2026 के शुरुआत के साथ बढ़ी IAS-IPS की मुश्किलें, बतानी होगी संपत्ति
Aman Vaishnav | Jan 01, 2026, 13:45 IST
ias ips
मध्य प्रदेश के सभी IAS-IPS अफसरों को अब अपनी संपत्ति का हिसाब देना होगा। 31 जनवरी तक ब्यौरा न देने पर प्रमोशन रुक सकता है। पूरा मामला जानने के लिए खबर आखिरी तक पढ़ें।
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सरकार ने इसके लिए एक सख्त समय-सीमा तय कर दी है, जिसके मुताबिक सभी को अपना संपत्ति विवरण 31 जनवरी तक जमा करना होगा।
अब डॉक्यूमेंट पर जानकारी देने का पुराना जमाना चला गया है।। सरकार ने इसके लिए SPARROW नाम का एक पोर्टल बनाया है। सभी अधिकारियों को इसकी वेबसाइट पर जाकर लॉगिन करना होगा। यहां उन्हें अपनी अचल संपत्ति (जमीन-जायदाद) की पूरी जानकारी देनी होगी। इसमें घर, जमीन और अन्य स्थाई संपत्तियों का जिक्र होगा।
प्रोसेस को पूरी तरह पारदर्शी बनाने के लिए यह कदम उठाया गया है। ऑनलाइन रिकॉर्ड होने से डेटा में हेरफेर की गुंजाइश नहीं रहेगी।
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नियमों के मुताबिक केवल खुद की संपत्ति बताना काफी नहीं है। अफसरों को अपने परिवार के नाम मौजूद प्रॉपर्टी भी बतानी होगी। इसमें उनकी पत्नी या पति के नाम की जमीन शामिल है। बच्चों के नाम पर खरीदी गई प्रॉपर्टी का ब्यौरा भी देना होगा। चाहे वह संपत्ति देश में हो या फिर विदेश में स्थित हो। सरकार हर छोटे-बड़े निवेश पर नजर रखना चाहती है।
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कोई अधिकारी समय पर जानकारी नहीं देता, तो क्या होगा? सरकार ने इसके लिए बहुत सख्त नियम बनाए हैं। समय पर जानकारी न देने पर प्रमोशन रोक दिया जा सकता है। विजिलेंस क्लीयरेंस मिलने में भी अफसरों को भारी दिक्कत आएगी।
कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग ने इस संबंध में साफ निर्देश जारी किए हैं। अनुशासनहीनता पाए जाने पर विभागीय जांच भी शुरू हो सकती है।
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यह नियम केवल बड़े अफसरों तक ही सीमित नहीं है। सामान्य प्रशासन विभाग ने एक और आदेश जारी किया है। इसके तहत मंत्रालय के तृतीय श्रेणी कर्मचारी संघ भी दायरे में आएंगे। सहायक ग्रेड और स्टेनोटाइपिस्टको भी अपनी संपत्ति बतानी होगी।
निज सहायक और तकनीकी संवर्ग के लिए भी यह जरूरी है। मंत्री स्थापना में पदस्थ कर्मचारियों को भी ब्यौरा देना पड़ेगा। हालांकि उप सचिव स्तर के अधिकारियों का जिक्र इसमें नहीं है।
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जीएडी ने सभी विभागाध्यक्षों को सख्त निर्देश भेज दिए हैं। उन्हें सुनिश्चित करना होगा कि हर कर्मचारी नियम का पालन करे। अखिल भारतीय सेवा आचरण नियम 1968 के तहत यह अनिवार्य है। साल 2025 का विवरण 1 जनवरी 2026 की स्थिति में बनेगा। सरकार चाहती है कि प्रशासन में पूरी तरह ईमानदारी बनी रहे। कोई गड़बड़ी मिली, तो सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई तय है। सभी कर्मचारियों को 31 जनवरी तक का वक्त मिला है।
- सभी आईएएस, आईपीएस और आईएफएस अफसरों के लिए नियम लागू हुए है।
- अपनी सारी संपत्ति का विवरण 1 जनवरी से 31 जनवरी तक देना होगा।
- SPARROW पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन जानकारी भरनी होगी।
- देरी करने वाले अफसरों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
- मंत्रालय के तृतीय श्रेणी कर्मचारियों को भी विवरण देना होगा।
सरकार ने इसके लिए एक सख्त समय-सीमा तय कर दी है, जिसके मुताबिक सभी को अपना संपत्ति विवरण 31 जनवरी तक जमा करना होगा।
ऑनलाइन पोर्टल पर अपलोड होगी जानकारी
प्रोसेस को पूरी तरह पारदर्शी बनाने के लिए यह कदम उठाया गया है। ऑनलाइन रिकॉर्ड होने से डेटा में हेरफेर की गुंजाइश नहीं रहेगी।
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पत्नी और बच्चों के नाम की संपत्ति भी शामिल
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प्रमोशन पर पड़ सकता है बुरा असर
कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग ने इस संबंध में साफ निर्देश जारी किए हैं। अनुशासनहीनता पाए जाने पर विभागीय जांच भी शुरू हो सकती है।
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मंत्रालय के कर्मचारियों के लिए सख्त आदेश
निज सहायक और तकनीकी संवर्ग के लिए भी यह जरूरी है। मंत्री स्थापना में पदस्थ कर्मचारियों को भी ब्यौरा देना पड़ेगा। हालांकि उप सचिव स्तर के अधिकारियों का जिक्र इसमें नहीं है।
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नियमों का पालन कराने की जिम्मेदारी
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