने के निर्देश देता है। फिर भी बैंक अधिकारियों की मिलीभगत से फ्रॉड हो रहे हैं। आईडीएफसी (IDFC) बैंक के इस मामले से हमें सीखना चाहिए कि-

  • गवर्नेंस की जांच (Check Governance): 

    किसी भी बैंक में पैसा लगाने से पहले देखें कि उसका मैनेजमेंट कैसा है। अगर बैंक के इंटरनल नियम सख्त नहीं हैं, तो अधिकारियों की मिलीभगत से ऐसे फ्रॉड (Fraud) होने का खतरा हमेशा बना रहता है।

  • पारदर्शिता की कमी (Lack of Transparency): 

    आरबीआई (RBI) के कड़े निर्देशों के बावजूद, कई बार बैंक की जमीनी सच्चाई और फाइलों में फर्क होता है। निवेशकों को केवल विज्ञापन नहीं, बल्कि बैंक की ऑडिट रिपोर्ट्स और पारदर्शिता पर भी गौर करना चाहिए।

  • बैलेंस शीट पर नजर (Analysis of Balance Sheet): 

    निवेश से पहले बैंक के मुनाफे के साथ-साथ उसके एनपीए (NPA) और पेंडिंग कानूनी मामलों को जरूर चेक करें। अचानक आने वाली ऐसी खबरें शेयर की वैल्यू को पल भर में 'जीरो' कर सकती हैं।

  • सिस्टम की विफलता (Systemic Failure): 

    सरकारी विभागों (जैसे हरियाणा सरकार) के खातों में सेंध लगना बैंकिंग सिस्टम की बड़ी चूक है। यह याद दिलाता है कि बड़े से बड़े संस्थान का पैसा भी असुरक्षित हो सकता है अगर डिजिटल सुरक्षा में चूक हो।

  • सतर्क निवेशक ही सुरक्षित (Be Alert): 

    बैंकिंग स्टॉक्स में भारी गिरावट से बचने का एक ही तरीका है—अपने पोर्टफोलियो को डायवर्सिफाई रखें। किसी एक बैंक पर पूरा भरोसा करने के बजाय मार्केट की खबरों और रेगुलेटरी बदलावों (Regulatory Changes) पर अपनी नजर बनाए रखें।

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