भारत में मेटा का अब तक का सबसे बड़ा एक्शन, बच्चों की सुरक्षा के लिए 53 लाख चाइल्ड एब्यूज कंटेंट पर चलाया चाबुक
Kaushiki | Oct 08, 2026, 13:47 IST
डिजिटल दुनिया में बच्चों की सुरक्षा
मेटा ने भारत में बाल यौन शोषण के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। छह महीने में 53 लाख से ज्यादा एब्यूज कंटेंट हटाए गए। 98 फीसदी मामले बिना शिकायत ही पकड़े गए। नए एआई टूल और I4C पोर्टल से डायरेक्ट रिपोर्टिंग से ऑनलाइन सुरक्षा मजबूत होगी। मेटा ने संदिग्ध विज्ञापनों और बाहरी लिंक्स को ब्लॉक करने के लिए नए लार्ज लैंग्वेज मॉडल और एआई एजेंट लगाए हैं।
फेसबुक और इंस्टाग्राम पर ऐसे 98 फीसदी कंटेंट खुद ही पहचान लिए गए। यूजर्स के रिपोर्ट करने से पहले ही सिस्टम ने इन्हें पकड़ लिया। दुनियाभर में मेटा ने ऐसे 3.32 करोड़ कंटेंट पर सख्त एक्शन लिया है।
आजकल ऑनलाइन अपराधी नए-नए तरीके अपना रहे हैं। वे विज्ञापनों का सहारा लेकर गलत काम कर रहे हैं। ये विज्ञापन देखने में बिल्कुल आम लगते हैं। मगर वे लोगों को प्लेटफॉर्म से बाहर गैरकानूनी सामग्री तक पहुंचा देते हैं।
इस चाल को पकड़ने के लिए मेटा ने नए और उन्नत एआई टूल तैनात किए हैं। ये टूल ऐसे संदिग्ध विज्ञापनों को तुरंत पकड़ लेते हैं। कंपनी अब विज्ञापनों के बाहरी लिंक्स की पूरी जांच कर रही है।
एआई टेक्नोलॉजी से सुरक्षा
इसके साथ ही एक विशेष एआई एजेंट सिस्टम की कमजोरियों को खोजता है। यह टूल खुद सुरक्षा खामियों की पहचान करता है। ब्लॉक किए गए यूज़र्स अक्सर नया अकाउंट बनाकर वापस आ जाते हैं। कंपनी ने ऐसे चालाक लोगों को रोकने के लिए नया फीचर बनाया है।
डिजिटल सुरक्षा में सरकार की सख्ती
इसके बाद कंपनी अब मामलों की जानकारी सीधे भारतीय साइबर अपराध पोर्टल को दे रही है। इस नई व्यवस्था से भारतीय एजेंसियों को समय पर जानकारी मिलेगी। पुलिस अपराधियों के खिलाफ तुरंत और सख्त कानूनी कार्रवाई कर सकेगी।
सुरक्षित इंटरनेट की नई शुरुआत
संदिग्ध व्यवहार करने वाले अकाउंट्स पर तुरंत पाबंदी लगाई जा रही है। ऑनलाइन सुरक्षा के लिए भारत सरकार की सख्ती बहुत जरूरी साबित हुई है। सरकार और टेक कंपनियों के इस मिले-जुले प्रयास से इंटरनेट बच्चों के लिए काफी सुरक्षित बनेगा।
पेरेंट्स के लिए जरूरी टिप्स
पेरेंटल कंट्रोल टूल्स का यूज करें:
अपने बच्चे के स्मार्टफोन, फेसबुक और इंस्टाग्राम पर पेरेंटल कंट्रोल फीचर्स ऑन करें। इससे आप उनके स्क्रीन टाइम और वो कौन सा कंटेंट देख रहे हैं, उस पर नजर रख सकते हैं।
प्राइवेसी सेटिंग्स हमेशा प्राइवेट रखें:
बच्चे के सोशल मीडिया अकाउंट्स की सेटिंग्स को Private पर रखें। इससे अनजान लोग उनके अकाउंट की फोटोज, वीडियोज या पर्सनल डिटेल्स नहीं देख पाएंगे और न ही उनसे कनेक्ट हो सकेंगे।
ओपन कम्यूनिकेशन बनाए रखें:
बच्चे से इंटरनेट और सोशल मीडिया के फायदों और खतरों पर खुलकर बात करें। उन्हें समझाएं कि अगर ऑनलाइन कोई उन्हें परेशान करे या अजीब मैसेज भेजे, तो बिना डरे तुरंत आपको बताएं।
पर्सनल इंफॉर्मेशन शेयर करने से रोकें:
बच्चों को सिखाएं कि सोशल मीडिया पर अपना फोन नंबर, स्कूल का नाम, घर का पता या लाइव लोकेशन कभी भी किसी पोस्ट या चैट में शेयर न करें।
अनजान लिंक्स और फ्रेंड्स से सावधान रखें:
बच्चों को अजनबियों की फ्रेंड रिक्वेस्ट स्वीकार न करने और किसी भी संदिग्ध या अट्रैक्टिव ऑफर वाले लिंक पर क्लिक न करने की सख्त सलाह दें।
FAQs:
- मेटा ने भारत में बच्चों की सुरक्षा के लिए क्या कदम उठाए हैं?
मेटा ने भारत में बाल यौन शोषण से जुड़ी सामग्री के खिलाफ कार्रवाई करते हुए पहले छह महीनों में 53 लाख से ज्यादा कंटेंट हटाए हैं, जिसमें 98 फीसदी कंटेंट स्वतः पहचान लिया गया। - मेटा ने ऑनलाइन अपराध से निपटने के लिए कौन सी तकनीकें विकसित की हैं?
मेटा ने संदिग्ध विज्ञापनों को पहचानने के लिए नए और उन्नत एआई टूल्स का इस्तेमाल किया है, जो विज्ञापनों के बाहरी लिंक्स की पूरी जांच करते हैं और संदिग्ध इरादों को तुरंत पकड़ लेते हैं। - बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा के लिए पेरेंट्स को कौन सी टिप्स अपनानी चाहिए?
पेरेंट्स को अपने बच्चों के स्मार्टफोन और सोशल मीडिया पर पेरेंटल कंट्रोल टूल्स का उपयोग करना चाहिए, प्राइवेसी सेटिंग्स को हमेशा प्राइवेट रखना चाहिए, और बच्चों से इंटरनेट के फायदों तथा खतरों पर खुलकर बातचीत करनी चाहिए।
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