RBI की नई गाइडलाइन: OTP फ्रॉड पर अब मिलेगा मुआवजा, जानें शर्तें

RBI ने छोटे फ्रॉड के शिकार ग्राहकों के लिए मुआवजा ढांचा पेश किया है। 25 हजार तक के नुकसान पर ग्राहक को जिम्मेदार नहीं माना जाएगा और नुकसान की भरपाई आरबीआई, बैंक और ग्राहक मिलकर करेंगे।

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Anjali Dwivedi
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News In Short

  • देश में 65 प्रतिशत बैंकिंग धोखाधड़ी के मामले 50 हजार रुपए से कम राशि के होते हैं।
  • 25 हजार रुपए तक के नुकसान पर अब ग्राहकों को मुआवजे की सुविधा मिलेगी।
  • मुआवजे का बोझ ग्राहक (15%), बैंक (15%) और आरबीआई (70%) मिलकर उठाएंगे।
  • यह राहत योजना किसी भी ग्राहक के लिए केवल एक बार ही मान्य होगी।
  • बार-बार की लापरवाही या गलती पर मुआवजा नहीं दिया जाएगा।

News In Detail

डिजिटल लेन-देन के इस दौर में साइबर ठग नए-नए तरीकों से लोगों की गाढ़ी कमाई पर हाथ साफ कर रहे हैं। कभी ओटीपी के बहाने तो कभी किसी स्कैम लिंक के जरिए छोटे जमाकर्ताओं को निशाना बनाया जा रहा है। इसी समस्या को देखते हुए भारतीय रिजर्व बैंक ने एक क्रांतिकारी कदम उठाया है। अब अगर आपके साथ छोटी रकम की धोखाधड़ी होती है, तो आपको अपनी डूबी हुई रकम वापस मिल सकती है।

छोटे फ्रॉड पर आरबीआई का सुरक्षा कवच

RBI के आंकड़ों के मुताबिक, देश में होने वाली कुल बैंकिंग धोखाधड़ी में से लगभग 65% मामले 50 हजार रुपए से कम राशि के होते हैं। हालांकि, ये रकम बड़ी नहीं लगती, लेकिन आम आदमी के लिए यह बहुत मायने रखती है। इसी को ध्यान में रखते हुए केंद्रीय बैंक एक नया मुआवजा ढांचा पेश कर रहा है। इसके तहत अब छोटे फ्रॉड के शिकार लोगों को राहत देने के लिए एक विशेष सिस्टम तैयार किया गया है।

25 हजार तक के नुकसान पर नहीं उठेंगे सवाल

RBI ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी ग्राहक के साथ 25 हजार रुपए तक की धोखाधड़ी (Fraud) होती है, तो उस नुकसान के लिए ग्राहक को जिम्मेदार नहीं ठहराया जाएगा। बैंक आपसे कोई कड़े सवाल नहीं पूछेगा, बशर्ते सिस्टम में सुरक्षा उपायों का पालन किया गया हो। इस नई व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य छोटे जमाकर्ताओं को तुरंत राहत पहुंचाना और बैंकिंग सिस्टम पर उनका भरोसा बनाए रखना है।

कौन उठाएगा कितना बोझ?

इस प्रस्तावित ढांचे में नुकसान की भरपाई के लिए जिम्मेदारी को तीन हिस्सों में साझा किया गया है। 25 हजार रुपए तक के फ्रॉड मामले में-

ग्राहक की हिस्सेदारी: कुल नुकसान का 15 प्रतिशत।

बैंक की हिस्सेदारी: कुल नुकसान का 15 प्रतिशत।

RBI का योगदान: शेष 70 प्रतिशत राशि केंद्रीय बैंक द्वारा मुआवजे के रूप में दी जाएगी। इस फॉर्मूले से पीड़ित ग्राहक को अपनी डूबी हुई रकम का एक बड़ा हिस्सा तुरंत वापस मिल सकेगा।

आरबीआई ने इस राहत योजना के साथ एक सख्त शर्त भी जोड़ी है। यह मुआवजा व्यवस्था बार-बार सुरक्षा देने के लिए नहीं है। किसी भी ग्राहक को इस योजना के तहत मुआवजा केवल एक बार ही दिया जाएगा। केंद्रीय बैंक का मानना है कि ग्राहकों को सतर्क रहना चाहिए और अपनी पुरानी गलतियों से सीख लेनी चाहिए। अगर कोई ग्राहक बार-बार लापरवाही करता है या वही गलती दोहराता है, तो वह इस मुआवजे का हकदार नहीं होगा।

ऐसे बचें साइबर फ्रॉड से 

आरबीआई ने साफ संदेश दिया है कि भले ही सरकार और बैंक मुआवजे का बोझ उठा रहे हैं, लेकिन ग्राहकों की जिम्मेदारी कम नहीं होती। धोखाधड़ी से बचने के लिए अपनी बैंकिंग डिटेल्स और ओटीपी किसी के साथ साझा न करें। डिजिटल युग में सतर्क रहकर काम करना और जिम्मेदारी निभाना ही वित्तीय सुरक्षा की पहली सीढ़ी है।

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