भगवान श्री कृष्ण थे मुस्लिम, 5 वक्त की पढ़ते थे नमाज-मौलाना जर्जिस अंसारी
Aman Vaishnav | Jul 16, 2026, 14:00 IST
भगवान श्री कृष्ण थे मुस्लिम, मौलाना जर्जिस अंसारी
मौलाना जर्जिस अंसारी का एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें उन्होंने भगवान श्री कृष्ण को मुस्लिम बताया है। साथ ही कहा है कि श्री कृष्ण 5 वक्त की नमाज पढ़ते थे। हिंदू संगठनों ने मौलाना की गिरफ्तारी की मांग की है।
श्री कृष्ण जन्मभूमि विवाद के बीच एक पुराना बयान फिर से चर्चा में आ गया है। यह बयान मौलाना जर्जिस अंसारी का बताया जा रहा है। इसमें उन्होंने भगवान श्री कृष्ण को धर्म से मुस्लिम बताया है।
मौलाना ने यह भी दावा किया कि श्री कृष्ण दिन में पांच बार नमाज पढ़ते थे। यह बयान सामने आते ही हिंदू संगठनों में गहरी नाराजगी देखी गई। संगठनों ने मौलाना की तुरंत गिरफ्तारी की मांग की है।
बता दें कि मौलाना ने अपने भाषण में श्रीमद्भगवद्गीता के एक श्लोक का हवाला दिया है। यह श्लोक है...
योगी युञ्जीत सततमात्मानं रहसि स्थितः। एकाकी यतचित्तात्मा निराशीरपरिग्रहः।
मौलाना ने दावा किया कि इस श्लोक में भक्तों को पूरे शरीर से पूजा करने का निर्देश दिया गया है। उन्होंने आगे कहा कि इसी वजह से श्री कृष्ण खुद नमाज पढ़ते थे।
भाषण में मौलाना ने यह भी कहा कि हिंदू धर्म के लोग अगर अपने ग्रंथ ध्यान से पढ़ें, तो उन्हें इस्लाम अच्छा लगने लगेगा। उनका दावा था कि राम और कृष्ण से जुड़े ग्रंथों में इस्लाम को वैश्विक धर्म बताया गया है।
बताया जा रहा है कि यह बयान पुराना है। श्री कृष्ण जन्मभूमि विवाद के बीच यह दोबारा वायरल हो रहा है।
मौलाना का यह दावा तथ्यात्मक रूप से गलत है। यह भगवद्गीता के अध्याय 6 का 10वां श्लोक है।
इस श्लोक का असली अर्थ अलग है। इसका मतलब है कि एक योगी को अपने मन, शरीर और आत्मा को लगातार परमात्मा में लगाना चाहिए। उसे एकांत जगह पर खुद को अकेला रखकर, मन और इंद्रियों को वश में रखते हुए, हर तरह की इच्छा और मोह से मुक्त होना चाहिए।
इस श्लोक में कहीं भी नमाज या इस्लाम का कोई उल्लेख नहीं है। मौलाना की व्याख्या मूल श्लोक से मेल नहीं खाती।
मौलाना के इस बयान पर हिंदू संगठनों ने कड़ा ऐतराज जताया है। संगठनों ने मांग की है कि मौलाना जर्जिस अंसारी को तुरंत गिरफ्तार किया जाए और उन पर सख्त कानूनी कार्रवाई हो।
हालांकि, किन संगठनों ने यह मांग उठाई, इसका स्पष्ट नाम फिलहाल सामने नहीं आया है।
मौलाना जर्जिस अंसारी पहले भी विवादों में रह चुके हैं। साल 2022 में उन्होंने महिलाओं को लेकर एक बयान दिया था।
उस बयान में मौलाना ने कहा था कि मुस्लिम महिला को हर हाल में पति की इच्छाएं पूरी करनी चाहिए, चाहे वह प्रसव पीड़ा में ही क्यों न हो। उस समय भी इस बयान का व्यापक विरोध हुआ था।
श्रीकृष्ण जन्मभूमि केस के पक्षकार महेंद्र प्रताप सिंह ने मौलाना जरजिश के बयान पर कड़ी आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि यह बयान हिंदू समाज की आस्था को ठेस पहुंचाने वाला है।
महेंद्र प्रताप ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का प्राकट्य करीब 5 हजार साल पहले हुआ था, जबकि इस्लाम का इतिहास करीब 1400 साल पुराना है। महेंद्र प्रताप सिंह ने यह भी कहा कि मौलाना को भगवद गीता की सही जानकारी नहीं है और उन्हें पूरे हिंदू समाज से बिना शर्त माफी मांगनी चाहिए।
श्रीकृष्ण जन्म संघर्ष न्यास के अध्यक्ष दिनेश फलाहारी ने भी मौलाना पर निशाना साधते हुए कहा कि भगवान श्रीकृष्ण पर इस तरह की टिप्पणी स्वीकार नहीं की जा सकती। उन्होंने विवादित बयान देने वाले मौलाना को पाकिस्तान भेजने की मांग की।
साध्वी इंदुलेखा ने भी इस मांग का समर्थन किया और कहा कि आस्था का अपमान करने वालों को देश में रहने का अधिकार नहीं है। वहीं अनमोल दास जी महाराज ने भी इस मामले में सख्त कार्रवाई की मांग की।
भाजपा नेता मनीष शुक्ला ने भी इस बयान की आलोचना करते हुए कहा कि भगवान श्रीकृष्ण करोड़ों लोगों की आस्था के केंद्र हैं और इस तरह की टिप्पणी बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने आशंका जताई कि यह मामला किसी बड़ी साजिश का हिस्सा हो सकता है, इसलिए इसकी गहराई से जांच होनी चाहिए। साथ ही उन्होंने झारखंड में मुकदमा दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की मांग की।
मनीष शुक्ला ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ राजनीतिक दलों के नरम रवैये की वजह से ऐसे लोगों का हौसला बढ़ता है और वे सनातन धर्म व देवी-देवताओं पर विवादित बयान देने की हिम्मत करते हैं।
फिलहाल, वीडियो वायरल होने के बाद मथुरा और ब्रज के कई हिंदू संगठनों में नाराजगी है। सभी संगठन आरोपी मौलाना के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई और जल्द गिरफ्तारी की मांग कर रहे हैं।
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मौलाना ने यह भी दावा किया कि श्री कृष्ण दिन में पांच बार नमाज पढ़ते थे। यह बयान सामने आते ही हिंदू संगठनों में गहरी नाराजगी देखी गई। संगठनों ने मौलाना की तुरंत गिरफ्तारी की मांग की है।
किस श्लोक का दिया हवाला
योगी युञ्जीत सततमात्मानं रहसि स्थितः। एकाकी यतचित्तात्मा निराशीरपरिग्रहः।
मौलाना ने दावा किया कि इस श्लोक में भक्तों को पूरे शरीर से पूजा करने का निर्देश दिया गया है। उन्होंने आगे कहा कि इसी वजह से श्री कृष्ण खुद नमाज पढ़ते थे।
भाषण में मौलाना ने यह भी कहा कि हिंदू धर्म के लोग अगर अपने ग्रंथ ध्यान से पढ़ें, तो उन्हें इस्लाम अच्छा लगने लगेगा। उनका दावा था कि राम और कृष्ण से जुड़े ग्रंथों में इस्लाम को वैश्विक धर्म बताया गया है।
बताया जा रहा है कि यह बयान पुराना है। श्री कृष्ण जन्मभूमि विवाद के बीच यह दोबारा वायरल हो रहा है।
श्लोक की सही व्याख्या क्या है
इस श्लोक का असली अर्थ अलग है। इसका मतलब है कि एक योगी को अपने मन, शरीर और आत्मा को लगातार परमात्मा में लगाना चाहिए। उसे एकांत जगह पर खुद को अकेला रखकर, मन और इंद्रियों को वश में रखते हुए, हर तरह की इच्छा और मोह से मुक्त होना चाहिए।
इस श्लोक में कहीं भी नमाज या इस्लाम का कोई उल्लेख नहीं है। मौलाना की व्याख्या मूल श्लोक से मेल नहीं खाती।
हिंदू संगठनों की प्रतिक्रिया
हालांकि, किन संगठनों ने यह मांग उठाई, इसका स्पष्ट नाम फिलहाल सामने नहीं आया है।
मौलाना का पुराना विवाद
उस बयान में मौलाना ने कहा था कि मुस्लिम महिला को हर हाल में पति की इच्छाएं पूरी करनी चाहिए, चाहे वह प्रसव पीड़ा में ही क्यों न हो। उस समय भी इस बयान का व्यापक विरोध हुआ था।
मौलाना के बयान के बाद छिड़ा संग्राम
महेंद्र प्रताप ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का प्राकट्य करीब 5 हजार साल पहले हुआ था, जबकि इस्लाम का इतिहास करीब 1400 साल पुराना है। महेंद्र प्रताप सिंह ने यह भी कहा कि मौलाना को भगवद गीता की सही जानकारी नहीं है और उन्हें पूरे हिंदू समाज से बिना शर्त माफी मांगनी चाहिए।
मौलाना को पाकिस्तान भेजने की मांग
साध्वी इंदुलेखा ने भी इस मांग का समर्थन किया और कहा कि आस्था का अपमान करने वालों को देश में रहने का अधिकार नहीं है। वहीं अनमोल दास जी महाराज ने भी इस मामले में सख्त कार्रवाई की मांग की।
भाजपा नेता मनीष शुक्ला ने भी इस बयान की आलोचना करते हुए कहा कि भगवान श्रीकृष्ण करोड़ों लोगों की आस्था के केंद्र हैं और इस तरह की टिप्पणी बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने आशंका जताई कि यह मामला किसी बड़ी साजिश का हिस्सा हो सकता है, इसलिए इसकी गहराई से जांच होनी चाहिए। साथ ही उन्होंने झारखंड में मुकदमा दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की मांग की।
मनीष शुक्ला ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ राजनीतिक दलों के नरम रवैये की वजह से ऐसे लोगों का हौसला बढ़ता है और वे सनातन धर्म व देवी-देवताओं पर विवादित बयान देने की हिम्मत करते हैं।
फिलहाल, वीडियो वायरल होने के बाद मथुरा और ब्रज के कई हिंदू संगठनों में नाराजगी है। सभी संगठन आरोपी मौलाना के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई और जल्द गिरफ्तारी की मांग कर रहे हैं।
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